NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
हमारे असली नायक
मछुआरों, सरकारी मशीनरी और स्वयंसेवकों के व्यापक नेटवर्क ने बाढ़ प्रभावित केरल में बचाव अभियान में प्रमुख भूमिका निभाई।
जॉय सेबेस्टियन
20 Aug 2018
Translated by महेश कुमार
kerala fishermen

[जॉय सेबेस्टियन, एक सॉफ्टवेयर पेशेवर जो केरल के आलप्पुज़्हा जिले में बचाव अभियान का हिस्सा है, कुट्टानाद में बाढ़ राहत गतिविधियों में मछुआरों और स्वयंसेवकों द्वारा निभाई गई तारकीय भूमिका के बारे में लिखते है। सुंदर बैकवॉटर के साथ एक बड़ा चावल उगाने वाला क्षेत्र, कुट्टानाद आलप्पुज़्हा और कोट्टायम जिलों में फैला हुआ है। समुद्र तल से नीचे का यह इलाका, क्षेत्र हर साल बाढ़ से पीड़ित होता है। लेकिन इस वर्ष की बाढ़ पूरी तरह से एक अलग ही रंगत के साथ आयी है, बाढ़ के की वज़ह से इस क्षेत्र की कई पंचायतों में रह रही लगभग पूरी आबादी को निकालने की आवश्यकता पैदा हो गई है।

यह लेख मूल रूप से मलयालम में है जिसे शनिवार, 18 अगस्त 2018 को देर रात को लिखा गया था।]

कुट्टानाद और चेंगानूर आज रात शांति से सोएँगे। एडथुआ और मुतार क्षेत्रों के कई लोगों को राहत शिविरों में ले जाया जा रहा है। एक बार यह पूरा हो जाने के बाद, साढ़े तीन दिनों के भीतर 7 पंचायतों के लगभग 2 लाख (200,000) लोगों की बड़े पैमाने पर निकासी पूरी हो जाएगी। मौसम बेहद प्रतिकूल था, और बैकवाटर में पानी बहाव काफी भारी था। ऐसी स्थिति में यह कि दो लाख लोग, जो प्रमुख बैकवाटर और उसके बहाव के तट पर रहते हैं, और नीचे स्तर जमीन जो चावल के खेतों से घिरे स्थानों में से एक है, उन्हें आलप्पुज़्हा और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षित शिविरों में उनके प्रिय घरेलू जानवरों (पशुधन) के साथ भेज दिया गया है। तथ्य यह है कि इतनी कम समय अवधि में यह किया गया जोकि एक ऐतिहासिक कार्य है।

चूंकि मैं आलप्पुज़्हा जिला कलेक्टरेट के नियंत्रण केंद्र में था, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रिपोर्ट तक कोई पहुंच नही थी, डर जो बाहर के लोगों सता रहा था मैं उससे कतई प्रभावित नही था। यह तब हुआ जब हमने कल (17 अगस्त) रात को नियंत्रण केंद्र में फोन की कॉल में भारी वृद्धि देखी, हमने महसूस किया कि कुछ मीडिया आउटलेटों द्वारा लिखे गए "समाचार" के कारण लोग किस तरह घबरा गए है। दोपहर के मध्य में, फोन कॉल की एक और लहर कुछ और "समाचार" के बाद आई। दावा है कि नौसेना के हेलीकॉप्टर रात में काम कर रहे थे, इस तरह के कॉल के पीछे क्या कारण था। मुझे आश्चर्य है कि इस तरह की नकली खबर के पीछे कौन था।

हां, इमारतों के शीर्ष से हेलीकॉप्टरों द्वारा लोगों का बचाव करने के दृश्यों को देखने से अच्छा लगा। लेकिन वास्तविक नायक आम लोग थे। मुझे आश्चर्य है कि उनके दृश्य कहीं दिखाए जा रहे हैं या नही। उनके पास वर्दी नहीं थी। बस उनकी नाव ही उनकी शक्ति थी। ये वे लोग हैं जो हर दिन समुद्र की लहरों का सामना करते हैं। कुट्टानाद और चेंगानूर की लहरें उनके लिए कुछ भी नहीं थीं। केवल लुंगी पहने हुए अपने सिर के चारों ओर कपड़ा बाँधे बंधे हुए थे, उन्होंने चुनौतीपूर्ण कार्य को साहसपूर्वक निभाया।

