NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
आ गया 2019 का जनमत संग्रह !
दीवार पर लिखी इबारत की तरह ये बात स्पष्ट रूप से पढ़ी जा सकती है कि ये चुनाव नतीजे सीधे-सीधे 2019 का जनमत संग्रह है, जो बता रहा है कि मोदी जी की राह अब आसान नहीं है।
मुकुल सरल
11 Dec 2018
modi

पांच राज्यों में से हिन्दी पट्टी के तीन राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के आज आए परिणामों का संदेश क्या है? अब ये समझना ज़्यादा मुश्किल नहीं है। दीवार पर लिखी इबारत की तरह ये बात स्पष्ट रूप से पढ़ी जा सकती है कि ये चुनाव नतीजे सीधे-सीधे 2019 का जनमत संग्रह है, जो बता रहा है कि मोदी जी की राह अब आसान नहीं है।   

राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ इन तीनों राज्यों में लोकसभा की कुल 65 सीटें हैं। जिनमें 2014 में कांग्रेस के हिस्से सिर्फ़ तीन सीटें आईं थीं। और वोट प्रतिशत मिला था 35.07 प्रतिशत।

राजस्थान में लोकसभा की सभी 25 सीटें बीजेपी की झोली में गईं थीं। मध्य प्रदेश में भी 29 में से 27 सीटें बीजेपी ने हासिल कीं और कांग्रेस के हिस्से केवल दो सीटें आईं। इसी तरह छत्तीसगढ़ की कुल 11 संसदीय सीटों में से बीजेपी ने 10 सीटें आईं और कांग्रेस को एक सीट से संतोष करना पड़ा।

देखें विशेष ग्राफिक्स : https://elections.newsclick.in/

अब इन तीन राज्यों में कांग्रेस पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने जा रही है। और वोट शेयर है क्रमश: राजस्थान में 39.2%,  मध्य प्रदेश में 41.4%  और छत्तीसगढ़ में 42.8% (अभी ये अंतिम आंकड़ा नहीं है)। इस तरह तीनों राज्यों का औसत देखें तो कांग्रेस के हिस्से आया है 41.13 प्रतिशत ।

कांग्रेस के वोट प्रतिशत में जहां करीब 6 फीसदी का अच्छा इज़ाफ़ा हुआ है वहीं भाजपा के वोट प्रतिशत में काफी गिरावट हुई है। 15 फीसदी से ज़्यादा। भाजपा को 2014 के लोकसभा चुनाव में इन तीनों राज्यों में क्रमश: 53.32 फीसदी मत मिले थे। जबकि इस बार अभी तक का आंकड़ा है 37.63 फीसदी।  

कोई कह सकता है कि लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनावों बहुत अलग-अलग होते हैं। तो 2013 के विधानसभा चुनावों से भी तुलना करें तो बीजेपी ने राजस्थान में 45.17 प्रतिशत वोटों के साथ 136 सीटें जीती थीं। मध्य प्रदेश में 44.87 प्रतिशत वोटों के साथ 165 सीटें और छत्तीसगढ़ में 41.04 प्रतिशत वोटों के साथ 49 सीटें जीती थीं। यानी इन तीनों राज्यों में बीजेपी का कुल वोट था 43.69 प्रतिशत।

कांग्रेस को इन तीनों राज्यों में 2013 के विधानसभा चुनाव में क्रमश: राजस्थान में कुल 33.07 प्रतिशत वोटों के साथ महज़ 21 सीटें, मध्य प्रदेश में 36.38 वोट प्रतिशत के साथ 58 सीटें और छत्तीसगढ़ में 40.29 वोट के साथ 39 सीटें मिली थीं। इस तरह इसका औसत होता है 36.58 प्रतिशत।

अब इन दोनों चुनावों लोकसभा चुनाव-2014 और विधानसभा चुनाव-2013 से भी तुलना की जाए तो बीजेपी को बड़ा घाटा है। विधानसभा की तुलना में बीजेपी को 6.19 प्रतिशत का नुकसान हो रहा है और कांग्रेस को 4.42 प्रतिशत का फायदा हुआ है।

rajasthan vote.jpg

madhy pradesh vote.jpg

chhattisgarh vote.jpg

(विधानसभा चुनाव 2018। वोट शेयर। स्रोत : चुनाव आयोग eciresults.nic.in/PartyWiseResult.htm)

इसके अलावा हिन्दी पट्टी के अन्य राज्य उत्तर प्रदेश और दिल्ली में भी बीजेपी अपनी अधिकतम सीटें ले चुकी है। उत्तर प्रदेश (यूपी) में 2014 के आम चुनाव में बीजेपी ने 80 में से 71 सीटें और दो उसके सहयोगी दल अपना दल ने जीती थीं। इसी तरह दिल्ली की सात लोकसभा सीटों में से बीजेपी के हिस्से सभी सातों सीटें आईं थीं। इसके अलावा बिहार में लोकसभा चुनाव में बीजेपी के हिस्से 40 में से 22 सीटें आईं। इस तरह हिन्दी पट्टी के इन पांच राज्यों की कुल 192 सीटों में बीजेपी 2014 में अपना अधिकतम पा चुकी है। अब 2019 में क्या होगा, ये लगभग तय हो चुका है।

