NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
गार्गी कॉलेज जैसी घटनाएं होना बेहद ख़तरनाक लेकिन इनपर चुप्पी और भी बड़ा अपराध!
"यूथ फ़ेस्ट और म्यूजज़िकल प्रोग्राम के दौरान लड़के जान-बूझ कर लड़कियों को यहां-वहां टच करते हैं, आपके क़रीब आने की कोशिश करते हैं लेकिन जब आप शिकायत करेंगे तो आपसे ही सवाल पूछे जाएंगे, आपको ही सलाह दी जाएगी कि आख़िर आपको वहाँ जाने की ज़रूरत ही क्या है।"
सोनिया यादव
13 Feb 2020
Gargi College
Image courtesy: India Today

दिल्ली विश्वविद्यालय का गार्गी कॉलेज इन दिनों सुर्खियों में है। कॉलेज के एक फ़ेस्ट के दौरान छात्राओं पर हुए यौन हमले ने पुलिस और प्रशासन पर सुरक्षा को लेकर दर्जनों सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला सड़क से लेकर संसद तक पहुंच चूका है, सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर सीबाआई जांच की मांग हुई तो वहीं अब डीयू प्रशासन ने भी महिला सुरक्षा के मद्देनज़र सभी कॉलेजों को पारदर्शी निगरानी तंत्र बनाने और दो हफ़्ते में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश जारी किए हैं। लेकिन छात्राओं का सवाल अभी भी बना हुआ है कि आख़िर बार-बार लड़कियों के साथ हो रही ऐसी घटनाओं पर डीयू प्रशासन लापरवाई बरतने के बाद चुप्पी कैसे साध लेता है?

दिल्ली विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले अलग-अलग कॉलेजों की छात्राओं का कहना है कि अक्सर फ़ेस्ट और दूसरे कार्यक्रमों के दौरान उनके साथ छेड़खानी की घटनाएँ होती रहती हैं। प्रशासन से शिकायत के बावजूद ना तो उस पर कोई कार्रवाई होती है और ना ही उसे संज्ञान में लिया जाता है। उल्टा आगे से कार्यक्रम ना करवाने की धमकी दे दी जाती है।

न्यूज़क्लिक ने इस संबंध में कुछ छात्राओं से बातचीत कर इस मामले की गंभीरता को समझने की कोशिश की।

क्या है पूरा मामला : गार्गी कॉलेज छेड़छाड़ मामला : छात्राओं का प्रदर्शन, पुलिस ने दर्ज की एफ़आईआर

लेडी श्रीराम कॉलेज की खुशबू कहती हैं, "मुझे लगता है ये बातें डीयू के हर फ़ेस्ट में दोहराई जाती हैं। गार्गी की घटना का स्तर बड़ा था और वो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गई, फिर भी कई दिन लग गए तब जाकर प्रशासन और पुलिस पर दबाव बन पाया। जिसके बाद अब कार्रवाई हो रही है। लड़कियों के लिए समाज, प्रशासन और पुलिस ने छेड़खानी- अभ्रदता को सामान्य मान लिया है।"

डीयू के ही मैत्रेयी कॉलेज की आकांक्षा बताती हैं, "अक्सर हमें कपड़ों और चाल-चलन से जज किया जाता है। अगर आप किसी अभ्रदता की शिकायत करेंगे तो प्रशासन और पुलिस सबसे पहले आपको जज करना शुरू कर देगा। यूथ फ़ेस्ट और म्यूजज़िकल प्रोग्राम के दौरान लड़के जान-बूझ कर लड़कियों को यहां-वहां टच करते हैं, आपके क़रीब आने की कोशिश करते हैं लेकिन जब आप कम्प्लेन्ट करेंगे तो आपसे ही सवाल पूछे जाएंगे, आपको ही सलाह दी जाएगी कि आख़िर आपको वहाँ जाने की ज़रूरत ही क्या है।"

गार्गी कॉलेज की लड़कियों ने भी प्रिंसिपल प्रोमिला कुमार से इस यौन हमले की शिकायत की, लेकिन लड़कियों का आरोप है कि प्रिंसिपल ने उन्हें ही फटकार लगाते हुए कहा कि 'इसी वजह से मैं फ़ेस्ट ऑर्गनाइज़ करना पसंद नहीं करती। तुम्हीं लोगों को फ़ेस्ट चाहिए होते हैं।' ऐसे में सवाल ये भी उठता है कि क्या सुरक्षा के तमाम वादों और दावों के बीच आज भी समाज में पुलिस और प्रशासन पर पितृसत्ता की सोच हावी है?

