NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
हिमाचल के सेब किसान संकट में, 24 से आंदोलन का ऐलान
उत्पाद का सही दाम नहीं मिलने से परेशान सेब किसान 24 सिंतबर से शिमला के नारकण्डा में अनिश्चितकालीन आंदोलन करेंगे।
मुकुंद झा
22 Sep 2018
सेब किसान

सेब की खेती से हिमाचल को पहचान दिलाने वाले किसान आजकल काफ़ी निराश हैं। अब ये निराशा गुस्से में बदली तो वहाँ के किसानों ने सरकार के खिलाफ़ मोर्चा खोल दिया है। मंडियों में मनमानी और अपने उत्पाद का सही दाम न मिलने से परेशान किसानों ने 24 सिंतबर से शिमला के नारकण्डा में अनिश्चितकालीन आंदोलन का ऐलान किया है। ये आंदोलन किसान संघर्ष समिति के बैनर के तहत होगा ये समिति हिमाचल किसान सभा के नेतृत्व में बनी है।

किसानों का कहना है कि मंडियों में हो रही मनमानी पर सरकार चुप्पी साधे हुए है और 2005 में किसानों को हक़ दिलाने वाले हिमाचल प्रदेश कृषि और बागवानी उत्पाद मार्केटिंग (विकास व नियमन) एक्ट (ए पी एम सी) भी आज तक लागू नहीं हुआ है | सरकार भी अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है। इसबार वैसे ही इस साल सेब की पैदावार कम होने से किसान ऐसे ही परेशान हैं, उसपर से बिचौलियों के बढ़ते प्रभाव से वो और मुश्किल में हैं। अब किसानों ने अपने हक़ के लिए आरपार की लड़ाई लड़ने की ठानी है |

 

हिमाचल प्रदेश के लिए सेब सबसे महत्वपूर्ण फसलों में से एक है। सेब की बागबानी में लगभग राज्य के 44 लाख परिवार जुड़े हुए है, जो कि एक बहुत ही बड़ा आकड़ा है। राज्य के कुल क्षेत्रफल का लगभग 49 प्रतिशत हिस्से में इसकी फसल होती है, जो कुल फल उत्पादन का लगभग 85 प्रतिशत है।

हिमाचल किसान सभा ने कहा है कि, सेब उत्पादकों के संघर्ष जिसे किसान संघर्ष समिति, के बैनर तले किया जा रहा है। करसोग, किन्नौर, आनी, निरमंड, रामपुर, ननखड़ी, बागी, नावर-टिककर, कोटगढ़, कुमारसैन, मतियाना, ठियोग और शिलारू के सेब उत्पादक भी  24 सितंबर, 2018 को नारकण्डा में बड़ी संख्या में आकर अपना विरोध दर्ज करांगे। यहां से ही सेब उत्पादकों का शोषण करने वाले कमीशन एजेंट के खिलाफ आंदोलन को शुरू किया जाएगा।

बीते 17 सितंबर को हुई एक बैठक जिसमें एसडीएम ठियोग, एपीएमसी के सचिव, कृषि विभाग के उपनिदेशक सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों सहित किसान संगठन शामिल थे, उसमें कमीशन एजेंटों की लूट के बारे में गंभीर चर्चा हुई और उन्हें 'हिमाचल प्रदेश कृषि और बागवानी उत्पाद मार्केटिंग (विकास व नियमन) एक्ट 2005 के तहत कार्य करने को कहा। ये बहुत ही दुखद है कि कमीशन एजेंट्स (सेब कारोबारी) ने इसे मानने से साफ इंकार कर दिया और इसे लागू करने को पूरी तरह नकार दिया।

हिमाचल प्रदेश कृषि और बागवानी उत्पाद मार्केटिंग (विकास व नियमन) एक्ट 2005 के तहत सेब कारोबारियों को सेब किसानों को उनकी फसल का दाम उसी दिन देना होता है, परन्तु हिमाचल में 15 दिनों में उनके दाम देना आम बात है, लेकिन अभी कई बागबानों की शिकायत है कि उन्हें साल भर से भी ज्यादा समय होने के बादजूद भुगतान नहीं मिला है। साथ ही अवैध तौर पर सेब के पेटी पर की गई वसूली को लौटाने से मना कर दिया गया।

एक और तथ्य, कमीशन एजेंट्स को सामान की अनलोडिंग के प्रति बॉक्स 5 रुपये लेने की अनुमति है जबकि कमीशन एजेंट्स इसका 6 गुना यानी 30 रुपये प्रति बॉक्स ले रहे हैं। किसानों का कहना है कि कमीशन एजेंट्स इस अतिरिक्त वसूली को किसानों को तुरंत वापस करें, एपीएमसी नियमों के पालन को सुनिश्चित करें जिसे कमीशन एजेंट्स दरकिनार कर रहे है। इसमें प्रदेश की सरकार की भी जिम्मेदारी है जिसने शोषण करने वालों को पूरी आजादी दे रखी है।

हिमाचल में 40 फीसदी आढ़तियों के पास लाइसेंस नहीं हैं।

हिमाचल किसान सभा के नेता और ठियोग से सीपीएम के विधायक राकेश सिंघा ने केंद्र सरकार के उस नारे को याद दिलाते हुए कहा, जिसमें उन्होंने ‘2022 तक किसानों की आमदनी को दुगुना' करने की बात कही है कि ये केवल एक सपना मात्र होगा। ये केवल एक नारा बन कर कर ही किसानों को भ्रमित करता रहेगा।

