NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
गेस्ट टीचर्स हटाने से दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था चरमराई, आंदोलन तेज़
दिल्ली के स्कूलों से 1 मार्च से 38% शिक्षकों को हटा दिया गया, आप सब जानते हैं कि किसी स्कूल और शैक्षणिक सत्र के हिसाब से शिक्षकों के लिए मार्च से अप्रैल तक का समय सबसे व्यस्त समय होता है।
मुकुंद झा
06 Mar 2019
delhi teacher

दिल्ली के हज़ारों शिक्षकों के साथ ही लाखों छात्रों का भी भविष्य अंधकारमय में हो गया है, क्योंकि 22 हज़ार अतिथि शिक्षक पिछले 6 दिनों से राज्य के उप मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया के घर के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं। गेस्ट टीचर्स ने अपने आंदोलन के 5वें दिन बाल मुंडवाए और मांगें न माने जाने पर आत्महत्या करने की धमकी दी।

teachar_1.PNG

शिक्षकों के मुताबिक, कई शिक्षक अपने घर में अकेले कमाने वाले हैं, आप कई सालों से एक नौकरी कर रहे हैं, अचानक हम सबको खबर मिली कि अब कल से आपकी नौकरी चली गई है। ऐसा किसी एक के साथ नहीं हुआ है, बल्कि दिल्ली के हज़ारों हज़ार शिक्षकों को यकायक ऐसा ही फरमान मिला। यहां आपको यह भी समझना चाहिए अधिकतर दिल्ली में अतिथि शिक्षक हैं वो निम्न मध्यम वर्ग और मध्यम वर्ग के हैं, उनके लिए यही एक आय का स्रोत था। ऐसे ही एक शिक्षक जय कुमार हैं उन्होंने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए बताया कि वो अपने घर में अकेले कमाने वाले हैं। परिवार चलने के लिए यही एक सहारा था लेकिन जबसे उन्होंने सुना है कि अब और उनकी नौकरी नहीं रही तो वो सोच रहे हैं कि अगले महीने वो अपने बच्चों की फीस कैसे जमा करेंगे। यहां तक कि अब तो उन्हें यह भी सोचना पड़ रहा है कि वो अपना 6 लोगों का परिवार कैसे पालेंगे, हम से यह सब बात करते हुए उनका गला रुंध गया था। उन्होंने कहा की अगर स्थिति ठीक नहीं हुई तो उनके पास आत्मदाह के सिवाय कोई चारा नहीं है।

ऐसे ही एक अन्य शिक्षक शबाना जो दिल्ली के दरियागंज में एक सरकारी स्कुल में पढ़ाती हैं, उन्होंने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए बताया कि उन्होंने कैसे बड़े कठिनाई से जिंदगी की जद्दोजहद करके पहले पढ़ाई की उसके बाद लंबे संघर्ष के बाद वर्ष 2014 में किसी भी तरह स्कूल में शिक्षक की नौकरी मिली तो लगा की अब एक स्थायी नौकरी मिल गई लेकिन 28 फरवरी के आदेश के बाद से दोबारा मेरे सामने और मेरे जैसे कई शिक्षकों के सामने रोज़ी-रोटी का संकट आ गया है।

आज वो जब इस पूरे विरोध प्रदर्शन में थी तब भी उन्हें अपने छात्रों के परीक्षा के बारे में चिंता थी। उनका कहना था कि कैसे हमारे बच्चे परीक्षा दे रहे होंगे। क्योंकि परीक्षा केवल छात्र की नहीं बल्कि उन्हें साल भर पढ़ाने वाले शिक्षक की भी होती है। उन्होंने इस पूरे मामले पर सरकार और राज्यपाल के रवैये पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा इन दोनों ने हम शिक्षकों को पिछले दो सालो से फुटबाल बनाकर रख दिया है। सरकार हर बार कहती है कि हम तो आपको स्थायी करना चाहते हैं, लेकिन राज्यपाल नहीं होने दे रहे हैं। अब यह सब बर्दाश्त से बाहर हो गया है। अब हमें पक्का किया जाए नहीं तो हमारे पास सड़क पर संघर्ष के आलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन्हें देश का भविष्य बनाने का काम करना है, वो सड़क पर क्यों है? चाहे वो उच्च शिक्षा संस्थानों में 13 प्वाइंट रोस्टर का मामला हो या दिल्ली के गेस्ट टीचर्स का, अगर शिक्षक सड़कों पर उत्तर रहा है तो ये हमारी व्यवस्था के लिए शर्म की बात है लेकिन हमारी सरकारें इसका हल करने के बजाय एक दूसरे पर आरोप- प्रत्यारोप कर रही हैं।

