NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
“हमारे जंगल और विश्वविद्यालय वापस दो”
जंगल की ज़मीन से बेदखली और 13 प्वाइंट रोस्टर के खिलाफ आदिवासियों और विश्वविद्यालय शिक्षकों ने मंगलवार को ‘भारत बंद’किया, जिसमें कई राजनीतिक दलों ने भी साथ दिया।
मुकुंद झा
05 Mar 2019
DUTA

देश के कई संगठनों ने मंगलवार को ‘भारत बंद’ का आह्वान किया था, जिसका देश के कई राज्यों में असर भी दिखा। आदिवासियों को उनकी ज़मीन से बेदखल करने और 13 प्वाइंट रोस्टर के खिलाफ आदिवासियों और विश्वविद्यालय शिक्षकों ने इस भारत बंद में बड़ी संख्या में भागीदारी की। इस दौरान राजधानी दिल्ली में आदिवासी, दलित, ओबीसी और छात्र संगठनों ने मंडी हाउस से संसद तक मार्च भी किया। इन लोगों ने सरकार को चेताया कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वो उन्हें आने वाले चुनावो में उखाडा फेकेंगे।

बिहार समेत कई राज्यों में बंद का असर दिखा। बिहार में इस बंद के समर्थन में माकपा, भाकपा , भाकपा माले, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी (रालोसपा) भी आगे आईं। इन पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने कई स्थानों पर सड़क और रेल मार्ग को रोक कर केंद्र सरकार के विरोध में नारेबाजी की और अपना रोष जाहिर किया।

53933986_1031695353690152_4531511155243352064_n.jpg

हाजीपुर बंद समर्थकों ने महात्मा गांधी सेतु पर जाम कर दिया। आरा में भी बंद समर्थकों ने रेल और सड़क मार्ग को अवरुद्ध कर प्रदर्शन किया। पटना-गया सड़क मार्ग को भी जाम कर दिया गया। सासाराम, नवादा, खगड़िया और गया में भी भीम आर्मी संगठन व विभिन्न राजनीतिक दलों के लोग सड़क पर उतरे और सड़कों पर टायर जलाकर मार्ग जाम किया। पटना में संविधान संघर्ष समिति के कार्यकर्ता भी सड़क पर उतरे।

अन्य रिपोर्टों के मुताबिक इस बंद का असर बिहार के अलावा झारखंड, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, महाराष्ट्र, छतीसगढ़, पंजाब, तेलंगाना, तमिलनाडु, अंडमान, हिमाचल, नागालैंड में भी दिखा। इन राज्यों में कई जगहों पर सड़कें जाम करने और ट्रेन सेवा को रोका गया है। इस बंद को आरजेडी और वामदलों  के साथ ही कई अन्य दाल जैसे सपा, बसपा , कांग्रेस और आप समेत कई विपक्षी दलों ने अपना समर्थन दिया है|

53160490_398376460949920_2125979442533629952_n_0.jpg

बिहार के भाकपा-माले नेता धीरेन्द्र झा ने कहा कि न केवल दलित व पिछड़े समुदाय के आरक्षण में कटौती की जा रही है, बल्कि उन्हें पूरे देश में आवास की जमीन से विस्थापित किया जा रहा है। बिहार में तो खासकर बरसों-बरस से बसे गरीबों को भी बेदखल किया जा रहा है। बिहार में लाखों गरीबों को या तो उजाड़ दिया गया है अथवा उजाड़ने का नोटिस दिया गया है। आजादी के इतने सालों बाद भी हाउसिंग राइट मौलिक अधिकार का दर्जा प्राप्त नहीं कर सका है। आज इसके खिलाफ पूरे राज्य में खेग्रामस के बैनर से लाखों गरीबों ने जिला व प्रखंड मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया। सरकार जंगलों में आदिवासियों को उजाड़ रही है और बिहार में दलित-गरीबों को। मोदी की इस कार्पोरेट परस्ती को पूरा भारत देख रहा है और आने वाले दिनों में सबक सिखायेगा।

