NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
“हड़ताल का कौन ज़िम्मेदार-भारत सरकार, भारत सरकार”
“इस दो दिन कि हड़ताल ने देश की सरकारों को बता दिया है कि मज़दूर के बिना आप देश नहीं चला सकते हैं। मज़दूर विरोधी सरकार को जाना होगा, इसी का ऐलान करने के लिए देश भर के करोड़ो मज़दूर सड़क पर उतरे।”

मुकुंद झा
09 Jan 2019
#WorkersStrikeBack

8-9 जनवरी की आम हड़ताल कई मायनो में ऐतिहासिक रही, इसमें 20 करोड़ से भी ज़्यादा मज़दूर-कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। ये आज़ाद भारत की दूसरी दो दिन की हड़ताल थी। इससे पहले फरवरी 2013 में दो दिन की हड़ताल हुई थी परन्तु उसमें इतनी बड़ी संख्या में मजदूरों कि भागीदारी नहीं हुई थी। इसबार की हड़ताल में देश के एक करोड़ से अधिक स्कीम वर्कर के साथ असंगठित क्षेत्र के मजदूर शामिल हुए। इसके साथ किसान मजदूरों ने भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। इस दौरान कई जगह मजदूरों की पुलिस से सीधी झड़प हुई। कई जगह तो मजदूरों को गंभीर चोटे भी आईं। कई राज्यों में सरकारों ने मजदूरों को एस्मा  लगाकर डराने कि कोशिश भी की लेकिन इसके बावजूद इस हड़ताल में करोड़ों की संख्या में भागीदारी इस हड़ताल की सफलता को बताता है।

मज़दूरों की 12 सूत्री मांगें थी, जिसको लेकर मजदूर देश भर में सड़कों पर उतरा था। इन सभी मांगों को लेकर पूरे देश में 7 जनवरी के रात 12 बजे से ही कामबंदी शुरू हो गई थी। हड़ताल को कामयाब बनाने के लिए अलग-अलग राज्यों में रैली और गेट मीटिंग का आयोजन किया गया। कई जगह रेल रोको, सड़क रोको आन्दोलन हुए। भारी संख्या में महिला स्कीम वर्कर और कामगारों ने भी हिस्सा लिया। आज भी देश के तमाम औद्योगिक क्षेत्र बंद रहे और अलग राज्यों में रैली और विरोध प्रदर्शन किया।

नरेला में हड़ताल.jpg

(नरेला में आज सुबह हड़ताल कि फ़ोटो)

इस हड़ताल के अंतिम दिन सभी दस ट्रेड यूनियन और फेडरेशन के केन्द्रीय नेतृत्व में आज दिल्ली के मंडी हाउस से संसद तक मार्च किया गया जिसमे सरकार को चेतावनी दी गई कि वो मजदूर विरोधी नीति को लाना बंद करे नहीं तो मजदूर अपना हक लड़कर लेना जनता है। यूनियन के नेताओं ने कहा कि यह तो केवल झांकी थी। अगर सरकार नहीं मानी  तो इससे बड़े और आन्दोलन होंगे।

“हम मजदूर भाई भाई-लेकर रहेंगे पाई-पाई, जो हम से टकराएगा-वो चूर चूर हो जाएगा, मज़दूर एकता ज़िंदाबाद, मोदी न योगी, देश पर राज करेगा मजदूर किसान, इंकलाब जिंदाबाद, हड़ताल का कौन जिम्मेदार-भारत सरकार, भारत सरकार, हर ज़ोर-जुल्म के टक्कर में हड़ताल हमारा नारा है..”आज दिल्ली में रैली की शुरुआत इन गगनभेदी नारों से हुई। मंडी हाउस से संसद मार्ग तक का रास्ता इन्हीं नारों से गूंजता रहा। रैली में अलग क्षेत्र के मज़दूर शामिल हुए और उन सभी की मुख्य समस्याएं लगभग एक समान थी। कुछ अलग मांगें भी थीं।

रेलवे कर्मचारी

रेलेव.PNG

उत्तरी रेलवे कर्मचारी यूनियन के नेता एस कुमार ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा की रेलवे में  नौकरी में अप्रेंटिस को प्राथमिकता दी जाती थी,परन्तु अब इसको तबाह करने की कोशिश हो रही है, जिससे इसके तहत ट्रेनिंग पा चुके नौजावन को नौकरी नहीं मिल रही है। इसको लेकर हमारा विरोध है।

पुरानी पेंशन  

कर्मचारियों की दूसरी सबसे अहम मांग है पुरानी पेंशन की बहाली। सरकार की नए पेंशन नीति का विरोध केवल रेलवे कर्मचारी ही नहीं बल्कि सभी निगमों के कर्मचारी कर रहे हैं। उनके मुताबिक इस नई नीति के तहत कर्मचारी की पेंशन सुनिश्चित नहीं है, जो पहले निश्चित होती थी। अब उनके पैसों को सरकार शेयर मार्केट में लगा रही है, उस पर फायदा हो या नुकसान वो कर्मचारी का होगा। यानी इसमें बड़ा जोखिम है। इसी को लेकर सभी कर्मचारी इसका विरोध कर रहे।

