NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
हिंदुत्ववादियों के भीतर की हीन भावना कश्मीरी महिलाओं के प्रति उनकी हवस को बढ़ाती है!
'साफ़ और गोरी चमड़ी वाली' कश्मीरी महिलाओं को वश में करने की चाहत उनके बचकाना और भय के आचरण को उजागर करती है।
एजाज़ अशरफ़
16 Aug 2019
Translated by महेश कुमार
हिंदुत्ववादियों

हिंदुत्ववादियों की कल्पना में, जम्मू और कश्मीर की संवैधानिक स्थिति में परिवर्तन आना उनके लिए हिंदू विजय का पर्याय बन गया है। उनके लिए, राज्य की मुस्लिम आबादी, जो 31 अक्टूबर को केंद्रशासित प्रदेश में तब्दील होने की वजह से है, भारतीय राज्य के ख़िलाफ़ दशकों से चली आ रही बड़ी लड़ाई को हार गई है। इसलिए, हिंदुत्ववादी अब परास्त लोगों पर अपनी इच्छा थोप सकते है। घाटी को अब "हड़पा" हुआ माना जाएगा, जो इतिहास की पुस्तकों में परिचित शब्द है।

मध्ययुगीन और प्राचीन काल की विशिष्ट, सर्वनाश करने वाली छवियां, ट्विटर की दुनिया मे आए दिन उभर रही हैं, जो 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 को हटाने के समारोहों की गूँज को दिखाती हैं। अनुच्छेद 35A के उन्मूलन के बारे में एक निरंतर बकवास पेश की गई, जो जम्मू-कश्मीर के बाहर रहने वाले भारतीयों को वहां संपत्ति खरीदने से रोकता था। ट्विटर पर राय ज़ाहिर करने वाली हिंदूवादियो ने कश्मीर की एक अलग पहचान को तोड़ने के लिए अनुच्छेद 35A को रद्द करने को निर्णायक कदम के रूप में पेश किया।

ठीक यही कारण था कि घाटी में सस्ती ज़मीनों का अधिग्रहण करने वाली ट्विटर पोस्टों  का दौर शुरू हो गया। घाटी में ज़मीन की प्रति वर्ग गज कीमत बताते हुए मीम जारी किए थे। इन तथाकथित विजयी लोगों ने मान लिया कि विजय हासिल करने से उन्हें यह अधिकार मिल जाता है कि वे संपत्ति को किस दर पर बेच सकते हैं। क्योंकि उन्हें (ज़मीन वालों को), आख़िरकार, विजेता की दया पर रहना होगा, जिसे कि सदियों पहले आदर्श नियम माना जाता था।

ट्विटर की धारणा एकदम वास्तविक लग रही थी क्योंकि यह ज़मीनी वास्तविकता से मेल खाती थी। घाटी में हज़ारों हज़ार जूते गश्त लगा रहे थे, जबकि घाटी के लोग अपने घरों के अंदर बंद थे, उनकी चुप्पी ने उनकी विजय की भूमिका निभाई थी। हालांकि उनका इरादा नेक हो सकता है, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का कश्मीरियों के साथ दोपहर के भोजन का वीडियो कश्मीर के अधीन किए जाने के रूपक में प्रसारित किया गया था। अब लग ऐसा रहा है जैसे कि कुछ कश्मीरियों को धोखे से दोपहर के भोजन में जोड़ा गया था। हिंदुत्ववादियों ने घाटी में डोभाल के लंच के वीडियो को बड़े आनन्द और खुशी के साथ साझा किया।

लोग अपनी विश्वदृष्टि के अनुसार किसी भी कार्रवाई के अर्थ की व्याख्या करते हैं। कैलेंडर के हिसाब से पहले से ही पता था कि 12 अगस्त को ईद का त्योहार है, फिर भी नरेंद्र मोदी सरकार ने 5 अगस्त को कश्मीर की स्थिति में बदलाव की घोषणा की। शायद पहले से समय निर्धारित किया गया था क्योंकि संसद भी सत्र में थी और सरकार को इसकी अनुमति भी लेनी थी। और इसलिए भी कि शायद प्रधानमंत्री मोदी को 15 अगस्त (भारत के स्वतंत्रता दिवस) पर लाल किले से भारत में कश्मीर के एकीकरण की घोषणा करने जल्दबाज़ी थी।