दिल्ली के स्कूलों से 1 मार्च से 38%  शिक्षकों को हटा दिया गया, आप सब जानते हैं कि किसी स्कूल और शैक्षणिक सत्र के हिसाब से शिक्षकों के लिए मार्च से अप्रैल तक का समय सबसे व्यस्त समय होता है क्योंकि इसी महीने में सभी कक्षाओं के छात्रों की परीक्षा होती है। इसके आलावा उत्तर पुस्तिकाओं की जाँच भी होनी होती है।

delhi.jpg

वहीं इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को कैबिनेट की आपात बैठक बुलाई। इससे पहले सिसोदिया ने भी एलजी को पत्र लिखकर पूछा है कि गेस्ट टीचर्स को लेकर आपके पास कोई प्लान है कि कैसे इस समस्या का हल होगा।

गेस्ट टीचर्स हरियाणा सरकार की तर्ज पर 58 साल की पॉलिसी की मांग कर रहे हैं। सरकार अगर ऐसा नहीं करती तो शिक्षकों ने सामूहिक आत्मदाह करने की भी बात कही।

IMG-20190306-WA0028.jpg

आपको बता दें कि  पिछले चार साल में दिल्ली में केवल चार हज़ार स्थायी शिक्षकों की भर्ती हुई है।उपमुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने आरोप लगाया कि दो साल से वह गेस्ट टीचर्स को लेकर बात करना चाहते हैं। उन्होंने अतिथि शिक्षकों के मुद्दे पर मंगलवार को उपराज्यपाल अनिल बैजल को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि दो साल से एक भी बार आपने अतिथि शिक्षकों के मुद्दों पर बातचीत नहीं की।”

उन्होंने पूछा कि क्या आप इस स्थिति से अवगत हैं कि 22 हजार अतिथि शिक्षक जो आज सड़कों पर हैं, वह दिल्ली सरकार के स्कूलों में कुल 38 फीसद हैं।

उन्होंने कहा कि एक मार्च से दिल्ली के सरकारी स्कूल बिना अतिथि शिक्षकों की सेवाओं के संचालित हो रहे हैं। जबकि बोर्ड की वार्षिक 10वीं एवं 12वीं की परीक्षाएं हो रही हैं। इस महीने परीक्षाओं के अलावा शिक्षकों को उत्तर पुस्तिकाओं को भी चेक करना पड़ता है। ताकि वह नतीजों को तैयार कर सकें। जिससे वह अगले शैक्षिक सत्र की तैयारी कर सकें। क्या आप उम्मीद कर रहे हैं कि अतिथि शिक्षकों के अलावा बचे हुए 62 फीसद शिक्षक अपने हिसाब से यह तैयार करें? उन्होंने पत्र में आगे सवाल किया, “उपराज्यपाल सर, 25 अक्टूबर 2018 को दिल्ली उच्च न्यायलय ने आदेश पारित किया था कि मौजूदा अतिथि शिक्षकों की सेवाएं 28 फरवरी 2019 तक जारी रहे। लेकिन अब जो संकट हमारे सामने है उस पर क्या करेंगे?

हरियाणा सरकार ने अतिथि शिक्षकों को सेवानिवृत तक सेवाएं जारी रखने के लिए अपनी विधानसभा में बिल पास कर दिया था। हमारी सरकार ने भी 2017 में दिल्ली विधानसभा में इसी आधार पर बिल पास किया था।

यह बिल अब भी आपकी सहमति का इंतजार कर रहा है। मैंने इस मामले में मुख्यमंत्री से आपातकालीन कैबिनेट की बैठक बुलाने का अनुरोध किया है। जिससे अतिथि शिक्षकों की सेवाओं के लिए बिना किसी रोक के नीति को स्वीकृति दी जा सके।”

सिसोदिया ने पत्र को ट्वीट करते हुए एलजी से सवाल किया। लिखा कि वह बताएं कि शिक्षामंत्री अब स्कूलों को कैसे चलाए?

