NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
हादिया 'लव जिहाद' केसः जानिए, सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में आख़िर क्या हुआ
कथित लव जिहाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फ़ैसाल सुनाते हुए मेडिकल की आगे की पढ़ाई करने की इजाज़त दी, माता-पिता से कहा क़ब्जे में न रखें।
तारिक़ अनवर
29 Nov 2017
hadiya

27 नवंबर को लाल स्कार्फ पहने हादिया (पूर्ववर्ती नाम अखिला अशोकन) दोपहर क़रीब 2:55 बजे सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर एक में दाख़िल हुई। हादिया ने वर्ष 2015में इस्लाम धर्म अपनाकर एक मुस्लिम व्यक्ति शफीन जहां से शादी कर ली थी। मुस्लिम व्यक्ति से हादिया के विवाह को लेकर आरोप लगाया जा रहा था कि हादिया को उसकी इच्छा के ख़िलाफ़ इस्लाम धर्म स्वीकार करवाया गया था। इसी को लेकर वह अपना पक्ष रखने सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। 
 

अदालत में कार्यवाही 3 बजे शुरू हुई। लेकिन हादिया की बारी आने में थोड़ा ज़्यादा वक्त लगा। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायाधीश एएम खानविलकर और न्यायाधीश डीवाइ चंद्रचूड़ की पीठ में सुनवाई हुई। पीठ ने क़रीब दो घंटे की सुनवाई के बाद हादिया से बातचीत शुरू की। 
जब सुनवाई 3 बजे शुरू हुई तब हादिया के पिता केएम अशोकन की ओर से पक्ष रखते हुए वकील श्याम दिवान ने अपना आवेदन प्रस्तुत किया कि अदालत को हदिया का इंटरव्यू बंद कमरे में लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि "इसका उद्देश्य उसके पीछे की ताकतों (धर्मांतरण) को जानना है। ज़बरदस्त संगठनात्मक समर्थन है;इसलिए, जांच के तत्व और बातचीत की सीमा आवश्यक है। वातावरण बंद दरवाज़ा होना चाहिए।"

तब दिवान ने कहा कि केरल का वातावरण "बहुत ही सांप्रदायिक" था। उन्होंने कहा कि ओपन कोर्ट में वह जो कुछ कह सकती है उसके कुछ खतरे होंगे। उन्होंने अदालत से प्रार्थना किया कि "कृपया सार्वजनिक सुनवाई करने के निर्णय पर फिर से विचार किया जाए।"

अपने पिछले तर्कों को दोहराते हुए दिवान ने आगे कहा कि "केरल में बिना किसी समस्या के अच्छी व्यवस्था काम कर रही है जो युवा महिलाओं के इंडॉक्ट्रिनेशन और रेडिकलाइजेशन में शामिल है और उनका परिवर्तन कर रही है"।

कथित लव जिहाद मामले की जांच के लिए शीर्ष अदालत द्वारा एनआईए को ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से बहस करते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल मनिंदर सिंह ने पीठ से कहा कि इंडॉक्ट्रिनेशन और इसके प्रभाव पर एक व्यापक सुनवाई ज़रूरत है।

उन्होंने ओपन कोर्ट में हादिया से बातचीत करते हुए कहा, सुप्रीम कोर्ट निर्णय नहीं कर सकता है कि किसी व्यक्ति को इंडॉक्ट्रिनेटेड किया गया है या नहीं। उन्होंने अदालत से कहा कि "यह मनोवैज्ञानिक है, अपहरण का एक परिणाम है, और इसमें व्यक्तिगत स्वायत्तता शामिल है। इस तरह के इडॉक्ट्रिनेशन को 'न्यूरो-लिंग्विस्टिक प्रोग्रामिंग' कहा जाता है।

तब पीठ ने एनआईए से पूछा कि "क्या हमें हादिया के विवाह के विशिष्ट मामले में इंडॉक्ट्रिनेशन के इस बड़े मुद्दे को अलग करना चाहिए? किस स्तर पर निजी स्वतंत्रता अदालत द्वारा स्थगित की जा सकती है?"

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने पूछा कि "यदि यह स्थापित किया जाता है कि व्यक्ति की सहमति स्वैच्छिक नहीं है तो अदालत को क्या करना चाहिए?"

