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अपराध
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बिहार में एसएसआर मामले पर सीबीआई जाँच झटपट हुई, लेकिन अपहृत लड़की पर सुनवाई क्यों नहीं?  
पिछले पाँच दिनों से मुजफ्फरपुर के अपने घर से कथित डकैतों द्वारा अपहृत एक नाबालिग लड़की के मामले में बिहार की पुलिस और प्रशासनिक महकमे को अभी तक कोई सुराग हाथ नहीं लग पाया है।
 
मोहम्मद इमरान खान
09 Sep 2020
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पटना: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के एक गाँव में एक 17 वर्षीया लड़की को कथित तौर पर बन्दूक की नोक पर उसके घर से अगवा कर लेने के पाँच दिनों के बाद भी पुलिस इस मामले में कोई सुराग हाथ लगा पाने में नाकाम रही है।इस मामले में पुलिस की निष्क्रियता को देखते हुए गुस्साए ग्रामीणों के साथ-साथ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) से जुड़े छात्रों और महिला संगठनों ने पिछले दो दिनों से विरोध प्रदर्शनों के क्रम को जारी रखा हुआ है।

यह भी एक अजीब विडंबना है कि यह सब एक ऐसे समय में हो रहा है जब एक शक्तिशाली वर्ग द्वारा अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के लिए न्याय की माँग को लेकर लगातार कोहराम मचाया जा रहा है, जो बिहार से थे और जिनकी जून माह में मुंबई में कथित खुदकशी के चलते मौत हो गई थी। जबकि यहाँ पर एक नाबालिग लड़की के अपहरण के मामले में लगभग पूरी तरह से चुप्पी छाई हुई है। 

इतना ही नहीं स्थानीय मीडिया तक में इक्का-दुक्का क्षेत्रीय अखबारों द्वारा इस खबर को मामूली न्यूज़ आइटम के तौर पर अन्दर के पेजों में जगह देने के अलावा इस विचलित कर देने वाले अपहरण के मामले को स्थानीय मीडिया ने पूरी तरह से दरकिनार कर दिया है। यहाँ तक कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक ने जिन्होंने आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर अपनी 7 सितंबर की पहली वर्चुअल रैली में इस बात का उल्लेख करने से नहीं चूके कि किस प्रकार से सुशांत के परिवार वालों के अनुरोध पर उनकी सरकार ने सीबीआई जाँच की सिफारिश की थी। लेकिन वहीँ दूसरी तरफ वे इस लापता लड़की की खोजखबर के बारे में किसी भी प्रकार की कार्यवाही किये जाने का जिक्र तक न कर सके।

यह विडंबना नहीं तो क्या है जिसमें एक ऐसे समय में मुख्यमंत्री बयानबाजी करते हैं कि कैसे उनके राज्य में कानून का राज कायम हो रखा है, जबकि वहीँ बिहार में पिछले कुछ दिनों में एक दर्जन से अधिक हत्याओं की रिपोर्ट दर्ज हुई हैं, जिसमें एक एसबीआई के बैंक प्रबंधक और एक व्यवसायी की हत्या की घटना भी शामिल है। एक अन्य घटना में जमुई जिले में एक 16 वर्षीय लड़के की हत्या इसलिए कर दी गई, क्योंकि उसके परिवार वाले अपहरणकर्ताओं द्वारा माँगी गई फिरौती की रकम को चुका पाने में असफल रहे। इतना ही नहीं तीन दिन पहले ही हथियारबंद शराब माफिया ने पटना में दिन-दहाड़े एक पुलिस अधिकारी पर हमला बोल दिया और घायल कर डाला था।
 
मुजफ्फरपुर पुलिस के मुताबिक लड़की को हथियारबंद डकैतों ने उसके निवास दिगहरा गाँव से जोकि सदर पुलस थाने के तहत आता है, से 3 और 4 सितंबर के बीच की दर्मियानी रात को अपहृत कर लिया था। पहले उन्होंने घर में रखे कीमती सामानों की लूट को अंजाम दिया और उसे भी जबरन साथ ले गए थे।  
अपहरण की इस घटना के एक दिन बाद गुस्साए ग्रामीणों ने इस घटना के विरोध में कई घंटों तक राष्ट्रीय राजमार्ग 28 को जाम करके रख दिया था। बाद में जाकर उन्होंने शनिवार और रविवार के दिन विरोध प्रदर्शन किये, जबकि आल इंडिया प्रोग्रेसिव विमेंस एसोसिएशन (ऐपवा) और आल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के कार्यकर्ताओं ने सोमवार के दिन इस मामले में विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। 

अपहृत लड़की के पिता संभुनाथ पांडेय जो अपनी किराने की दुकान चलाते है ने न्यूज़क्लिक से अपनी बातचीत में कहा “अभी तक पुलिस ने इस मामले में कुछ भी नहीं किया है। सिर्फ आश्वासनों से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है।”पुलिस अधिकारियों का भी मानना है कि यह अपनेआप में एक दुर्लभ मामला है, क्योंकि डकैतों ने लूटपाट को अंजाम देने के साथ-साथ लड़की को अपह्रत किया है। 