शिक्षक और छात्रों का दिल्ली में मार्च

आदिवासी और आदिवासियों को उनके अधिकारों के संरक्षण की मांग और 13 प्वाइंट रोस्टर के खिलाफ बुलाए गए बंद का समर्थन करते हुए दिल्ली में छात्रों, शिक्षकों, दलित आदिवासी संगठनों के साथ ही कई युवा संगठनों ने ‘संविधान बचाओ-देश बचाओ’ नारे के साथ दिल्ली में संसद मार्च किया, जिसमें हज़ारों की संख्या में लोग शामिल हुए। इस मार्च में डूटा के साथ ABVP  को छोड़ सारे छात्र संगठन शामिल हुए। इसके आलावा कांग्रेस की नेता और दिल्ली की पूर्व मंत्री डॉ. किरण वालिया, आरजेडी के राज्यसभा सांसद मनोज झा, आप के नेता और दिल्ली के कैबिनेट मंत्री राजेंद्र पाल सिंह गौतम, माकपा के पोलित ब्यूरो सदस्य नीलोत्पल बसु के आलावा कई अन्य राजनीतिक दलों के नेता इस मार्च में शामिल हुए।

53522401_249687335981093_2073167373610778624_n.jpg

जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र सैफुल्ला हाथ में संविधान लेकर इस प्रतिरोध मार्च में शमिल हुए। हमने उनसे बात की और पूछा कि वो हाथ में संविधान लेकर क्यों मार्च कर रह रहे है? इस पर उन्होंने जो कहा वो यह था कि ये सरकार न केवल दलित आदिवासी पर हमला कर रही है, बल्कि ये हमारे संविधान को ही खत्म करना चाहती है। यह हमने देखा भी है कि इसी जंतर-मंतर पर भाजपा और संघ के लोगो ने संविधान को जलाया था, हम उन्हें बताने आये है कि आप ऐसे हमारे संविधान को ख़त्म नहीं कर सकोगे, जब तुम इस पर हमला करोगे तो हम इस संविधान में दिए गए विरोध और समानता के अधिकार को लेकर मार्च करेंगे। उन्होंने कहा ‘मनुवाद का एक जवाब संविधान जिंदाबाद।’

53160308_659242851175286_8159610003158728704_n.jpg

इसके अलावा दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक केदार नाथ मंडल जिनका हौसला और जज्बा देखने लायक था। उनकी उपस्थिति सभी को आंदोलित कर रही थी। वे अपनी शारीरिक अक्षमताओं के बावजूद इस पूरे मार्च में पूरी हिम्मत के साथ चल रहे थे। उन्होंने कहा यह समय सबको एकजुट होकर इस संविधान को बचाने का है। ये सरकार दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक, पिछड़ा विरोधी है। खुद मोदी OBC  बताकर चुनाव लड़े और जीते भी लेकिन जबसे वो जीते हैं वो लगातार दलित आदिवासी, पिछड़ा विरोधी ही काम कर रहे हैं। अभी लड़ने की जरूरत है अगर अभी नहीं लड़े तो वो  हज़ारो सालो में आदिवासी और दलित जिन्हे कुछ अधिकार मिल सके है उसे भी छीन लेंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ये सरकार संविधान से नहीं बल्कि नागपुरिया विधान देश में लागू करना चाहती है। 

पूरा मामला क्या है?

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने कई ऐसे आदेश दिए जिससे देश के दलित खासतौर पर आदिवासियों के अधिकार गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं। इन सभी पर सरकार का रुख भी ठीक नहीं रहा। इसी को लेकर लोगों में भारी रोष है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 21 राज्यों के 12 लाख आदिवासियों को जंगल छोड़ने का आदेश दिया है। ये आदिवासी वनाधिकार कानून के तहत अपना दावा साबित नहीं कर पाए हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश पर स्टे लगा दिया है, लेकिन सरकार ने इस पूरे मामले की सुनवाई में लोगों का और अपना पक्ष रखने के लिए वकील तक नहीं भेजा था, जो सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है। 

इसी तरह सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालयों की नियुक्ति में विभागवार आरक्षण के अपने फैसले के खिलाफ दायर केंद्र और यूजीसी की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है।  इसके खिलाफ शिक्षकों और छात्रों में गुस्सा है।  आज सभी की मांग थी की दोनों ही मामलों में सरकार अध्यादेश लाए। 

