NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
गिरफ्तार एक्टिविस्ट गौतम नवलखा के नाम एक साथी का खुला पत्र
तुम्हारी गिरफ्तारी के बाद से सोच रही हूं कि आखिर किस बात का डर सता रहा होगा आज के सत्तधारियों को जो तुम जैसे नरमदिल गुस्सैल को कैद करके सुकून पा रहे हैं?
मेघा
12 Sep 2018
gautam navlakha

प्रिय गौतम,

घर में नजरबंद हो, इसलिए तुम्हारे नाम एक खुला खत लिख रही हूं। वैसे इस दौर में खत लिखने का एक नुकसान है कि कहीं अब यह भी सत्ताधारियों के नुमाइंदों द्वारा निरंतर निर्मित खतों की पटकथा में शामिल न कर लिया जाए, तुम और मैं किसी प्रतिबंधित पार्टी के 'षड्यंत्रकारी सदस्य' न बना दिये जाएं। खैर!

गोरख पांडेय की वह कविता जो तुमने हमारी आखिरी बातचीत में मुझे सुनाई थी अब तक ज़हन में घूम रही है - "उनका डर" 

वे डरते हैं

किस चीज से डरते हैं वे

तमाम धन-दौलत

गोला-बारूद पुलिस-फौज के बावजूद?

वे डरते हैं

कि एक दिन

निहत्थे और गरीब लोग

उनसे डरना

बंद कर देंगे

 

तुम्हारी गिरफ्तारी के बाद से सोच रही हूं कि आखिर किस बात का डर सता रहा होगा आज के सत्तधारियों को जो तुम जैसे नरमदिल गुस्सैल को कैद करके सुकून पा रहे हैं? पूरी तरह से सार्वजनिक होने के बावजूद, पीयूडीआर की गतिविधियों की निगरानी तो ये करते ही आये हैं, लेकिन अब की इन्होंने ऐसा क्या देख लिया तुममें, तुम्हारी किस बात से भयभीत हैं?

लोकगीत जो तुम गाते हो पीयूडीआर के कार्यक्रमों में वे तो कारण नहीं ? लगता है वे तुम्हारी  बुलंद आवाज़ से सच में डर बैठे हैं! आदिवासियों पर हो रहे दमन के खिलाफ, मज़दूरों के हितों के लिए, गटरों में रोज़-रोज़ मर रहे दलितों के लिए, मुसलमानों की हो रही हत्याओं के खिलाफ तुमने जो भी भाषण दिए, उनकी वीडियो ये सभी देख चुके हैं, तुमने जिन रिपोर्टों पर काम किया वे सभी पढ़ चुके हैं ।

तुम्हारे जनवादी अधिकारों पर व्यापक समझ से भयभीत हैं क्या ये? पर वह समझ तो चालीस वर्षों से लोगों के बीच लिख-बोलकर तुम साझा करते ही आये हो। क्या इन्हें यह लग रहा है कि तुम्हें कैद करने से तुम्हारे विचारों और तुम्हारे द्वारा विगत में किये गए काम को भी कैद कर पाएंगे?

एक 65 वर्षीय की स्फूर्ति से डर रहे हैं? शायद ये जान चुके हैं की आज भी अगर हमारे संगठन में कोई बेहद सक्रिय है तो वह तुम हो। ज़रूर ये उस दिन भी तुम पर नज़र रखे हुए थे जब तुम और हम कापसहेड़ा बॉर्डर पर सुबह-सुबह कपड़ा फैक्ट्री के मज़दूरों के बीच फैक्ट्री परिसर में हो रही दुर्घटनाओं को लेकर पर्चा वितरण करने गए थे।

इस तानाशाह सरकार को ज़रूर यह भी गम बैठ गया है कि कैसे कोई व्यक्ति इतने वर्षों से जनवादी तौर-तरीकों से कार्यरत है। शायद इन्होंने जनवादी अधिकारों के मुद्दों पर हो रही पीयूडीआर की चर्चाओं की निगरानी में यह गौर किया होगा की तुमसे आधी उम्र के सदस्य किस प्रकार तुमसे बहस करते हैं, तुम पर चिल्लाते हैं, असहमति व्यक्त करते हैं और फिर तुमसे गले मिलकर जाते हैं।

बेशक वे तुम्हारी गति से तो डर रहे हैं कि कहीं 2019 चुनावों से पहले हमारा काम इनकी पोलों का पुलिंदा न खोल दे। और इनके द्वारा निरंतर देश के अलग-अलग हिस्सों में किये जा रहे मानवाधिकारों के हनन का चिट्ठा न खुल जाए? आखिर क्यों तुम यूएपीए जैसे गैर-लोकतांत्रिक कानूनों के दुष्प्रभावों पर इतने आंकडें इकठ्ठा करने में जुटे थे? लगा दिया न तुम पर भी यूएपीए ! राजनैतिक बंदियों के लिए मांगे रखते-रखते, लो आज बन गए तुम भी एक राजनैतिक बंदी!