1 अप्रैल से नया सत्र भी शुरू होना है। 22 हजार से ज्यादा गेस्ट टीचर्स के चले जाने से शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है। हाईकोर्ट में गेस्ट टीचर्स को लेकर मंगलवार को सुनवाई होनी थी, लेकिन अब यह 29 मार्च को होगी।

53470918_655617061508321_1813134441304817664_n_0.jpg

आज दिल्ली सरकार ने कैबिनट मीटिंग के बाद एक सर्कुलर जारी करते हुए कहा की न्यायालय के अगले आदेश तक सभी शिक्षक पढ़ाएं।

 

Delhi
delhi govt
Arvind Kejriwal
MANISH SISODIA
LG
Anil Baijal
teachers protest
GuestTeacher Delhi
GuestTeacher
Higher education
Government schools
school children
SCHOOL EDUCATION
BOARD EXAM

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

धनशोधन क़ानून के तहत ईडी ने दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन को गिरफ़्तार किया

ख़बरों के आगे-पीछे: MCD के बाद क्या ख़त्म हो सकती है दिल्ली विधानसभा?

बच्चे नहीं, शिक्षकों का मूल्यांकन करें तो पता चलेगा शिक्षा का स्तर

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

‘आप’ के मंत्री को बर्ख़ास्त करने से पंजाब में मचा हड़कंप

डीयूः नियमित प्राचार्य न होने की स्थिति में भर्ती पर रोक; स्टाफ, शिक्षकों में नाराज़गी

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई


बाकी खबरें

  • Barauni Refinery Blast
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बरौनी रिफायनरी ब्लास्ट: माले और ऐक्टू की जांच टीम का दौरा, प्रबंधन पर उठाए गंभीर सवाल
    20 Sep 2021
    भाकपा (माले) और मज़दूर संगठन ऐक्टू की जांच टीम ने घटनास्थल का दौरा किया और अपनी एक जाँच रिपोर्ट दी, जिसमें उन्होंने कहा कि 16 सितंबर को बरौनी रिफाइनरी में हुआ ब्लास्ट प्रबन्धन की आपराधिक लापरवाही का…
  • New Homes, School Buildings, Roads and Football Academies Built Under Kerala Govt’s 100-Day Programme
    अज़हर मोईदीन
    केरल सरकार के 100-दिवसीय कार्यक्रम के तहत नए घर, विद्यालय भवन, सड़कें एवं फुटबॉल अकादमियां की गईं निर्मित  
    20 Sep 2021
    100-दिवसीय कार्यक्रम में शामिल परियोजनाओं के कार्यान्वयन पर नजर रखने के लिए बनाये गए राजकीय नियंत्रण-मंडल की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों के विभिन्न विभागों के तहत…
  • Afghanistan
    एम. के. भद्रकुमार
    शांघाई सहयोग संगठन अमेरिका की अगुवाई वाले क्वाड के अधीन काम नहीं करेगा
    20 Sep 2021
    एससीओ यानी शांघाई सहयोग संगठन, अमेरिका की अगुवाई वाले चार देशों के गठबंधन क्वाड के अधीन काम नहीं करेगा।
  • Indigenous People of Brazil Fight for Their Future
    निक एस्टेस
    अपने भविष्य के लिए लड़ते ब्राज़ील के मूल निवासी
    20 Sep 2021
    हाल ही में इतिहास की सबसे बड़ी मूल निवासियों की लामबंदी ने सत्ता प्रतिष्ठानों के आस-पास की उस शुचिता की धारणा को को तोड़कर रख दिया है जिसने सदियों से इन मूल निवासियों को सत्ता से बाहर रखा है या उनके…
  • Government employees in Jammu and Kashmir
    सबरंग इंडिया
    जम्मू-कश्मीर में सरकारी कर्मचारियों से पूर्ण निष्ठा अनिवार्य, आवधिक चरित्र और पूर्ववृत्त सत्यापन भी जरूरी
    20 Sep 2021
    16 सितंबर को जारी सरकारी आदेश में कहा गया है कि अगर किसी कर्मचारी के खिलाफ किसी भी तरह की प्रतिकूल रिपोर्ट की पुष्टि होती है तो उसे बर्खास्त किया जा सकता है
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License