यूपी और बिहार की हालत किसी से छिपी नहीं है। कानून-व्यवस्था के मामले में यूपी और बिहार एक-दूसरे से होड़ ले रहे हैं। फर्जी मुठभेड़ से लेकर मॉब लिंचिंग में यूपी बदनाम हो गया है। अब तो पुलिस भी मॉब लिंचिंग का शिकार हो रही है। बुलंदशहर इसी का उदाहरण है। जहां गाय के नाम पर न सिर्फ दंगे भड़काने की कोशिश हुई बल्कि एक इंस्पेक्टर सुबोध सिंह की भी जान ले ली गई। महिलाओं के खिलाफ हिंसा में भी दोनों राज्य अव्वल हो रहे हैं। मुजफ्फरपुर से देवरिया तक शेल्टर होम प्रकरण से पूरा देश हिला हुआ है। बिहार में तो अभी आशा कर्मी और नर्सिंग छात्राएं आंदोलन में हैं और इसकी गूंज 2019 में ज़रूर सुनाई देगी।

इसके अलावा इन पांचों राज्यों समेत पूरे देश में किसान और मज़दूर आंदोलित हैं। तीन राज्यों में बीजेपी की हार को भी किसान-मज़दूर खासकर किसानों के गुस्से का नतीजा माना जा रहा है। देशभर के किसान कई बार दिल्ली में दस्तक दे चुके हैं। अभी नवंबर के अंत में देशभर के लाखों किसान दिल्ली आए और कर्ज़ माफ़ी और उपज के उचित दाम की मांग करते हुए स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने की मांग की। किसान ने इन सब समस्याओं को लेकर संसद का विशेष अधिवेशन बुलाने की मांग की। इससे अलावा भी लगभग सभी प्रदेशों में किसान आंदोलित हैं। छात्र-नौजवानों का भी कमोबेश यही हाल है। शिक्षा और महंगी होती जा रही है और रोजगार है नहीं। इस वजह से युवा परेशान है। सरकारी कमर्चारी भी आंदोलित हैं। इस वर्ग की तरफ से अगले आम चुनाव में पुरानी पेंशन की बहाली एक बड़ा मुद्दा बनने जा रही है।

नोटबंदी और जीएसटी ने आम लोगों के साथ व्यापारी और मध्य वर्ग की भी कमर तोड़ दी है। चुनाव में ये सब फैक्टर स्पष्ट रूप से काम करेंगे इसमें कोई शक नहीं है। इन सभी मुद्दों ने खासतौर से किसानों के मुद्दे ने इन विधानसभा चुनावों को पूरी तरह प्रभावित किया है, यह हर राजनीतिक जानकार और स्थानीय लोगों के बयानों से साफ है। यही वजह है कि बीजेपी और आरएसएस अब स्पष्ट रूप से मंदिर आंदोलन की तरफ बढ़ेंगे साथ ही दलित-अल्पसंख्यकों के साथ बौद्धिक और प्रगतिशील वर्ग का दमन पहले से तेज़ हो सकता है, इसका पूरा अंदेशा है।


बाकी खबरें

  • राज वाल्मीकि
    कैसे ख़त्म हो दलित-आदिवासी छात्र-छात्राओं के साथ शिक्षण संस्थानों में होने वाला भेदभाव
    25 Mar 2022
    दलित-आदिवासी छात्र-छात्राओं के साथ होने वाले भेदभाव को ख़त्म करने के विषय पर नई दिल्ली में एक कॉन्फ्रेंस का आयोजन  किया गया।
  • इरिका शेल्बी
    पुतिन को ‘दुष्ट' ठहराने के पश्चिमी दुराग्रह से किसी का भला नहीं होगा
    25 Mar 2022
    रूस की ओर उंगलियों उठाने से कुछ नहीं बदलेगा–दुनिया में स्थायी शांति के लिए यह रवैया बदलने की ज़रूरत है। 
  • ज़ो एलेक्जेंड्रा
    गिउलिअनो ब्रुनेटी: “नाटो के ख़िलाफ़ हमारा संघर्ष साम्राज्यवादी ताकतों के ख़िलाफ़ संघर्ष है”
    25 Mar 2022
    आक्रामक सैन्य गठबंधन हमेशा से ही यूक्रेन में चल रहे संघर्ष का केंद्र रहा है, जिसके चलते कई लोगों ने गठबंधन पर सवालिया निशान लगाकर पूछना शुरू कर दिया है कि इसका हिस्सा बने रहने का क्या मतलब है। पोटेरे…
  • भाषा
    दिल्ली के तीन नगर निगमों का एकीकरण संबंधी विधेयक लोकसभा में पेश
    25 Mar 2022
    सरकार ने दिल्ली के तीन नगर निगमों का एकीकरण करने संबंधी दिल्ली नगर निगम (संशोधन) विधेयक, 2022 को शुक्रवार को विपक्षी दलों के सदस्यों के विरोध के बीच लोकसभा में पेश किया। विपक्षी दलों ने इसका विरोध…
  • न्यूज़क्लिक डेस्क
    गणेश शंकर विद्यार्थी : वह क़लम अब खो गया है… छिन गया, गिरवी पड़ा है
    25 Mar 2022
    गोदी मीडिया के दौर में गणेश शंकर विद्यार्थी को याद करना एक अलग अनुभव, एक अलग चुनौती और एक अलग दायित्व है। आज़ादी के मतवाले क्रांतिकारी भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की शहादत के दो दिन बाद 25 मार्च,…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License