NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
ई-पासपोर्ट कितना सुरक्षित है और इसके क्या फ़ायदे हैं?
विदेश मंत्रालय का दावा है कि ई-पासपोर्ट के जरिए सुरक्षा की वाजिब चिंताओं से समझौता किए बगैर नियमों और प्रक्रियाओं को आसान बनाने पर मुख्य रूप से ध्यान दिया जा रहा है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
21 Aug 2020
Image Credit- track.in
Image Credit- Herzindagi.com

“भारतीय सुरक्षा एजेंसियों से पासपोर्ट में चिप को लेकर शुरुआती चर्चा की जा रही है। हमारी कोशिश है कि सभी ई-पासपोर्ट जारी करने के लिए जल्द से जल्द काम हो और लोगों को आधुनिक सुरक्षा फीचर्स के साथ एडवांस्ड बुकलेट जारी किया जा सके।”

बतौर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने पहले संबोधन में ई-पासपोर्ट जारी करने की घोषणा की थी। जिसके बाद इस साल पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर उन्होंने जानकारी दी कि देश में चिप युक्त ई-पासपोर्ट के उत्पादन के लिये जरूरी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और उन्हें पेश किये जाने से भारतीय यात्रा दस्तावेजों की सुरक्षा काफी मजबूत होगी। अब केंद्र सरकार ने इसका पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर दिया है। नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर ने इसके लिए रिक्वेस्ट फ़ॉर प्रपोजल (आरएफपी) जारी किया है। इसके ज़रिए सरकार एक ऐसी एजेंसी का चुनाव करना चाहती है, जो इन ई-पासपोर्ट के लिए आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर और सॉल्यूशंस तैयार कर सके।

ख़बरों के मुताबिक, सरकार की तैयारी अब हर घंटे 10,000 से 20,000 ई-पासपोर्ट जारी करने की है। इसके लिए चुनी गई एजेंसी एक डेडिकेटेड यूनिट लगाएगी, साथ ही दिल्ली और चेन्नई में आईटी सिस्टम्स भी लगाए जाने की बात कही जा रही है। विदेश मंत्रालय के अनुसार अब देश के सभी 36 पासपोर्ट दफ्तर ई-पासपोर्ट जारी कर सकेंगे।

इकनॉमिक टाइम्स की ख़बर के मुताबिक़, सरकार 20,000 सरकारी और डिप्लोमैटिक ई-पासपोर्ट ट्रायल बेसिस पर जारी भी कर चुकी है। माना जा रहा है कि अगले साल से ये नए ई-पासपोर्ट आम लोगों को भी जारी किए जाने लगेंगे।

ई-पासपोर्ट क्या हैं?

इलेक्ट्रॉनिक पासपोर्ट या ई-पासपोर्ट पारपंरिक पासपोर्ट के जैसे ही होते हैं। लेकिन, इनमें एक छोटा इंटीग्रेटेड सर्किट (चिप) लगा होता है। इस इलेक्ट्रॉनिक माइक्रोप्रोसेसर चिप में पासपोर्टधारक के फोटोग्राफ और फिंगरप्रिंट्स के साथ ही ट्रेवल डेटा भी स्टोर होते हैं।

अभी तक देश में जो पासपोर्ट जारी होते हैं वो पर्सनलाइज्ड होते हैं और उन्हें बुकलेट्स पर प्रिंट किया जाता है। लेकिन ई-पासपोर्ट सुरक्षा फीचर्स के साथ एडवांस्ड बुकलेट सिस्टम पर आधारित होंगे।

सिक्योरटी के पहलू से देखें तो ई-पासपोर्ट में यूजर की डिज़िटल आइडेंटिटी वेरिफ़ाई होती है। फिजिकल पासपोर्ट में डेटा को स्कैन करके रखना और इस स्कैन्ड डेटा को रिट्रीव करना कितना मुश्किल काम होता है। ई-पासपोर्ट में आपके बायोमीट्रिक से जानकारियाँ वेरिफाई हो जाती हैं।

