NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
गुजरात चुनाव: भावनगर का एक गाँव जहाँ महीने भर में सिर्फ एक घंटे मिलता है पीने का पानी
स्थानीय लोगों की शिकायत है कि आरओ-आरओ प्रोजेक्ट ने उनको कोई नए रोज़गार का अवसर नहीं दिया।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
08 Dec 2017
Gujarat Elections

गुजरात मॉडल में असमानता तथा भेदभाव का मार्मिक उदाहरण आसानी से देखा जा सकता है। एक तरफ जहां भावनगर ज़िले के घोघा गांव में 614 करोड़ रुपए की आरओ-आरओ (रोल-ऑन रोल-ऑफ) फेरी सेवा शुरू की गई वहीं दूसरी तरफ घोघा गाँव के ठीक बग़ल में स्थित एक गाँव में लोग पीने के पानी के तरस रहे हैं। उक्त गाँव में महीने में सिर्फ़ एक बार ही पानी आता है और वह भी महज़़ एक घंटे के लिए।

घोघा गाँव में मछली पकड़ने और नमक खनन किया जाता है जो खंभात की खाड़ी के मध्य-पश्चिमी तट पर स्थित है। इसके ठीक बगल में मच्छिवाड़ा गाँव है जहाँ मुस्लिमों की आबादी है। इस गाँव में पीने का पानी तक नहीं है।

मच्छिवाड़ा में रहने वाले ज़्यादातर लोग मछली पकड़ने का काम करते हैं। यहाँ के निवासियों का कहना है कि यहाँ नगर निगम से "एक महीने में सिर्फ एक बार ही पानी आता है और वह भी बहुत मुश्किल से महज़ एक घंटे तक" के लिए। वे कहते हैं कि हमलोग भूजल का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं क्योंकि यह खारा है साथ ही यह गाँव समुद्र तट से कुछ मीटर की दूरी पर स्थित है।

भरूच में घोघा और दाहेज के बीच रोल-ऑन रोल-ऑफ फेरी सेवा 22 अक्टूबर 2017 को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन किया था। यह दक्षिण गुजरात और सौराष्ट्र को जोड़ता है। इसके शुरू होने से सड़क से यात्रा करने का समय यानि 9 घंटे से घट कर महज एक घंटा हो जाएगा। इस सेवा की सुविधा के लिए दो यात्री टर्मिनलों का निर्माण किया गया है। ये टर्मिनल एक सूरत के पास दाहेज में और दूसरा घोघा में है।

यूसुफ कासिम नाम के एक व्यक्ति जिनकी आजीविका मछली पकड़ने पर निर्भर करती है, उन्होंने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि "यह क्षेत्र विकसित हुआ था लेकिन हमारे गाँव के लिए कुछ भी नहीं किया गया। हमें ज़िंदा रहने के लिए पानी भी नहीं मिलता है। नगर निगम द्वारा सप्लाई किया गया पानी महीने में एक ही बार आता है वह महज़ एक घंटे के लिए।"

इसी गाँव के दूसरे व्यक्ति असलम से यह पूछ जाने पर कि वे पानी के बिना किस तरह अपना ज़रूरी काम चलाते हैं तो उसने कहा कि उन्हें टैंकरों को फोन करना पड़ता है और पानी का लिए पैसे का भुगतान करना पड़ता है। असलम ने आगे कहा कि "चूंकि हम टैंकर से पानी खरीदने के लिए हर रोज़ 150 रुपए खर्च नहीं कर सकते, इसलिए हम गांव से क़रीब 200 मीटर दूर स्थित एक तालाब पर निर्भर रहना पड़ता है।

उसने कहा कि मछुआरों को समुद्र में ज़्यादा दूर जाने की इजाज़त नहीं है और शिपयार्ड के नज़दीक उच्च धाराओं के चलते बड़ी मछली उस जगह नहीं मिलती है। असलम ने कहा कि "स्थानीय झींगा जैसी ही छोटी मछलियां हमारे जाल में पकड़ी जाती हैं और वह भी बहुत छोटी मात्रा में। हम उन्हें स्थानीय बाजार में बेचते हैं और हर महीने 3,000 रुपए ही कमा पाते हैं। सिर्फ़ यही आजीविका का एकमात्र स्रोत है जिनसे परिवार का ख़र्च चलता है।

गाँव में कोई पक्की सड़क नहीं है। गाँव में रहने वाले लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में गाँव में प्रवेश करना मुश्किल हो जाता है। लगभग 15,000 ग्रामीणों की कुल आबादी के लिए पड़ोस में केवल एक ही अस्पताल है।

गाँव के एक अन्य निवासी ने कहा कि "इस अस्पताल में केवल आपातकालीन सेवाएँ ही उपलब्ध है यदि किसी महिला को लेबर पेन होता है उसे भावनगर के अस्पताल भेज दिया जाता है जो यहाँ से 25 किमी दूर है।"

