NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
गुजरात चुनावः दलित नेता जिग्नेश मेवानी के ख़िलाफ़ ग़ैर-ज़मानती वारंट
इस साल जनवरी में जिग्नेश मेवानी के नेतृत्व में 'रेल रोको आंदोलन' किया गया था। इस मामले में अदालत के समक्ष पेश न होने के चलते उनके ख़िलाफ़ ग़ैर-ज़मानती वारंट जारी किया गया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
30 Nov 2017
जिनेश मेवनी

इस साल जनवरी में जिग्नेश मेवानी के नेतृत्व में 'रेल रोको आंदोलन' किया गया था। इस मामले में अदालत के समक्ष पेश न होने के चलते उनके ख़िलाफ़ ग़ैर-ज़मानती वारंट जारी किया गया है।

दलित अधिकार कार्यकर्ता जिग्नेश मेवानी के ख़िलाफ़ एक ग़ैर-ज़मानती वारंट जारी किया गया है। मेवानी गुजरात के आगामी विधानसभा चुनाव में उत्तरी गुजरात के बनासकांठा ज़िले में वड़गाम क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं। इस साल जनवरी में 'रेल रोको आंदोलन' के चलते उनके ख़िलाफ़ दर्ज मामले के सिलसिले में मेट्रोपॉलिटन कोर्ट के समक्ष पेश न होने के कारण ये वारंट जारी किया गया है।

जिग्नेश के वकील शमशाद पठान के मुताबिक उनके मुवक्किल सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं हो सकें क्योंकि वह नामांकन के लिए परचा भरने में व्यस्त थें। ये सीट कांग्रेस द्वारा खाली छोड़ने के बाद एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में जिग्नेश ने परचा दाख़िल किया।

वकीलों ने जिग्नेश की उपस्थिति की छूट के लिए याचिका दायर की थी लेकिन मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट आरएस लांगा ने उसे ख़ारिज कर दिया था। हालांकि, अदालत ने कहा कि दबाव की आवश्यकता नहीं थी और नामांकन पहले दाख़िल किया जा सकता था।मजिस्ट्रेट ने जिग्नेश सहित अन्य 12 लोगों के ख़िलाफ़ वॉरंट जारी किया।

इस मामले की प्रगति पर टिप्पणी करते हुए जिग्नेश ने न्यूज़़क्लिक को बताया कि "मेरे वकील द्वारा निवेदन किया गया था जिसे अदालत ने ख़ारिज कर दिया और वारंट मेरे ख़िलाफ़ जारी कर दिया गया"।

उन्होंने कहा "मैं माननीय अदालत के फ़ैसले का सम्मान करता हूं। मैं अदालत के समक्ष ख़ुद को पेश करूंगा और शारीरिक रूप से उपस्थिति से स्थायी छूट पाने की कोशिश करूंगा। देखते हैं कि क्या होता है"।

'वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन' के विरोध में इस साल 11 जनवरी को जिग्नेश और उनके समर्थकों ने अहमदाबाद रेलवे स्टेशन पर दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस को कुछ समय के लिए रोक दिया था। इसको लेकर जिग्नेश और उनके समर्थकों को गिरफ्तार किया गया था। 'वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन' राज्य सरकार द्वारा आयोजित किया गया था। इस मामले में लगभग 40 लोग मुक़दमे का सामना कर रहे हैं।

जिग्नेश ख़ुद एक वकील हैं और क़रीब एक साल पहले उन्हें उस समय प्रसिद्धि मिली जब उन्होंने गौरक्षकों द्वारा सात दलित युवाओं की पिटाई के ख़िलाफ़ अहमदाबाद से ऊना 'दलित अस्मिता यात्रा' नामक एक विरोध जुलूस का नेतृत्व किया था।

यह विरोध यात्रा 15 अगस्त 2016 को खत्म हुआ। इस यात्रा में महिलाओं सहित क़रीब 20,000 दलितों ने भाग लिया, जिन्होंने गायों के शवों से चर्म निकालने की अपनी पारंपरिक नौकरियों को छोड़ने का प्रतिज्ञा ली। उन्होंने दलितों के उत्थान के लिए भूमि की मांग की थी।

पाटीदारों के लिए आरक्षण की मांग करने वाले नेता हार्दिक पटेल और ओबीसी नेता अल्पेश ठाकुर के साथ जिग्नेश को गुजरात में हाल की राजनीति में उभरते चेहरे के रूप में देखा जाता है। राज्य में दलित समाज की तरफ से कोई आवाज़ उठाने वाला नहीं था लेकिन इस यात्रा के बाद दलित समाज को जिग्नेश मेवानी के रूप में नेता मिल गए जो समाज की समस्याओं को दूर करने के लिए लड़ रहे है।

राज्य की चुनावी राजनीति के चलते बीजेपी ने दलितों के समर्थन से पिछले चुनाव जीते हैं। लेकिन इस बार स्थिति बिल्कुल अलग है। अब इस समुदाय को एक नेता मिल गया है।

तीन युवा चेहरे हार्दिक, जिग्नेश और अल्पेश ने दक्षिणपंथी-विरोधी मोर्चा बना लिया है और राज्य में भगवा पार्टी के ख़िलाफ़ राजनीतिक लहर को साफ़ बदल दिया है।

