NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
पुस्तकें
कला
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
गिरिजा कुमार माथुर ने आधुनिकता को उचित संदर्भ में परिभाषित किया
कवि, नाटककार और समालोचक गिरिजा कुमार माथुर का जन्मशतवार्षिकी देश भर में विश्वविद्यालयों और साहित्यिक संस्थानों में मनाया जा रहा है। इस कड़ी में दिल्ली में साहित्य अकादमी ने ‘गिरिजा कुमार माथुर : व्यक्तित्व और कृतित्व’ विषयक दो दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया।
प्रदीप सिंह
16 Oct 2019
गिरिजा कुमार माथुर

गिरिजा कुमार माथुर की कविताओं और गीतों में प्रणय की अनूठी रागिनी बजती है तो इतिहास और यथार्थ से भी उनकी कविताओं का सघन रिश्ता रहा है। वे उस दौर के कवि रहे हैं जब विश्व दो-दो विश्वयुद्धों से गुजर कर घायल अवस्था में था। हिरोशिमा व नागासाकी भयानक अणुसंहार में ज़मीदोज़ हुए जिसने मनुष्य के अस्तित्व और मानवाधिकारों की चूलें हिला दीं। देश साठ के दौर के मोहभंग से गुजरा, आपातकाल देखा उन्होंने, आजादी की व्यर्थता भी। पर वे अपने प्रगतिशील जीवन मूल्यों से बंधे रहे। उनके सामने कविता में अनेक आंदोलन आए-गए।

कवि, नाटककार और समालोचक गिरिजा कुमार माथुर का जन्मशतवार्षिकी देश भर में विश्वविद्यालयों और साहित्यिक संस्थानों में मनाया जा रहा है। इस कड़ी में नई दिल्ली साहित्य अकादमी ने ‘गिरिजा कुमार माथुर : व्यक्तित्व और कृतित्व’ विषयक दो दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया।

2_2.JPG

संगोष्ठी में उद्घाटन वक्तव्य देते हुए प्रख्यात हिंदी आलोचक विश्वनाथ त्रिपाठी ने कहा कि “गिरिजा कुमार माथुर काव्य की सभी परंपराओं को तोड़ते हुए अपने वाक्य विधान पर विशेष ध्यान दिया। वे अनास्था के कवि नहीं थे और उन्होंने आधुनिकता को उचित संदर्भ में परिभाषित किया। वे अपनी कविता शब्दों से, लय से, छंद से तथा अन्य प्रतीकों को नए रूप में प्रस्तुत करके संभव करते हैं।”  

इस अवसर पर चित्तरंजन मिश्र ने कहा कि माथुर के काव्य में गीतात्मकता है। वे कविता में ‘अनुभूति के ताप’ को महत्त्वपूर्ण मानते थे। उन्होंने गीतों को एक नया संस्कार दिया। उन्होंने हिंदी साहित्य में विज्ञान लेखन की शुरुआत तो की ही बल्कि उपेक्षित विधा काव्य-नाटक आदि का सृजन भी किया।

वरिष्ठ आलोचक अजय तिवारी ने उनकी कविता के तीन प्रमुख तत्त्वों- रोमांटिकता, प्रकृति सौंदर्य और यर्थाथवाद को विस्तार से व्याख्यायित करते हुए कहा कि बिना रोमांटिक हुए प्रगतिवादी भी नहीं हुआ जा सकता। उनकी कविता एक-आयामी नहीं है बल्कि वे विभिन्न आयामों के कवि हैं।

साहित्य अकादमी के उपाध्यक्ष माधव कौशिक ने कहा कि “गिरिजा कुमार माथुर ‘लोकल’ से लेकर ‘ग्लोबल’ तक के कवि हैं। उनकी बौद्धिक प्रखरता एवं सम्यक दृष्टि उनको एक बड़े कवि के रूप में प्रतिष्ठित करती है। उन्होंने हिंदी साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए आकाशवाणी के माध्यम से कई नए प्रयोग किए।”

ब्रज श्रीवास्तव ने ‘गिरिजा कुमार माथुर की कविताओं में सामाजिक परिवेश और यथार्थ’ विषय पर कहा कि “उनकी कविताओं में जो भी प्रयोग किए गए उनका लक्ष्य ‘व्यापक सत्य’ को सामने लाना था। उन्होंने अपनी कविताओं में यथार्थ और सौंदर्य का संतुलित समन्वय किया है। वे अपनी कविता में मौलिकता और अनुभव की सत्यता का सम्मान करते थे। हम उन्हें आधुनिक और नए भारत के स्वप्निल कवि के रूप में याद कर सकते हैं। उनका सामाजिक यथार्थ गहन परिवेश और रचना-प्रक्रिया की सघनता पर आधारित था।”

