NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
हालिया सरकारी सर्वेक्षण कहता है कि रोज़गार मात्र 1.8% की सालाना दर से बढ़ रहे हैं
श्रम ब्यूरो के सर्वेक्षण में विनिर्माण और आईटी/बीपीओ सहित आठ प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया।
सुबोध वर्मा
30 Apr 2018
Translated by महेश कुमार
Jobs

सरकार के श्रम ब्यूरो द्वारा आयोजित तिमाही रोजगार सर्वेक्षण (क्यूईएस) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार देश में नौकरी की वृद्धि की एक अंधकारमय तस्वीर पेश करता है। जुलाई से अक्टूबर 2017 को कवर करने वाली नवीनतम सर्वेक्षण रिपोर्ट हाल ही में जारी की गई थी। यह 2016 की पहली तिमाही के आधारभूत सर्वेक्षण के साथ शुरू होने वाली एक नई श्रृंखला की सातवीं रिपोर्ट है। सभी त्रैमासिक रिपोर्टों को जोड़ने से, यह अप्रैल 2016 से अक्टूबर 2017 तक 18 महीने की  हालत को प्रदान करता है। इस अवधि में कुल 5.56 लाख रोज़गार को अप्रैल 2016 में नौकरियों को 205.22 लाख मौजूदा नौकरियों के आधारभूत स्तर से जोड़ा गया था। यह प्रति वर्ष लगभग 1.8 प्रतिशत  की कम बढ़ोतरी की चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है।

job

सर्वेक्षण आठ क्षेत्रों - विनिर्माण, निर्माण, व्यापार, परिवहन, आवास और रेस्तरां, आईटी/बीपीओ, शिक्षा और स्वास्थ्य में फैले उद्यमों में किया जाता है। ये क्षेत्र 6 वीं ईसी के समय 10 या अधिक श्रमिकों (2013-14 की 6 वीं आर्थिक जनगणना में उल्लिखित) और कुल रोजगार (131.2 9 मिलियन व्यक्तियों) का लगभग 15 प्रतिशत  इकाइयों के कुल रोजगार का लगभग 81% है।

इस सीमा के भीतर, तिमाही रोज़गार सर्वेक्षण देश में रोजगार वृद्धि में प्रवृत्ति को इंगित करता है और यह एकमात्र सरकार का नियमित सर्वेक्षण है जो नौकरियों के डेटा को जानने का एकमात्र स्रोत है।

विनिर्माण क्षेत्र में नौकरियां, जो अप्रैल 2016 में 101.17 लाख श्रमिकों को रोजगार देती है, इसमें  18 महीने के दौरान केवल 1.65 लाख की वृद्धि हुई, इस प्रकार नौकरी की वृद्धि सिर्फ 1.6 प्रतिशत  थी। निर्माण क्षेत्र जिसमें 3.67 लाख श्रमिकों के साथ इसने मूल रूप से 38,000 श्रमिकों के रोज़गार को खो दिया, जो 10 प्रतिशत से अधिक की शुद्ध नौकरी के नुकसान के साथ समाप्त हुए। आवास और रेस्तरां क्षेत्र एक और क्षेत्र था जिसने नौकरी के नुकसान को दिखाया, हालांकि मामूली, लगभग 0.3 प्रतिशत।

स्वास्थ्य क्षेत्र में अधिकतम नौकरियां पैदा की गईं, जो अप्रैल 2016 में 12 लाख से बढ़कर 13 लाख हुयी वह भी करीब डेढ़ साल के बाद बढ़ीं, जो लगभग 8.5 प्रतिशत थी। शिक्षा में भी लगभग 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

नवीनतम तिमाही रोज़गार सर्वेक्षण 7 रिपोर्ट में कहा गया है कि सर्वेक्षण किए गए लगभग 49 प्रतिशत कर्मचारी नियमित कर्मचारी थे जबकि 33 प्रतिशत अनुबंध कर्मचारी थे और 17 प्रतिशत  आकस्मिक कर्मचारी थे। दिलचस्प बात यह है कि, 2017 के तीन तिमाहियों में जिसके लिए डेटा उपलब्ध है, नियमित रोजगार गिर गया है, जबकि अनुबंध और आकस्मिक रोजगार दोनों बढ़ गए हैं।

