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गुरु रविदास का मंदिर गिराए जाने के विरोध में बंद रहा पंजाब
पंजाब पुलिस ने राज्य में बंद के मद्देनज़र सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। राज्‍य में अधिकतर स्‍थानों पर सुबह से बाजार बंद हैं। 
सोनिया यादव
13 Aug 2019
punjab band
Image courtesy: Hindustan Times

दिल्ली के तुग़लकाबाद में दिल्ली विकास प्राधिकरण यानी डीडीए द्वारा  गुरु रविदास मंदिर ढाह दिया गया, जिसका असर अब दिल्ली से लेकर पंजाब तक देखने को मिल रहा है। मंदिर गिराने के विरोध में  गुरु रविदास समाज के लोगों ने आज पंजाब बंद का आह्वान किया है। पंजाब पुलिस ने राज्य में बंद के मद्देनज़र सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। राज्‍य में पांच हजार अतिरिक्‍त पुलिस के जवान तैनात किए गए हैं। राज्‍य में अधिकतर स्‍थानों पर सुबह से बाजार बंद हैं।
 
पंजाब पुलिस कंट्रोल रूम से प्रीतम सिंह ने न्यूज़क्लिक को बताया कि पंजाब के सभी प्रांतों में शांतिपूर्ण स्थिति है। पुलिस ने एतिहाद के तौर पर संवेदशील इलाकों में अधिक फोर्स को तैनात किया है। कहीं भी हिंसा या झड़प की कोई घटना सामने नहीं आई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार रविदास समाज के लोग विभिन्न जिलों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा जालंधर, लुधियाना, होशियारपुर, गुरदासपुर व कपूरथला में सरकारी व प्राइवेट स्कूल बंद रखा गया है।

गुरु  रविदास मंदिर ट्रस्ट दिल्ली के महामंत्री गोपालकृष्ण ने न्यूज़क्लिक से कहा कि, उनका ये प्रदर्शन केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट से शांतिपूर्ण आग्रह करने के लिेए है कि, हमें हमारी जमीन का आवंटन दोबारा किया जाए, जिससे हम मंदिर का फिर से निर्माण कर सकें। इस मंदिर का इतिहास लगभग 500 साल पुराना है और ये हमारे समाज के लिए बेहद महत्तवपूर्ण है। उन्होंने आगे सुप्रीम कोर्ट से पुनर्विचार याचिका के लिेए भी समय की मांग की। 

गोपालकृष्ण ने आगे बताया कि उन्होंने इस बारे में दक्षिणी दिल्ली सांसद रमेश बिधूड़ी से भी संपर्क करने की कोशिश की है। वे चाहते हैं कि सांसद बिधूड़ी इसमें उनका साथ दें।

गुरु रविदास मंदिर का इतिहास 

मीडिया की खबरों के अनुसार, ये मंदिर  गुरु रविदास की याद में बनवाया गया था। जब  गुरु रविदास बनारस से पंजाब की ओर जा रहे थे, तब उन्होंने 1509 में इस स्थान पर आराम किया था। एक जाति विशेष के नाम पर यहां पर एक बावड़ी भी बनवाई गई थी जो आज भी मौजूद है। कहा जाता है कि स्वयं सिकंदर लोदी ने  गुरु  रविदास से नामदान लेने के बाद उन्हें यहां जमीन दान की थी जिस पर यह मंदिर बना था। आजाद भारत में 1954 में इस जगह पर एक मंदिर का निर्माण हुआ था। इस मंदिर से सिखों की आस्था भी जुड़ी हुई है क्योंकि सिखों का मानना है कि  गुरु  रविदास की उच्चारण की हुई वाणी गुरु ग्रंथ साहिब में मौजूद है।

गौरतलब है कि इस मसले पर अब राजनीति भी तेज हो गई है। मीडिया के हवाले से दिल्ली में आम आदमी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने इस मामले को लेकर केंद्र की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि ''डीडीए दुनिया भर में जमीन बांट रहा है अपने नेताओं को जमीन दे रहा है, लेकिन डीडीए को  गुरु  रविदास जी के लिए 100 गज जमीन देनी भी मुश्किल हो रही है। तो वहीं बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने कहा है कि वह इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से बात करेंगे। पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल ने भी मंदिर गिराने की घटना को गलत बताया है। वहीं, केंद्रीय राज्य मंत्री सोम प्रकाश ने कहा है कि मंदिर के लिए दोबारा जमीन अलॉट करवाने का प्रयास करेंगे।

कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने प्रदर्शन के दौरान  कहा कांग्रेस रविदास समाज के साथ खड़ी है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गिराए गए मंदिर के लिए उसी ऐतिहासिक स्थान को फिर से अलॉट करने व मंदिर के दोबारा निर्माण के मामले की पैरवी के लिए हर संभव सहयोग देगी।

इस पूरे प्रकरण पर डीडीए का कहना है कि  गुरु रविदास जयंती समारोह समिति ने जंगल की जमीन पर निर्माण किया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद भी जगह को खाली नहीं किया गया। इसलिए 9 अगस्त 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने डीडीए को आदेश दिया कि वो पुलिस की मदद से इस जगह को खाली कराए और ढांचे को हटाये।

क्या आस्था के आगे कानून में ढील दी जाएगी या कोर्ट अपने फैसले पर अडीग रहेगा ये देखना होगा। हालांकि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर आगे क्या कदम उठाती है इस पर भी सबकी नज़रे होंगी।  

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