ई-पासपोर्ट के प्रोटोटाइप का परीक्षण अमेरिकी सरकार द्वारा मान्यताप्राप्त लेबोरेटरी में किया गया है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किसी भी कॉमर्शियल एजेंसी को इसमें इंवॉल्व नहीं किया गया है।

ई-पासपोर्ट निर्माण का पूरा काम विदेश मंत्रालय की निगरानी में किया जा रहा है। इसके लिए नेशनल इनफॉर्मेटिक्स सेंटर और आईआईटी कानपुर के बीच करार हुआ है। यह दोनों संस्थान मिलकर इलेक्ट्रॉनिक पासपोर्ट की सिलिकॉन चिप के निर्माण का काम देख रही हैं। पासपोर्ट की प्रिंटिंग और असेंबलिंग का काम इंडियन सिक्योरिटी प्रेस नासिक में किया जाएगा, यानी पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से लैस होगा।

इलेक्ट्रॉनिक पासपोर्ट के क्या फायदे हैं?

  •  ई-पासपोर्ट्स में डिज़िटल सिक्योरिटी फ़ीचर्स मिलते हैं। इसमें लगी चिप पासपोर्ट की वैधता को भी साबित करने में मददगार होती है।
  • ई-पासपोर्ट्स में फ़र्जीवाड़ा करना मुश्किल है। चिप में दर्ज सूचनाओं को बदला नहीं जा सकता है।
  • बार-बार अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल करने वालों के लिए भी यह फ़ायदेमंद है। इसके जरिए सिर्फ कुछ ही सेकंड्स में पहचान प्रमाणित हो सकती है।
  • इमिग्रेशन अधिकारियों को भी ई-पासपोर्ट्स से यात्रियों के बारे में अधिक ठोस और प्रमाणित सूचना मिलती है।
  • अपराधियों को देश छोड़ने से रोकना आसान हो जाएगा। साथ ही डिज़िटल डेटा होने के चलते दूसरे देशों में भी उन्हें आसानी से एंट्री नहीं मिलेगी।

बता दें कि पासपोर्ट्स के मानकीकरण का काम आईसीएओ (इंटरनेशल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन) करता है, जो यूएन का ही एक हिस्सा है। लेकिन, देशों के पास अपने हिसाब से इन मानकों को लागू करने का अधिकार होता है।

बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2016 में तय हुए नियम के अनुसार सभी पासपोर्ट मशीन में पढ़े जाने योग्य होने चाहिए। इसके लिए मशीन रीडेबल ट्रैवल डॉक्यूमेंट्स (एमआरटीडी) शब्द का इस्तेमाल किया गया था। इसका मतलब है कि पासपोर्ट के पहले पन्ने के नीचे की दो लाइनों में नाम, एक्सपायरी की तारीख, जारी करने वाला देश जैसी जानकारियाँ हों।

हालाँकि, आईसीएओ ने अभी तक चिप को मानक के तौर पर अनिवार्य नहीं किया है। लेकिन, दुनिया के कई देश अपने पासपोर्ट्स की साख को बढ़ाने के लिए चिप का इस्तेमाल करते हैं। आईसीएओ के मुताबिक़, दुनिया के 100 से अधिक देश और ग़ैर-राष्ट्र इकाइयाँ (जैसे संयुक्त राष्ट्र) फ़िलहाल ई-पासपोर्ट जारी करते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, दुनिया में इस समय क़रीब 49 करोड़ ई-पासपोर्ट सर्कुलेशन में हैं। यूरोप के ज़्यादातर देशों में इसी तरह के ई-पासपोर्ट चलते हैं।

गौरतलब है कि कोरोना संकट, साइबर हमले और पासपोर्ट फ्रॉड के बढ़ते मामलों को देखते हुए ई-पासपोर्ट को सरकार द्वारा उठाया एक अहम कदम माना जा है। हालांकि कई जानकारों को अब भी इस सरकारी दावे पर संशय ही है कि ये भगौड़े अपराधियों पर पूरी तरह से लगाम लगा पाएगा और इसके आने के बाद नकली पासपोर्ट का व्यापार पूरी तरह ठप्प हो जाएगा।

Ministry of External Affairs
S. Jaishankar
E-Passport
Cyber Security
GOVERNMENT OF INDIA
National Informatics Centre

Related Stories

ऑनलाइन सेवाओं में धोखाधड़ी से कैसे बचें?

सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह मामलों की कार्यवाही पर लगाई रोक, नई FIR दर्ज नहीं करने का आदेश

अजय मिश्रा टेनी भारत सरकार के मंत्रिपरिषद का हिस्सा नहीं रह सकते : एसकेएम

बाइडेन प्रशासन अफ़ग़ानों के साथ जो कर रहा है वह क्रूरता है!

मुसलमानों, आदिवासियों पर हो रहे हमलों पर चुप क्यों है भारत सरकार?

ब्लिंकन का दिल्ली में एक ही एजेंडा था- सिर्फ़ चीन

जनतंत्र के लिए ख़तरा है पेगासस

वैक्सीन रणनीति को तबाह करता भारत का 'पश्चिमीवाद'

भारत में क्यों कोविड का टीका मुफ़्त होना चाहिए? 

दिलीप छाबड़िया ने कारों की डिज़ाइनिंग से करोड़ों रुपये कमाए, फ़िर क्यों उन्होंने बैंकों से धोखाधड़ी के लिए नए डिज़ाइन ईज़ाद किए?


बाकी खबरें

  • mamta banerjee
    भाषा
    तृणमूल कांग्रेस ने बंगाल में चारों नगर निगमों में भारी जीत हासिल की
    15 Feb 2022
    तृणमूल कांग्रेस ने बिधाननगर, चंदरनगर और आसनसोल नगरनिगमों पर अपना कब्जा बरकरार रखा है तथा सिलीगुड़ी में माकपा से सत्ता छीन ली।
  • hijab
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    हिजाब विवादः समाज सुधार बनाम सांप्रदायिकता
    15 Feb 2022
    ब्रिटेन में सिखों को पगड़ी पहनने की आज़ादी दी गई है और अब औरतें भी उसी तरह हिजाब पहनने की आज़ादी मांग रही हैं। फ्रांस में बुरके पर जो पाबंदी लगाई गई उसके बाद वहां महिलाएं (मुस्लिम) मुख्यधारा से गायब…
  • water shortage
    शिरीष खरे
    जलसंकट की ओर बढ़ते पंजाब में, पानी क्यों नहीं है चुनावी मुद्दा?
    15 Feb 2022
    इन दिनों पंजाब में विधानसभा चुनाव प्रचार चल रहा है, वहीं, तीन करोड़ आबादी वाला पंजाब जल संकट में है, जिसे सुरक्षित और पीने योग्य पेयजल पर ध्यान देने की सख्त जरूरत है। इसके बावजूद, पंजाब चुनाव में…
  • education budget
    डॉ. राजू पाण्डेय
    शिक्षा बजट पर खर्च की ज़मीनी हक़ीक़त क्या है? 
    15 Feb 2022
    एक ही सरकार द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे बजट एक श्रृंखला का हिस्सा होते हैं इनके माध्यम से उस सरकार के विजन और विकास की प्राथमिकताओं का ज्ञान होता है। किसी बजट को आइसोलेशन में देखना उचित नहीं है। 
  • milk
    न्यूज़क्लिक टीम
    राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के साथ खिलवाड़ क्यों ?
    14 Feb 2022
    इस ख़ास पेशकश में परंजॉय गुहा ठाकुरता बात कर रहे हैं मनु कौशिक से राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड से सम्बंधित कानूनों में होने वाले बदलावों के बारे में
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License