NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
हम अस्थिर, यहां तक कि विस्फोटक परिस्थिति में रह रहे हैंः बिहार गृह सचिव
"पुलिसवाले भी कुछ जगहों पर शामिल थें।"
तारिक़ अनवर
07 Apr 2018
बिहार दंगे

पिछले महीने बिहार का कई ज़िला सांप्रदायिक हिंसा की चपेट में आ गया था। 25 से 30 मार्च के बीच हुए हिंसा ने सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ दिया। इन घटनाओं पर बिहार के गृह सचिव ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि "हम एक अस्थिर या यहां तक कि एक विस्फोटक परिस्थिति में रह रहे हैं"।

उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस भी उसी अस्थिर समाज का हिस्सा हैं जो भागलपुर से शुरू हुए दंगों में उनकी सहभागिता का संकेत देते हैं और ये दंगा कुछ ही दिनों के भीतर आठ अन्य ज़िलों मुंगेर, समस्तीपुर, गया, सिवान, औरंगाबाद, नवादा और कैमूर समेत अन्य ज़िलों में फैल गया।

बिहार के प्रधान सचिव (गृह) आमिर सुबहानी ने न्यूज़क्लिक को एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में 5 अप्रैल को राज्य सचिवालय में बताया कि "जुलूस के आगे एक पुलिसवाले ने भड़काऊ नारा लगाते हुए देखा जा सकता है। ये पुलिस भी हमारे हिंसक और विस्फोटक समाज का ही हिस्सा हैं।"

bihar riots यह पूछे जाने पर कि 17 मार्च को भागलपुर में कुछ लोगों ने हिंदू कैलेंडर के नए साल का जश्न मनाने के लिए एक अनधिकृत जुलूस के दौरान आपत्तिजनक गीत बजाए जिससे हिंसा हुई तो पुलिस ने इस घटना से सबक क्यों नहीं ली। इस पर उन्होंने कहा कि "पुलिस सतर्क थी और इन्हें तैनात कर दिया गया था। हम पूरी सफलता का दावा नहीं कर सकते लेकिन यह विफल भी नहीं हुआ था। अगर पुलिस ने वक़्त रहते अपना काम नहीं किया होता तो स्थिति बदतर होती।"

केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे के बेटे अरिजीत शाश्वत को 1 अप्रैल को जेल में बंद कर दिया गया था। आरोप है कि शाश्वत ने कथित रूप से भागलपुर के नथनगर इलाक़े में हुए हिंसा को उकसाया था। इस घटना में हुई पत्थरबाज़ी और आगजनी की घटना में दो पुलिसवाले समेत कई लोग घायल हो गए थें।

हिंसा के बाद दर्ज किए गए दो एफआईआर में से एक में शाश्वत का नाम शामिल है। शाश्वत ने बिहार की राजधानी पटना में हनुमान मंदिर में पुलिस के सामने सरेंडर किया था।

रामनवमी के मौक़े पर भारी मात्रा में तलवार बांटे जाने के रिपोर्ट के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि, "हमें जुलूस (रामनवमी) में बड़ी संख्या में तलवार ले जाने के बारे में मालूम था- जो पहले कभी नहीं देखा गया। लेकिन हमें यह नहीं पता था कि वास्तव में इसकी संख्या कितनी है। यह हमारी जांच का विषय है।"

……………….

 

क़रीब 2 लाख धारदार हथियार राज्य के बाहर से मंगवाए जाने के बारे मेें न्यूज़़क्लिक ने एक रिपोर्ट प्रकाशित किया था। इन तलवारों को प्रभावित इलाक़ों मेंकूरियर के ज़रिए वितरित किया गया था। खुफिया स्रोतों ने संवाददाता से कहा था कि "ये दंगे सुनियोजित थें" जिसके लिए "पिछले छह महीनों से तैयारी चल रही थी"। उन्होंने यह भी कहा कि हथियारों की ख़रीद के लिए करोड़ों रुपए के फंड जुटाए गए थे।

