NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
अर्थव्यवस्था
गन्ना किसानों की भी सुनिए योगी जी
मौजूदा पेराई सत्र 2018-19 में कुल 33,048 करोड़ रुपये का गन्ना किसानों से खरीदा गया, जिसमें से 28,784 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया है। इसका मतलब हुआ कि अब भी इस पेराई सत्र के 4264 करोड़ रुपये का भुगतान गन्ना किसानों का मिलना बाकी है।
सरोजिनी बिष्ट
23 Oct 2019
ganna

उत्तर प्रदेश में गन्ना पेराई का नया सत्र 2019-20 दीपावली के बाद शुरू होने जा रहा है, लेकिन अब भी चालू पेराई सत्र 2018-19 का चार हजार करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया भुगतान बाकी है। नये पेराई सत्र के लिए अक्टूबर महीने के अंत या नवंबर के पहले या दूसरे हफ्ते में चीनी मिलें गन्ने की पेराई शुरू कर देंगी। हालांकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की एक-दो मिलों ने पेराई शुरू भी कर दी है। अब जबकि अक्टूबर महीने में बमुश्किल एक हफ्ते का समय बचा है, यह कहा जा सकता है कि चालू पेराई सत्र में गन्ना किसानों को उनका पूरा भुगतान नहीं मिल पायेगा। एक तरफ किसानों की आय  दुगनी करने के लिए अनेक सरकारी योजनाओं व नीतियों का ढोल पीटा जा रहा है तो दूसरी तरफ किसानों को समय पर उनकी फसल का दाम तक नहीं मिल पा रहा है। गन्ना किसानों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है, लेकिन अदालती आदेश भी उन्हें राहत नहीं दिला पा रहा है।

19 अक्टूबर 2019 को उत्तर प्रदेश सरकार के चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग ने गन्ना मूल्य भुगतान की अपडेट रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा पेराई सत्र 2018-19 में कुल 33,048 करोड़ रुपये का गन्ना किसानों से खरीदा गया, जिसमें से 28,784 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया है। इसका मतलब हुआ कि अब भी इस पेराई सत्र के 4264 करोड़ रुपये का भुगतान गन्ना किसानों का मिलना बाकी है। इसके अलावा बीते पेराई सत्रों की भी बड़ी रकम बकाया है। यह हाल उस राज्य का है, जो चीनी उत्पादन में देश में पहला स्थान रखता है और जहां पहले के मुकाबले चीनी उत्पादन में भारी इजाफा हुआ है। गत 1 अक्टूबर को जारी सरकार के विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, पेराई सत्र 2018-19 में चीनी उत्पादन 118 लाख टन रहा, जबकि 2014-15 में यह उत्पादन 71 लाख टन, 2015-16 में 68 लाख टन, 2016-17 में 88 लाख टन और 2017-18 में 120 लाख टन रहा। सत्र 2019-20 में उत्पादन 125 लाख टन पार कर जाने का अनुमान है। यानी, चीनी उत्पादन में कंपनियों ने बड़ी छलांग लगायी है, फिर भी गन्ना किसानों को समय पर भुगतान वे नहीं कर रही हैं।

उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने सरकार गठन के बाद किसानों को 14 दिन में गन्ना मूल्य भुगतान कराने का वादा किया था। लेकिन उसका वादा, वादा ही रह गया। सच्चाई यह है कि चीनी मिलों ने एक साल में भी पूरा भुगतान नहीं किया है। उत्तर प्रदेश गन्ना (आपूर्ति और खरीद विनियमन) अधिनियम के मुताबिक, 14 दिनों में गन्ना भुगतान नहीं करने पर चीनी मिलों को 15 फीसदी ब्याज देना होता है। लेकिन ब्याज तो दूर की बात किसानों को अपना मूल बकाया पाने के लिए भी लंबा इंतजार करना पड़ता है। इस साल बीते 18 सितंबर को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया कि प्रदेश के गन्ना किसानों का बकाया एक माह के भीतर 15 फीसदी ब्याज के साथ भुगतान करें। लेकिन अदालत के आदेश के पालन में सरकार और चीनी मिलें विफल रही हैं। हाई कोर्ट ने अपने आदेश के दौरान यह टिप्पणी भी की कि भुगतान के लिए गन्ना किसानों को बार-बार हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है, जिसके लिए प्रदेश के अधिकारी जिम्मेदार हैं। अदालत ने सरकारी अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए इसे किसानों के उत्पीड़न की तरह बताया।