8_0.JPG

चित्तरंजन मिश्र ने कहा कि “गिरिजा कुमार माथुर ने मार्क्सवाद को भारतीय परिवेश में रोपकर देखा है। उन्होंने उनकी कविताओं में आए मुख्य प्रतीकों- आग, रोशनी, चांदनी और दीपक का ज़िक्र करते हुए कहा कि वे आग और रोशनी को जहां परिवर्तन के प्रतीक के रूप में देख रहे थे वहीं चांदनी आशा के प्रतीक के रूप में थी। इस तरह उनकी कविताओं में सपनों को बचाने की आकुल पुकार को महसूस किया जा सकता है।”

सुरेश ढींगरा ने ‘गिरिजा कुमार माथुर नाटककार एवं एकांकीकार के रूप में’ विषय पर कहा कि “उनके नाटकों और एकांकियों में पौराणिक संदर्भ नहीं हैं बल्कि उन्होंने निकट इतिहास की घटनाओं को कथ्य के रूप में प्रयुक्त किया है। रेडियो की समय-सीमा को देखते हुए उन्होंने छोटे नाटक लिखे हैं लेकिन अपने कथ्य की व्यापकता में वे बड़े नाटक के रूप में भी प्रस्तुत किए जा सकते हैं। उन्होंने अपने पात्रों को दैनिक बोलचाल की भाषा प्रदान की है, जो बेहद महत्त्वपूर्ण है। हम उनके नाटकों को उनकी कविता से कमतर नहीं माप सकते।”
सत्यकाम ने ‘गिरिजा कुमार माथुर: लेखकीय व्यक्तित्व के विविध आयाम’ विषय पर कहा कि “उनका श्रृंगार मध्यवर्गीय व्यक्ति का है। वे कविता में निराला के बाद ध्वनि संगीत की परंपरा को प्रतिष्ठित करने वाले महत्त्वपूर्ण कवि हैं। उनके लेखकीय व्यक्तित्व पर रेडियो और दूरदर्शन की स्पष्ट छाया है। वे अपने सृजन में आध्यात्मिकता के बारे में बहुत संतुलित दृष्टि प्रस्तुत करते हैं।”

11_0.JPG

वरिष्ठ पत्रकार शरद दत्त ने कहा कि “गिरिजा कुमार माथुर ने आकाशवाणी को एक परिवार के रूप में रूपांतरित किया और लेखकों एवं आकाशवाणी के बीच सेतु का काम किया। उन्होंने उनके रेडियो नाटकों को पुस्तकाकार रूप में प्रकाशित करने की अपील भी की, जिससे उनकी नाट्य प्रक्रिया को बेहतर रूप में समझा जा सके और उनकी प्रस्तुतियां भी की जा सकें।”

‘गिरिजा कुमार माथुर आलोचक के रूप में’ विषय पर कौशलनाथ उपाध्याय ने कहा कि “गिरिजा कुमार माथुर का आलोचक व्यक्तित्व उनकी कविता में आता रहा है। वे किसी भी रचना का मूल्यांकन किसी खांचे में रखकर नहीं करते हैं बल्कि वे उसके विश्लेषण के लिए एक ‘नई राह’ चुनते हैं जो एक आलोचक के रूप में उन्हें रामचंद्र शुक्ल के पास ले जाती है। वे अपनी आलोचना में किसी एक का पक्ष नहीं लेते हैं बल्कि वहां भी वे आधारभूत मूल्यों और तत्त्वों को खोजने-निकालने की कोशिश करते हैं।”

आलोचक रवि भूषण ने कहा कि “उनके आलोचकीय व्यक्तित्व में उनके बचपन, प्रारंभिक शिक्षा एवं निराला तथा रामविलास शर्मा के सान्निध्य का बहुत बड़ा हाथ है। उनका ‘नाद सौंदर्य’ विचारणीय है और कविता जैसा कि उन्होंने खुद कहा है कि कविता जीवन के आलोक की वाणी है। एक आलोचक के रूप में उनकी दृष्टि निरंतर विकसित होती रही है। उनकी आलोचना का सामाजिक पक्ष बहुत महत्त्वपूर्ण है तथा वे अपनी आलोचना में प्रयोगशीलता और आधुनिकता को साथ-साथ लेकर चलते हैं। उनका मूल्यांकन व्यापक और नई दृष्टि के साथ किया जाना आवश्यक है।”