विजय हासिल करने की भावना, इतिहास हमें बताता है, विजेता की मजबूरियों के अधीन होती हैं। ईद कश्मीर के लिए भारत की पटकथा का एक फ़ुटनोट बन गया है। यही कारण है कि कश्मीरी अपने क्षेत्र में आए अचानक बदलाव को प्रतीकात्मक और कानूनी रूप से हड़पा हुआ मानेंगे। उनकी भावनाओं और तकलीफों में ओर ज्यादा इज़ाफा होगा, क्योंकि अब उनके दुःख सीधे उस खुशी के अनुपात में हैं जो हिंदुत्व के कट्टरपंथी प्रदर्शित कर रहे हैं।
जब कश्मीरी लोग शोक व्यक्त कर रहे थे या शांत रहकर अपने भाग्य को कोस रहे थे, तब सोशल मीडिया हिंदू नेटिज़न्स की पोस्ट से लबालब था, जो घाटी की गोरी लड़कियों से शादी करने के अवसर को पाने पर खुश थे। यहां तक कि भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने वैवाहिक बाज़ार में उपलब्ध महिलाओं के नए ‘माल’ की बात की। कुछ पोस्ट में तो कश्मीरी महिलाओं के बलात्कार को भी जायज़ ठहराया गया है। टिप्पणीकारों ने इन टिप्पणियों को महिला विरोधी क़रार दिया, जो कि वास्तव में हैं भी।

कश्मीर के संदर्भ में, मिथ्याचार का यह रूप सामूहिक स्मृति से जुड़ा हुआ है जिसे आमतौर पर निर्लज विजेता के व्यवहार के रूप में माना और जाना जाता है। विजय प्राप्त करने वाली सेना गोली चलाती है, भूमि को विनियोजित करती है और महिलाओं का अपहरण करती है। विजय प्राप्त करने वालों के अधिकार हमेशा मौजूद रहे हैं। महिलाएं उनकी वशीभूत और गुलाम हो जाती हैं। उनका शरीर, उनकी भूमि की तरह, वर्चस्व को स्थापित करने का स्थल बन जाता है।
हिंदुत्ववादियों की कल्पना में, अब कश्मीरी महिलाओं के पास उन्हें ठुकराने का कोई कारण नहीं है। वे, आख़िरकार, उन्होंने उस भूमि को जीत लिया है जिस पर वे वास करते थे, जिस पर विजय प्राप्त की गई है और उसे भारत में मिलाया गया है। इसे उनकी इच्छाओं के ख़िलाफ़ हासिल किया गया है, जो भारत से अलग होने की प्रवर्तिया घाटी में मौजूद थी, उसके विपरीत हैं।

कोई भी थोपी हुई विजय अक्सर सामाजिक आचरण के तरीकों को तोड़ देती है। क्योंकि नैतिकता के स्वीकृत मानदंड आम तौर पर समाज में मौजूद होते हैं। लेकिन विजयी लोग नैतिकता को फिर से परिभाषित करते है।
ज़ाहिर है, कश्मीर में नैतिकता का आचरण अभी ध्वस्त नहीं हुआ है। फिर भी, चिंताजनक रूप से, कश्मीर हिंदुत्ववादी की कल्पना में उतारा गया है, जो उन्हें यह विश्वास दिलाने के लिए प्रेरित करता है कि उनके पास भूमि और उनकी महिलाओं पर अधिकार है।
कश्मीरी महिलाओं के बारे में "गोरी तवचा" पर ज़ोर हिंदुत्ववादियों की हीन भावना को दर्शाता है। भारतीयों को हमेशा से ही अपनी सांवली त्वचा को लेकर हीन भावना रही है। परिवार हमेशा से गौरे बच्चों के पैदा होने पर, विशेषकर लड़कियों के जन्म का जश्न मनाते हैं। गोरी लड़कियों के लिए एक अच्छा वर पाना आसान माना जाता है। इसमे कोई आश्चर्य बात नहीं कि अक्सर वैवाहिक विज्ञापन में हमेशा अच्छे दूल्हे की चाहत में लड़कियों के गेहुएं या गोरे रंग का वर्णन किया जाता है।

