NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
हिमाचल प्रदेश: एंबुलेंस सेवा पूरी तरह से ठप
एंबुलेंस कर्मचारी कंपनी के शोषण के कारण हड़ताल पर हैं। सरकार मामले को हल करने की जगह एस्मा लगाकर और बिगाड़ दिया हैI
मुकुंद झा
29 Jun 2018
हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश में पिछले कई दिनों से 108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारी हड़ताल पर है जिस कारण मरीजों को बहुत ही कठनाइयों का सामना करना पड़ रहा है | इनसे जुड़े कर्मचारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैI सरकार ने उन पर एसेंशियल सर्विसिज़ मैनेजमेंट एक्ट (एस्मा) लगा दिया है|  प्रदेश में एस्मा लगने के बाद मामला और भड़क गया है| पहले यह हड़ताल केवल चार ज़िलों में थी अब ये बढ़कर सात ज़िलों  में फैल गई है| कर्मचारी संघ का कहना है कि जब तक उनकी माँग पूरी नहीं होती तब तक ये हड़ताल जारी रहेगी | सरकार ने चेतावनी दी थी कि एस्मा लागू होने के बाद यदि कर्मचारी काम पर नहीं लौटते हैं तो उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाएगा। सरकार ने जिला कलेक्टरों से 108 एंबुलेंस को सुचारू तौर पर चलाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने को कहा है।

नेशनल एंबुलेंस सर्विस कर्मचारी यूनियन जीवीके कम्पनी के खिलाफ सडक़ पर उतर आई है।

हड़ताली कर्मचारियों की मुख्य माँगें

·        समय पर वेतन नहीं मिलता है, वो समय पर दिया जाए|

·        पिछले कई सालों से उन्हें कोई इंक्रीमेंट नहीं मिला है वो उन्हें पिछले        पाँच सालों का इन्क्रीमेंट जोड़ कर दिया जाए|

·        साथ ही यह एक गंभीर सवाल है कर्मचारियों के पीएफ भी कम्पनी द्वारा जमा नहीं किया जा रहा है|

·        गाड़ियों के रखरखाव (मैंटीनेंस) की ओर भी ध्यान नहीं दिया जाता, उस पर भी उचित ध्यान दिया जाए|

·        12 से 48 घंटों की ड्यूटी को 8 घन्टे की जाए|

·        महज़ 6 से 7 हजार रुपए वेतन मिलता है और वह भी समय पर नहीं मिलता। वेतन में बढ़ोत्तरी की जाए |

·        कर्मचारियों की मुख्य माँग है कि प्रदेश सरकार कम्पनी को हटाने को लेकर सख्त कदम उठाए और सभी कर्मचारियों को स्वास्थ्य विभाग के दायरे में लाया जाये।

कर्मचरियों का कहना है कि जब किसी ने उनकी बात नहीं सुनी, तब ये कर्मचारी हड़ताल पर गए है इससे पहले कंपनी व प्रशासन की लापरवाही के खिलाफ एक दिन की सांकेतिक हड़ताल की गई थी। बावजूद इसके कर्मचारियों की माँगों पर कोई गौर नहीं हुआ। इसके बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया गया है। पाँच साल से कंपनी व प्रशासन के समक्ष माँगें रखने के बावजूद कोई कार्यवाही न होने पर कर्मचारी परेशान थे और उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाने को मज़बूर होना पड़ा। कंपनी श्रम कानून का उल्लंघन कर रही है। आठ घंटे की जगह 48 घंटे काम लिया जाता है फिर भी अतिरिक्त काम का पैसा नहीं दिया जाता। कर्मचारी लंबे समय से एक ही वेतन पर काम कर रहे हैं। जब तक माँगें पूरी नहीं होती तब तक कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे, जिसकी सारी ज़िम्मेदारी प्रदेश सरकार और कंपनी प्रबंधन की होगी।

ये कर्मचारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रदेश में एंबुलेंस सर्विस के लिए एक निजी कंपनी जीवीके को आउटसोर्स किया गया है| इसी कम्पनी के तहत ही ये कर्मचारी कार्य कर रहे है| परन्तु कर्मचारियों के अनुसार यहाँ कार्य करने का वातावरण (वर्किंग कंडीशन)  बहुत खराब है| कंपनी काफी समय से कोई श्रम कानून का पालन नहीं कर रही है| इन सभी ज़्यादतियों के खिलाफ इस हड़ताल में पायलट यानी ड्राईवर और उनके साथ ही टेक्नीशियन भी हड़ताल पर हैं|

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसी कंपनी के एच०आर० मैनेजर को अभी कुछ समय पहले ही पीफ में गड़बड़ी को लेकर पकड़ा गया थाI इसी मामले में  एक ईपीफओ इंस्पेक्टर को भी सीबीआई ने गिरफ्तार किया है| यही आरोप कर्मचरियों की ओर से लगाए जा रहे हैं कि उनके पीफ (भविष्य निधि) में घोटाला हो रहा है|