उल्लेखनीय है कि एससी के लिए आरक्षित 13 सीटों में पिछली विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने 10 और कांग्रेस ने तीन सीटों का जीता था।

जिग्नेश अनुसूचित जाति (एससी) उम्मीदवार के लिए आरक्षित सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। अपनी उम्मीदवारी की घोषणा करते हुए 32 वर्षीय नेता ने अन्य पार्टियों से इस सीट पर चुनाव न लड़ने का अनुरोध किया।

उन्होंने फेसबुक पर लिखा कि "पिछले कुछ महीनों से अनगिनत कार्यकर्ताओं और युवाओं ने मुझे इस चुनावों में फासिस्ट बीजेपी के ख़िलाफ़ सड़कों पर और साथ ही चुनाव क्षेत्र में पूरी ताक़त से लड़ने का अनुरोध किया ताकि विधान सभा में दलितों की आवाज़ को उठाया जा सके। बीजेपी हमारा पहला दुश्मन है। बीजेपी को छोड़कर हम हर राजनीतिक संगठन और स्वतंत्र उम्मीदवार से अनुरोध करते हैं कि हमारे खिलाफ कोई उम्मीदवार खड़ा नहीं किया जाए ताकि बीजेपी के साथ सीधे लड़ाई हो सके।"

वडगाम सीट जिग्नेश के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित सीट माना जाता है। हालांकि इस क्षेत्र में दलितों की आबादी केवल 8-9% है, जिग्नेश को ठाकुरों और मुसलमानों का समर्थन मिलेगा। इस क्षेत्र में ठाकुरों की आबादी 20% से ज़्यादा है जबकि मुसलमान क़रीब 12% हैं।

पाटन ज़िले के राधनपुर से अल्पेश ठाकुर चुनाव लड़ रहे हैं जो वडगाम से ज़्यादा दूर नहीं और पाटन लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है।हालांकि वर्ष 1995 से इस विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी विधायक चुने जा रहे हैं। लेकिन 1998, 2002 और 2012 में कांग्रेस ने तीन बार ये सीट जीती है। पिछले चुनाव में मणिलाल वाघेला ने पूर्व कैबिनेट मंत्री फकीरभाई वाघेला को 22,000 मतों के बड़े अंतर से हराया था।

वर्ष 2013 में फकीरभाई का निधन हो गया था और जिग्नेश बीजेपी की ओर से नए चेहरे विजय चक्रवर्ती के ख़िलाफ़ मैदान में होंगे।वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में भी बीजेपी और कांग्रेस के वोट शेयरों के बीच का अंतर 27% था, वहीं वडगाम विधानसभा सीट पर अंतर मात्र 1.8% था।

Jignesh Mevani
BJP
gujarat elections 2017
Gujrat

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • क्या नीतीश सरकार बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने में नाकाम हो गई?
    एम.ओबैद
    क्या नीतीश सरकार बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने में नाकाम हो गई?
    29 Sep 2021
    नीतीश सरकार के योजना एवं विकास मंत्री ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि "यह मांग पुरानी हो चुकी है। ...अब हम विशेष राज्य के दर्जे की मांग नहीं करेंगे। बिहार के हर क्षेत्र में विशेष सहायता की मांग की…
  • yogi
    अनुराग तिवारी
    सरकारी विज्ञापनों की बाढ़ में बहाए जा रहे बेहिसाब पैसों की लोकतांत्रिक लिहाज़ से जांच-पड़ताल
    29 Sep 2021
    इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ज़्यादातर चुप ही रहा है, ऐसा इसलिए क्योंकि सुप्रीम कोर्ट इन विज्ञापनों के कथित तौर पर 'सूचनात्मक' होने को अहमियत देने के लिए मजबूर है।
  • AUKUS
    न्यूज़क्लिक टीम
    आकुस के बहाने अमेरिका चीन ही नहीं, दुनिया को डाल रहा ख़तरे में
    28 Sep 2021
    पड़ताल दुनिया भर की में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने अमेरिका- ब्रिटेन-ऑस्ट्रेलिया (आकुस-AUKUS) समझौते में छिपे परमाणु हथियारों की होड़ की आशंका के बारे में न्यूज़क्लिक के प्रधान संपादक प्रबीर…
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्या भारत बंद से डरी सरकार, चुनाव आयोग, भगत सिंह और कोरोना अपडेट
    28 Sep 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हम बात करेंगे 'भारत बंद’ के देशव्यापी असर की , चुनाव आयोग द्वारा घोषित उपचुनावों की, भगत सिंह जयंती और कोरोना मामलों की।
  • Modi Biden
    न्यूज़क्लिक टीम
    बाइडन के बयान पर अमेरिकी मीडिया की तीखी प्रतिक्रिया
    28 Sep 2021
    जो बाइडन ने भारतीय मीडिया को ज़्यादा सभ्य बताया था जिसपर आज वाइट हाउस को तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। इसे मुद्दे पर न्यूज़क्लिक ने परंजॉय गुहा ठाकुरता से बातचीत की।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License