महिला अधिकारों के क्षेत्र में कार्यरत ग़ैर सरकारी संगठन अनहद की सृष्टी ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहा, "महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा एक गंभीर मुद्दा है। फिर चाहे वो सड़क पर हो या घर में, लेकिन हैरानी है कि शिक्षण संस्थानों में भी पुलिस और प्रशासन की पनाह में छात्राएं सुरक्षित नहीं हैं। शिकायत आने के बावजूद प्रशासन पूरे मामले पर चुप्पी साध लेता है। क्या हम यहाँ हर बार किसी बड़ी घटना होने का इंतज़ार करते हैं? बच्चियों को अपनी आवाज़ सुनाने के लिए भी प्रदर्शन करना पड़ा, क्या हम वाक़ई देश की राजधानी में हैं?"

बता दें कि गार्गी मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच के लिये याचिका पर विचार से इंकार कर दिया है। चीफ जस्टिस एस. ए. बोबडे, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति सूर्य कांत की पीठ ने याचिकाकर्ता वकील मनोहर लाल शर्मा से कहा कि उन्हें इसके लिये दिल्ली हाई कोर्ट जाना चाहिए। शर्मा ने इस याचिका का उल्लेख करते हुए शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया था।

इस संबंध में वकिल आर्शी जैन कहती हैं, "सुप्रीम कोर्ट में कार्यवाही का एक प्रोसेस है। ये मामला एक विशेष जगह से जुड़ा हुआ है, जो दिल्ली प्रदेश के अंदर आता है इसलिए इस पर सुनवाई का पहला अधिकार भी दिल्ली हाई कोर्ट का ही है। हालांकि अगर सुप्रीम कोर्ट चाहे तो इसकी सुनवाई कर सकता था या स्वत: संज्ञान भी ले सकता था लेकिन यहां पहले से कई मामले लंबित पड़े हैं और बेहतर हैं चीज़े एक तय प्रक्रिया के अनुसार ही हों।"

इस मामले में छात्राओं ने दिल्ली पुलिस पर भी यह आरोप लगाया गया है कि जब रविवार 9 फ़रवरी को ही यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा था, तब भी साउथ दिल्ली पुलिस ने जांच कराना ज़रूरी नहीं समझा। पुलिस क्यों कॉलेज प्रशासन की एफ़आईआर का इंतज़ार कर रही थी? छात्राओं के साथ बद्तमीज़ी पुलिस की मौजूदगी में हुई, फिर पुलिस द्वारा आख़िर कोई क़दम क्यों नहीं उठाया गया?

गार्गी कॉलेज की एक छात्रा ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, "इस बार कॉलेज ने बाउंसर की तैनाती की थी। सुरक्षा बल भी वहाँ थे लेकिन वे सब देख रहे थे। मेरी दोस्त जिसके साथ छेड़छाड़ हुई है, उसने सुरक्षाकर्मियों से मदद की गुहार लगाई लेकिन वह हिला तक नहीं। सुरक्षा के मद्देनज़र कॉलेज ने इस साल पुरुष आगंतुकों के लिए पास व्यवस्था लागू की थी। लेकिन कई लोग बिना पास के भी घुस आए, आख़िर पुलिस और प्रशासन क्या कर रहे थे?"

उधर, मामले के तूल पकड़ने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने गार्गी कॉलेज की घटना को लेकर सभी प्रिंसिपल्स को परामर्श जारी कर छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है। डीयू ने 10 फ़रवरी को जारी परामर्श में कॉलेजों को दो सप्ताह के भीतर छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देने के लिए भी कहा है। डीयू ने गार्गी कॉलेज में हुई घटना की निंदा करते हुए पुलिस से इस घटना में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का अनुरोध किया है। परामर्श में कहा गया है कि डीयू ने कॉलेज की प्राचार्य से इस मामले में की गई कार्रवाई पर रिपोर्ट भी मांगी है।

ग़ौरतलब है कि गार्गी कॉलेज में 4 से 6 फ़रवरी के बीच एक एनुअल फ़ेस्ट हुआ। फ़ेस्ट के आख़िरी दिन 6 फ़रवरी को सिंगर ज़ुबिन नौटियाल के कार्यक्रम के दौरान कुछ लड़के कॉलेज में गेट और बैरिकेड फांदकर अंदर घुस आए। आरोप है कि उन्होंने लड़कियों से बद्तमीज़ी की, छेड़छाड़ जैसी घटनाएं हुईं। इस घटना से संबंधित कई पोस्ट सोशल मीडिया पर ख़ूब वायरल हो रहे हैं।

एक पोस्ट के मुताबिक, जो लड़के कॉलेज में घुसे वो नशे में थे और ‘जय श्री राम’ के नारे लगा रहे थे। इसके बाद 10 फ़रवरी को छात्राओं ने बड़ा विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद मामले पर एफ़आईआर दर्ज हुई। 

