NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
हिमाचल : बस हादसे रोकने और उचित सेवा की मांग को लेकर सीपीएम का धरना-प्रदर्शन
प्रदर्शन के दौरान सीपीएम विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि सरकारी बसों में ओवरलोडिंग बंद है, जबकि निजी बसों में ओवरलोडिंग हो रही है।
मुकुंद झा
13 Jul 2019
HIMCHAL CPM PROTEST

हिमाचल प्रदेश में हो रही बस दुर्घटनाओं को रोकने व जनता को उचित बस सुविधा देने की मांग को लेकर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) ने गुरुवार को पथ परिवहन के प्रबंध निदेशक के कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन व धरना दिया। प्रदर्शनकरियों का कहना था कि प्रशासन सरकारी बसों पर तो सख्ती बरत रहा है, मगर निजी बस संचालकों पर मेहरबानी की जा रही है और वे धड़ले से ओवरलोडिंग कर बस चला रहे हैं। 
प्रदर्शन के दौरान सीपीएम के विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि सरकारी बसों में ओवरलोडिंग बंद है, जबकि निजी बसों में ओवरलोडिंग हो रही है। धरने प्रदर्शन के माध्यम से सीपीएम ने सरकार और एचआरटीसी द्वारा जनता को उचित बस सेवा उपलब्ध करवाने में विफलता को सामने रखा। सीपीएम ने कहा कि एचआरटीसी में ड्राइवर और कंडक्टर के सैकड़ों पद खली पड़े हैं। उन्होंने कहा कि इस अभियान में सबसे अधिक स्कूल के बच्चे विशेष रूप से छात्राओं, किसानों, कर्मचारियों, महिलाओं आदि को परेशानी उठानी पड़ रही है। 


राकेश सिंघा ने कहा की सरकार अपनी विफलता को छुपाने की कोशिश कर रही है, ये उसकी नैतिक जिम्मेदारी है कि वो लोगों के लिए सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराए। लेकिन आज प्रदेश में सार्वजानिक परिवहन को खत्म करने की कोशिश हो रही है। 
सीपीएम के नेता और शिमला के पूर्व मेयर संजय चौहान ने कहा की प्रशासन ओवरलोडिंग के नाम पर बसों से लोगों को उतार रहा है। इसमे विशेष रूप से पथ परिवहन की बसों में स्कूली बच्चों को चिह्नित कर उन्हें परेशान किया जा रहा है। जबकि निजी बसों में ओवरलोडिंग बदस्तूर जारी है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो कई दिनों तक बस सेवा नही चलाई जा रही हैं जिसके कारण आज बच्चों के साथ साथ गरीब किसान बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। उसे अपनी सब्जी या फल के एकाध नग को मण्डियों तक पहुंचाने में परेशानी हो रही है और उसकी सब्जी व फल सड़ रहे हैं। 
क्या है पूरा मामला? 
आपको बता दें कि हिमाचल में बस दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। अभी हाल में ही बंजर में बस दुर्घटना हुई। जिसमें 46 लोग मारे गए और लगभग 37 लोग घायल हुए थे। इसके अलावा शिमला में स्कूल बस दुर्घटना में दो छात्रों और चालक की मौत हो गई थी। इसके बाद से हिमाचल प्रदेश सरकार ने ओवरलोडिंग के प्रति कुछ सख्ती दिखाई, लेकिन यह करते हुए वह इससे निपटने के लिए जो जरूरी इंतजाम करना भूल गई। 
हैरानी की बात यह है कि स्थानीय लोगों के मुताबिक यह सख्ती हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम  की बसों तक ही सीमित है, जबकि निजी बसें ओवरलोड चलती रहती हैं। 
प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है की सरकार की इस दोषपूर्ण नीति के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में जनता को बहुत नुकसान हो रहा है। लोगों की शिकायत है कि भले ही कोई बसों में खड़ा न हो, इसके बावजूद एचआरटीसी कंडक्टर या पुलिस उन्हें इन बसों में चढ़ने नहीं देती। स्थिति इस स्तर तक बिगड़ गई है कि लोग का गुस्सा फूट रहा है और सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। 

