NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
हिन्दू, मुसलमान और भागवत
आरएसएस शायद देश का एकमात्र ऐसा संगठन है, जो यह दावा करता है कि वह एक सांस्कृतिक संस्था है परंतु देश की केन्द्रीय सरकार के एजेंडे का निर्धारण भी करता है।
राम पुनियानी
12 Mar 2018
Mohan Bhagwat
Image Courtesy: News18 India

आरएसएस शायद देश का एकमात्र ऐसा संगठन है, जो यह दावा करता है कि वह एक सांस्कृतिक संस्था है परंतु देश की केन्द्रीय सरकार के एजेंडे का निर्धारण भी करता है। हिन्दू राष्ट्र के अपने एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए आरएसएस आज देश का सबसे बड़ा संगठन बन गया है। उसके मुखिया (सरसंघचालक) आरएसएस पर तो पूर्ण नियंत्रण रखते ही हैं, अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा, विहिप, बजरंग दल, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और आरएसएस से संबद्ध अन्य सैकड़ों संगठन भी उनकी मुठठी में रहते हैं। ये संगठन देश के विभिन्न हिस्सों में सामाजिक-षैक्षणिक-राजनैतिक व आर्थिक क्षेत्रों में सक्रिय हैं।

संघ के मुखिया समय-समय पर अपने वक्तव्यों और भाषणों के जरिए इन सभी संगठनों के एजेंडे का निर्धारण करते रहते हैं। हाल में (24 फरवरी 2018) आगरा में आयोजित ‘राष्ट्रोदय समागम‘ में बोलते हुए सरसंघचालक मोहन भागवत ने हिन्दू राष्ट्र के संबंध में कई बातें कहीं। उनके अनेक कथन अजीब से जान पड़ सकते हैं परंतु गहराई से विचार करने पर हमें यह अहसास होगा कि उनका मूल एवं एकमात्र लक्ष्य हिन्दू राष्ट्र के एजेंडे को आगे बढ़ाना है।

भागवत ने कहा कि हिन्दुओं को एक होना चाहिए और जाति के आधार पर आपस में संघर्ष या विवाद नहीं करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हिन्दुस्तान, हिन्दुओं का देश है और इस देश के अतिरिक्त वे कहीं और नहीं जा सकते। जिसे वे जाति-आधारित संघर्ष बता रहे हैं, दरअसल, वह सामाजिक न्याय का संघर्ष है। हिन्दू धर्म के जाति-आधारित ढांचे के विरोध में सदियों से आंदोलन खड़े होते रहे हैं। गौतम बुद्ध को हम इस आंदोलन का सबसे पुराना अगुआ कह सकते हैं। उनके बाद कबीर, तुकाराम और नामदेव जैसे संतों ने भी जाति प्रथा के विरूद्ध आवाज उठाई। भागवत जिसे जाति-आधारित संघर्ष बता रहे हैं, उसमें जोतिबा फुले का आंदोलन भी शामिल है, जिसका लक्ष्य अछूतों को शिक्षित करना था। डा. अंबेडकर ने इस संघर्ष को आगे बढ़ाया और जातिगत समानता के आंदोलन को एक नई धार दी।

स्वतंत्रता के पूर्व, हिन्दू महासभा और आरएसएस, स्वाधीनता आंदोलन के समानांतर चल रहे समाजसुधार आंदोलनों से बहुत परेशान थे और इसलिए उन्होंने हिन्दुओं से एक होने का आव्हान किया था। जाति के सवाल पर हिन्दुत्ववादी संगठन यथास्थितिवादी हैं, जबकि अंबेडकर, जाति के उन्मूलन के पक्षधर थे। अंबेडकर ने मनुस्मृति का दहन किया और भारतीय संविधान का मसौदा तैयार करने वाली समिति के अध्यक्ष बतौर, हमारे देश को समानता पर आधारित संविधान दिया। इसके साथ ही, संविधान में वंचित और पिछड़े वर्गों के लिए सकारात्मक कार्यवाही करने संबंधी प्रावधान भी किए गए ताकि समानता केवल कागजों तक सीमित न रह जाए वरन् जमीन पर भी उतरे।