निजीकरण

देश का सबसे ज्यादा नौकरी पैदा करने वाला क्षेत्र रेलवे है, परन्तु सरकार इसको भी बर्बाद करना चाह रही है। रेलवे को पूंजीपतियों को बेचा जा रहा है। रेलवे कर्मचारियों का कहना था कि सरकार ने कई स्टेशनों को बेचने का काम शुरू भी कर दिया है और वो हर तरह से अपने पूंजीपति मित्रों को फायदा पहुंचाना चाहती है।

बैंक कर्मचारी- बीमा कर्मचारी

बैंक कर्मचारी.jpg

अमित जो एक बैंक कर्मचारी हैं उन्होंने बताया कि लगातार जिस तरह से बैंकों में छंटनी हो रही है, उससे सभी अस्थायी कर्मचारियों की नौकरी पर तो संकट है ही, साथ ही अभी जो कर्मचारी काम कर रहे हैं, उनपर भी काम का दबाव बढ़ रहा है। इसके साथ ही सरकार लगतार बैंको का मर्जर/विलय कर रही है, उससे भी कर्मचारियों में भय का माहौल है।

डीटीसी कर्मचारी

आज के रैली में डीटीसी के कर्मचारी भी शामिल हुए। इनका कहना था कि केंद्र और राज्य दोनों ही सरकारों ने इन्हें ठगा है। सबने पहले पक्का करने का वादा किया परन्तु किसी ने भी पूरा नहीं किया।

निर्माण मजदूर

निर्माण मजदूर.PNG

इस रैली में आये निर्माण मजदूरों का कहना था कि सरकार हमेशा ही प्रदूषण के नाम पर उनपर हमला करती है। इसके साथ ही लगातर श्रम कानूनों में सुधार के नाम पर श्रम कानूनों को खत्म किया जा रहा है। निर्माण मज़दूर कहते हैं कि केंद्र की मोदी सरकार निर्माण मजदूरों के लिए बने कानूनों को खत्म करने में लगी हुई है।

सफाई कर्मचारी  

sansad marchnew1_0.jpg

इस रैली में आये सफाई कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें न तो न्यूनतम वेतन मिलता है, न समय पर वेतन मिलता है। इसके साथ ही उनके साथ बहुत बुरा बर्ताव किया जाता है। आज देश में हाथ से मैला उठाना गैरक़ानूनी है, मगर फिर भी हमें सीवर में बिना किसी सुरक्षा इंतज़ाम के उतार दिया जाता है। इसके चलते न जाने कितने मजदूरों ने अपनी जान गंवाई है।

जल बोर्ड के कर्मचारी

जल बोर्ड.jpg

अशोक कुमार जो दिल्ली जल बोर्ड कर्मचारी यूनियन के महासचिव हैं उन्होंने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि  दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारी कर्मचारियों के फंड के पैसे का कोई हिसाब नहीं दे रहे, जो संदेह पैदा करता है। वो आगे कहते हैं जो कर्मचारी रिटायर हो रहे हैं उन्हें उनकी भविष्य निधि में कितना धन जमा हुआ और उस पर कितना ब्याज है, इसका कोई हिसाब नहीं दिया जा रहा, बल्कि दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारी कर्मचारियों को एक अंदाजे से कुछ रकम दे रहे हैं और कई कर्मचारियों को तो किसी भी प्रकार का कोई भुगतान नहीं किया जा रहा है।

सीटू के महासचिव तपन सेन ने इस हड़ताल को सफल बताते हुए न्यूज़क्लिक से कहा की ये जो हड़ताल का दूसरा दिन है इसमें इसका दायर और बढ़ा है, जो मजदूर इसमें कल शामिल नहीं हो पाए थे, वो भी इसमें आज शामिल हुए। उन्होंने कहा की ये हड़ताल केवल मजदूर के लिए नही है बल्कि देश के हित में है।

 

भाकपा-माले की पोलित ब्यूरो सदस्य और ऐपवा की महासचिव कविता कृष्णन ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने कल सवर्ण जाति के लोग जो आर्थिक रूप से पिछड़े हैं उनके लिए भी आरक्षण कि बात की है और उन्होंने जो गरीब के लिए दायरा तैयार किया है उसके मुताबिक 8 लाख सलाना कमाने वाला गरीब होगा लेकिन दो दिनों से 20 करोड़ मजदूर अपने लिए 18 हज़ार  रुपये न्यूनतम वेतन मांग रहा है जो कि सालाना 2 लाख 16 हज़ार होता है, वो तो सरकर दे नहीं रही है।

