NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों में डिटेंशन सेंटर के लिए मैनुअल जारी किया
इस मैनुअल में कई विशेषताएं शामिल हैं जिसे असम के डिटेंशन सेंटर की स्थिति को लेकर याचिका दाखिल करने के बाद असम की राज्य सरकार ने शामिल किया था।
विवान एबन
31 Jul 2019
nrc

 

रिपोर्ट के अनुसार, गृह मंत्रालय ने जनवरी में कार्यान्वयन और अनुपालन के लिए सभी राज्य सरकारों को ‘2019 मॉडल डिटेंशन मैनुअल’ जारी किया। हालांकि न्यूज़क्लिक इस मैनुअल की कॉपी को हासिल नहीं कर पाया है लेकिन मीडिया रिपोर्टों और लोकसभा में अतारांकित प्रश्न के उत्तर के आधार पर ऐसा लगता है कि इस मैनुअल में कई विशेषताएं शामिल हैं जिसे असम के डिटेंशन सेंटर की स्थिति के ख़िलाफ याचिका दाखिल करने के बाद असम की राज्य सरकार ने शामिल किया था। इससे जो समझा जा सकता है वह ये कि ये मॉडल डिटेंशन सेंटर अदालतों में गंभीर चुनौती से बचना चाहता है।

गृह राज्य मंत्री किशन रेड्डी द्वारा इस विषय पर दिए गए उत्तर के अनुसार, "अन्य विषयों के अलावा द मॉडल डिटेंशन सेंटर जनरेटर, पीने के पानी, स्वच्छता, बिस्तरों के साथ स्थान, रनिंग वाटर के सुविधा वाला उचित टायलेट व बाथरुम, कम्युनिकेशन और चिकित्सा सुविधाओं, रसोई और मनोरंजन की सुविधाओं के प्रावधान सहित मानवीय गरिमा के साथ जीवन के मानक को कायम रखने के लिए डिटेंशन सेंटर में सुविधाएं मुहैया कराने का आदेश देता है।"

ये कथन असम में डिटेंशन सेंटर के संबंध में याचिका को लेकर हुई कार्रवाई के कुछ रिकॉर्ड के समान लगता है जो चौंकाने वाला नहीं होना चाहिए। 20 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश दिया जिसके एक हिस्से में केंद्र सरकार को एक डिटेंशन मैनुअल तैयार करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए कहा गया था। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से मैनुअल तैयार करने के लिए तीन महीने की मोहलत और देने का अनुरोध किया था जिसे बेंच ने खारिज कर दिया। यह मैनुअल जनवरी में राज्य सरकारों को भेजा गया था जो दर्शाता है कि केंद्र सरकार को वैसे भी तीन महीने लगे। यह कैसी विडंबना है कि असम में अनिश्चितकालीन हिरासत के खिलाफ एक याचिका ने पूरे भारत में डिटेंशन की प्रक्रिया को आसान बनाने वाले दस्तावेज को जन्म दिया है।

इसी प्रश्न के एक भाग के रूप में गृह राज्य मंत्री ने यह भी कहा कि 25 जून, 2016 तक असम में छह हिरासत केंद्रों में कुल 1,133 व्यक्ति थे। इनमें से 769 लोगों को एक साल से अधिक और 335 लोगों को तीन साल से अधिक समय के लिए हिरासत में लिया गया था।

इकोनॉमिक टाइम्स ने लिखा है कि इन राज्यों को डिटेंशन सेंटर स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार से विशेष अनुमति की आवश्यकता नहीं है। हालांकि जो चीज स्पष्ट नहीं है वह ये कि क्या डिटेंशन सेंटर को अनिवार्य रूप से स्थापित करना है या नहीं इसका मैनुअल में स्पष्ट उल्लेख नहीं है। फॉरेनर्स एक्ट, 1946 की धारा 3 (2) (ई) के अनुसार, केंद्र सरकार भारत में विदेशियों की आवाजाही को पूरी तरह से नियंत्रित कर सकती है। ऐसा लगता है कि ये शक्ति अब केंद्र सरकार और राज्यों के बीच साझा की जा रही है।

असम के डिटेंशन सेंटर से गायब हुई एक अन्य चीज यह है कि मैनुअल नए डिटेंशन सेंटर को जेलों में स्थापित करने की अनुमति नहीं देता है। यह असम के डिटेंशन सेंटर की सबसे बड़ी आलोचना की तरह है। इसके अलावा बंदियों को कांसुलर की व्यवस्था होगी और परिवारों से अलग नहीं किया जाएगा। उनका डिटेंशऩ तब तक होगा जब तक कि उन्हें कानूनन निर्वासित नहीं किया जा सकता। हालांकि इस प्रक्रिया में कितना समय लगेगा यह स्पष्ट नहीं है। इसका तात्पर्य यह है कि डिटेंशन सेंटर की स्थापना डिटेंशन के लिए बुनियादी ढांचे के निर्माण की दिशा में एक कदम है। विदेशियों से संबंधित कानूनों को लेकर भविष्य में संशोधन हो सकते हैं या नहीं इसका अभी इंतजार करना होगा। हालांकि असम में डिटेंशन सेंटर और फॉरेनर्स ट्राइब्यूनल का अनुभव इस संबंध में किसी को बहुत उम्मीद नहीं देता है।