‘गिरिजा कुमार माथुर परिवार में’ विषय पर उनके पुत्र अमिताभ माथुर ने उनकी कई रोचक आदतों का ज़िक्र करते हुए कहा कि वे अपने परिवार को बेहद प्यार करते थे और बहुत व्यस्त रहते हुए भी सभी के लिए समय निकालते थे। उन्होंने देर रात तक लिखने, घर आए प्रत्येक व्यक्ति की मदद करने आदि के कई रोचक संस्मरण भी सुनाए। इस अवसर पर गिरिजा कुमार माथुर के पुत्र पवन माथुर द्वारा संपादित ‘गिरिजा कुमार माथुर रचना-संचयन’ का लोकार्पण भी किया गया।

girija kumar mathur
hindi writers
hindi poets
girija kumar mathur hindi writer
sahitya academi
literature
hindi literature

Related Stories

मेरे लेखन का उद्देश्य मूलरूप से दलित और स्त्री विमर्श है: सुशीला टाकभौरे

देवी शंकर अवस्थी सम्मान समारोह: ‘लेखक, पाठक और प्रकाशक आज तीनों उपभोक्ता हो गए हैं’

वाद-विवाद; विनोद कुमार शुक्ल : "मुझे अब तक मालूम नहीं हुआ था, कि मैं ठगा जा रहा हूँ"

समीक्षा: तीन किताबों पर संक्षेप में

यादें; मंगलेश डबरालः घरों-रिश्तों और विचारों में जगमगाती ‘पहाड़ पर लालटेन’

कोरोना लॉकडाउनः ज़बरिया एकांत में कुछ और किताबें

कोरोना लॉकडाउनः ज़बरिया एकांत के 60 दिन और चंद किताबें

नामवर सिंह : एक युग का अवसान

कृष्णा सोबती : मध्यवर्गीय नैतिकता की धज्जियां उड़ाने वाली कथाकार

"हमारी मनुष्यता को समृद्ध कर चली गईं कृष्णा सोबती"


बाकी खबरें

  • sever
    रवि शंकर दुबे
    यूपी: सफ़ाईकर्मियों की मौत का ज़िम्मेदार कौन? पिछले तीन साल में 54 मौतें
    06 Apr 2022
    आधुनिकता के इस दौर में, सख़्त क़ानून के बावजूद आज भी सीवर सफ़ाई के लिए एक मज़दूर ही सीवर में उतरता है। कई बार इसका ख़ामियाज़ा उसे अपनी मौत से चुकाना पड़ता है।
  • सोनिया यादव
    इतनी औरतों की जान लेने वाला दहेज, नर्सिंग की किताब में फायदेमंद कैसे हो सकता है?
    06 Apr 2022
    हमारे देश में दहेज लेना या देना कानूनन अपराध है, बावजूद इसके दहेज के लिए हिंसा के मामले हमारे देश में कम नहीं हैं। लालच में अंधे लोग कई बार शोषण-उत्पीड़न से आगे बढ़कर लड़की की जान तक ले लेते हैं।
  • पटनाः डीजल-पेट्रोल से चलने वाले ऑटो पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ ऑटो चालकों की हड़ताल
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पटनाः डीजल-पेट्रोल से चलने वाले ऑटो पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ ऑटो चालकों की हड़ताल
    06 Apr 2022
    डीजल और पेट्रोल से चलने वाले ऑटो पर प्रतिबंध के बाद ऑटो चालकों ने दो दिनों की हड़ताल शुरु कर दी है। वे बिहार सरकार से फिलहाल प्रतिबंध हटाने की मांग कर रहे हैं।
  • medicine
    ऋचा चिंतन
    दवा के दामों में वृद्धि लोगों को बुरी तरह आहत करेगी – दवा मूल्य निर्धारण एवं उत्पादन नीति को पुनर्निर्देशित करने की आवश्यता है
    06 Apr 2022
    आवश्यक दवाओं के अधिकतम मूल्य में 10.8% की वृद्धि आम लोगों पर प्रतिकूल असर डालेगी। कार्यकर्ताओं ने इन बढ़ी हुई कीमतों को वापस लेने और सार्वजनिक क्षेत्र के दवा उद्योग को सुदृढ़ बनाने और एक तर्कसंगत मूल्य…
  • wildfire
    स्टुअर्ट ब्राउन
    आईपीसीसी: 2030 तक दुनिया को उत्सर्जन को कम करना होगा
    06 Apr 2022
    संयुक्त राष्ट्र की नवीनतम जलवायु रिपोर्ट कहती है कि यदि​ ​हम​​ विनाशकारी ग्लोबल वार्मिंग को टालना चाहते हैं, तो हमें स्थायी रूप से कम कार्बन का उत्सर्जन करने वाले ऊर्जा-विकल्पों की तरफ तेजी से बढ़ना…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License