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भारत
राजनीति
गढ़वाल विवि में भी पकड़ा गया एबीवीपी का फर्जीवाड़ा, छात्रसंघ अध्यक्ष संदीप राणा का चुनाव रद्द
नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश पर हुई पुनर्मतगणा में 71 मत अवैध पाए गए जो संदीप राणा के पक्ष में पड़े थे। इसके बाद विवि ने अध्यक्ष पद पर हुए चुनाव को निरस्त कर दिया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
19 Jan 2019
ABVP SANDEEP RANA
File Photo. Image Courtesy: jagran.com

हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय, श्रीनगर, उत्तराखण्ड के छात्रसंघ में दिल्ली विश्वविद्यालय का इतिहास दोहराया गया है। जी हां, यहां भी अध्यक्ष पद पर काबिज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के संदीप राणा का फर्जीवाड़ा पाया गया है, जिस वजह से ये चुनाव रद्द कर दिया गया है।

लेकिन यहां भी इस पूरे प्रकरण की जांच में दो महीने से ज़्यादा समय बीत चुका है और यहां भी अब दोबारा चुनाव नहीं होंगे। लिंगदोह कमेटी के निर्देशानुसार यहां भी उपाध्यक्ष पद पर विजयी प्रत्याशी को अध्यक्ष पद सौंपना होगा। दिलचस्प ये है गढ़वाल विश्वविद्लाय में एबीवीपी दिल्ली विश्वविद्यालय की तरह भाग्यशाली नहीं है, जहां छात्र संघ के उपाध्यक्ष पद पर भी उसी का प्रत्याशी विजयी हुआ था। इसलिए डूसू का अध्यक्ष पद खोकर भी कमान एबीवीपी के हाथ में रही। गढ़वाल विवि में अध्यक्ष पद की कमान अब आइसा के हाथ आ जाएगी, क्योंकि यहां उपाध्यक्ष पद पर आइसा का प्रत्याशी विजयी हुआ था।

छात्रों का कहना है कि एचएनबी गढ़वाल विवि में छात्रसंघ अध्यक्ष के चुनाव में फर्जी मतदान की पुष्टि होना ये दर्शाता है कि आरएसएस से जुड़ा छात्र संगठन एबीवीपी किस तरह बीजेपी सरकार का फायदा उठा रहा है। छात्रों ने मांग की है कि इस मामले में उन सभी विभागीय अधिकारियों को भी निलंबित किया जाना चाहिए जो इसमें शामिल रहे हैं। 

HNB garhwal university.jpg

क्या है पूरा मामला?

एचएनबी गढ़वाल विवि में 7 सितम्बर 2018 को छात्र संघ के चुनाव हुए। इसमें अध्यक्ष  पद पर 3 प्रत्याशी थे। अध्यक्ष पद पर विद्यार्थी परिषद के संदीप राणा और ‘जय हो’ छात्र संगठन के अमित प्रदाली के बीच मुख्य मुकाबला रहा। 7 सितम्बर को आए परिणाम में विद्यार्थी परिषद के संदीप राणा विजयी घोषित किए गए। लेकिन बाद में दूसरे प्रत्याशी ने चुनाव में धांधली के आरोप लगाए। और सूचना के अधिकार के तहत जवाब मांगा कि कि कुल कितने वोट पड़े और उन्हें कितने वोट मिले। इसका जवाब विश्वविद्लाय ने जो दिया उसमें 41 वोट, कुल वोटों से अधिक पड़े थे। जिससे ये साफ हुआ कि छात्रसंघ चुनाव  में फर्जी मतदान हुआ है। इसी जवाब के आधार पर अमित प्रदाली ने उच्च न्यायालय नैनीताल में याचिका दायर की। उच्च न्यायालय ने पुनर्मतगणना के आदेश दिए लेकिन पहली बार में एबीवीपी के दबाव में विवि पुनर्मतगणना नहीं करा पाया। दोबारा जब कोर्ट ने सख्ती की तो 18 जनवरी को डीएम-एसपी की सुरक्षा देखरेख में पुनर्मतगणा हुई। जिसमें 71 मत अवैध पाए गए जो संदीप राणा के पक्ष में पड़े थे। इसके बाद विवि ने अध्यक्ष पद हुए चुनाव को निरस्त कर दिया है।

चुनाव में जिस तरह से धांधली हुई है उससे यह स्पष्ट है कि चुनाव में कोई पारदर्शिता नहीं रही। छात्रों का आरोप है कि अधिकारियों की मिलीभगत से ही यह संभव हो पाया है। छात्र नेताओं ने कहा कि चुनाव रद्द होना सभी छात्र-छात्राओं की जीत है। छात्र संगठन आइसा ने आज इस संबंध में कुलपति को एक ज्ञापन सौंपा जिसमें चुनाव समिति द्वारा कराए गए चुनाव में किसी प्रकार की गोपनीयता न रहने व फर्ज़ीवाड़ा कराने के कारण मुख्य चुनाव अधिकारी पर कार्रवाई तथा भविष्य में किसी भी जिम्मेदारी के पद न सौंपने की मांग की तथा अब अध्यक्ष पद के चुनाव के बाद रिक्त होने के चलते लिंगदोह की सिफारिशों के अनुरूप उपाध्यक्ष अंकित उछौली को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपने की मांग की।

Hemwati Nandan Bahuguna Garhwal University
Garhwal University
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ABVP
SANDEEP RANA
AISA
ANKIT UCHHOLI
AMIT PRADALI

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