NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
हज़ारों पॉवर सेक्टर कर्मचारीयों ने दिल्ली में निजीकरण से खिलाफ किया प्रदर्शन
यह लोग Electricity(Amendment) Bill 2014 के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं क्योंकि इस बिल से बिजली आवंटन का निजीकरण हो जायेगा और इसके आलावा उनका विरोध प्रदर्शन योगी सरकार के बिजली के निजीकरण के खिलाफ भी है I
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
05 Apr 2018
Translated by ऋतांश आज़ाद
power sector protest

3 अप्रैल को देशभर से आये हज़ारों पॉवर सेक्टर कर्मचारी Electricity(Amendment)Bill 2014 के खिलाफ दिल्ली के संसद मार्ग पर जमा हुए I यह बिल बिजली के आवंटन में निजीकरण को लाने के पक्ष में है I

इस रैली में विभिन्न कर्मचारी यूनियनों के कर्मचारी और इंजीनियर National Coordination Committee of Electricity Employees and Engineers (NCCOEEE)  के दिल्ली चलो के आव्हान पर दिल्ली पहुँचे I

हाथों में बैनर लिए और निजीकरण के खिलाफ नारे लगाते हुए 25,000 लोग इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए I

रैली में इस साल मानसून सत्र के दौरान अगस्त में संसद में पेश होने वाले अमेंडमेंट बिल के खिलाफ एक दिन की हड़ताल का आवाहन किया गया I

Electricity (Amendment)Bill 2014 के अंतर्गत बिजली के आवंटन को दो हिस्सों यानी infrastucture (संरचना) और supply (content) में बांटा जायेगा I इसका अर्थ ये होगा कि जहाँ एक तरफ सरकार बिजली की तारें बिछाने का काम करेगी वहीँ दूसरी तरफ निजी कंपनियां बिजली बेचने के लिए और मुनाफा कमाने के लिए एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा करेंगी I

इस रैली में उत्तर प्रदेश सरकार के बिजली को निजी हाथों में दिए जाने के खिलाफ भी विरोध जताया गया I

16 मार्च को उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार ने लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी, मेरठ और मुरादाबाद में बिजली आवंटन को निजी हाथों में देने का निर्णय लिया I

इससे पहले फरवरी में उत्तर प्रदेश सरकार ने निजी कंपनियों को निमंत्रण देते हुए 7 जिलों - इटावा, कन्नौज, ओराई, रायबरेली, सहारनपुर, मऊ और बलिया के लिए टेंडर निकाले I इन  टेंडरों के अंतर्गत जहाँ एक तरफ सरकार बिजली तारों की नेटवर्क संरचना का ख्याल रखेगी वहीँ दूसरी तरफ बिजली के आवंटन निजी कंपनियों द्वारा किया जायेगा I ये निर्णय Electricity(Amendment)Bill 2014 के समान ही है I

ये निजी कंपनियाँ “Integrated Service Providers” कहलाई जायेंगी और ये  नए पॉवर कनेक्शन लगाने, मीटर लगाने, मीटर पढने, मीटर बदलने , बिल जारी करने और रकम इकटठा करने का काम करेंगी I

उत्तर प्रदेश में पॉवर सेक्टर कर्मचारी इस निर्णय के खिलाफ 28 मार्च से वर्क टू रूल विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं I वह 9 अप्रैल को 72 घंटों की हड़ताल करेंगे I

कुछ राज्य स्तरीय यूनियनों के आलावा दिल्ली चलो रैली में Electricity Employees Federation of India ( जो Centre Of Indian Trade Unions से सम्बंधित है) , All India Federation Of Electricity Employees ( जो All India Trade Union Congress से जुड़ी हुई है ) , the Indian National Federation Electricity Workers ( जो Indian National Trade Union Congress से जुड़ी हुई है ) , the All India Federation of Power Diploma Engineers, All India Power Men’s Federation, the All India Power Engineers’ Federation भी शामिल थे I

रैली में बोलते हुए Electricity Employees Federation of India के अधक्ष के.ओ हबीब ने कहा कि जिस बिल को लाया जा रहा है उसका मकसद बिना किसी निवेश के निजी कंपनियों को सरकारी क्षेत्र में व्यपार करने के लिए बढ़ावा देना है I वितरण के व्यापार को दो हिस्सों में बांटने से निजी कंपनियों को मुनाफा कमाने का बहुत मौका मिलेगा क्योंकि इसमें नेटवर्क फैलाने का कार्य खुद सरकार द्वारा किया जायेगा I

