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भारत
राजनीति
कोरोना के व्यापक फैलाव के बीच सरकार का नींद में चलना जारी
भारत में अब कुल कोरोना संक्रमितों की संख्या 8 लाख से ज़्यादा हो गई है, अब भारत पूरी दुनिया में तीसरे नंबर पर आ चुका है। लोग परेशान हैं और सरकारी नीतियां पूरी तरह अव्यवस्थित हैं।
सुबोध वर्मा
13 Jul 2020
modi

स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक़, 11 जुलाई तक भारत में कोरोना वायरस से 8.2 लाख से ज़्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से 22,000 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। खैर, आप चाहे जैसे इसे देखें, बात यह है कि अब भारत में कोरोना संक्रमण की लहर चल रही है, जो मुख्यत: शहरी और इसके आसपास के इलाकों में जोर पकड़ रही है। लेकिन कुछ ग्रामीण इलाकों में भी इसकी रफ़्तार जारी है।

ज़्यादातर मामले कुछ ही राज्यों तक सीमित हैं, लेकिन यह महामारी ज़्यादा विस्तृत और दूर तक फैल चुकी है। यह एक ऐसा बम बन चुकी है, जो कभी भी फूट सकता है। इसकी वजह कोरोना महामारी के संक्रमण का तेजी से फैलना है। यह सारी बातें स्वास्थ्य ढांचे की जानकारी में आए मामलों के हवाले से कहा जा रहा है, जिनके रिकॉर्ड सरकार के पास हैं। जैसा बहुत सारे विशेषज्ञ मानते हैं, कोरोना संक्रमितों की असली संख्या बहुत ज़्यादा होगी, हालांकि इनमें से ज़्यादातर मामले गंभीर नहीं होंगे।

पिछले एक महीने में 64 फ़ीसदी मामले

लेकिन यहीं एक अहम बात है। भारत में मौजूदा मामलों में से दो तिहाई पिछले एक महीने में, 12 जून से 11 जुलाई के बीच ही सामने आए हैं। नीचे चार्ट देखें। इसका मतलब हुआ कि पिछले एक महीने में ही करीब 5.2 लाख मामले सामने आ चुके हैं। वहीं बचे हुए तीन लाख मामले उसके पहले के साढ़े चार महीनों में आए थे। साफ़ है कि अब महामारी चिंताजनक रफ़्तार पकड़ रही है। 

graph 1.jpg

जैसा आप ऊपर के चार्ज में देख सकते हैं, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे राज्यों में 80 से 90 फ़ीसदी मामले पिछले एक महीने में सामने आए हैं।

पिछले तीन महीनों से तेलंगाना में कड़ाई से लॉकडाउन लागू है, तो यह उन लोगों के लिए जवाब है, जो कहते थे कि महामारी से निपटने के लिए सबसे बेहतर हथियार लॉकडाउन है। इन लोगों में मोदी सरकार भी शामिल है।

वहीं दूसरी तरफ संक्रमितों के संपर्कों की खोज के लिए कर्नाटक एक उदाहरण बनकर उभरा था। वहां जिस तरह से संक्रमण रोका जा रहा था, उसकी नज़ीर पेश की जा रही थीं। लेकिन मौजूदा लहर में वहां भी ढांचा ढह गया। अब कोरोना संक्रमितों की संख्या बहुत ज़्यादा है, उनके संपर्कों की पहचान करना आसान नहीं है।

महाराष्ट्र और तमिलनाडु के बाद सबसे ज़्यादा मामले दिल्ली में ही है। लेकिन दिल्ली राज्य बड़ी संख्या में टेस्टिंग कर रहा है। वहां भी दो तिहाई मामले पिछले एक महीने में ही सामने आए हैं।

केरल में सफलता के साथ महामारी पर नियंत्रण रखा गया है, लेकिन अब बड़ी संख्या में प्रवासियों के लौटने के साथ ही वहां भी कोरोना की लहर पैदा हो गई है। बता दें केरल में करीब़ पांच लाख प्रवासी दूसरे राज्यों और विदेश से लौटे हैं।