सूत्र बताते हैं कि "दंगाईयों को उकसाने के लिए लोगों को राज्य के बाहर से बुलाया गया था।" इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) ने राज्य में सांप्रदायिक तनाव की संभावना को लेकर केंद्र तथा राज्य के गृह मामलों के विभाग को दो बार अलर्ट किया था।

एक आईबी अधिकारी ने बताया कि "हमने संभावित इलाक़ों और लक्ष्यों की पहचान के साथ विशिष्ट चेतावनी दी थी। वे सभी जिले जो हमारी रिपोर्ट में शामिल थें उन्हीं ज़िलों को आख़िरकार निशाना बनाया गया।।"

यह पूछे जाने पर कि उनको इसके बाबत अलर्ट किया गया था उन्होंने एक्शन नहीं लिया तो सुबहानी ने कहा कि "हमें इनपुट था, लेकिन वे विशिष्ट नहीं थे। हमने इनपुट के अनुसार काम किया और पुलिसबल की तैनाती की। पुलिस सतर्क थी और उनकी तैनाती की गई। "

गृह सचिव ने कहा, "हमने सभी एहतियाती उपाय किए। रामनवमी समारोह के आयोजन से पहले हमने संशोधित और नए दिशानिर्देश जारी किया। जुलूस के लिएइस्तेमाल में लाए जाने वाले सभी चीजों को यह सुनिश्चित करने के लिए जांच की गई कि इसमें किसी तरह का भड़काऊ गीत शामिल न हो। हमने अनुमति देने से पहले आयोजकों से सीडी लेकर जांच के लिए कहा था। लेकिन हमें पता चला कि जो भड़काऊ गीत जुलूस में बजाए गए थें उसके सीडी की मंजूरी नहीं दी गई थी।"

दंगों भड़काने में नेताओं के शामिल होने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि एक राजनीतिक दल का नेता था जो शांति समितियों की बैठकों में हिस्सा लियाथा और साथ ही इस हिंसक जुलूस में भी शामिल था।

इस धार्मिक जुलूस में बीजेपी और कांग्रेस दोनों पार्टी के नेता हिंसा भड़काने के आरोपी हैं। न्यूज़क्लिक के पास एक वीडियो है जिसमें देखा जा सकता है किऔरंगाबाद के कांग्रेस विधायक आनंद शंकर एक अनियंत्रित भीड़ का नेतृत्व कर रहे हैं। स्थानीय बीजेपी नेता अनिल सिंह पर भी हिंसा के लिए मुक़दमा दर्ज किया चुका है। स्थानीय अदालत में ले जाने के दौरान पुलिस हिरासत से भाग निकला था लेकिन आख़िरकार वह 2 अप्रैल को सरेंडर कर दिया।

औरंगाबाद के सांसद सुशील कुमार सिंह ने 26 मार्च को कहा था कि ये "क्रिया की प्रतिक्रिया है"। इस बयान के बाद ज़िले में सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई। वह हिंदू सेवा समिति नामक एक संगठन के साथ जुड़े थे जो औरंगाबाद में लंबे समय से रामनवमी जुलूस का आयोजन कर रहा है। वह साल 2007 में बीजेपी में शामिल हुए।

सुबहानी ने कहा कि हाल में राज्य में ऐसे कई नए धार्मिक संगठन उभर आए हैं जो इस तरह की जुलूस का आयोजन कर रहे हैं जिसके परिणामस्वरूप सांप्रदायिकहिंसा हो रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि "एक विशेष धर्म के नाम से नई संस्थाएं उभर गए हैं और वे ऐसी रैलियों के लिए जिला प्रशासन के पास आते रहते हैं। चूंकि यह आस्था का मामला है, इसलिए हमें नियमों और शर्तों के साथ अनुमति देनी पड़ती है लेकिन उनका उल्लंघन होता है।"