उन्होंने कहा कि ये इस तरह के भ्रामक नारे तब दिए जा रहे हैं जब आज़ादी के बाद के भारत में देश गंभीर कृषि संकट से जूझ रहा है। कृषि लागत कई गुना बढ़ चुकी है जबकि बाजार में उत्पाद के मूल्य वहीं ठहरे हुए हैं।

सिंघा कहते हैं कि “पेट्रोल व डीजल के दाम गत 4 वर्षों में कई गुना बढ़े हैं जो किसानी व किसानों के उत्पाद के परिवहन के लिए जरूरी वस्तु है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना व मौसम आधारित फसल बीमा योजनाएं किसानों के साथ सिर्फ धोखा हैं। ये किसानों के नाम पर, पूंजीपति बीमा कंपनियों की तिजोरी भरने की योजना मात्र हैं।”

सिंघा ने  हिमाचल सरकार को आगाह करते हुए कहा  कि वो कमीशन एजेंट्स को खुश करने में न लगी रहे। किसान ऐसे समय भी सेब की बिक्री के संकट से गुजर रहा है जब सेब की पैदावार 2 करोड़ पेटी  से भी कम है। बाहर से आने वाले सेब पर आयात कर बढ़ाना मात्र एक'गेम' है। पहले से ही आयात पर कर बढ़ाने की घोषणा, सेब कारोबारियों के लिए आयात का एक सुनहरा मौका देने जैसे था। यही कारण है जिससे आज सेब के दाम में इतनी गिरावट आई जिसे किसानों को भुगतना पड़ रहा है।

apple
kisan andolan
Himachal Pradesh
Rakesh Singha
shimla

Related Stories

हिमाचल में हाती समूह को आदिवासी समूह घोषित करने की तैयारी, क्या हैं इसके नुक़सान? 

विशेष: कौन लौटाएगा अब्दुल सुब्हान के आठ साल, कौन लौटाएगा वो पहली सी ज़िंदगी

किसानों और सत्ता-प्रतिष्ठान के बीच जंग जारी है

केवल विरोध करना ही काफ़ी नहीं, हमें निर्माण भी करना होगा: कोर्बिन

लखीमपुर खीरी हत्याकांड: आशीष मिश्रा के साथियों की ज़मानत ख़ारिज, मंत्री टेनी के आचरण पर कोर्ट की तीखी टिप्पणी

किसान-आंदोलन के पुनर्जीवन की तैयारियां तेज़

MSP पर लड़ने के सिवा किसानों के पास रास्ता ही क्या है?

हिमाचल: प्राइवेट स्कूलों में फ़ीस वृद्धि के विरुद्ध अभिभावकों का ज़ोरदार प्रदर्शन, मिला आश्वासन 

किसान आंदोलन: मुस्तैदी से करनी होगी अपनी 'जीत' की रक्षा

सावधान: यूं ही नहीं जारी की है अनिल घनवट ने 'कृषि सुधार' के लिए 'सुप्रीम कमेटी' की रिपोर्ट 


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पटना : जीएनएम विरोध को लेकर दो नर्सों का तबादला, हॉस्टल ख़ाली करने के आदेश
    06 May 2022
    तीन वर्षीय जीएनएम डिप्लोमा कोर्स में वर्तमान में 198 छात्राएं हैं। उनका कहना है कि पीएमसीएच कैंपस में विभिन्न विभागों में और वार्डों में बड़े पैमाने पर क्लिनिकल प्रशिक्षण की सुविधा है।
  • विजय विनीत
    अब विवाद और तनाव का नया केंद्र ज्ञानवापी: कोर्ट कमिश्नर के नेतृत्व में मस्जिद का सर्वे और वीडियोग्राफी शुरू, आरएएफ तैनात
    06 May 2022
    सर्वे का काम तीन दिन चल सकता है। शाम पांच बजे के बाद काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद के एक किमी के दायरे को कानून व्यवस्था के लिहाज से खाली करा लिया गया। मौके पर दंगा नियंत्रक उपकरणों के साथ…
  • Press Freedom Index
    न्यूज़क्लिक टीम
    Press Freedom Index में 150वें नंबर पर भारत,अब तक का सबसे निचला स्तर
    06 May 2022
    World Press Freedom Index को किस तरह से पढ़ा जाना चाहिए? डिजिटल की दुनिया में अभिव्यक्ति की स्वत्नत्रता के प्लेटफॉर्म बढे है तो क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी बढ़ी है? आबादी के लिहाज़ से दुनिया के…
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    मोदी-शाह राज में तीन राज्यों की पुलिस आपस मे भिड़ी!
    06 May 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के इस एपिसोड में अभिसार बात कर रहे हैं तेजिंदर पाल सिंह बग्गा के गिरफ़्तारी और पूरे मामले की।
  • भाषा
    चुनावी वादे पूरे नहीं करने की नाकामी को छिपाने के लिए शाह सीएए का मुद्दा उठा रहे हैं: माकपा
    06 May 2022
    माकपा की केंद्रीय समिति के सदस्य सुजान चक्रवर्ती ने कहा कि शाह का यह कहना कि सीएए को पश्चिम बंगाल में लागू किया जाएगा, इस तथ्य को छिपाने का एक प्रयास है कि 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले इस मुद्दे पर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License