शिमला शहर के पूर्व महापौर और सीपीएम नेता संजय चौहान ने कहा कि, “इस तरह की कम्पनी को तो बैन कर देना चाहिए परन्तु सरकार इसे बचाने के लिए काम कर रही है| सरकार की बेशर्मी की तो हद तब हो गई जब पीड़ित मज़दूरों की माँगों को सुनने की जगह सरकार ने मज़दूरों को डराना-धमकाना शुरू कर दिया है और उन पर एस्मा लगा कर उन्हें बर्खास्त करने की बात कर रही है और अन्य राज्य  के लोगों से काम करवाने की बात कर रही है| जो कि पूरी तरह से अव्यावहारिक हैं”|

कर्मचरियों के अनुसार “सरकार उनसे कोई बात नहीं कर रही बल्कि कंपनी को आगे कर दिया है, जबकी आरोप कम्पनी पर ही है| ये सरकार केवल निजी कम्पनी को बचाने में लगी हुई है, मज़दूरों की ओर कोई ध्यान नहीं है| सरकार भी कई तरीके से हमारे आन्दोलन को तोड़ने की कोशिश कर रहे है परन्तु हमने भी इसबार आर-पार की लड़ाई की ठानी है| जब तक हमारी माँगो को नहीं माना जाएगा तब तक ये आन्दोलन जारी रहेगा”|

इनको अन्य मज़दूर यूनियनों का भी समर्थन मिल रहा है| सीटू राज्य कमेटी ने 108 एंबुलेंस कर्मचारियों की हड़ताल को समर्थन देने का एलान किया है। सीटू ने प्रदेश सरकार द्वारा 108 एंबुलेंस कर्मचारियों पर एस्मा लगाने की भी निंदा की है। सीटू ने आरोप लगाया है कि प्रदेश सरकार एंबुलेंस कर्मचारियों की माँगों को मनवाने की बजाए जीवाईके कंपनी को हड़ताल पर गए कर्मचारियों को बर्खास्त कर नए कर्मचारियों की भर्ती करने को कह रही है जो निंदनीय है। सीटू राज्य अध्यक्ष जगत राम ने कहा कि यदि कर्मचारियों की माँगें नहीं मानी तो आंदोलन उग्र होगा।

Himachal Pradesh
आन्दोलन
एंबुलेंस कर्मचारी हड़ताल
श्रम कानून
BJP

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • Uddhav Thackeray
    सोनिया यादव
    लचर पुलिस व्यवस्था और जजों की कमी के बीच कितना कारगर है 'महाराष्ट्र का शक्ति बिल’?
    24 Dec 2021
    न्याय बहुत देर से हो तो भी न्याय नहीं रहता लेकिन तुरत-फुरत, जल्दबाज़ी में कर दिया जाए तो भी कई सवाल खड़े होते हैं। और सबसे ज़रूरी सवाल यह कि क्या फांसी जैसी सज़ा से वाक़ई पीड़त महिलाओं को इंसाफ़ मिल…
  • jammu and kashmir
    अशोक कुमार पाण्डेय
    जम्मू-कश्मीर : परिसीमन को लोकतंत्र के ख़िलाफ़ हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रही है बीजेपी
    24 Dec 2021
    बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर श्रीनगर में हिंदू मुख्यमंत्री बनवाने का जुनून सवार है। इसके लिए केंद्र सरकार कश्मीर घाटी व दूसरी जगह के लोगों को, ख़ुद के द्वारा पहुंचाए जा रहे दर्द को नज़रअंदाज़…
  • modi biden
    मोनिका क्रूज़
    2021 : चीन के ख़िलाफ़ अमेरिका की युद्ध की धमकियों का साल
    24 Dec 2021
    जो बाइडेन प्रशासन लगातार युद्ध की धमकी देने, निराधार आरोपों और चीन के विरुद्ध बहु-देशीय दृष्टिकोण बनाने के संकल्प को पूरा करने के साथ नए शीत युद्ध को गरमाए रखना जारी रखे हुए है।
  • unemployment
    रूबी सरकार
    लोगों का हक़ छीनने वालों पर कार्रवाई करने का दम भरने वाले मुख्यमंत्री ख़ुद ही छीन रहे बेरोज़गारों का हक़!
    24 Dec 2021
    इंटरमीडिएट, ग्रेजुएशन, एमबीए करने के बाद भी मध्यप्रदेश के आईटीआई में शिक्षक सिर्फ 7200 रुपये प्रति महीने में काम करने के लिए मजबूर हैं, राज्य सरकार की ओर से राहत देने की बात भी हवाबाज़ी ही साबित हुई…
  • modi yogi
    लाल बहादुर सिंह
    चुनाव 2022: अब यूपी में केवल 'फ़ाउल प्ले' का सहारा!
    24 Dec 2021
    ध्रुवीकरण और कृपा बाँटने का कार्ड फेल होने के बाद आसन्न पराजय को टालने के लिए, अब सहारा केवल फ़ाउल प्ले का बचा है। ऐन चुनाव के समय बिना किसी बहस के जिस तरह निर्वाचन कार्ड को आधार से जोड़ने का कानून बना…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License