हिन्दू राष्ट्रवादी राजनीति, वंचित वर्गों की बेहतरी के लिए सकारात्मक कदमों की विरोधी है। वह आरक्षण नहीं चाहती। सरकारी नौकरियों में ‘योग्यता‘ को बढ़ावा देने के नाम पर उसने आरक्षण का विरोध करने के लिए ‘यूथ फार इक्वालिटी‘ जैसी संस्थाओं का गठन किया। सामाजिक न्याय के पक्षधर भी देश के असमानता पर आधारित ढांचे को ढहा कर समानता स्थापित करना चाहते हैं। इस दृष्टि से ऐसा लग सकता है कि भागवत और सामाजिक न्याय के पक्षधरों का एजेंडा एक ही है। परंतु सच यह है कि संघ और उससे जुड़ी संस्थाओं का एक छुपा हुआ एजेंडा है, जो तब जाहिर हो जाता है जब वे भारतीय संविधान में मूलचूल परिवर्तन की बात करते हैं या उनके शीर्ष चिंतक गोलवलकर, मनुस्मृति की प्रशंसा में गीत गाते हैं। स्पष्टतः, संघ परिवार को भारतीय संविधान पसंद नहीं है।

भागवत जब यह कहते हैं कि हिन्दुओं के पास बसने के लिए हिन्दुस्तान के अतिरिक्त कोई और देश नहीं है, तब इससे उनका क्या आशय है? क्या वे नहीं जानते कि पूरी दुनिया में बेहतर अवसरों की तलाश में लोग अन्य देशों बसते आ रहे हैं और भारतीय हिन्दू इसका अपवाद नहीं हैं। बड़ी संख्या में हिन्दू, अमेरिका, कनाडा, आस्ट्रेलिया और इंग्लैंड में जा रहे हैं और इन देशों की नागरिकता भी ले रहे हैं। अतः संघ प्रमुख का यह कथन कि हिन्दुओं के पास भारत के अतिरिक्त रहने के लिए कोई अन्य देश नहीं है, तथ्यात्मक रूप से गलत है।

इसी तरह यह कहना कि भारत केवल हिन्दुओं का देश है, भी सही नहीं है। कौन इस देश का नागरिक है और कौन नहीं, इसका निर्धारण भारत का संविधान करता है। भारत किसका देश है यह इससे भी स्पष्ट है कि भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में सभी जातियों, धर्मों और वर्गों के लोगों की भागीदारी थी। भारत प्राचीनकाल से ही नस्लीय और धार्मिक विविधताओं का देश रहा है। भारत के उत्तर में शक, हूण और मुसलमान, आक्रांता के रूप में आए और उन्होंने इस देश को अपना घर बनाया। दक्षिण भारत में समुद्र के रास्ते यहूदी, मुसलमान और ईसाई पहुंचे। सच तो यह है कि हिन्दू शब्द मूलतः भौगोलिक है और यह एक धर्म का नाम बहुत बाद में बना।

भारत में विविध धर्मों के लोग निवास करते हैं अतः यह कहना कि भारत में रहने वाले सभी लोग हिन्दू हैं, तथ्यों के साथ खिलवाड़ करना होगा। भागवत के इस दावे में कोई दम नहीं है कि हिन्दू मूलतः सहिष्णु हैं और विविधता का सम्मान करते हैं। हिन्दुत्व चिंतक सावरकर ने हिन्दू की परिभाषा देते हुए कहा था कि केवल वे ही लोग हिन्दू हैं जिनकी मातृभूमि और पुण्यभूमि दोनों भारत में हैं। यह साफ है कि इस परिभाषा के अनुसार मुसलमान और ईसाई हिन्दू नहीं हो सकते। सिक्खों, बौद्धों और जैनियों का एक बड़ा तबका भी स्वयं को हिन्दू कहलवाना नहीं चाहता। भागवत इस अर्थ में सही कह रहे हैं कि गांधी जैसे लोगों की विचारधारा में ढले हिन्दू, अन्य धर्मों का सम्मान करते हैं और धार्मिक विविधता को खुले मन से स्वीकार करते हैं। परंतु संघ-मार्का हिन्दुओं को सहिष्णु नहीं कहा जा सकता। संघ परिवार का एजेंडा, पंथवाद और संकीर्णता पर आधारित है। वह आर्थिक विकास और सामाजिक और लैंगिक न्याय की बात नहीं करता। उसका जोर बांटने वाले मुद्दों पर रहता है - ऐसे मुद्दों पर जो लोगों को असहिष्णु बनाते हैं। कोई भी यह नहीं कहा सकता कि गौरक्षा, राममंदिर, लव जिहाद, घरवापसी, वंदेमातरम् इत्यादि जैसे मुद्दे विविधता को प्रोत्साहन देते हैं या कम से कम उसे स्वीकार करते हैं।