एक बार बचाव अभियान रात में बंद हो गया और हर कोई कैंप में वापस आ गया, एक मछुआरे ने- जो मेरे पिता की उम्र के समान था ने - 10 बजे नियंत्रण कक्ष में आकर मेरा हाथ पकड़कर रोया और बोला, "बेटा, ये अधिकारी हमें रात मैं जाने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। 15 लोग हमारे लिए एक घाट (मलयालम में "कडवु") के पास 10 किलोमीटर दूर इंतजार कर रहे हैं। हमने उन्हें वादा किया है कि हम वापस जाएँगे। हम लोग ही हैं जो रात में समुद्र में काम करते हैं। आओ हम चलें।"

मैं बेहद आश्चर्यचकित होकर अपनी सीट से कूद गया। क्या आदमी है! हाँ, ऐसे गरीब मछुआरों ने 60 प्रतिशत से ज्यादा लोगों को बचाया था। वही गरीब मछुआरे जो इन सभी प्रयासों के बाद सरकारी अधिकारियों से केरोसिन खरीदने के लिए नम्रता से खड़े होंगे। क्या वे हमारे असली हीरो/नायक नहीं हैं?

शेष चालीस प्रतिशत को ज्यादातर जल परिवहन विभाग की हाउसबोट और नावों से बचाया गया। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल द्वारा बचाए गए लोगों की संख्या दो अंकों में होगी। नौसेना के हेलीकॉप्टरों ने लगभग चालीस लोगों को बचाय होगा। यह उनकी गलती नहीं है। कुट्टानाद के संदर्भ में उनकी संख्या बस पर्याप्त नहीं थी।

मैं स्थिति के बारे में पता लगाने और वापस जाने के विचार के साथ, गुरुवार को कलेक्टरेट के साथ अपने दोस्त के साथ गया था। कुट्टानाद और चेंगानूर में जल स्तर केवल तब उठना शुरू हुआ था। जब हम वहां पहुंचे, तो हमने फोन कॉल में व्यस्त कुछ 6-7 लोगों को देखा। वे कयामकुलम से एसएफआई के कार्यकर्ता थे। हम भी उनसे जुड़ गए। पहले घंटे में, 10-15 फोन कॉल आये थे। लेकिन जैसे ही कई घंटे बीते, बचाव के लिए लगातार फोन कॉल की झड़ी लग गयी। तब से तीन दिन बीत गए है। आज दोपहर तक फोन कॉल की संख्या कम हो गई। आज रात 11 बजे, एसएफआई कार्यकर्ता जिजो की केवल एक फोन कॉल थीं जो हमारे साथ पिछ्ले तीन दिनों से था, और ध्रुव की जो कि मैदान और नियंत्रण कक्ष के बीच बचाव के लिए आ जा रहा था। मैं आज रात कुछ समय के लिए सोने की योजना बना रहा हूँ।

एक दुख हमेशा रहेगा। जब सुबह 4 बजे, किसी ने मथूर, रमांकारी में फंसी दादी अम्म्मा के बारे में जानकारी दी थी। बचाव कार्यकर्ता शाम को केवल उनके निर्जीव शरीर को ही वापस ला सके।

मैने इस काम के दौरान कई ऊर्जावान युवाओं से मुलाकात की। बचाव अभियान की चोटी पर, हम में से लगभग 150 नियंत्रण कक्ष में थे। कैन-एलेप्पी टीम [जिसे आलप्पुषा की नहरों को साफ करने के अभियान के लिए बनाया गया था] के साथ, कई युवाओं के साथ जो किसी भी संगठन का हिस्सा नहीं थे, साथ ही साथ हमसे जुड़ रहे थे, फोन कॉल को संभालने और वर्गीकृत करने और क्षेत्र में बचाव कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय काफी बेहतर किया।