एनआईए ने अपने जवाब में अदालत से कहा कि "हमने किसी भी निर्णय से पहले 100-पृष्ठ की रिपोर्ट जमा की है..., हमारी जांच पर एक नज़र डाल लिया जाए।"

हादिया के पति शफीन जहां की ओर से पक्ष रख रहे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने पीठ से कहा कि मान लेते हैं कि दूसरा पक्ष जो भी कह रहा वह सही है फिर भी हादिया को अपने बारे में कहने का पूरा अधिकार है।

"यह जानने के लिए कि क्या वह इनडॉक्ट्रिनेटेड की गई या नहीं, किसी को उससे बात करनी चाहिए। योर लॉर्डशिप, हादिया को सुना जाना चाहिए। उसका बयान एनआईए की तुलना में ज्यादा महत्वपूर्ण है।"

मुख्य न्यायाधीश ने जवाब में कहा "मैंने कभी अपने जीवन में ऐसा मामला नहीं देखा है।"

बंद कमरे में हादिया की सुनवाई का विरोध करते हुए सिब्बल ने कहा कि वह उसकी स्वायत्तता के प्रति चिंतित थें। उन्होंने कहा कि "राष्ट्रीय हित में यह ओपन कोर्ट में किया जाना चाहिए। वह तय कर सकती है कि उन्हें क्या निर्णय लेना चाहिए।

सांप्रदायिकता पर दिवान की दलील का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि वे "विष की अभिव्यक्ति" से "दुखी" थे। उन्होंने कहा कि "मैं सांप्रदायिक तर्कों पर सांप्रदायिक प्रतिक्रिया दे सकता हूं"। साथ ही पूछा कि "हादिया के साथ क्या किया गया है?"

उन्होंने पूछा कि "किसी व्यक्ति की पहुंच से दूर वह पिछले आठ महीनों से अपने माता-पिता की हिरासत में रही है। आप इस व्यवहार में क्यों केरल को सांप्रदायिक बनाना चाहते हैं? "

उन्होंने कहा कि हादिया वयस्क है और अपना फैसला ख़ुद लेने की हक़दार है। "जो भी एनआईए कहता है वह असीम सत्य नहीं है। अगर मैं हिरासत में हूं तो मैं कैसे इनडॉक्ट्रिनेटेड हो सकता हूं?" उन्होंने पीठ को याद दिलाते हुए कहा कि एनआईए ने कई मामलों में यू-टर्न लिया है।

सिब्बल ने पीठ से कहा कि "यदि कोई मज़बूत सबूत है और यदि यह आपको यक़ीन दिलाता है कि इस्लाम के धर्मांतरण में कोई पसंद शामिल नहीं है, तो कार्रवाई करें।"

सिब्बल ने कहा कि "यद्यपि उसने गलत फैसला किया है फिर भी उसे उस फैसले पर रहने का हक़ है। अगर यह टूट जाता है, तो हो। आख़िरकार, इतने सारे विवाह टूट जाते हैं"।

उन्होंने कहा कि भले ही इंडॉक्ट्रिनेशन की कहानी सही है, वह (हादिया) अभी भी कहती है कि वह जाना चाहती है। वरिष्ठ वकील ने पीठ से कहा "उससे पहले बात करें, प्रथम दृष्टया उसके बारे में विचार प्राप्त करें और देखें कि क्या निष्कर्ष निकाले जाने के लिए मज़बूत सबूत है। उसे चिकित्सा के लिए भेजें या घोषणा करें कि वह स्वतंत्र चयन कर रही है। वह इस उद्देश्य के लिए यहां मौजूद है।"

न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा कि यह पीठ "इंडॉक्ट्रिनेशन के खतरे से चिंतित है।" उन्होंने कहा कि "हम अपना कर्तव्य पूरा करने के लिए शपथ लेते हैं।"

सिब्बल ने जवाब में कहा, "हम भी।"

इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करते हुए न्यायाधीश खानविलकर ने कहा कि "एक सामान्य मामले में हम लड़की को सुना और फैसला किया, लेकिन यह एक असामान्य मामला है।"

'स्टॉकहोम सिंड्रोम' नामक एक घटना को इंगित करते हुए, न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा कि "हम यह नहीं कह रहे हैं कि यह आपके मामले में है, लेकिन स्टॉकहोम सिंड्रोम नामक एक घटना है। यद्यपि एक स्वतंत्र सहमति है या व्यक्ति एक व्यस्क है लेकिन इस सिंड्रोम के कारण वे अपने फैसलों को स्वतंत्र रूप से नहीं ले सकते।"

उन्होंने आगे कहा कि "एक स्वतंत्र घटक (एजेंट) होने के लिए व्यक्ति की क्षमता भी एक महत्वपूर्ण पहलू है"।

सिब्बल ने तब कहा कि "पीठ ने केरल से हादिया को क्यों बुलाया यदि वह फैसला करे कि उसे सुनना चाहे या नहीं?"जब पीठ दो घंटे में तय नहीं कर सका तो वरिष्ठ वकील और पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह व्यथित हो गए। जयसिंह भी शफीन की ओर से पेश हुईं। उन्होंने पूछा कि "क्या हादिया एक व्यक्ति था, क्या पीठ ने उसके विशेषाधिकार पर संदेह किया है?"