संघ परिवार के सदस्य जो कुछ कहते आए हैं या कह रहे हैं, वह भारतीय संविधान की आत्मा के विरूद्ध है। उनका यह कथन भी घोर अनुचित व असंवैधानिक है कि सभी भारतीयों को भारतमाता को अपनी मां मानना चाहिए। संविधान कहता है कि ‘‘भारत अर्थात इंडिया राज्यों का संघ होगा‘‘। इसमें भारतमाता कहां से आ गईं? और ऐसे अन्य धर्मावलंबियों, जो किसी भी कारण से भारतमाता की जय नहीं कहना चाहते, को इसके लिए मजबूर किया जाना किस तरह से उचित या संवैधानिक है? यह कहना कि मुसलमान भी हिन्दू हैं, एक डरावना बयान है। पहले उन्हें हिन्दू बताया जाएगा और फिर यह कहा जाएगा कि वे हिन्दू धर्मग्रथों का सम्मान करें और भगवान राम और गाय को पूज्यनीय मानें। यह एक फिसलन भरी राह है।

भागवत, राणाप्रताप के अकबर के साथ हुए युद्धों को भारतीय स्वाधीनता संग्राम का हिस्सा बताते हैं। राणाप्रताप अपनी मंसबदारी के लिए लड़ रहे थे, अंग्रेजों के खिलाफ नहीं। अगर हम भागवत की मानें तो हर मुसलमान राजा के खिलाफ युद्ध स्वाधीनता संग्राम है। वे यह जानते हुए भी ऐसा कह रहे हैं कि राणाप्रताप के साथ अकबर के युद्धों में अकबर की सेना का नेतृत्व राजा मानसिंह के हाथों में था।

Courtesy: The Citizen,
Original published date:
11 Mar 2018
Mohan Bhagwat
RSS
BJP
Hindutva

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

डिजीपब पत्रकार और फ़ैक्ट चेकर ज़ुबैर के साथ आया, यूपी पुलिस की FIR की निंदा

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • budget
    न्यूज़क्लिक टीम
    अमीरों को अमृत, गरीबों को विष काल सौंप बजट में बजा झुनझुना
    01 Feb 2022
    खोज ख़बर में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने बताया कि किस तरह से बजट में नये जुमलों के साथ गरीबों, मध्यम वर्ग, नौजवानों, दलितों-आदिवासियों, किसानों और वंचित समुदाय को ठगा गया है। इस बारे में भारत सरकार…
  • mp farmer
    रूबी सरकार
    मध्य प्रदेश: अपनी बर्बादी का तमाशा देखने को मजबूर राजगढ़ के किसान
    01 Feb 2022
    मध्य प्रदेश सरकार 1375 करोड़ की एक वृहद सिंचाई परियोजना शुरू करने जा रही है। सरकार द्वारा तर्क दिया जा रहा है कि यहां खेती के लिए भरपूर पानी नहीं है, जबकि ग्रामीणों का कहना है कि यहां सिंचाई के लिए…
  • Union Budget
    भाषा
    आयातित वस्तुओं में हेडफोन, छाता, सोलर सेल होंगे महंगे; विशेष किस्म की सीप और हीरे सस्ते
    01 Feb 2022
    प्रस्तावित आयात शुल्क बढ़ोतरी के कारण हेडफोन, ईयरफोन, लाउडस्पीकर, स्मार्ट मीटर, कृत्रिम आभूषण, सौर सेल और सौर मॉड्यूल सहित कई वस्तुएं महंगी हो जाएंगी।
  • Union Budget
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूनियन बजट: किसका नफ़ा किसका नुकसान?
    01 Feb 2022
    आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यूनियन बजट पेश किया है। इस ख़ास पेशकश में न्यूज़क्लिक के लिए ऑनिंद्यो बात कर रहे हैं अरुण कुमार, चिराश्री दासगुप्ता, परंजॉय गुहा ठाकुरता से बजट के मायने पर।
  • union budget
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
    बजट 2022: शिक्षा, रेल, रक्षा क्षेत्र के लिए क्या है ख़ास, किसे क्या मिला
    01 Feb 2022
    वित्त मंत्री के मुताबिक भारत का राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 6.9 प्रतिशत रह सकता है, जबकि पहले इसके 6.8 प्रतिशत पर रहने का अनुमान जताया गया था।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License