NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
"गणतंत्र की बात"
आप सभी को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ। यह दिवस हम तभी सार्थक ढंग से मना सकेंगे जब हमारे भीतर संविधान को सही अर्थ में लागू करने का जज़्बा ज़िंदा रहे।
कन्हैया कुमार
26 Jan 2018
republic day
Image Courtesy : India.com

साथियों,

सबसे पहले तो आप सभी को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ। यह दिवस हम तभी सार्थक ढंग से मना सकेंगे जब हमारे भीतर संविधान को सही अर्थ में लागू करने का जज़्बा ज़िंदा रहे। आज जब भीड़ को संस्थाओं से ज़्यादा ताकतवर बनाया जा रहा है, तब संविधान के असुरक्षित होने के मसले पर बार-बार बात होनी चाहिए। देश नागरिकों से बनता है, न कि भीड़ से। आज जब शासक- वर्ग अपने फ़ायदे के लिए गणतंत्र को भीड़तंत्र में बदल रहा है तब संविधान की रक्षा करना सबसे ज़रूरी काम बन गया है।

देश की कैसी तस्वीर हमारे सामने आ रही है? हरियाणा में डरे-सहमे बच्चों और कुछ न कर पाने की बैचैनी के साथ बस में बैठे मायूस टीचर और स्टाफ़ की तस्वीर को देखिये और अपने दिल पर हाथ रखकर ख़ुद से पूछिए। क्या आज़ादी के इतने दशकों बाद हमारे देश को ऐसा ही बनना था? क्या एक प्रतिशत आबादी के पास 73 प्रतिशत संपत्ति होने पर हम यह कह सकते हैं कि हमारे देश में सचमुच गण का तंत्र है? क्या पटियाला हाउस कोर्ट में गुंडों को शिक्षकों, एक्टिविस्टों, पत्रकारों आदि पर हमला करने की छूट देने वाली सरकार को आज संविधान का गुणगान करने का नैतिक अधिकार है? क्या उस शर्मनाक हमले को बासी मसला बता देने से लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो पायेगी? क्या इससे नजीब पर हमला करने वालों का, कोर्ट परिसर की गुम्बद पर चढ़कर तिरंगे का अपमान करने वालों का और रोहित से लेकर गौरी लंकेश की हत्या करने वालों का मनोबल नहीं बढ़ेगा? हिंसा की अनदेखी करके उसे सामान्य घटना बताने की मानसिकता वाले लोग ही अख़लाक़ की हत्या के बाद जुनैद, पहलू खा़न आदि की हत्या का कारण बनते हैं।

हम असली मसलों पर बात ही नहीं कर पाएँ, इसलिए जान-बूझकर ऐसा सामाजिक-राजनीतिक माहौल बनाया जा रहा है जिसमें शिक्षा, रोज़गार आदि के मुद्दे दबकर रह जाएँ। शंभूलाल रैगर के पक्ष में तर्क गढे जा रहे हैं। लोगों को हिंदू-मुस्लिम के मुद्दे में उलझा कर इस बात पर बहस ही नहीं होने दी जाती कि गिनी-चुनी सरकारी नौकरियों में भी वर्षों तक भर्ती की प्रक्रिया पूरी क्यों नहीं की जाती। लोगों को फ़ालतू के मुद्दों में इतना उलझा दिया जाता है कि वे समझ ही नहीं पाते कि पीएचडी कोर्सों में केवल 0.4 प्रतिशत विद्यार्थियों के मौजूद होने पर भी टैक्सपेयर के पैसे का मुद्दा कैसे खड़ा किया जा सकता है। सरकार नौकरी से जुड़े सभी आँकड़े क्यों नहीं जारी करती है? उसे अपनी किस असलियत के सामने आने का डर है?

मुख्यधारा का मीडिया हमारे देश की बेहतरी से जुड़े मसलों पर कभी बहस नहीं कराता, इसलिए सोशल मीडिया पर ऐसे मसलों पर लगातार बात करते हुए हम विमर्श को ज़मीनी आंदोलनों से जोड़ने की कोशिश तो कर ही सकते हैं। जब सरकार रोज़गार के पकौड़ाकरण की मुहिम में जुटी हो तो हमें योग्यता की कद्र के बारे में पूरे देश में बहस छेड़ने के काम में लगना ही होगा। जब मीडिया संवैधानिक संस्थाओं को लगातार कमज़ोर करने की साज़िश में सरकार का साथ निभाता नज़र आए तो हमें यह सवाल उठाना ही होगा कि भाजपा-शासित राज्यों के मुख्यमंत्री कोर्ट की फटकार सुनने के बाद भी भारतीय सेंसर बोर्ड जैसी संस्था का अपमान क्यों करते हैं। चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट, केंद्रीय सूचना आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं की हालत ख़राब क्यों की जा रही है? लाभ के पद का बहाना बनाकर आप के विधायकों को अयोग्य घोषित किया गया, लेकिन मध्य प्रदेश के 116 भाजपाई विधायकों को इसी आरोप के बावजूद सुयोग्य माना जा रहा है। कोर्स की किताबों में इतिहास से छेड़छाड़ करके भविष्य को बिगाड़ने की तैयारी की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के जजों को प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके न्यायपालिका की आज़ादी बचाने की कोशिश क्यों करनी पड़ रही है? आखिर क्यों उन्हें सार्वजानिक रूप से ऐसा कहना पड़ रहा है कि "लोकतंत्र खतरे में है।"