यह पूछे जाने पर कि रामनवमी 25 नवंबर को था लेकिन लोगों ने 28 मार्च तक अपनी जुलूसों को निकाला तो कहा कि "लोग आम तौर पर ऐसी जुलूस का आयोजन करने के लिए एक दिन करने के लिए सहमत नहीं होते हैं। उनमें से कुछ एक दिन करते हैं, जबकि दूसरे इसे अलग-अलग तारीखों पर इसे करते हैं। हम उन्हें अनुमति देने से इनकार नहीं कर सकते लेकिन हिंसा की अनुमति कभी नहीं दी जाती है। यह दुर्गा पूजा में भी होता है । विसर्जन की प्रक्रिया अलग-अलग दिनों में होती है। रामनवमी जुलूस के लिए भी ऐसा ही होता है।"

उन लोगों के बारे में बात करने पर जिनकी दुकानों में आग लगा दी गई जिससे उनकी कमाई का ज़रिया ख़त्म हो गया तो सुबहानी ने कहा कि "जिन लोगों की भीसंपत्ति का नुकसान हुआ है उन्हें मुआवजा दिया जाएगा। संबंधित इलाक़े के ज़िला मजिस्ट्रेट ने नुकसान का आकलन करके रिपोर्ट भेज दिया है और हमने मुआवज़ाजारी कर दिया है जो जल्द ही प्रभावित लोगों को दिया जाएगा।

बिहार दंगे
बिहार
BJP
RSS
jdu
मुसलमानों पर हमला

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • रौनक छाबड़ा
    महानगरों में बढ़ती ईंधन की क़ीमतों के ख़िलाफ़ ऑटो और कैब चालक दूसरे दिन भी हड़ताल पर
    19 Apr 2022
    व्यावसायिक चालकों ने पेट्रोल, डीज़ल और सीएनजी की बढ़ती क़ीमतों के विरोध में अपनी वाहन सेवा को लंबित रखा।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    करौली हिंसा पर फैक्ट फाइंडिंग:  संघ-भाजपा पर सुनियोजित ढंग से हिंसा भड़काने का आरोप
    19 Apr 2022
    सीपीएम ने जारी की फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट। रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान के करौली में 2 अप्रैल को जो साम्प्रदायिक दंगे की घटना हुई वह पूरी तरह से प्रायोजित और सुनियोजित थी।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बलिया: पत्रकारों की रिहाई के लिए आंदोलन तेज़, कलेक्ट्रेट घेरने आज़मगढ़-बनारस तक से पहुंचे पत्रकार व समाजसेवी
    19 Apr 2022
    मंगलवार को बलिया के अलावा आज़मगढ़, मऊ, ग़ाज़ीपुर और बनारस से बड़ी संख्या में पत्रकार व समाजसेवी कलेक्ट्रेट पहुंचे और डीएम व एसपी के दफ्तरों का घेराव किया। पत्रकारों का भारी हुजूम जुटने की वजह से…
  • विजय विनीत
    बनारस: ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में वीडियोग्राफी पर रोक, फ़िलहाल नहीं जाएगा कमीशन
    19 Apr 2022
    ‘श्रृंगार गौरी में रोजाना दर्शन पूजन को परंपरा का हिस्सा कतई न बनाया जाए। सिर्फ चैत्र नवरात्रि के दिन ही वहां दर्शन-पूजन की मान्यता है। ज्ञानवापी मस्जिद की बैरिकेडिंग में सिर्फ मसुलमान या…
  • आज का कार्टून
    8 साल की उपलब्धि : ...और नहीं बस और नहीं !
    19 Apr 2022
    अगर एक आम आदमी से मोदी सरकार की आठ साल की उपलब्धियां पूछी जाएं, तो वह क्या जवाब देगा? हम कुछ नहीं कहेंगे, आप ख़ुद सोचिए। सोचिए कि अगर वह आम आदमी आप हैं और आप एक अंधभक्त नहीं हैं तो ईमानदारी से आपका…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License