NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
“हम भारत के मूल निवासी आदिवासी ,जंगल ख़ाली नहीं करेंगे”
सुप्रीम कोर्ट ने लाखों आदिवासियों को जंगल से बाहर निकलने का आदेश दिया था | इस पर अभी कोर्ट ने स्टे कर दिया है लेकिन लाखों आदिवासी इस पुरे मसले पर केंद्र सरकार के रुख को लेकर नाराज़ हैं |
मुकुंद झा
02 Mar 2019
FRA

हम भारत के मूल निवासी आदिवासी
जय जोहर का नारा भारत देश हमारा

आदिवासी पर अत्याचार किया तो ख़ून बहेगा सड़कों पे

संघर्षो की जली मशाल भागे दुश्मन और दलाल

जंगल ख़ाली नहीं करेंगे 

आदिवासी की ज़मीन लूटना बंद करो

एक तीर और एक कमान दलित आदिवासी एक समान

बिरसा तेरा सपनों को मंज़िल तक पहुँचायेंगे

 

इन नारों के साथ आज  यानी 2  मार्च  को सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश जिसमें उसने लाखों आदिवासियों को जंगल से बाहर निकलने का आदेश दिया था | इस  पर अभी कोर्ट ने स्टे कर दिया है लेकिन लाखों  आदिवासी  इस पुरे मसले पर केंद्र सरकार के रुख को लेकर नाराज़ हैं | उन्होंने सरकार को इस पूरे मामले को लेकर अध्यादेश लाने और आदिवासियों को उनकी ज़मीन का हक़ देने की मांग को लेकर मंडी हाउस से पार्लियामेंट स्ट्रीट तक  हज़ारो की संख्या में आदिवासीयों  ने "आदिवासी बचाओ मार्च" किया |

5.PNG

आज के इस मार्च में कई आदिवासी पूरे परिवार के साथ आए थे, कई  प्रदर्षनकारी   अपने  साथ आदिवासियों के पारंपरिक  हथियार जैसे तीर कमान और अपने पारंपरिक वेश भूषा में आये थे | उन लोगों का कहना था कि उन्होंने जंगल में अपना जीवन बिता दिया है और वो किसी भी क़ीमत पर जंगल नहीं छोड़ेंगे | वो अपनी जान दे देंगे लेकिन जंगल से बाहर नहीं आएँगे जैसे मछली बिना पानी के नहीं रह सकती है ऐसे ही हम भी बिना जंगल के नहीं रह सकते हैं  |

वन अधिकार कानून और शीर्ष न्यायालय के फ़ैसले के बाद आदिवासी युवाओं में सरकार के प्रति काफ़ी नाराज़गी है, जो इस  मार्च में भी दिखा. आदिवासी युवाओं ने कहा कि एक तो सरकार न्यायालय में आदिवासियों का पक्ष नहीं रखती है और जब न्यायालाय फ़ैसला सुनाता है, तो उसके बाद उस पर स्टे का प्रयास करती है. यह खेल आदिवासियों को ख़त्म करने के समान है|

53048072_2748376525190289_3672511799053254656_n.jpg

इस मार्च का आह्वानकरने वाली जॉइंट आदिवासी युवा फ़ोरम एवं भारतीय आदिवासी मंच का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का वन एवं वनभूमि से बेदख़लीकरण का आदेश वन अधिकार क़ानून 2006 की मूल भावना के ख़िलाफ़ है, क्योंकि यह कानून 13 दिसंबर 2005 से पहले वनभूमि पर खेती करने एवं वनों में निवास करनेवाले आदिवासी एवं अन्य पारंपरिक वन निवासियों के अधिकार को मान्यता प्रदान करता है. क्या 11 लाख लोग 13 दिसंबर 2005 के बाद जंगलों के अंदर घुसे हैं?

असल में केंद्र और राज्य सरकारों ने जानबूझकर वन अधिकार कानून को लागू नहीं किया है, ताकि जंगलों के अंदर पड़ी अकूत खनिज संपदा का दोहन करने के लिए इसे पूंजीपतियों को दिया जा सके. इसके अलावा आदिवासियों को जंगलों से बाहर निकालने के बाद वनों के विकास के नाम पर भारत सरकार के खाते में कम्पा फंड के तहत रखे गये 55 हजार करोड़ रुपये से वन विभाग के बाबू और पूंजीपति मौज कर सकें. इस आदेश ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कथनी और करनी के बीच के अंतर को भी खोलकर सामने रख दिया है|

एक प्रदर्षनकारी जो झारखंड से आये थे उन्होंने कहा आदिवासी समुदाय किसी भी परिस्थिति में अपना घर मीन और जंगल नहीं छोड़ने वाला है और हम सरकार के द्वारा रिव्यू पिटिशन के बाद आए सुप्रीम कोर्ट के स्टे ऑर्डर से भी संतुष्ट नहीं ! हम चाहते हैं कि इस मुद्दे पर सरकार एक अध्यादेश लाए और तुरंत आदिवासियों के हित में कार्यवाही की जाए जिससे अगली बार जब सुनवाई हो तो सरकार आदिवासियों को उनके जल जंगल और ज़मीन से बेदख़ल ना कर पाए| इससे भारत के विभाजन के पश्चात होने वाले सबसे बड़े आदिवासी विस्थापन और उनके जीवन पर गहरा रहे संकट को दूर करने में उनकी मदद करें|