यह पूछे जाने पर कि क्या कोई नेता अपने लिए वोट माँगने आया है तो ग्रामीणों ने कहा कि किसी ने अभी तक यहाँ का दौरा नहीं किया कि यहाँ के लोग किस स्थिति में रहते हैं।

समीर नाम का युवक जो 10 वीं कक्षा पास कर चुका है और वह वैज्ञानिक बनना चाहता है जिसके लिए वह आगे की पढ़ाई करना चाहता है। इसके लिए इसे भावनगर जाना पड़ेगा क्योंकि उसके इलाके में हाई स्कूल को छोड़कर कॉलेज नहीं है। समीर ने निराशा के साथ न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि "मैं अपने सपनों को पूरा नहीं कर सकता क्योंकि मेरे माता-पिता के पास शहर में मुझे पढ़ाने के लिए पैसा नहीं है। यद्यपि मैं मछली पकड़ने के अपने पैतृक व्यवसाय में जाना नहीं चाहता, लेकिन मुझे परिवार की सहायता करने के लिए इसे अपनाने के सिवा कोई विकल्प नहीं रहा।"

ग्रामीणों ने शिकायत की कि आरओ-आरओ सेवा शुरू होने पर स्थानीय लोगों को नौकरी के अवसरों में प्राथमिकता नहीं दी गई थी। इस सेवा में कई रोज़गार के अवसर हैं जैसे कि लोड करना, सेवक, पर्यवेक्षक आदि। लेकिन स्थानीय लोगों को कथित तौर पर इसके लिए कोई पेशकश नहीं की गई।

दुबाई में एसी मैकेनिक का काम करने वाले उसमान ग़़नी ने कहा "हमें इस परियोजना का पहला लाभार्थी होना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। केवल बाहरी लोगों को नौकरी दी गई।

जब फेरी सेवा का उद्घाटन किया गया था तो यह कहा गया था कि इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर और विशेष रूप से भावनगर में आर्थिक लाभ होंगे। यह सेवा केवल यात्रा को ही आसान नहीं करेगी बल्कि व्यापार बढ़ाने में भी मददगार साबित होगा। यह सेवा सौराष्ट्र को गोल्डेन चतुर्भुज और वडोदरा, सूरत और मुंबई जैसे बड़े वाणिज्यिक केंद्रों को जोड़ता है।

Gujarat
Gujarat Assembly
Gujarat Assembly Election 2017
BJP
Narendra modi
Bhavnagar
RORO

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • एम. के. भद्रकुमार
    AUKUS के विश्वासघात के ख़िलाफ़ मैक्रोन का बदला
    08 Dec 2021
    फ़्रांस के राष्ट्रपति ने नवीनतम रफ़ाल सौदा कर पश्चिम एशिया में एंग्लो-सैक्सन गठजोड़ पर बड़ा हमला किया है जहां यह सबसे अधिक चोट पहुंचाता है - संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब।
  • किसान आंदोलन ऐतिहासिक जीत की ओर बढ़ रहा है
    लाल बहादुर सिंह
    किसान आंदोलन ऐतिहासिक जीत की ओर बढ़ रहा है
    08 Dec 2021
    किसानों ने जो आपत्तियां दर्ज की हैं, वे पूरी तरह न्यायसंगत हैं और मोदी सरकार की रीति-नीति को लेकर उनके ठोस, तल्ख अनुभवों पर आधारित हैं।
  • babri
    संदीप चक्रवर्ती
    कोलकाता: बाबरी मस्जिद विध्वंस की 29वीं बरसी पर वाम का प्रदर्शन
    08 Dec 2021
    वामपंथियों ने 1992 में ढहाई गई बाबरी मस्जिद को याद करने के लिए कोलकाता में कई कार्यक्रम आयोजित किए, जिसने देश के सामाजिक ताने-बाने को हमेशा के लिए बदल दिया।
  • Funeral
    अजय सिंह
    नगालैंड व कश्मीर : बंदूक को खुली छूट
    08 Dec 2021
    इन मुठभेड़ हत्याओं के विरोध में आफ़्सपा को हटाने और सेना को बैरकों में वापस भेजने की मांग ज़ोर पकड़ रही है। नगालैंड, मणिपुर व मिज़ोरम में यह आवाज़ तेज़ हो रही है।
  • किसान आंदोलन: केंद्र ने किसानों को भेजा प्रस्ताव, मोर्चे ने मांगा स्पष्टीकरण, सिंघु बॉर्डर पर अहम बैठक
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    किसान आंदोलन: केंद्र ने किसानों को भेजा प्रस्ताव, मोर्चे ने मांगा स्पष्टीकरण, सिंघु बॉर्डर पर अहम बैठक
    07 Dec 2021
    एसकेएम ने भारत सरकार के गृह मंत्रालय से एक लिखित मसौदा प्रस्ताव प्राप्त होने की पुष्टि की है। सिंघु बॉर्डर पर मंगलवार को इसी मुद्दे पर मोर्चा की बैठक हुई और बुधवार को भी इसी पर बैठक हो रही है, जिसमें…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License