रोज आने वाले मामलों में हो रही बढ़ोतरी

मौजूदा लहर की बेहतर तस्वीर जानने के लिए हमें नीचे दिए गए चार्ज पर ध्यान देना होगा। इसमें स्वास्थ्य मंत्रालय को दिए आंकड़ों के हिसाब से रोज आने वाले नए मामलों की संख्या बताई गई है। 11 जुलाई को देशभर में 27,114 नए मामले आए हैं। 12 मई को 3,604 नए मामले सामने आए थे। 12 जून को 10,956 नए मामले आए। ट्रेंड बेहद साफ़ है। बल्कि उस दौरान लॉकडाउन लागू था। उस अवधि के अंत में ही लॉकडाउन में कुछ छूट दी गई थी। अगले एक महीने में, 11 जुलाई तक रोज सामने आने वाले मामलों में तीन गुना वृद्धि हो गई।

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साफ़ है कि नई लहर के पीछे की वज़हें जटिल हैं। यह वजहें टेस्टिंग, संपर्क खोज और आईसोलेशन में अपर्याप्त प्रयास और लॉकडाउन, स्कूल बंद, भीड़ इकट्ठा होने पर प्रतिबंध जैसे नॉन-फॉर्मेकोलॉजिकल हस्तक्षेपों पर अंधाधुंध विश्वास का मिश्रण है। टेस्टिंग, संपर्क खोज और आइसोलेशन में अपर्याप्त कोशिशों के चलते कोरोना के मामलों में वृद्धि हुई। वहीं लॉकडाउन, स्कूल बंद और भीड़ इकट्ठा होने पर प्रतिबंध जैसे उपायों पर अंधाधुंध विश्वास से अर्थव्यवस्था बुरे तरीके से तबाह हो गई, जिससे लोगों में बहुत तनाव पैदा हो गया, घरों की ओर प्रवास शुरू हो गया। फिर स्वाभाविक तौर पर लोगों में अपनी आजीविका चलाने के लिए काम पर लौटने की मजबूत इच्छा पैदा हुई।

इससे वृत्त पूरा हो गया, क्योंकि जब प्रतिबंधों की सबसे ज़्यादा जरूरत थी, तब सरकार फैक्ट्रियों और ऑफिसों को खोलने की कोशिश कर रही थी, इससे संक्रमण का ज़्यादा फैलाव संभव हुआ। यह कुप्रबंधन का नतीज़ा है। ऊपर जो लोग सत्ता में हैं, उनके द्वारा सिर्फ़ भाषणबाजी की जा रही है। इनका नेतृत्व खुद प्रधानमंत्री मोदी कर रहे हैं।

जब यह त्रासदी फैल रही थी, तब मोदी सरकार सोते हुए चल रही थी। इस आपदा में सरकार बड़े घमंड से सहर्ष पहुंची है। अब जब तेजी से कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, तब सरकार जवाबों के लिए यहां-वहां घूम रही है। अब भी तस्वीरें खिंचवाने और नाटकीय घोषणाएं करने पर ज़्यादा जोर है। आंकड़ों का खिलवाड़ कर अकसर ऐसा जताने की कोशिश की जाती है, जैसे चीजों में सुधार आ रहा हो। लेकिन लोगों को संक्रमितों की संख्या दिखाई दे रही है, अब वह डरे हुए और उलझन में हैं।

ज़्यादातर विशेषज्ञों को लगता है कि अब भी देश के ज़्यादातर हिस्सों में बड़े स्तर पर TTI (टेस्टिंग, ट्रेसिंग और आइसोलेशन) कार्यक्रम के लिए देर नहीं हुई है। अगर धारावी और कुछ हद तक बेंगलुरु समेत केरल और ओडिशा एक समग्र रणनीति बनाकर, उसका मजबूती से पालन कर कोरोना के संक्रमण पर काबू पा सकते हैं, तो ऐसा दूसरी जगह क्यों नहीं किया जा सकता? अब भी इस महामारी से हज़ारों ज़िन्दगियों को बचाए जाने की संभावना है, लेकिन पहले उन लोगों को उठाना होगा, जो नींद में चल रहे हैं।

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

Govt Continues to Sleep-Walk Amid COVID-19 Surge

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Health Ministry

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