मुजफ्फरपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जयंत कांत के अनुसार पुलिस की टीमें अपहृत लड़की की तलाश में जुटी हुई हैं। इसके साथ ही जोड़ते हुए वे कहते हैं कि अपहरणकर्ताओं द्वारा इस मामले में फिरौती की माँग नहीं की गई है, और कहा “एक विशेष जाँच दल द्वारा तलाशी अभियान को तेज कर दिया गया है।”
पटना स्थित महिला अधिकार कार्यकर्त्ता कंचन बाला के अनुसार यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस प्रकार की विचलित कर देने वाई घटना को शायद ही राष्ट्रीय मीडिया द्वारा कोई संज्ञान लिया जाता हो। “राष्ट्रीय और स्थानीय मीडिया तक के लिए इस समय एक अभिनेता की आत्महत्या ही एकमात्र मुद्दा बना हुआ है। राज्य से बाहर के लोगों को शायद ही पता हो कि बिहार में पिछले पांच दिनों पहले से एक लड़की को उसके घर से डकैतों ने अपहृत कर रखा है, और पुलिस अभी तक उसे बरामद नहीं कर पाई है। हम बेहद आहत और निराश हैं।”

इस बारे में स्थानीय ऐपवा नेत्री शारदा देवी कहती हैं कि अपहरण के इस मामले से यह साफ़ परिलक्षित होता है कि बिहार में लडकियाँ और महिलाएं किस कदर असुरक्षित हैं। “यदि किसी लड़की को उसके घर से ही अगवा कर लिया जा सकता है तो बताइये ऐसे में सुरक्षा और हिफाजत कहाँ है? नीतीश कुमार के तहत एनडीए शासन में बच्चियाँ सुरक्षित नहीं हैं। न्याय और सुशासन की बात पूरी तरह से बेमानी है, यहाँ पर पूरी तरह से जंगल राज चल रहा है। क्यों नहीं नीतीश कुमार ने अपनी पहली वर्चुअल रैली में 24 घंटे के भीतर इस अपह्रत लड़की की बरामदगी की घोषणा की?”

वहीँ सीपीआई (एमएल) नेता धीरेंद्र झा के अनुसार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल- यूनाइटेड (जेडी-यू) की यह तथाकथित 'डबल इंजन' वाली सरकार अपराधों पर लगाम लगा पाने और शिकंजा कसने में पूरी तरह से विफल रही है, जिसके चलते आम लोगों की रातों की नींद हराम हो रखी है। उनके अनुसार “राज्य में पूरी तरह से अराजकता का माहौल व्याप्त है,  लोगों में भय व्याप्त है, जिसके चलते अपराधियों के लिए महिलाएं बेहद आसान शिकार बन गई हैं। लेकिन इस सबके बावजूद सरकार और उसका समूचा प्रशासनिक अमला इस बीच अक्टूबर-नवंबर में होने वाले चुनावों की तैयारियों में पूरी तरह से मशगूल है। इस सरकार का लोगों की सुरक्षा और हिफाजत के प्रति कोई सरोकार नहीं है। भाकपा (माले) अपहृत लड़की की तत्काल सुरक्षित बरामदगी की मांग करती है और जल्द ही यदि उसे बरामद नहीं किया जाता तो पार्टी जल्द ही राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने जा रही है।

इस बीच बिहार महिला आयोग की अध्यक्षा दिलमणि मिश्रा ने मुज़फ़्फ़रपुर एसएसपी को इस मामले में अबतक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपने के संबंध में लिखा है।पूर्व मंत्री और जदयू नेता रामचंदर प्रसाद सिंह ने कहा है कि उन्होंने इस बारे में सीएम को पत्र लिखा था और अपहृत लड़की की बरामदगी के संबंध में डीजीपी और मुजफ्फरपुर एसएसपी से बात की है।

जबकि मुजफ्फरपुर के निवासियों को इस बात का भय है कि कहीं यह मामला भी जिले में कुछ साल पहले वाल्रे दूसरे मामले की तरह ही साबित न हो जाए। सन 2012 में मुजफ्फरपुर के एक पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाली 7वीं कक्षा की नाबालिग छात्रा को उसके घर से अगवा कर लिया गया था। लेकिन इस मामले में विपक्ष की ओर से विरोध प्रदर्शन के बाद सीबीआई जाँच बिठाने के बावजूद आज इस बात को आठ साल बीत जाने के बाद भी उस लड़की का कोई सुराग नहीं मिल सका है।

इसके साथ ही दो वर्ष पूर्व मुजफ्फरपुर शेल्टर होम बलात्कार मामला तब राष्ट्रीय सुर्ख़ियों में आ सका, जब टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज ने अपनी सोशल ऑडिट रिपोर्ट में इस मामले को सार्वजनिक किया था। इस शेल्टर होम की कम से कम 34 लड़कियों का यौन शोषण हुआ था। इसके बाद जाकर कहीं बिहार समाज कल्याण विभाग की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी। इस मामले में मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर के एनजीओ द्वारा इस शेल्टर होम को संचालित किया जा रहा था। विपक्ष की ओर से चलाए गए निरंतर विरोध प्रदर्शनों के चलते ठाकुर की गिरफ्तारी संभव हो पाई थी और बिहार सरकार में समाज कल्याण मंत्री रहीं मंजू वर्मा को अपने पति के ठाकुर के साथ कथित घनिष्ठ संबंधों के आरोपों के चलते इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

यह लेख अंग्रेजी के लेख का अनुवाद है.आप मूल लेख को इस लिंक की मदद से पढ़ सकते हैं -

https://www.newsclick.in/Nitish-Land-CBI-Probe-SSR-Action-Abducted-Girl


 

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