गन्ने की पेराई मई महीने तक खत्म हो जाती है। कायदे से जून महीने तक पूरा भुगतान हो जाना चाहिए। लेकिन अब भी हजारों करोड़ के बकाया को देखते सरकार ने अक्टूबर के तीसरे सप्ताह तक भी वर्तमान पेराई सत्र का समापन घोषित नहीं किया है। राज्य में चालू पेराई सीजन में कुल 119 चीनी मिलों में पेराई हुई। इनमें से 92 निजी चीनी मिलों पर किसानों का बकाया सबसे ज्यादा है। निजी चीनी मिलों को सरकार की तरफ से तरह-तरह की रियायतें दी जाती हैं, फिर भी मूल्य भुगतान में वे सबसे पीछे हैं। इस मुकाबले 24 को-ऑपरेटिव चीनी मिलों और उत्तर प्रदेश स्टेट शुगर कॉरपोरेशन लिमिटेड की तीन मिलों का रिकॉर्ड बेहतर है।

गन्ना उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी नकदी फसल है। राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के लगभग 35 लाख किसान परिवारों की आय का मुख्य स्रोत गन्ने की खेती है। राज्य में 27.94 लाख हेक्टेयर जमीन पर गन्ने की खेती होती है। वर्तमान पेराई सत्र 2018-19 में शुगर यील्ड (चीनी परता) 11.46 फीसदी रही। यह पिछले पेराई सत्र 2017-18 से 0.62 फीसदी अधिक है। इसका मतलब हुआ कि प्रति क्विंटल गन्ने से चीनी निकलना बढ़ा है। किसानों की मेहनत से चीनी मिलों का मुनाफा बढ़ा है। फिर भी किसानों के साथ छल किया जाना बंद नहीं हो रहा है। बकाया भुगतान नहीं होने के कारण इस बार भी राज्य के लाखों गन्ना किसानों की दीपावली फीकी रहेगी।
 

GANNA KISAN
due of ganna kisan
ganna kisanon ka bakaya. sugarcane mill in uttar prdaesh

Related Stories

राज्यसभा में उठी यूपी के गन्ना किसानों के बकाया भुगतान की मांग

क्रांति यात्रा : दिल और जिस्म पर घाव लेकर लौटे किसान

दिल्ली के दरवाज़े पर ‘किसान क्रांति यात्रा’, लेकिन प्रवेश की इजाज़त नहीं


बाकी खबरें

  • Lebanon
    पीपुल्स डिस्पैच
    लेबनान में ड्राइवरों और परिवहन कर्मचारियों को लेकर सरकारी उदासीनता के ख़िलाफ़ हड़ताल
    15 Jan 2022
    हड़ताली श्रमिकों ने कई प्रमुख राजमार्गों और सड़कों को अवरुद्ध कर दिया और सरकार से बढ़ती महंगाई के मद्देनज़र ईंधन और दूसरी वस्तुओं पर दी जा रही पिछली सब्सिडी को बहाल करने की मांग की।
  • Akhilesh
    रवि शंकर दुबे
    स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ कई विधायक सपा में शामिल, अखिलेश बोले ‘’हिट विकेट हो गए बाबा’’
    14 Jan 2022
    यूपी चुनाव से पहले सभी राजनीतिक पार्टियां अपनी-अपनी बिसात बिछा रही हैं, ऐसे में अखिलेश यादव ने स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ कई विधायकों को पार्टी में शामिल कराकर बीजेपी करारा झटका दिया है।  
  • nato
    न्यूज़क्लिक टीम
    अमेरिका-नेटो के निशाने पर रूस, उक्रैन पर खलबली
    14 Jan 2022
    पड़ताल दुनिया भर की में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने अमेरिका व रूस और नेटो पर रूस के शीर्ष नेताओं की बैठक, उक्रैन को लेकर चल रहे विवाद पर न्यूज़ क्लिक के प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ से बातचीत की।…
  • Privatization
    न्यूज़क्लिक टीम
    बैंक निजीकरण का खेल
    14 Jan 2022
    बैंकों के निजीकरण के लिए तर्क दिया जाता है कि सरकारी बैंक ठीक तरह से काम नहीं कर रहे और वे नुकसान झेल रहे हैं हैं। आखिर क्यों सरकारी बैंक घाटे में चलते हैं? क्या है इसका कारण ? जानते हैं ऑनिंद्यो से
  • YATI NARSINGHANAND
    रवि शंकर दुबे
    यति नरसिंहानंद से क्यों डर रही है सरकार? आज भी खुलेआम दे रहा चुनौती
    14 Jan 2022
    डासना मंदिर का महंत यति नरसिंहानंद हरिद्वार संसद के बाद से अभी तक आज़ाद घूम रहा है और लगातार दूसरे धर्मों पर कीचड़ उछाल रहा है, ऐसे में सवाल है कि अभी तक उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया, आखिर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License