फ़िलहाल छात्राएँ इस घटना के लिए कॉलेज प्रशासन और पुलिस पर आरोप लगा रही हैं, साथ ही उनके इस्तीफ़े की मांग भी कर रही हैं।

इसे भी पढ़े :गार्गी कॉलेज यौन हमला : डीयू के छात्रों ने किया विरोध प्रदर्शन, पुलिस की कार्रवाई भी कठघरे में

Gargi College
sexual harassment
Mass Molestation
Delhi University
delhi police
Ramesh Pokhriyal Nishank
MHRD
DCW
ncw
national commission for women
student protest

Related Stories

मुस्लिम विरोधी हिंसा के ख़िलाफ़ अमन का संदेश देने के लिए एकजुट हुए दिल्ली के नागरिक

बिहार बजट सत्र: विधानसभा में उठा शिक्षकों और अन्य सरकारी पदों पर भर्ती का मामला 

दिल्ली दंगों के दो साल: इंसाफ़ के लिए भटकते पीड़ित, तारीख़ पर मिलती तारीख़

SFI ने किया चक्का जाम, अब होगी "सड़क पर कक्षा": एसएफआई

बिहार : रेलवे परीक्षा परिणाम में धांधली का आरोप लगाते हुए अभ्यर्थियों का दूसरे दिन भी प्रदर्शन

दिल्ली: प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों पर पुलिस का बल प्रयोग, नाराज़ डॉक्टरों ने काम बंद का किया ऐलान

दिल्ली: एसएससी जीडी भर्ती 2018 के अभ्यर्थियों की नियुक्ति की मांग को लेकर प्रदर्शन

किसान आंदोलन@378 : कब, क्या और कैसे… पूरे 13 महीने का ब्योरा

दिल्ली: ऐक्टू ने किया निर्माण मज़दूरों के सवालों पर प्रदर्शन

सुप्रीम कोर्ट को दिखाने के लिए बैरिकेड हटा रही है सरकार: संयुक्त किसान मोर्चा


बाकी खबरें

  • Barauni Refinery Blast
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बरौनी रिफायनरी ब्लास्ट: माले और ऐक्टू की जांच टीम का दौरा, प्रबंधन पर उठाए गंभीर सवाल
    20 Sep 2021
    भाकपा (माले) और मज़दूर संगठन ऐक्टू की जांच टीम ने घटनास्थल का दौरा किया और अपनी एक जाँच रिपोर्ट दी, जिसमें उन्होंने कहा कि 16 सितंबर को बरौनी रिफाइनरी में हुआ ब्लास्ट प्रबन्धन की आपराधिक लापरवाही का…
  • New Homes, School Buildings, Roads and Football Academies Built Under Kerala Govt’s 100-Day Programme
    अज़हर मोईदीन
    केरल सरकार के 100-दिवसीय कार्यक्रम के तहत नए घर, विद्यालय भवन, सड़कें एवं फुटबॉल अकादमियां की गईं निर्मित  
    20 Sep 2021
    100-दिवसीय कार्यक्रम में शामिल परियोजनाओं के कार्यान्वयन पर नजर रखने के लिए बनाये गए राजकीय नियंत्रण-मंडल की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों के विभिन्न विभागों के तहत…
  • Afghanistan
    एम. के. भद्रकुमार
    शांघाई सहयोग संगठन अमेरिका की अगुवाई वाले क्वाड के अधीन काम नहीं करेगा
    20 Sep 2021
    एससीओ यानी शांघाई सहयोग संगठन, अमेरिका की अगुवाई वाले चार देशों के गठबंधन क्वाड के अधीन काम नहीं करेगा।
  • Indigenous People of Brazil Fight for Their Future
    निक एस्टेस
    अपने भविष्य के लिए लड़ते ब्राज़ील के मूल निवासी
    20 Sep 2021
    हाल ही में इतिहास की सबसे बड़ी मूल निवासियों की लामबंदी ने सत्ता प्रतिष्ठानों के आस-पास की उस शुचिता की धारणा को को तोड़कर रख दिया है जिसने सदियों से इन मूल निवासियों को सत्ता से बाहर रखा है या उनके…
  • Government employees in Jammu and Kashmir
    सबरंग इंडिया
    जम्मू-कश्मीर में सरकारी कर्मचारियों से पूर्ण निष्ठा अनिवार्य, आवधिक चरित्र और पूर्ववृत्त सत्यापन भी जरूरी
    20 Sep 2021
    16 सितंबर को जारी सरकारी आदेश में कहा गया है कि अगर किसी कर्मचारी के खिलाफ किसी भी तरह की प्रतिकूल रिपोर्ट की पुष्टि होती है तो उसे बर्खास्त किया जा सकता है
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License