आम चुनावों से पहले सरकार भी किसी प्रकार का जोखिम नहीं उठाना चाहती है। इसलिए बंद के दौरान  केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने आंदोलनकारियों से भारत बंद वापस लेने की अपील की।  उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को एक यूनिट माना जाएगा और सरकार 200 प्वाइंट रोस्टर के पक्ष में है। जावड़ेकर ने यहां तक कहा कि दो दिन के भीतर आन्दोलनकारियों को जरूर न्याय मिलेगा। अब तक देखना है कि आंदोलन के दबाव में सरकार क्या कदम उठाती है।

  इसे भी पढ़े :-“हम भारत के मूल निवासी आदिवासी ,जंगल ख़ाली नहीं करेंगे”

 

DUTA protest
DUTA
teachers protest
aadiwasi
SC/ST
Adivasi Adhikar Rashtriya Manch
Joint Adivasi Youth Forum
Indian Adivasi Forum
tribal rights
Modi government
Eviction of Adivasis

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

आख़िर फ़ायदे में चल रही कंपनियां भी क्यों बेचना चाहती है सरकार?

तिरछी नज़र: ये कहां आ गए हम! यूं ही सिर फिराते फिराते

'KG से लेकर PG तक फ़्री पढ़ाई' : विद्यार्थियों और शिक्षा से जुड़े कार्यकर्ताओं की सभा में उठी मांग

मोदी के आठ साल: सांप्रदायिक नफ़रत और हिंसा पर क्यों नहीं टूटती चुप्पी?

डीयूः नियमित प्राचार्य न होने की स्थिति में भर्ती पर रोक; स्टाफ, शिक्षकों में नाराज़गी

कोविड मौतों पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट पर मोदी सरकार का रवैया चिंताजनक

किसानों और सत्ता-प्रतिष्ठान के बीच जंग जारी है


बाकी खबरें

  • starbucks
    सोनाली कोल्हटकर
    युवा श्रमिक स्टारबक्स को कैसे लामबंद कर रहे हैं
    03 May 2022
    स्टारबक्स वर्कर्स यूनाइटेड अमेरिकी की प्रतिष्ठित कॉफी श्रृंखला हैं, जिसकी एक के बाद दूसरी शाखा में यूनियन बन रही है। कैलिफ़ोर्निया स्थित एक युवा कार्यकर्ता-संगठनकर्ता बताते हैं कि यह विजय अभियान सबसे…
  • प्रबीर पुरकायस्थ, टी के अंजलि
    कोयले की किल्लत और बिजली कटौती : संकट की असल वजह क्या है?
    03 May 2022
    मौजूदा संकट, बिजली क्षेत्र में सुधारों की बुनियादी विचारधारा का ही नतीजा है, जहां 400 गीगावाट की स्थापित बिजली क्षमता के होते हुए भी, इससे आधी शीर्ष मांग पूरी करना भी संभव नहीं हो रहा है।
  • आज का कार्टून
    मंज़र ऐसा ही ख़ुश नज़र आए...पसमंज़र की आग बुझ जाए: ईद मुबारक!
    03 May 2022
    कार्टूनिस्ट इरफ़ान के साथ हम सब इस ईद पर यही चाहते हैं कि मंज़र ऐसा ही ख़ुश नज़र आए...पसमंज़र की आग बुझ जाए।
  • विजय विनीत
    बनारस में हाहाकारः पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में पीने के पानी के लिए सब बेहाल
    03 May 2022
    ग्राउंड रिपोर्टः  बनारस में पानी की आफत को देखते हुए एमएलसी आशुतोष सिन्हा ने मांग की है कि शुद्ध पेयजल की आपूर्ति के लिए बनारस शहर में आपातकाल घोषित किया जाए और पानी की विलासिता पर रोक लगाई जाए।…
  • अखिलेश अखिल
    ढहता लोकतंत्र : राजनीति का अपराधीकरण, लोकतंत्र में दाग़ियों को आरक्षण!
    03 May 2022
    आजादी के अमृतकाल की दुदुम्भी और शंखनाद से इतर जब राजनीति के अपराधीकरण पर हम नजर डालते हैं तो शर्म से सिर झुक जाता है। जो सदन कभी जनता के सवालों पर गूंजता था,एक से बढ़कर एक वक्ताओं के ऐतिहासिक भाषणों…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License