NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
हाई कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता अखिल गोगोई को राजद्रोह के आरोप से मुक्त किया
अखिल गोगोई काफी समय से सामाजिक और राजनीतिक आन्दोलनों से जुड़े रहे हैं और बीजेपी के मुखर विरोधी रहे हैं, इसीलिए ये माना जा रहा है कि ये कोर्ट के इस फैसले से असम सरकार के लिए एक बड़ा झटका है |
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
22 Dec 2017
akhil gogoi

गुवाहाटी हाई कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्त्ता और कृषक मुक्ति संग्राम समिति के प्रमुख अखिल गोगोई को राजद्रोह के आरोप से मुक्त कर दिया है | 21 दिसंबर , गुरुवार को आये फैसले में हाई कोर्ट ने गोगोई पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के अंतर्गत लगे नज़रबंदी को ख़ारिज कर दिया है| इससे पहले 13 सितम्बर को उन्हें राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और बाद में उनपर रासुका के तहत 12 और केस लगा दिए गए थेI

अखिल गोगोई के वकील ने मीडिया से कहा कि पहली बात ये कि गोगोई के मामले में संविधान की धारा 22(5) का उल्लंघन हुआ है क्योंकि उन्हें ये बताया नहीं गया था कि वह अपना प्रतिनिधित्व रासुका के अधिकारियों के सामने रख सकते हैं, दूसरी बात ये कि काफी सारे दस्तावेज़ जिनकी बिनाह पर उनपर रासुका की धारा लगायी गयी हमें उपलब्ध नहीं कराए गए थे, और तीसरी बात ये कि क्योंकि इस मामले में मौलिक अधिकारों का हनन हुआ है, राज्य सरकार को रासुका की धारा की तहत सभी प्रक्रियाएँ जल्द से जल्द ख़त्म करनी चाहिए थीं|

सितम्बर में असम की एक रैली में तथाकथित तौर पर एक विवादित भाषण देने के आरोप में अखिल गोगोई पर राजद्रोह की धारा लगायी गयी थी और उन्हें 13 सितम्बर को गिरफ्तार किया गया था | ये रैली ULFA के एक पूर्व उग्रवादी के व्यापारियों द्वारा पीटे जाने के बाद आयोजित की गयी थी, जिसके बाद असम के नागाओन इलाके में दंगे भड़क गए थे |

गौतलब है कि 21 दिसंबर को गोगोई के खिलाफ दर्ज़ हुए रासुका के मामले पर कोर्ट निर्णय देने वाला था, पर उससे एक दिन पहले ही पुलिस ने उनके खिलाफ़ एक और मामला दर्ज़ कर दिया |

कृषक मुक्ति संग्राम समिति के नेताओं का कहना है कि ये सरकार की चाल है, जिससे गोगोई को जेल से बाहर नहीं आने दिया जाए |

अखिल गोगोई काफी समय से सामाजिक और राजनीतिक आन्दोलनों से जुड़े रहे हैं और बीजेपी के मुखर विरोधी रहे हैं, इसीलिए ये माना जा रहा है कि ये कोर्ट के इस फैसले से असम सरकार के लिए एक बड़ा झटका है | वो किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ाने, कर्ज़ माफ़ी और किसानों से जुड़े बाकि मुद्दे भी उठाते रहे हैं | इसके आलावा वो डैम विरोधी आन्दोलन, लैंड माफिया के खिलाफ आन्दोलन और भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन में भी मुख्य भूमिका निभाते रहे हैं | 2010 में पब्लिक कॉज़ रिसर्च फाउंडेशन के द्वारा संपूर्ण ग्राम रोज़गार योजना में 1.25 करोड़ का घोटाला सामने लाने के लिए RTI अवार्ड मिला था I

गौतलब है कि 20 और 21 नवम्बर को दिल्ली में हुई किसान मुक्ति संसद  (जहाँ सारे देश से 180 से ज्यादा किसान संगठन आये थे) ने भी अखिल गोगोई पर रासुका की धारा हटाने और उनकी रिहाई की माँग करी थी |

Akhil gogoi
Assam
BJP
KMSS
Gauhati High Court

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • PUNJAB
    शिव इंदर सिंह
    कृषि कानूनों की वापसी के बाद क्या सोच रहे हैं पंजाब के लोग?
    29 Nov 2021
    कानूनों की वापसी के ऐलान के बाद पंजाब में जश्न का माहौल है। पंजाब के लोग इसे किसान आंदोलन की बड़ी जीत के रूप में देख रहे हैं। लेकिन भाजपा के प्रति विरोध और गुस्से का भाव कम होने का नाम नहीं ले रहा।
  • civil society
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    खुला पत्र : क्या नागरिक समाज देश का दुश्मन है?
    29 Nov 2021
    अखिल भारतीय और केन्द्रीय सेवाओं के पूर्व सिविल सेवकों के समूह ने देशवासियों के नाम एक खुला पत्र जारी करके नागरिक समाज को देश और शासन के दुश्मन के रूप में रेखांकित किए जाने पर चिंता जताई है।
  • Munawar Faruqui
    सत्यम् तिवारी
    "अनेकता में एकता" वाले देश भारत में अल्पसंख्यकों की हैसियत क्या है?
    29 Nov 2021
    मुनव्वर फ़ारूक़ी, चर्च की घटना या नमाज़ में ख़लल डालने की ख़बरें सिर्फ़ 3 घटनाएँ नहीं हैं, बल्कि यह उन सैकड़ों हज़ारों घटनाओं की झलक भर हैं जो देश के हर कोने में अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ घटित हो रही हैं।
  • Yogi
    सोनिया यादव
    यूपी: परीक्षाओं का पेपर लीक और रद्द होना योगी सरकार की बड़ी विफलता है!
    29 Nov 2021
    सरकार के भ्रष्टाचार पर जीरों टॉलरेंस के दावे के बीच बार-बार सरकारी भर्तियों और परीक्षाओं में भ्रष्टाचार के मामले कैसे सामने आ रहे हैं, क्या सरकार की नीयत और नीति अलग-अलग है?
  • kisan andolan
    ओँकार सिंह
    तमाम मुश्किलों के बीच किसानों की जीत की यात्रा और लोकतांत्रिक सबक़
    29 Nov 2021
    जब एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में मांग और अधिकार की लड़ाई को देशद्रोह के खांचे में फिट किया जा रहा था, तब किसान आंदोलन संघर्ष की संजीवनी के रूप में उभरा। साल भर सड़क पर दमन और क्रूरता की हदें झेलकर अंतत…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License