जीवन बचाने के लिए बहुत से लोगों ने मिलकर काम किया। कई इंजीनियर जो पूरे दिन जागते रहे और एसओएस ऐप से डेटा बनाने के लिए लिख्ते रहे, आईटी पेशेवर जो दुनिया के विभिन्न कोनों में बैठे और एसओएस ऐप से डेटा स्वरूपित और वर्गीकृत कर रहे थे, सोशल मीडिया पर दोस्तों और असंख्य लोगों कॉल और चैट संदेशों के माध्यम से हमें किस मदद की ज़रूरत है के बारे मैं पूंछा। कई सरकारी अधिकारी जिन्होंने स्वयंसेवकों को विभिन्न स्थानों से अपने स्वयं के परिचालनों का एक अनिवार्य हिस्सा माना था। वित्त मंत्री, जो सामने से नेतृत्व कर रहे थे, मंत्री की टीम में, जिला कलेक्टर और सब-कलेक्टर शामिल थे।

एक मछुआरे के बेटे होने के गौरव के साथ अब मुझे सो जाने दो।

kerala floods
Kerala
kerala fishermen
केरल के मछुआरे
केरल में बाढ़

Related Stories

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

सीपीआईएम पार्टी कांग्रेस में स्टालिन ने कहा, 'एंटी फ़ेडरल दृष्टिकोण का विरोध करने के लिए दक्षिणी राज्यों का साथ आना ज़रूरी'

सीताराम येचुरी फिर से चुने गए माकपा के महासचिव

केरल में दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल के तहत लगभग सभी संस्थान बंद रहे

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 7,554 नए मामले, 223 मरीज़ों की मौत

केरल : वीज़िंजम में 320 मछुआरे परिवारों का पुनर्वास किया गया

किसी मुख्यमंत्री के लिए दो राज्यों की तुलना करना उचित नहीं है : विजयन

खोज ख़बर: हिजाब विवाद हो या नफ़रती भाषण, सब कुछ चुनाव के लिए कब तक

पड़ताल: गणतंत्र दिवस परेड से केरल, प. बंगाल और तमिलनाडु की झाकियां क्यों हुईं बाहर

केरल: चर्चित नन रेप केस में आरोपी बिशप बरी, फ़ैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगी नन


बाकी खबरें

  • Victims of Tripura
    मसीहुज़्ज़मा अंसारी
    त्रिपुरा हिंसा के पीड़ितों ने आगज़नी में हुए नुकसान के लिए मिले मुआवज़े को बताया अपर्याप्त
    25 Jan 2022
    प्रशासन ने पहले तो किसी भी हिंसा से इंकार कर दिया था, लेकिन ग्राउंड से ख़बरें आने के बाद त्रिपुरा सरकार ने पीड़ितों को मुआवज़ा देने की घोषणा की थी। हालांकि, घटना के तीन महीने से अधिक का समय बीत जाने के…
  • genocide
    अजय सिंह
    मुसलमानों के जनसंहार का ख़तरा और भारत गणराज्य
    25 Jan 2022
    देश में मुसलमानों के जनसंहार या क़त्ल-ए-आम का ख़तरा वाक़ई गंभीर है, और इसे लेकर देश-विदेश में चेतावनियां दी जाने लगी हैं। इन चेतावनियों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
  • Custodial Deaths
    सत्यम् तिवारी
    यूपी: पुलिस हिरासत में कथित पिटाई से एक आदिवासी की मौत, सरकारी अपराध पर लगाम कब?
    25 Jan 2022
    उत्तर प्रदेश की आदित्यनाथ सरकार दावा करती है कि उसने गुंडाराज ख़त्म कर दिया है, मगर पुलिसिया दमन को देख कर लगता है कि अब गुंडाराज 'सरकारी' हो गया है।
  • nurse
    भाषा
    दिल्ली में अनुग्रह राशि नहीं मिलने पर सरकारी अस्पतालों के नर्सिंग स्टाफ ने विरोध जताया
    25 Jan 2022
    दिल्ली नर्स संघ के महासचिव लालाधर रामचंदानी ने कहा, ‘‘लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल, जीटीबी हस्पताल और डीडीयू समेत दिल्ली सरकार के अन्य अस्पतालों के नर्सिंग स्टाफ ने इस शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में भाग…
  • student
    भाषा
    विश्वविद्यालयों का भविष्य खतरे में, नयी हकीकत को स्वीकार करना होगा: रिपोर्ट
    25 Jan 2022
    रिपोर्ट के अनुसार महामारी के कारण उन्नत अर्थव्यवस्था वाले देशों में विश्वविद्यालयों के सामने अनेक विषय आ रहे हैं और ऐसे में विश्वविद्यालयों का भविष्य खतरे में है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License