इस पर न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने नियंत्रण खो दिया और कहा कि "पीठ ने लैंगिक भेदभाव नहीं किया है और दोनों से समान व्यवहार किया है"।

सीजेआई दीपक मिश्रा ने भी उनसे नाराज़गी व्यक्त करते हुए पूछा कि "लैंगिक मुद्दे यहां कैसे आए?"

शफीन और हादिया के वकील ने अदालत से आग्रह किया कि कम से कम महिला को सुनें क्योंकि वह एक मेडिकल डॉक्टर है और उसका अपना ज़ेहन है। वकीलों ने पीठ से कहा कि "यदि अदालत उसे बुलाने के बाद भी नहीं सुनती है तो वह क्या सोचेगी? वह अदालत में चल रही सभी चीज़ों को समझती है।"

सीजेआई ने कहा कि पीठ उठाए जाने वाले केवल उन क़दमों के अनुक्रम की खोज कर रही थी। न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा कि सवाल यह था कि अदालत किस स्तर पर शामिल हो सकता था और हादिया एक वयस्क के रूप में किस स्तर पर फैसला कर सकती थी?

न्यायाधीश चंद्रचूड़ तथा हादिया के बीच बातचीत हुई। अदालत को बताया गया कि हालांकि वह अंग्रेजी में संवाद कर सकती है, हो सकता है कि वह भाषा में प्रभावी ढंग से स्पष्ट न हो सके। अदालत ने एडवोकेट वी गिरी, जो केरल राज्य का प्रतिनिधित्व करते हैं, से अनुवाद करने में सहायता करने का अनुरोध किया।

अदालत द्वारा किए गए सवालों की सीमा मूल रूप से उसकी योग्यता, अध्ययन, जीवन की धारणा और भविष्य में उसके द्वारा कुछ करने की इच्छाओं पर था। जवाब में उसने अदालत से कहा कि वह कोट्टायम जिले के वाइकॉम के केवी पुरम में उच्च माध्यमिक विद्यालय से कक्षा 10वीं पास कर चुकी है। इसके बाद वह तमिलनाडु के सलेम में शिवराज होमियोपैथी मेडिकल कॉलेज से बीएचएमएस (बैचलर ऑफ होमियोपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी) कर रही थी।

उसने पीठ से कहा कि "मुझे स्वतंत्रता चाहिए। मैं पिछले 11 महीनों से ग़ैरकानूनी हिरासत में हूं। मैं एक अच्छी नागरिक और एक अच्छी डॉक्टर बनना चाहती हूं। मैं अपनी आस्था के साथ जीना चाहती हूं।"

अदालत ने उससे कहा कि वह अपनी आस्था का दावा कर सकती है और एक अच्छी डॉक्टर बन सकती है।

जब पीठ ने हादिया से पूछा कि भविष्य के लिए उसके सपने क्या हैं तो उसने कहा कि वह स्वतंत्रता चाहती है और अपने पति के साथ रहना चाहती है।

उसने कोर्ट को यह भी बताया कि वह अपना इंटर्नशिप जारी रखना चाहती है, जिसे कुछ कारणों से छोड़ दी थी, और उसकी महत्वाकांक्षा एक होम्योपैथिक डॉक्टर बनने की है। उसने कहा कि अगर एक सीट उपलब्ध करा दिया जाए तो वह उसी कॉलेज में अपना कोर्स पूरा करना चाहती है और साथ ही हॉस्टल में भी रहने की इच्छा व्यक्त की।

उसके द्वारा इच्छा व्यक्त करने पर अदालत ने निर्देश दिया है कि उसे सलेम में ले जाया जाए ताकि वह इंटर्नशिप को जारी रख सके। इसकी अवधि 11 महीने होने की संभावना है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि "यदि किसी औपचारिकता का अनुपालन किया जाता है तो महाविद्यालय विश्वविद्यालय के साथ संवाद करेगी और विश्वविद्यालय उसी के साथ सहमत होगा।" अदालत के आदेश की एक कॉपी न्यूज़क्लिक के पास उपलब्ध है।

जब पीठ ने तमिलनाडु के सलेम में कॉलेज में अपने रिश्तेदार या किसी भी क़रीबी परिचित के नाम के बारे में पूछा तो उसने कहा कि केवल उसका पति ही उसका अभिभावक हो सकता है और वह इस भूमिका में किसी और को नहीं चाहती है।

हादिया ने आगे अदालत से कहा कि "अगर मुझे अपना कोर्स पूरा करने के लिए कॉलेज में वापस भेज दिया जाता है तो मैं चाहती हूं कि मेरे पति ही मेरे संरक्षक हों।"

न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा कि "एक पति अपनी पत्नी का अभिभावक नहीं हो सकता है। जीवन और समाज में उसकी अपनी पहचान है। यद्यपि मैं अपनी पत्नी का संरक्षक नहीं हूं। कृपया उसे समझें।"

सीजीआई ने उससे पूछा कि "क्या आप सरकारी खर्च पर अपना अध्ययन जारी रखना चाहती हैं?"