All India power Engineers Federation (AIPEF) के शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि उत्तर प्रदेश में फ्रेंचाइज़ दिए जाने का निर्णय पॉवर सेक्टर को निजी हाथों में देने की शुरुवात है और इसके खिलाफ उत्तर प्रदेश में इंजिनियर और कर्मचारी लगातार लड़ रहे हैं I

उन्होंने कहा कि पूर्व उर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने 2015 और 2016 में ये कहा था कि संसद में ये बिल लाने से पहले वह इंजीनियरों, कर्मचारीयों और कर्मचारी यूनियनों और संगठनों से बात की जाएगी I प्रदर्शनकारियों कि ये माँग है कि बीजेपी सरकार Privatisation amendments को हटा दे और बिल के बारे में सबसे राय ली जाए I

उन्होंने योगी आदित्यनाथ की सरकार को ये चेतावनी दी कि अगर उत्तर प्रदेश में विरोध कर रहे कर्मचारियों के खिलाफ यदि कोई भी कार्यवाही की जाएगी  तो वह देश भर में इसके खिलाफ प्रदर्शन करेंगे और अपने आन्दोलन को और तेज़ करेंगे I

पॉवर सेक्टर
कर्मचारी
उत्तर प्रदेश
बीजेपी
योगी आदित्यनाथ
संसद

Related Stories

बदहाली: रेशमी साड़ियां बुनने वाले हाथ कर रहे हैं ईंट-पत्थरों की ढुलाई, तल रहे हैं पकौड़े, बेच रहे हैं सब्ज़ी

उप्र बंधक संकट: सभी बच्चों को सुरक्षित बचाया गया, आरोपी और उसकी पत्नी की मौत

नागरिकता कानून: यूपी के मऊ अब तक 19 लोग गिरफ्तार, आरएएफ और पीएसी तैनात

झारखंड चुनाव: 20 सीटों पर मतदान, सिसई में सुरक्षा बलों की गोलीबारी में एक ग्रामीण की मौत, दो घायल

झारखंड की 'वीआईपी' सीट जमशेदपुर पूर्वी : रघुवर को सरयू की चुनौती, गौरव तीसरा कोण

हमें ‘लिंचिस्तान’ बनने से सिर्फ जन-आन्दोलन ही बचा सकता है

यूपी-बिहार: 2019 की तैयारी, भाजपा और विपक्ष

असमः नागरिकता छीन जाने के डर लोग कर रहे आत्महत्या, एनआरसी की सूची 30 जुलाई तक होगी जारी

'एक साथ चुनाव': हकीकत या जुमला

सोनभद्र में चलता है जंगल का कानून


बाकी खबरें

  • budget
    अजय कुमार
    बजट के नाम पर पेश किए गए सरकारी भंवर जाल में किसानों और बेरोज़गारों के लिए कुछ भी नहीं!
    01 Feb 2022
    बजट हिसाब किताब का मामला होता है। लेकिन भाजपा के काल में यह भंवर जाल बन गया है। बजट भाषण में सब कुछ होता है केवल बजट नहीं होता।
  • nirmla sitaraman
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बजट में अगले 25 साल के लिये अर्थव्यवस्था को गति देने का आधार: सीतारमण
    01 Feb 2022
    आमजन ख़ासकर युवा को नए आम बजट में न अपना वर्तमान दिख रहा है, न भविष्य, लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि केंद्रीय बजट ने समग्र और भविष्य की प्राथमिकताओं के साथ अगले 25 साल के लिये…
  • cartoon
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बजट में मध्यम वर्ग के साथ विश्वासघात और युवाओं की जीविका पर प्रहार: विपक्ष 
    01 Feb 2022
    “सरकार ने देश के वेतनभोगी वर्ग और मध्यम वर्ग को राहत नहीं देकर उनके साथ ‘विश्वासघात’ और युवाओं की जीविका पर ‘आपराधिक प्रहार’ किया है।”
  • kanpur
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव: ' बर्बाद होता कानपुर का चमड़ा उद्योग'
    01 Feb 2022
    अपने चमड़े के कारोबार से कानपुर का नाम पूरी दुनिया में मशहूर है। लेकिन आज चमड़ा फैक्ट्री अपने पतन की ओर है। चमड़ा व्यापारियों का कहना है कि इसका एक बड़ा कारण सरकार द्वारा गंगा नदी के प्रदूषण का हवाला…
  • varansi weavers
    दित्सा भट्टाचार्य
    यूपी: महामारी ने बुनकरों किया तबाह, छिने रोज़गार, सरकार से नहीं मिली कोई मदद! 
    01 Feb 2022
    इस नए अध्ययन के अनुसार- केंद्र सरकार की बहुप्रचारित प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) और प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) जैसी योजनाओं तक भी बुनकरों की पहुंच नहीं है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License