अब की बार अपने डरों को इन्होंने "अर्बन नक्सल" का नाम दिया है। राजनैतिक और जनवादी मुद्दों को लेकर कितना संकीर्ण दृष्टिकोण है यह! गोरख पांडेय ने कितना सटीक लिखा था। जब तक ये इन्हीं के द्वारा रचे इस खेल से थक हार कर निकलेंगे तब तक कितनी और नज़रें इन्हें घूरती होंगी शायद इसका अंदाज़ा नहीं है अभी इन्हें।

खैर, तुम अपना ख्याल रखना। तुमसे और तुम्हारे काम से इस देश के जनवादी अधिकार आंदोलन के इतिहास और आज के बारे में जो भी समझा है वह हमेशा साथ रहेगा। तुम्हारी रिहाई के इंतज़ार में।

सादर, 

तुम्हारी लड़ाकू दोस्त मेघा

11 सितंबर, 2018

(मेघा पीपुल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स के साथ 2012 से जुड़ी हुई हैं।)

 

gautam navlakha
arban naxal
PUDR
megha
open letter

Related Stories

भीमा कोरेगांव: बॉम्बे HC ने की गौतम नवलखा पर सुनवाई, जेल अधिकारियों को फटकारा

खुला पत्र : क्या नागरिक समाज देश का दुश्मन है?

जेल के अंडा सेल में गौतम नवलखा, ज़िंदगी ख़तरे में होने का अंदेशा : सहबा

'नये भारत' को नफ़रती भीड़तंत्र क्यों बना रहे हैं, मोदी जी!

एल्गार परिषद: नवलखा को तलोजा जेल के 'अंडा सेल' में भेजा गया, सहबा हुसैन बोलीं- बिगड़ गई है तबीयत

भारत में अभी भी क्यों जारी है बंधुआ मज़दूरी?

गौतम नवलखा की ज़मानत अर्ज़ी ख़ारिज, पंचायत चुनाव में मरे लोगों को 1 करोड़ मुआवज़ा और अन्य ख़बरें

सुधा भारद्वाज राजनीतिक बंदी हैं कोई क्रिमिनल नहीं, कोरोना महामारी को देखते हुए उन्हें जल्द रिहा किया जाए

भीमा-कोरेगांव मामले में गौतम नवलखा की ज़मानत याचिका पर फ़ैसला सुरक्षित

भीमा कोरेगांव प्रकरण: न्यायालय ने नवलखा की अर्जी पर एनआईए से मांगा जवाब


बाकी खबरें

  • Hum Bharat Ke Log
    डॉ. राजू पाण्डेय
    संविधान पर संकट: भारतीयकरण या ब्राह्मणीकरण
    05 Feb 2022
    न्याय प्रणाली में मनुवादी सोच की पुनर्प्रतिष्ठा के प्रयासों को न्याय व्यवस्था के भारतीयकरण का नाम दिया जा रहा है। नागरिक अधिकारों और संविधान के संरक्षक सर्वोच्च न्यायालय पर यदि ब्राह्मणवादी सोच हावी…
  • hisab kitab
    न्यूज़क्लिक टीम
    इस बजट से गरीबों को कोई फायदा नहीं
    04 Feb 2022
    हाल ही में वित्त मंत्री ने बजट पेश किया पर क्या इस बजट से बेरोज़गारी, गरीबी और अन्य चीज़ों पर कुछ असर पड़ेगा? आइये जानते हैं ऑनिंद्यो से
  • firing on owaisi
    रवि शंकर दुबे
    कौन हैं ओवैसी पर गोली चलाने वाले दोनों युवक?, भाजपा के कई नेताओं संग तस्वीर वायरल
    04 Feb 2022
    AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर हमला करने वाले दोनों आरोपियों को 14 दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। एक आरोपी सचिन पंडित की तस्वीरें भाजपा के कई बड़े नेताओं के साथ वायरल होने से कई सवालों ने…
  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    ग्राउंड रिपोर्ट: हापुड़ का सूदना गांव सुना रहा अपनी चुनावी कहानी
    04 Feb 2022
    ग्राउंड रिपोर्ट में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने हापुड़ के सूदना गांव में चल रही सैनेटरी पेड की फैक्ट्री में काम करने वाली महिलाओं, खेती से जुड़े समुदायों के सवालों-राजनीतिक रुझानों पर की चर्चा
  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक : बस ये चुनाव और पार करा दे
    04 Feb 2022
    कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने शुक्रवार को राज्यसभा में कहा कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के संबंध में एक समिति बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और निर्वाचन आयोग ने पांच राज्यों…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License