31773cdd-e41a-48b6-9225-85ff6215b022.jpg
सीपीएम का कहना है कि प्रबन्ध निदेशक से वार्ता के दौरान उन्होंने माना कि पथ परिवहन निगम के पास ड्राइवर व कंडक्टरों की कमी चल रही है जिसके कारण पथ परिवहन निगम के बस रूट प्रभावित हो रहे हैं। प्रबंध निदेशक से मांग की गई कि जहाँ केवल एक या दो बसें चलती हैं वहाँ बस सेवा तुरन्त बहाल की जाए तथा पथ परिवहन निगम की बसों में ओवरलोडिंग के नाम पर जनता को परेशान करना बंद करे और यदि ऐसे ही हालात रहते हैं तो नई बसे चलाई जाएं। प्रबंधन निदेशक ने जहाँ एक बस चलती है उसे तुरंत बहाल करने की बात को स्वीकार किया तथा जल्द इस पर ठोस निर्णय की बात कही। उन्होंने कहा कि ओवरलोडिंग को लेकर वे प्रशासन से बात करेंगे। 
प्रबंधन के इस आश्वासन के पश्चात धरना स्थगित कर दिया गया। सीपीएम का कहना है कि यदि सरकार व पथ परिवहन निगम, जनता को आ रही परेशानी को एक सप्ताह के भीतर दूर नही करते हैं तो जनता के साथ मिलकर अंदोलन को और तेज़ किया जाएगा और इसे तब तक जारी रखा जाएगा जबतक सरकार प्रदेश में बस सेवा को सुचारू नहीं करेगी।

Himachal Pradesh
CPM
HRTC
Rakesh Singha
shimla

Related Stories

हिमाचल: प्राइवेट स्कूलों में फ़ीस वृद्धि के विरुद्ध अभिभावकों का ज़ोरदार प्रदर्शन, मिला आश्वासन 

देशव्यापी हड़ताल को मिला कलाकारों का समर्थन, इप्टा ने दिखाया सरकारी 'मकड़जाल'

हिमाचल प्रदेश: नियमित करने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरीं आंगनबाड़ी कर्मी

हिमाचल: सेब के उचित दाम न मिलने से गुस्साए किसानों का प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन

हिमाचल: आईजीएमसी वर्कर्स यूनियन का आउटसोर्स व ठेका मज़दूरों की मांगों को लेकर प्रदर्शन  

हिमाचल प्रदेश का मज़दूर आंदोलन शहादत की अनोखी मिसाल है

हिमाचल: होटल मज़दूर लाल झण्डा यूनियन ने होटल ईस्टबोर्न की संपत्ति कुर्क कर के मज़दूरों को पैसा देने की मांग की

हिमाचल: होटल ईस्टबोर्न के कर्मचारियों ने अपने 16 महीने के बक़ाया वेतन देने की मांग को लेकर किया विरोध प्रदर्शन

हिमाचल में हुई पहली किसान महापंचायत, कृषि क़ानूनों के विरोध के साथ स्थानीय मुद्दे भी उठाए गए!

हिमाचल: शिमला में हज़ारों मज़दूरों ने सरकार पर बोला हल्ला, सीएम को सौंपा मांगपत्र


बाकी खबरें

  • govt employee
    अनिल जैन
    निजीकरण की आंच में झुलस रहे सरकारी कर्मचारियों के लिए भी सबक़ है यह किसान आंदोलन
    28 Nov 2021
    किसानों की यह जीत रेलवे, दूरसंचार, बैंक, बीमा आदि तमाम सार्वजनिक और संगठित क्षेत्र के उन कामगार संगठनों के लिए एक शानदार नज़ीर और सबक़ है, जो प्रतिरोध की भाषा तो खूब बोलते हैं लेकिन कॉरपोरेट से लड़ने…
  • poverty
    अजय कुमार
    ग़रीबी के आंकड़ों में उत्तर भारतीय राज्यों का हाल बेहाल, केरल बना मॉडल प्रदेश
    28 Nov 2021
    मल्टीडाइमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स के मुताबिक केरल के अलावा भारत का और कोई दूसरा राज्य नहीं है, जहां की बहुआयामी गरीबी 1% से कम हो। 
  • kisan andolan
    शंभूनाथ शुक्ल
    हड़ताल-आंदोलन की धार कुंद नहीं पड़ी
    28 Nov 2021
    एक ज़माने में मज़दूर-किसान यदि धरने पर बैठ जाते थे तो सत्ता झुकती थी। पर पिछले चार दशकों से लोग यह सब भूल चुके थे।
  • Hafte Ki Baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    संवैधानिक मानववाद या कारपोरेट-हिन्दुत्ववाद और यूपी में 'अपराध-राज'!
    27 Nov 2021
    संविधान दिवस के मौके पर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोपों-प्रत्यारोपो की खूब बौछार हुई. क्या सच है-संविधानवाद और परिवारवाद का? क्या भारत की सरकारें सचमुच संविधान के विचार और संदेश के हिसाब से…
  • crypto
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्या Crypto पर अंकुश ज़रूरी है?
    27 Nov 2021
    मोदी सरकार क्रिप्टोकरेंसी पर अंकुश लगा रही हैI लेकिन आखिर यह क्रिप्टोकरेंसी है क्या? क्या यह देश में मुद्रा की जगह ले सकती है?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License