हीनता की भावना हिंदुत्ववादियों की फंतासी में निमग्न कर दिया गया है, जो मानते हैं कि उन्होंने उस कश्मीर पर विजय प्राप्त की है, जहां की महिलाओं को गोरी और सुंदर माना जाता है। उनका पहले भी मानना था कि उनकी महिलाओं की त्वचा का रंग गोरा होना चाहिए, चाहे वे कश्मीर से हों या कहीं और से, जो उन्हें उनके स्नेह से वंचित करता है।

हिंदुत्ववाद की हीन भावना जो उसके गोरे रंग से उत्पन्न हुई थी वह अब उसकी कल्पना में कश्मीर का विजेता है।
जो लोग अपनी इस बचकाना इच्छा को दिल में संजोते हैं कि उनका जीवन साथी गोरी चमड़ी वाली कश्मीरी होनी चाहिए वे लव जिहाद के विरोधी लोग हैं, जो हिंदू महिलाओं का मुस्लिम पुरुषों के साथ प्यार पर संदेह करने के लिए एक शब्द है। मुस्लिम पुरुष के प्रेम को हिंदू महिला को इस्लाम में परिवर्तित करने के लिए एक कुप्रथा के रूप में देखा जाता है। गोरी कश्मीरी स्रियाँ भी मुस्लिम हैं। लेकिन यहां उसका धर्म बाधा नहीं है क्योंकि यह माना जाता है कि उसे हिंदू धर्म में परिवर्तित कर दिया जाएगा।

दरअसल, मर्दानगी पर चिंता ने हिंदू दक्षिणपंथी के आंदोलनों को कम कर दिया है। 1920 के दशक के बारे में लिखते हुए, जब उत्तर प्रदेश में हिंदू-मुस्लिम दंगों में तेज़ी आई थी, चारु गुप्ता, "औपनिवेशिक भारत में कामुकता, अश्लीलता, समुदाय: महिला, मुसलमान और हिंदू जनता" में लिखती हैं: कि "इन आंदोलन ने हिंदू पुरुषत्व को, एक निर्विकार, दुराचारी और सैन्य रूप से अक्षम हिंदू पुरुष की औपनिवेशिक छवि के विपरीत पेश किया है। आतंकवादी हिंदू संगठनों के लिए, शारीरिक शक्ति का एक प्रदर्शन उनकी मनोवैज्ञानिक रक्षा, शक्तिशाली, तर्कसंगत ब्रिटिश और लंपट मुस्लिम की छवियों के लिए उनका जवाब था।”

"कामुक मुस्लिम" पुरुषों के स्टीरियोटाइप चरित्र को पर्चों और अख़बारों की कहानियों के माध्यम से प्रचारित किया गया जिनमें उन घटनाओं को दर्शाया गया था जिनमें मुस्लिम पुरुषों पर हिंदू महिलाओं का अपहरण करने, शादी करने और उन्हें इस्लाम में परिवर्तित करने का आरोप लगाया गया था।