आइए, आज हम संविधान को बचाने का संकल्प लें क्योंकि समानता, स्वतंत्रता और न्याय जैसे नागरिक अधिकार तभी बचेंगे जब संविधान बचेगा। संविधान की शुरुआत होती है 'हम, भारत के लोग' शब्दों से। 'हम, भारत के लोग' सत्ता के नशे में पागल हो रहे नेताओं को याद दिलाना चाहते हैं कि संविधान में लिखे 'लोग' में हर धर्म, जाति, संप्रदाय आदि के लोग शामिल हैं। यह देश किसी धर्म या संगठन के लोगों को उपहार में नहीं मिला है। यह देश शहीदों की शहादत के बाद आज़ाद हुआ है। उम्मीद है कि इसे जनता अपने दुश्मनों की साज़िशों से ज़रूर बचाएगी।

कन्हैया  कुमार की फेसबुक वॉल से  साभार I 

gantantra diwas
samvidhaan
Kanhaiya Kumar

Related Stories

फ़ासीवाद से कैसे नहीं लड़ना चाहिए?

क्रांतिकारी और कांग्रेस

कांग्रेस में कन्हैया की इंट्री और सिद्धू के इस्तीफ़े का मतलब

कांग्रेस के खिलाफ दुष्प्रचार में उतरा मीडिया

अपनी ‘एलीट इमेज’ से बाहर निकलने की कोशिश कर रही है कांग्रेस!

किसानों को धन्नासेठों के हाथों मज़दूर बना देना चाहती है मोदी सरकार : कन्हैया कुमार

बिहार: वाम दलों ने विधानसभा चुनाव को बनाया जनमुद्दों वाला!

बिहार में होगा कड़ा मुक़ाबला : कन्हैया कुमार

“कोरोना की बजाय छात्रों से लड़ रही है सरकार” : नताशा, देवांगना, सफूरा, हैदर की गिरफ़्तारी के ख़िलाफ़ एकजुटता

U turn केजरीवाल और 'गिद्ध मीडिया'


बाकी खबरें

  • Ambedkar
    राज वाल्मीकि
    वर्तमान संदर्भ में डॉ. अंबेडकर की प्रासंगिकता
    06 Dec 2021
    बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की आज पुण्यतिथि है। 6 दिसंबर 1956 को दिल्ली में उनका निधन हुआ। उन्होंने हमें सफलता के तीन मंत्र दिए थे – ‘शिक्षित हो,  संगठित हो, संघर्ष करो।’ हाल ही में हमें किसान आंदोलन…
  • Alphons
    द लीफ़लेट
    संविधान की प्रस्तावना में संशोधन के लिहाज़ से प्राइवेट मेंबर बिल: एक व्याख्या
    06 Dec 2021
    झा के मुताबिक़, संविधान के बुनियादी ढांचे का एक हिस्सा होने के नाते प्रस्तावना में संशोधन नहीं किया जा सकता।
  •  Indian constitution
    डॉ. राजू पाण्डेय
    भारतीय संविधान पर चल रहे अलग-अलग विमर्शों के मायने!
    06 Dec 2021
    क्या संविधान से हमें कुछ भी हासिल नहीं हुआ? जब हमारे साथ स्वतंत्र हुए देशों में लोकतंत्र असफल एवं अल्पस्थायी सिद्ध हुआ और हमारे लोकतंत्र ने सात दशकों की सफल यात्रा पूरी कर ली है तो इस कामयाबी के पीछे…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 8,306 नए मामले, 211 मरीज़ों की मौत
    06 Dec 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.28 फ़ीसदी यानी 98 हज़ार 416 हो गयी है।
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी में तनाव व अव्यवस्था की आंखमिचौली, नगालैंड में गोलीकांड और विनोद दुआ को श्रद्धांजलि
    06 Dec 2021
    यूपी के पश्चिमी हिस्से में किसान आंदोलन के सामाजिक राजनीतिक असर की काट के लिए सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की पुरजोर कोशिश हो रही है. क्या मथुरा में तनाव पैदा करने की मुहिम चला रहे कुछ हिन्दुत्ववादी संगठनों…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License