NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
गुजरात में बिहारी मजदूरों पर हमले के खिलाफ भाकपा-माले का मार्च और सभा
भाकपा-माले, खेग्रामस व ऐक्टू के बैनर से आज पूरे राज्य में प्रतिवाद हुआ। पटना में इसका नेतृत्व पार्टी के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने किया और सीधे मोदी सरकार को इसके लिए जिम्मेदार ठहराते हुए चुनौती दी।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
12 Oct 2018
भाकपा माले का प्रतिवाद मार्च

भाकपा-माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने आज पटना के भगत सिंह चौक (कारगिल चौक) पर हजारों मजदूरों व आम लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि गुजरात में बिहारी व हिंदी भाषी मजदूरों पर बर्बर किस्म के हमले बेहद शर्मनाक हैं। इस अपमान के खिलाफ मजदूर आने वाले दिनों में भाजपा व मोदी सरकार से गिन-गिन कर बदला लेंगे और उन्हें सबक सिखायेंगे।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपने राज्य गुजरात से बिहार व यूपी के मजदूरों को ‘बाहरी’ बताकर भगाया जा रहा है और उनके ऊपर हिंसक हमले किये जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि 28 सितम्बर को गुजरात के साबरकांठा जिले में प्रवासी मजदूर द्वारा नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार की घटना हुई। निसंदेह यह शर्मनाक है और बलात्कारी को सजा मिलनी चाहिए। लेकिन इस आड़ में प्रवासी मजदूरों के खिलाफ हिंसा करना व उन्हें वापस लौटने के लिए मजबूर करना कहीं से जायज नहीं है। उस घटना के बाद गुजरात के साबरकांठा, पाटन, मेहसाणा, गांधीनगर व अरावली जैसे जिलों में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों पर रॉड, पत्थर से हमले शुरू हो गए जो अब तक जारी हैं।

उन्होंने आगे कहा कि गुजरात से हो रहे इस व्यापक पैमाने पर पलायन के बारे में राज्य पुलिस व संघ गिरोह बेशर्मी से कह रहा है कि लोग दिवाली और छठपूजा मनाने के लिए जा रहे हैं। इससे बेतुकी बात और क्या हो सकती है कि अभी इन त्योहारों में महीने भर से ज्यादा का समय है और अधिकतर मजदूर त्योहारों के कुछ ही दिन पहले घर जाते हैं। दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कह रहे हैं कि मोदी के ‘विकास’ से ईर्ष्या रखने वाले लोगों द्वारा पलायन और हिंसा की अफवाहें फैलाई जा रहीं हैं। समझ नहीं आता कि ये उत्तर प्रदेश की जनता के मुख्यमंत्री हैं या मोदी के ‘गुजरात मॉडल’ के प्रचारक, जिसकी वास्तविकता अब सबके सामने आ गई है। यदि अल्पेश ठाकोर इस हिंसा के जिम्मेवार हैं, तो सवाल यह है कि अब तक उनकी गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई? क्या दोनों की मिलीभगत से यह सब हो रहा है।

सभा को संबोधित करते हुए ऐपवा की बिहार राज्य अध्यक्ष सरोज चौबे ने कहा कि हम लोगों को इस नफरत, साम्प्रदायिकता और बांटो-भटकाओ-राज करो की राजनीति के खिलाफ लड़ना होगा और चुनावों में इस सरकार को सबक को सिखाना होगा।

कारिगल चैक पर आयोजित सभा की अध्यक्षता ऐक्टू के बिहार राज्य के महासचिव आर एन ठाकुर ने की। इस मौके पर भाकपा-माले के बिहार राज्य सचिव कुणाल, ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी, ऐपवा की बिहार राज्य सचिव शशि यादव, ऐक्टू नेता रणविजय कुमार सहित बड़ी संख्या में पटना शहर के मजदूर इलाके से लोग शामिल थे।

सभा के उपरांत सभी लोगों ने मार्च आरंभ किया और गांधी मैदान होते हुए जेपी गोलबंर पहुंचे, जहां पुलिस ने उनके मार्च को रोक दिया।

इसके अलावा आज पार्टी के आह्वान पर खेग्रामस व ऐक्टू के साथ राज्य में कई स्थानों पर इसी तरह प्रतिवाद मार्च और सभाएं हुईं।

CPI(ML)
Protest
Bihar
dipankar bhattacharya
Gujrat Migrants
Gujrat model

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

बिहारः नदी के कटाव के डर से मानसून से पहले ही घर तोड़कर भागने लगे गांव के लोग

मिड डे मिल रसोईया सिर्फ़ 1650 रुपये महीने में काम करने को मजबूर! 

बिहार : दृष्टिबाधित ग़रीब विधवा महिला का भी राशन कार्ड रद्द किया गया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

बिहार : जन संघर्षों से जुड़े कलाकार राकेश दिवाकर की आकस्मिक मौत से सांस्कृतिक धारा को बड़ा झटका

मुंडका अग्निकांड के खिलाफ मुख्यमंत्री के समक्ष ऐक्टू का विरोध प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • विकास भदौरिया
    एक्सप्लेनर: क्या है संविधान का अनुच्छेद 142, उसके दायरे और सीमाएं, जिसके तहत पेरारिवलन रिहा हुआ
    20 May 2022
    “प्राकृतिक न्याय सभी कानून से ऊपर है, और सर्वोच्च न्यायालय भी कानून से ऊपर रहना चाहिये ताकि उसे कोई भी आदेश पारित करने का पूरा अधिकार हो जिसे वह न्यायसंगत मानता है।”
  • रवि शंकर दुबे
    27 महीने बाद जेल से बाहर आए आज़म खान अब किसके साथ?
    20 May 2022
    सपा के वरिष्ठ नेता आज़म खान अंतरिम ज़मानत मिलने पर जेल से रिहा हो गए हैं। अब देखना होगा कि उनकी राजनीतिक पारी किस ओर बढ़ती है।
  • डी डब्ल्यू स्टाफ़
    क्या श्रीलंका जैसे आर्थिक संकट की तरफ़ बढ़ रहा है बांग्लादेश?
    20 May 2022
    श्रीलंका की तरह बांग्लादेश ने भी बेहद ख़र्चीली योजनाओं को पूरा करने के लिए बड़े स्तर पर विदेशी क़र्ज़ लिए हैं, जिनसे मुनाफ़ा ना के बराबर है। विशेषज्ञों का कहना है कि श्रीलंका में जारी आर्थिक उथल-पुथल…
  • आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: पर उपदेस कुसल बहुतेरे...
    20 May 2022
    आज देश के सामने सबसे बड़ी समस्याएं महंगाई और बेरोज़गारी है। और सत्तारूढ़ दल भाजपा और उसके पितृ संगठन आरएसएस पर सबसे ज़्यादा गैर ज़रूरी और सांप्रदायिक मुद्दों को हवा देने का आरोप है, लेकिन…
  • राज वाल्मीकि
    मुद्दा: आख़िर कब तक मरते रहेंगे सीवरों में हम सफ़ाई कर्मचारी?
    20 May 2022
    अभी 11 से 17 मई 2022 तक का सफ़ाई कर्मचारी आंदोलन का “हमें मारना बंद करो” #StopKillingUs का दिल्ली कैंपेन संपन्न हुआ। अब ये कैंपेन 18 मई से उत्तराखंड में शुरू हो गया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License