जंगल से बेदख़ली आदिवासी का अंत होगा और आदिवासी किस आधार पर अपना दावा कर रहे हैं |

जंगल से बेदख़ली आदिवासियों को उनके पैतृक ज़मीन, जीवन शैली, परंपरा और उनके पुरखों से दूर करने की साज़िश है| सामान्य शब्दों में कहा जाए तो यह बेदख़ली आदिवासियों के सम्मान पूर्वक जीवन जीने के अधिकार का हनन है| यह बेदख़ली वन अधिकार अधिनियम 2006 और पेशा कानून 1996 का उल्लंघन है| पेसा( पंचायत एक्सटेंशन टू सेडुल एरिया)   एक्ट 1996, ग्राम सभा को सर्वोच्च मानता है, न कि ग्राम पंचायत को| लेकिन इस जजमेंट में पारम्परिक ग्राम सभाओं की अनदेखी की गयी है|

52851286_2748378981856710_5237076476980887552_n.jpg

इसलिए आदिवासी समाज भारत सरकार से मांग करता है:

1. अनुसूचित जनजाति एवं परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006, को सख़्ती से लागू किया जाए|

2. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पश्चात जिन परिवारों पर विस्थापन का संकट मंडरा रहा है, केंद्र सरकार उनकी ज़मीन पर मालिकाना हक़/पट्टा दिलाने के लिए अध्यादेश लाए|

3. आदिम समुदायों और जिन परिवारों ने अभी तक ज़मीन पर मालिकाना हक़ का दावा नहीं किया है सरकार उन्हें भी अनुसूचित जनजाति एवं परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 , के तहत मालिकाना हक़ और वन अधिकार प्रदान करें|

4. संविधान की पांचवी और छठी अनुसूची को सख़्ती से लागू किया जाए|

5. पारम्परिक ग्रामसभा के अनुसूची 5 के 13 (3) (क), 244 (1), 19, (5 & 6) के तहत आदिवासियों एवं वन निवासियों को दिए गए अधिकारों को सुनिश्चित किया जाये| 

 

 

Adivasis
Forest Rights Act
Supreme Court
Adivasis in India
Adivasi Adhikar Rashtriya Manch
Joint Adivasi Youth Forum
Indian Adivasi Forum
tribal rights
Modi government
Eviction of Adivasis
Illegal Acquisition of Forest Lands.

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

आख़िर फ़ायदे में चल रही कंपनियां भी क्यों बेचना चाहती है सरकार?

तिरछी नज़र: ये कहां आ गए हम! यूं ही सिर फिराते फिराते


बाकी खबरें

  • musahar
    तारिक़ अनवर
    यूपी चुनाव: पूर्वी क्षेत्र में विकल्पों की तलाश में दलित
    02 Mar 2022
    दलित आम तौर पर ऐसे मूक मतदाता माने जाते हैं, जो अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं का आसानी से इज़हार नहीं करते। हालांकि, इस चुनाव को नज़दीक से देखने पर इस बात के साफ़ संकेत मिल जाते हैं कि उनका झुकाव बसपा…
  • कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 7,554 नए मामले, 223 मरीज़ों की मौत
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 7,554 नए मामले, 223 मरीज़ों की मौत
    02 Mar 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.20 फ़ीसदी यानी 85 हज़ार 680 हो गयी है।
  • एम. के. भद्रकुमार
    यूक्रेन युद्ध ने यूरोपियन यूनियन और अमेरिका को ईरान सौदे पर सोचने को मजबूर किया
    02 Mar 2022
    क्या नाटो (उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन) के विस्तार पर अमेरिका-रूस टकराव और यूक्रेन के आसपास बने हालात वियना में चल रही ईरान परमाणु वार्ता को पटरी से उतार देगी?
  • ukraine
    एपी/भाषा
    रूस-यूक्रेन युद्ध अपडेट: कीव के मुख्य टीवी टावर पर बमबारी; सोवियत संघ का हिस्सा रहे राष्ट्रों से दूर रहे पश्चिम, रूस की चेतावनी
    02 Mar 2022
    रूसी बलों ने मंगलवार को यूक्रेन के घनी आबादी वाले शहरी इलाकों पर हमले तेज करते हुए यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर के मध्य स्थित एक मुख्य चौराहे और कीव के मुख्य टीवी टावर पर बमबारी की। वहीं भारत ने…
  • बिहार : सीटेट-बीटेट पास अभ्यर्थी सातवें चरण की बहाली को लेकर करेंगे आंदोलन
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार : सीटेट-बीटेट पास अभ्यर्थी सातवें चरण की बहाली को लेकर करेंगे आंदोलन
    02 Mar 2022
    पालीगंज विधानसभा क्षेत्र से सीपीआई माले विधायक संदीप सौरभ ने कहा कि वह सीटेट और बीटेटट उत्तीर्ण सभी अभ्यर्तियों के लिए सातवें चरण की बहाली के लिए 2014-21 तक सभी रिक्तियों को जोड़कर मार्च महीने में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License