गुप्ता उत्तर प्रदेश में इन घटनाओं की एक सूची प्रदान करती हैं, जो इस ओर इंगित करते हैं कि "कथित" शब्द को मीडिया रिपोर्टों से हटा दिया गया था। जब अधिकारियों ने इनकार किया या स्पष्ट किया कि अपहरण के रिपोर्ट किए गए मामलों में वास्तव में क्या हुआ था, तो इन्हें अंदर के पन्नों में दफ़न कर दिया गया। कुछ मामले सही भी रहे होंगे। लेकिन यहां तक ​​कि मुस्लिम पुरुषों का हिंदू महिलाओं के साथ प्यार में घर से भाग जाने को भी, अपहरण के रूप में चित्रित किया गया। इसने हिंदू महिलाओं के प्रति मुस्लिम पुरुषों के अभद्र व्यवहार के मिथक को ख़त्म कर दिया, जिन्हें ब्रिटिश औपनिवेशिक इतिहास लेखन में मुस्लिम विजेता के असहाय शिकार के रूप में चित्रित किया गया था। गुप्ता लिखती हैं, "हिंदू मर्दानगी को 'अन्य' [मुस्लिम] के विरोध में बनाया गया था।" लेकिन हिंदू मर्दानगी मुस्लिम मर्दानगी की कार्बन कॉपी नहीं बन सकी, हालांकि हिंदुत्व के विचारक वीडी सावरकर ने अपने लेखन में इस तरह की कारगुज़ारी की वकालत की है। सावरकर खुले तौर पर उन मराठा शासकों का तिरस्कार कर रहे थे जिन्होंने मुस्लिम क्षेत्र पर विजय तो प्राप्त की, लेकिन मुस्लिम महिलाओं का अपहरण और बलात्कार नहीं किया।

गुप्ता के अनुसार, हिंदू दक्षिणपंथ की रणनीति एक "हिंदू पुरुष का महिमामंडन करना था जो एक मुस्लिम महिला के प्रेम को आकर्षित करने में सफल हो ..."। वह अपहरण नहीं करता; वह बहुत ही आकर्षक है। आदर्श हिंदू व्यक्ति की छवी को बेहतर बनाने के लिए उपन्यास लिखे गए थे।

गुप्ता लिखते हैं, "इन उपन्यासों में सबसे प्रसिद्ध “शिवाजी व रोशनारा” था, जो एक अनिर्दिष्ट स्रोत की एक कथित ऐतिहासिक कहानी थी, जिसमें मराठा परंपरा को मूर्त रूप दिया गया था, जिसके अनुसार शिवाजी ने औरंगजेब की बेटी रोशनआरा को क़ब्ज़े में किया, और अंततः उससे शादी की, संभाजी इस नाते से पैदा थे।”

उपन्यास में, शिवाजी को एक मज़बूत शरीर, गोरा रंग और उज्ज्वल आंखों वाला, "मर्दानगी का सुंदर नमूना"  पेश किया गया है। वह (यानी रोशनआरा) धीरे-धीरे उसके प्यार में पड़ जाती है। उपन्यास यह बताता है कि रोशनारा को सम्राट की बेटी कहे जाने की तुलना में छोटे राजा की रानी कहा जाता है।
कश्मीरी महिलाओं के संबंध में पोस्ट में, हिंदुत्ववादियों में शिवाजी के शरीर से उत्पन्न आत्मविश्वास का अभाव है, जैसा कि उपन्यास में दर्शाया गया है। उनकी हीनता उन्हें हिंदू विजय के रूप में कश्मीर की स्थिति में बदलाव के लिए विवश करती है। इससे उन्हें इतिहास से प्रेरणा मिली कि वे गोरी कश्मीरी महिलाओं को अपना जीवन साथी बना सकते हैं।

वास्तव में, हिंदुत्व को इस बात का समर्थन हासिल है क्योंकि यह भारतीय पुरुषों की हीनता, उनके टूटे हुए सपने और भविष्य के बारे में उनके डर को संबोधित करता है। इन सभी ने, बदले में उनकी मर्दानगी के बारे में उनकी चिंताओं को दूर किया है, जिसे वे मुसलमानों के खिलाफ प्रतिशोध की कल्पना से दूर करना चाहते हैं। भारत में कश्मीर के एकीकरण ने उन्हें बेशुमार ख़ुशी प्रदान की है।