Foreigners Detention
Deportation
Illegal Immigration
Assam
Ministry of Home Affairs
Detention Centres
Assam Detention Centres
Foreigners Tribunal
GOVERNMENT OF INDIA

Related Stories

असम में बाढ़ का कहर जारी, नियति बनती आपदा की क्या है वजह?

असम : विरोध के बीच हवाई अड्डे के निर्माण के लिए 3 मिलियन चाय के पौधे उखाड़ने का काम शुरू

सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह मामलों की कार्यवाही पर लगाई रोक, नई FIR दर्ज नहीं करने का आदेश

ज़मानत मिलने के बाद विधायक जिग्नेश मेवानी एक अन्य मामले में फिर गिरफ़्तार

असम की अदालत ने जिग्नेश मेवाणी को तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेजा

सद्भाव बनाए रखना मुसलमानों की जिम्मेदारी: असम CM

असम: बलात्कार आरोपी पद्म पुरस्कार विजेता की प्रतिष्ठा किसी के सम्मान से ऊपर नहीं

उल्फा के वार्ता समर्थक गुट ने शांति वार्ता को लेकर केन्द्र सरकार की ‘‘ईमानदारी’’ पर उठाया सवाल

गुवाहाटी HC ने असम में बेदखली का सामना कर रहे 244 परिवारों को अंतरिम सुरक्षा प्रदान की

असम: नागांव ज़िले में स्वास्थ्य ढांचा उपलब्ध होने के बावजूद कोविड मरीज़ों को स्थानांतरित किया गया


बाकी खबरें

  • एसकेएम की केंद्र को चेतावनी : 31 जनवरी तक वादें पूरे नहीं हुए तो 1 फरवरी से ‘मिशन उत्तर प्रदेश’
    मुकुंद झा
    एसकेएम की केंद्र को चेतावनी : 31 जनवरी तक वादें पूरे नहीं हुए तो 1 फरवरी से ‘मिशन उत्तर प्रदेश’
    16 Jan 2022
    संयुक्त किसान मोर्चा के फ़ैसले- 31 जनवरी को देशभर में किसान मनाएंगे "विश्वासघात दिवस"। लखीमपुर खीरी मामले में लगाया जाएगा पक्का मोर्चा। मज़दूर आंदोलन के साथ एकजुटता। 23-24 फरवरी की हड़ताल का समर्थन।
  • cm yogi dalit
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव और दलित: फिर पकाई और खाई जाने लगी सियासी खिचड़ी
    16 Jan 2022
    चुनाव आते ही दलित समुदाय राजनीतिक दलों के लिए अहम हो जाता है। इस बार भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। उनके साथ बैठकर खाना खाने की राजनीति भी शुरू हो गई है। अब देखना होगा कि दलित वोटर अपनी पसंद किसे बनाते हैं…
  • modi
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे : झुकती है सरकार, बस चुनाव आना चाहिए
    16 Jan 2022
    बीते एक-दो सप्ताह में हो सकता है आपसे कुछ ज़रूरी ख़बरें छूट गई हों जो आपको जाननी चाहिए और सिर्फ़ ख़बरें ही नहीं उनका आगा-पीछा भी मतलब ख़बर के भीतर की असल ख़बर। वरिष्ठ पत्रकार अनिल जैन आपको वही बता  …
  • Tribute to Kamal Khan
    असद रिज़वी
    कमाल ख़ान : हमीं सो गए दास्तां कहते कहते
    16 Jan 2022
    पत्रकार कमाल ख़ान का जाना पत्रकारिता के लिए एक बड़ा नुक़सान है। हालांकि वे जाते जाते भी अपनी आंखें दान कर गए हैं, ताकि कोई और उनकी तरह इस दुनिया को देख सके, समझ सके और हो सके तो सलीके से समझा सके।…
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    योगी गोरखपुर में, आजाद-अखिलेश अलगाव और चन्नी-सिद्धू का दुराव
    15 Jan 2022
    मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के अयोध्या से विधानसभा चुनाव लडने की बात पार्टी में पक्की हो गयी थी. लेकिन अब वह गोरखपुर से चुनाव लडेंगे. पार्टी ने राय पलट क्यों दी? दलित नेता चंद्रशेखर आजाद की पार्टी अब…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License