आगे वो कहती हैं कि इस हड़ताल ने देश को मजदूरों का महत्व बता दिया है कि अगर वो काम न करे तो देश पूरी तरह से ठप्प पड़ जाएगा।

सीपीएम की पोलित ब्यूरो सदस्य वृंदा करात ने कहा कि केंद्र कि मोदी सरकार लगातर श्रम कानूनों को सुधार के नाम पर कमज़ोर कर रही है। ये सरकार श्रम कानूनों को खत्म करने में लगी हुई है और लगातार पूंजीपति के हक़ में फिक्स टर्म जैसा मज़दूर विरोधी कानून बना रही है, जिसमें मजदूर एक तरह का गुलाम बनकर रह जाएगा। उसे किसी भी प्रकार का श्रम कानून का लाभ नहीं मिलेगा।

बृंदा कारात.jpg

आगे वो कहती हैं कि इस दो दिन कि हड़ताल ने देश की सरकारों को बता दिया है कि मज़दूर के बिना आप देश नहीं चला सकते हैं। मज़दूर विरोधी सरकार को जाना होगा, इसी का ऐलान करने के लिए देश भर के करोड़ो मज़दूर सड़क पर उतरे। 

 

 

 

 

 


 

#WorkersStrikeBack
#श्रमिकहड़ताल
workers protest
Anti Labour Policies
8-9 january strike
CITU
AICCTU
Brinda Karat

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

मुंडका अग्निकांड के खिलाफ मुख्यमंत्री के समक्ष ऐक्टू का विरोध प्रदर्शन

मुद्दा: आख़िर कब तक मरते रहेंगे सीवरों में हम सफ़ाई कर्मचारी?

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

विधानसभा घेरने की तैयारी में उत्तर प्रदेश की आशाएं, जानिये क्या हैं इनके मुद्दे? 

मुंडका अग्निकांड: लापता लोगों के परिजन अनिश्चतता से व्याकुल, अपनों की तलाश में भटक रहे हैं दर-बदर

#Stop Killing Us : सफ़ाई कर्मचारी आंदोलन का मैला प्रथा के ख़िलाफ़ अभियान


बाकी खबरें

  • Drugs worth Rs 313 crore seized from three people in Gujarat
    भाषा
    गुजरात में तीन लोगों के पास से 313 करोड़ रुपये मूल्य की मादक पदार्थ जब्त
    11 Nov 2021
    एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इससे पहले पुलिस ने मंगलवार को महाराष्ट्र के ठाणे के रहनेवाले सज्जाद घोसी नाम के व्यक्ति को एक गुप्त सूचना के आधार पर खम्भलिया कस्बे के एक अतिथिगृह से गिरफ्तार किया…
  • sc
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    त्रिपुरा हिंसा:सुप्रीम कोर्ट वकीलों, पत्रकार के खिलाफ यूएपीए के तहत दर्ज प्राथमिकी रद्द करने के अनुरोध पर करेगी सुनवाई
    11 Nov 2021
    प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और हिमा कोहली की पीठ को अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सूचित किया कि तथ्य खोज समिति का हिस्सा रहे दो वकील और एक पत्रकार के खिलाफ उनकी सोशल मीडिया…
  • Varun Gandhi said on Kangana Ranaut's remarks about independence - call it madness or sedition
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    आजादी को लेकर कंगना रनौत की टिप्पणी पर बोले वरूण गांधी - इसे पागलपन कहूं या देशद्रोह
    11 Nov 2021
    कंगना रनौत की आलोचना करते हुए गांधी ने ट्वीट कर कहा, ''कभी महात्मा गांधी जी के त्याग और तपस्या का अपमान, कभी उनके हत्यारे का सम्मान, और अब शहीद मंगल पाण्डेय से लेकर रानी लक्ष्मीबाई, भगत सिंह,…
  •  PM's parliamentary constituency Banaras breathing poisonous air
    विजय विनीत
    स्पेशल रिपोर्टः ज़हरीली हवा में सांस ले रहे पीएम के संसदीय क्षेत्र बनारस के लोग
    11 Nov 2021
    दिवाली के बाद से ही पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में स्थिति दमघोंटू बनी हुई है। इस शहर की एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 300 से नीचे उतरने का नाम नहीं ले रही है। यह स्थिति उन लोगों के…
  • maharastra
    भाषा
    महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम के कर्मचारियों की हड़ताल जारी, मंत्री ने यूनियन से बात की
    11 Nov 2021
    एमएसआरटीसी के एक अधिकारी ने कहा, "आज राज्य भर में सभी 250 डिपो बंद हैं। कल, कम से कम तीन डिपो चालू थे, लेकिन आज वे भी बंद हैं।" एमएसआरटीसी के कर्मचारी, घाटे में चल रहे निगम के राज्य सरकार में विलय की…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License