एजाज़ अशरफ़ दिल्ली स्थित एक स्वतंत्र पत्रकार हैं। उनका उपन्यास द आवर बिफ़ोर डॉन, हार्पर कॉलिंस द्वारा प्रकाशित किया गया था। विचार व्यक्तिगत हैं।

Jammu & Kashmir
Hindutvadi
Article 370
Article 35A
Kashmiri Women
Kashmir

Related Stories

कश्मीर में हिंसा का नया दौर, शासकीय नीति की विफलता

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

कश्मीरी पंडितों के लिए पीएम जॉब पैकेज में कोई सुरक्षित आवास, पदोन्नति नहीं 

क्यों अराजकता की ओर बढ़ता नज़र आ रहा है कश्मीर?

कश्मीर: कम मांग और युवा पीढ़ी में कम रूचि के चलते लकड़ी पर नक्काशी के काम में गिरावट

कैसे जम्मू-कश्मीर का परिसीमन जम्मू क्षेत्र के लिए फ़ायदे का सौदा है

कविता का प्रतिरोध: ...ग़ौर से देखिये हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र

जम्मू में आप ने मचाई हलचल, लेकिन कश्मीर उसके लिए अब भी चुनौती

जम्मू-कश्मीर: बढ़ रहे हैं जबरन भूमि अधिग्रहण के मामले, नहीं मिल रहा उचित मुआवज़ा

जम्मू-कश्मीर: अधिकारियों ने जामिया मस्जिद में महत्वपूर्ण रमज़ान की नमाज़ को रोक दिया


बाकी खबरें

  • ganguli and kohli
    लेस्ली ज़ेवियर
    कोहली बनाम गांगुली: दक्षिण अफ्रीका के जोख़िम भरे दौरे के पहले बीसीसीआई के लिए अनुकूल भटकाव
    19 Dec 2021
    दक्षिण अफ्रीका जाने के ठीक पहले सौरव गांगुली बनाम विराट कोहली की टसल हमारी टीवी पर तैर रही है। यह टसल जितनी वास्तविक है, यह इस तथ्य पर पर्दा डालने के लिए भी मुफ़ीद है कि भारतीय टीम ऐसे देश का दौरा कर…
  • modi
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    चुनावी चक्रम: लाइट-कैमरा-एक्शन और पूजा शुरू
    19 Dec 2021
    सरकार जी उतनी गंभीरता, उतना दिमाग सरकार चलाने में नहीं लगाते हैं जितना पूजा-पाठ करने में लगाते हैं। यह पूजा-पाठ चुनाव से पहले तो और भी अधिक बढ़ जाता है। बिल्कुल ठीक उसी तरह, जिस तरह से किसी ऐसे छात्र…
  • teni
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे : जयपुर में मौका चूके राहुल, टेनी को कब तक बचाएगी भाजपा और अन्य ख़बरें
    19 Dec 2021
    सवाल है कि अजय मिश्र को कैसे बचाया जाएगा? क्या एसआईटी की रिपोर्ट के बाद भी उनका इस्तीफा नहीं होगा और उन पर मुकदमा नहीं चलेगा?
  • amit shah
    अजय कुमार
    अमित शाह का एक और जुमला: पिछले 7 सालों में नहीं हुआ कोई भ्रष्टाचार!
    19 Dec 2021
    यह भ्रष्टाचार ही भारत के नसों में इतनी गहराई से समा चुका है जिसकी वजह से देश का गृह मंत्री मीडिया के सामने खुल्लम-खुल्ला कह सकता है कि पिछले 7 सालों में कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ।
  • A Critique of Capitalism’s Obscene Wealth
    रिचर्ड डी. वोल्फ़
    पूंजीवाद की अश्लील-अमीरी : एक आलोचना
    19 Dec 2021
    पूंजीवादी दुनिया में लगभग हर जगह ग़ैर-अमीर ही सबसे ज़्यादा कर चुकाते हैं और अश्लील-अमीरों की कर चोरी के कारण सार्वजनिक सेवाओं में होने वाली कटौतियों की मार बर्दाश्त करते रहते हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License