Jobs
IT/BPO
Job Growth

Related Stories

महंगाई की मार मजदूरी कर पेट भरने वालों पर सबसे ज्यादा 

पिछले 5 साल में भारत में 2 करोड़ महिलाएं नौकरियों से हुईं अलग- रिपोर्ट

भारत में छात्र और युवा गंभीर राजकीय दमन का सामना कर रहे हैं 

भाजपा की जीत के वे फैक्टर, जिसने भाजपा को बनाया अपराजेय, क्यों विपक्ष के लिए जीतना हुआ मुश्किल?

मध्य प्रदेश के जनजातीय प्रवासी मज़दूरों के शोषण और यौन उत्पीड़न की कहानी

​गत 5 वर्षों में पदों में कटौती से सरकारी नौकरियों पर छाए असुरक्षा के बादल

कोविड, एमएसएमई क्षेत्र और केंद्रीय बजट 2022-23

दलित भोजनमाता को दिल्ली में नौकरी के 'आप' के दावे पर सवाल.. दिल्ली में तो यह पद ही नहीं

महामारी ने एक निस्वार्थ शिक्षक और उसके गाँव के सपनों को चूर-चूर कर दिया

मोदी जी, शहरों में नौकरियों का क्या?


बाकी खबरें

  • srilanka
    न्यूज़क्लिक टीम
    श्रीलंका: निर्णायक मोड़ पर पहुंचा बर्बादी और तानाशाही से निजात पाने का संघर्ष
    10 May 2022
    पड़ताल दुनिया भर की में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने श्रीलंका में तानाशाह राजपक्षे सरकार के ख़िलाफ़ चल रहे आंदोलन पर बात की श्रीलंका के मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. शिवाप्रगासम और न्यूज़क्लिक के प्रधान…
  • सत्यम् तिवारी
    रुड़की : दंगा पीड़ित मुस्लिम परिवार ने घर के बाहर लिखा 'यह मकान बिकाऊ है', पुलिस-प्रशासन ने मिटाया
    10 May 2022
    गाँव के बाहरी हिस्से में रहने वाले इसी मुस्लिम परिवार के घर हनुमान जयंती पर भड़की हिंसा में आगज़नी हुई थी। परिवार का कहना है कि हिन्दू पक्ष के लोग घर से सामने से निकलते हुए 'जय श्री राम' के नारे लगाते…
  • असद रिज़वी
    लखनऊ विश्वविद्यालय में एबीवीपी का हंगामा: प्रोफ़ेसर और दलित चिंतक रविकांत चंदन का घेराव, धमकी
    10 May 2022
    एक निजी वेब पोर्टल पर काशी विश्वनाथ मंदिर को लेकर की गई एक टिप्पणी के विरोध में एबीवीपी ने मंगलवार को प्रोफ़ेसर रविकांत के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया। उन्हें विश्वविद्यालय परिसर में घेर लिया और…
  • अजय कुमार
    मज़बूत नेता के राज में डॉलर के मुक़ाबले रुपया अब तक के इतिहास में सबसे कमज़ोर
    10 May 2022
    साल 2013 में डॉलर के मुक़ाबले रूपये गिरकर 68 रूपये प्रति डॉलर हो गया था। भाजपा की तरफ से बयान आया कि डॉलर के मुक़ाबले रुपया तभी मज़बूत होगा जब देश में मज़बूत नेता आएगा।
  • अनीस ज़रगर
    श्रीनगर के बाहरी इलाक़ों में शराब की दुकान खुलने का व्यापक विरोध
    10 May 2022
    राजनीतिक पार्टियों ने इस क़दम को “पर्यटन की आड़ में" और "नुकसान पहुँचाने वाला" क़दम बताया है। इसे बंद करने की मांग की जा रही है क्योंकि दुकान ऐसे इलाक़े में जहाँ पर्यटन की कोई जगह नहीं है बल्कि एक स्कूल…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License