हादिया ने उत्तर दिया कि "मैं चाहती हूं लेकिन सरकारी ख़र्च पर नहीं क्योंकि जब मेरे पति मेरी देखभाल कर सकते हैं।"

अदालत ने कॉलेज को अन्य छात्र की तरह ही व्यवहार करने का भी निर्देश दिया और उसे हॉस्टल नियमों के अनुसार निर्देशित किया जाएगा। उसके वकील के अनुसार वह अपने पति से भी मिल सकती है।

किसी भी प्रकार की कोई समस्या होने पर पीठ ने महाविद्यालय के डीन को सर्वोच्च न्यायालय से संपर्क करने का आदेश दिया। पीठ ने स्पष्ट किया कि "किसी भी समस्या का मतलब छात्रावास में प्रवेश या पाठ्यक्रम जारी रखना नहीं है।"

अदालत ने कहा यदि आवश्यक हो तो पाठ्यक्रम और छात्रावास के लिए किए जाने के वाले खर्चों को केरल राज्य द्वारा वहन किया जाएगा।

पीठ ने केरल राज्य को भी सभी आवश्यक व्यवस्था करने का निर्देश दिया ताकि वह जल्द से जल्द सलेम जा सके।

हादिया ने एक अनुरोध किया कि सादे कपड़े में महिला पुलिस उसके साथ होना चाहिए। अदालत ने निर्देश दिया कि "राज्य उचित रूप से इस विनती पर ध्यान देगी। यदि कोई सुरक्षा समस्या उत्पन्न होती है तो तमिलनाडु राज्य को इसके लिए स्थानीय व्यवस्था करनी चाहिए।"

love jihad
Hadiya
Supreme Court
NIA
Deepak Mishra

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

मलियाना कांडः 72 मौतें, क्रूर व्यवस्था से न्याय की आस हारते 35 साल

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?


बाकी खबरें

  • prashant kishor
    अनिल सिन्हा
    नज़रिया: प्रशांत किशोर; कांग्रेस और लोकतंत्र के सफ़ाए की रणनीति!
    04 Dec 2021
    ग़ौर से देखेंगे तो किशोर भारतीय लोकतंत्र की रीढ़ तोड़ने में लगे हैं। वह देश को कारपोरेट लोकतंत्र में बदलना चाहते हैं और संसदीय लोकतंत्र की जगह टेक्नोक्रेट संचालित लोकतंत्र स्थापित करना चाहते हैं…
  • All five accused arrested in the murder case
    भाषा
    माकपा के स्थानीय नेता की हत्या के मामले में सभी पांच आरोपी गिरफ्तार
    04 Dec 2021
    घटना पर माकपा प्रदेश सचिवालय ने एक बयान जारी कर आरएसएस को हत्या का जिम्मेदार बताया है और मामले की गहराई से जांच करने की मांग की है.पुलिस के अनुसार, घटना बृहस्पतिवार रात साढ़े आठ बजे हुई थी और संदीप…
  • kisan andolan
    लाल बहादुर सिंह
    MSP की कानूनी गारंटी ही यूपी के किसानों के लिए ठोस उपलब्धि हो सकती है
    04 Dec 2021
    पंजाब-हरियाणा के बाहर के, विशेषकर UP के किसानों और उनके नेताओं की स्थिति वस्तुगत रूप से भिन्न है। MSP की कानूनी गारंटी ही उनके लिए इस आंदोलन की एक ठोस उपलब्धि हो सकती है, जो अभी अधर में है। इसलिए वे…
  • covid
    भाषा
    कोरोना अपडेट: देशभर में 8,603 नए मामले सामने आए, उपचाराधीन मरीजों की संख्या एक लाख से कम हुई
    04 Dec 2021
    देश में कोविड-19 के 8,603 नए मामले सामने आए हैं, जिसके बाद कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 3,46,24,360 हो गई है।  
  • uttarkhand
    सत्यम कुमार
    देहरादून: प्रधानमंत्री के स्वागत में, आमरण अनशन पर बैठे बेरोज़गारों को पुलिस ने जबरन उठाया
    04 Dec 2021
    4 दिसंबर 2021 को उत्तराखंड की अस्थाई राजधानी देहरादून में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आ रहे हैं। लेकिन इससे पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत के लिए आमरण अनशन पर बैठे बेरोजगार युवाओं…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License