NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
गंगा के लिए प्रो. जीडी अग्रवाल ‘शहीद’
प्रो. अग्रवाल को शायद ये विश्वास रहा हो कि जिन नरेंद्र मोदी ने सरकार में आने से पहले खुद को गंगा का पुत्र बताते हुए अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में कहा था कि “गंगा मां ने मुझे बुलाया है”, वे सरकार में आने के बाद गंगा के लिए वास्तव में कुछ करेंगे। लेकिन ऐसा हो न सका।
न्यूजक्लिक रिपोर्ट
11 Oct 2018
प्रो. जीडी अग्रवाल का निधन।

जिन लोगों ने सरकार में आने से पहले गंगा को बचाने का वादा किया था, वे सरकार में आकर उसे भूल गए लेकिन पर्यावरणविद प्रोफेसर जीडी अग्रवाल अपना संकल्प नहीं भूले और आज गंगा के लिए शहीद हो गए। प्रो. अग्रवाल गंगा के मुद्दे पर बीते 22 जून से अनशन कर रहे थे।

86 साल की उम्र में अनशन का मतलब आप समझ सकते हैं। और वो एक-दो दिन नहीं, उनके अनशन को 111 दिन हो गए थे। मंगलवार से उन्होंने जल भी त्याग दिया था। वे हरिद्वार में अपने मातृसदन आश्रम में अनशन पर थे। बताया जाता है कि आश्रम में उनकी हालत बिगड़ने पर पुलिस ने उन्हें जबरन ऋषिकेश के एम्स में भर्ती करा दिया गया था।

आईआईटी में प्रोफेसर रह चुके जीडी अग्रवाल इंडियन सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड में सदस्य भी रह चुके थे। हालांकि अब वह एक संन्यासी का जीवन जी रहे थे और उन्होंने अपना नाम स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद रख लिया था।

प्रो. अग्रवाल गंगा में अवैध खनन और  बांधों जैसे बड़े निर्माण के खिलाफ थे और गंगा की अविरलता बनाए रखने के पक्षधर थे। इन मुद्दों पर वे पहले भी सरकार को चेता चुके और अनशन भी कर चुके थे। इस बार भी उन्होंने प्रधानमंत्री को इस संबंध में पत्र लिखा था। फरवरी महीने में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिख गंगा के लिए अलग से क़ानून बनाने की मांग की थी। लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला और वे 22 जून को अनशन पर बैठ गए। इस बीच दो केंद्रीय मंत्री उमा भारती और नितिन गडकरी ने उनसे अपना अनशन तोड़ने की अपील की थी। लेकिन बिना किसी ठोस प्रस्ताव या कार्रवाई के वो अनशन तोड़ने को तैयार नहीं हुए। शायद उनको ये आशा रही हो कि उमा भारती जो गंगा के लिए जान देने की कसमें खातीं रही हैं, वे इस बारे में गंभीरता से कुछ करेंगी। उन्हें शायद ये भी विश्वास रहा हो कि जिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद को गंगा का पुत्र बताते हुए अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में कहा था “गंगा मां ने मुझे बुलाया है”, वे गंगा के लिए वास्तव में कुछ करेंगे। लेकिन उनकी उम्मीद पूरी नहीं हुई, भरोसा टूट गया, प्रधानमंत्री ने उन्हें जवाब तक न दिया और इसी के साथ उनकी सांस की डोर भी टूट गई।

प्रो. अग्रवाल के निधन से पर्यावरण प्रेमियों  को भारी धक्का पहुंचा है। उनके आंदोलन के समर्थकों ने उनके निधन पर गहरा दुख जताते हुए इसे हत्या तक करार दिया और इसके लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

professor g d agarwal
ganga
national mission for clean ganga
uma bharti
Narendra modi
ganga bachao aandolan

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

बिहारः नदी के कटाव के डर से मानसून से पहले ही घर तोड़कर भागने लगे गांव के लोग

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़


बाकी खबरें

  • प्रियंका शंकर
    रूस के साथ बढ़ते तनाव के बीच, नॉर्वे में नाटो का सैन्य अभ्यास कितना महत्वपूर्ण?
    19 Mar 2022
    हालांकि यूक्रेन में युद्ध जारी है, और नाटो ने नॉर्वे में बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है, जो अभ्यास ठंडे इलाके में नाटो सैनिकों के युद्ध कौशल और नॉर्वे के सैन्य सुदृढीकरण के प्रबंधन की जांच करने के…
  • हर्षवर्धन
    क्रांतिदूत अज़ीमुल्ला जिन्होंने 'मादरे वतन भारत की जय' का नारा बुलंद किया था
    19 Mar 2022
    अज़ीमुल्ला ख़ान की 1857 के विद्रोह में भूमिका मात्र सैन्य और राजनीतिक मामलों तक ही सिमित नहीं थी, वो उस विद्रोह के एक महत्वपूर्ण विचारक भी थे।
  • विजय विनीत
    ग्राउंड रिपोर्ट: महंगाई-बेरोजगारी पर भारी पड़ी ‘नमक पॉलिटिक्स’
    19 Mar 2022
    तारा को महंगाई परेशान कर रही है तो बेरोजगारी का दर्द भी सता रहा है। वह कहती हैं, "सिर्फ मुफ्त में मिलने वाले सरकारी नमक का हक अदा करने के लिए हमने भाजपा को वोट दिया है। सरकार हमें मुफ्त में चावल-दाल…
  • इंदिरा जयसिंह
    नारीवादी वकालत: स्वतंत्रता आंदोलन का दूसरा पहलू
    19 Mar 2022
    हो सकता है कि भारत में वकालत का पेशा एक ऐसी पितृसत्तात्मक संस्कृति में डूबा हुआ हो, जिसमें महिलाओं को बाहर रखा जाता है, लेकिन संवैधानिक अदालतें एक ऐसी जगह होने की गुंज़ाइश बनाती हैं, जहां क़ानून को…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मध्यप्रदेश विधानसभा निर्धारित समय से नौ दिन पहले स्थगित, उठे सवाल!
    19 Mar 2022
    मध्यप्रदेश विधानसभा में बजट सत्र निर्धारित समय से नौ दिन पहले स्थगित कर दिया गया। माकपा ने इसके लिए शिवराज सरकार के साथ ही नेता प्रतिपक्ष को भी जिम्मेदार ठहराया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License