NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
"हमें 99 प्रतिशत नागरिकों का भारत चाहिये, 1 प्रतिशत का नहीं"
एआईपीएफ़ ने एक घोषणपत्र जारी किया है, जिसे "2019 चुनाव के लिये भारत की जनता का घोषणापत्र" का नाम दिया गया है। इस घोषणापत्र में बताया गया है कि 2019 का चुनाव इस देश के लिये क्यों ख़ास है।
सत्यम् तिवारी
02 Mar 2019
AIPF

पिछले पांच सालों का 'मोदी राज' बीजेपी के लिए भले ही बेहद सुखदायक रहा हो, लेकिन आम जनता की दिक़्क़तों का हल नहीं हुआ बल्कि इनमें इज़ाफा ही हुआ है। यही वजह है कि आज देश का विपक्ष बीजेपी की सरकार के ख़िलाफ़ एकजुट होने की कोशिश कर रहा है। इसी कड़ी में राजनीतिक विपक्ष के अलावा सिविल सोसायटी, छात्र-युवा संगठन, किसान-मज़दूर संगठन आगे आए हैं। इन्ही में महत्वपूर्ण है एआईपीएफ़ यानी ऑल इंडिया पीपल्स फ़ोरम। जैसा कि नाम से ही जाहिर है एआईपीएफ़ जनता के सवालों के लिये संघर्षरत विभिन्न धाराओं का मंच है जो आगामी चुनावों में जनता के मुद्दों को मुख्य एजेंडा मानकर काम करने की ओर अग्रसर है। इसका गठन 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद किया गया था। एआईपीएफ़ का दावा है कि वो चुनाव के बाद भी जनता के हक़ में काम करते रहेंगे।

अभी बीती 28 फ़रवरी को एआईपीएफ़ ने एक घोषणपत्र जारी किया है, जिसे "2019 चुनाव के लिये भारत की जनता का घोषणापत्र" का नाम दिया गया है। इस घोषणापत्र में बताया गया है कि 2019 का चुनाव इस देश के लिये क्यों ख़ास है।

एआईपीएफ़ संयोजक  गिरिजा पाठक कहते हैं, "आगामी लोकसभा चुनाव देश में अब तक हुए अन्य चुनावों की तरह के सामान्य चुनाव नहीं हैं। मोदी सरकार की नीतियों के कारण आज देश में बेरोज़गारी के हालात पिछले 45 सालों में सबसे बदतर हो चुके हैं। कृषि संकट चरम पर है। राजनीति में परिवारवाद का विरोध करने का नाटक करने वाली भाजपा और मोदी के राज में नेता-पुत्रों और कॉर्पोरेट घरानों की चांदी कट रही है। अम्बानी-अडानी को मुनाफ़ा पहुँचाने के लिये बड़े-बड़े घोटालों में ख़ुद प्रधानमंत्री संलिप्त हैं।"

घोषणापत्र में शामिल अहम बिंदू :

* मोदी सरकार के दस झूठे और टूटे वादे : 2 करोड़ रोज़गार का वादा, पेट्रॉल के दाम घटाने का वादा, नारी सुरक्षा का वादा, और अन्य टूटे वादों का ज़िक्र एआईपीएफ़ के इस घोषणापत्र में किया गया है। इसी के साथ रुपये की गिरती क़ीमत, गंगा की गंदगी और "अच्छे दिन" का ज़िक्र करते हुए प्रधानमंत्री के वादों पर कड़ा हमला किया गया है।

* लोकतंत्र और संविधान पर हुए बड़े हमले : पिछले पांच सालों में जिस तरह से आम जनता पर, लोकतंत्र पर, और संविधान पर जो लगातार हमले हुए हैं, उन हमलों का ज़िक्र और निंदा इस घोषणापत्र में की गई है। दलितों, छात्रों, अल्पसंख्यकों, पत्रकारों पर लगातार हुए हमले और नेताओं द्वारा उन हमलों का समर्थन घोषणापत्र में शामिल किया गया है। एआईपीएफ़ ने मीडिया की भूमिका पर सवाल उठाते हुए इस बात को दर्शाया है कि किस तरह से पिछले पांच सालों में मीडिया ने सरकार के प्रचार-प्रसार के लिए काम किया है। फ़ेक न्यूज़ जिस तरह से लगातार फैलाई जा रही है, घोषणापत्र में उसका भी ज़िक्र शामिल है।

इसके अलावा मोदी सरकार के कई ‘जुमलों’ पर एआईपीएफ़ ने बड़े सवाल खड़े किए हैं :

* हर बैंक अकाउंट में 15 लाख लाने का वादा

* नोटबंदी से काले धन को ख़त्म करने का दावा

* स्वच्छ भारत

* बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ

* मुद्रा योजना की विफ़लता

* हर घर में बिजली का वादा

* "मेक इन इंडिया" का मज़ाक़

घोषणपत्र के अंत में एआईपीएफ़ ने उन तमाम घोटालों का ज़िक्र किया है जो पिछले पांच सालों में हुए हैं। सबसे हालिया "रफ़ाल डील, जियो यूनिवर्सिटी का मामला , अमित शाह के बेटे जय शाह का मामला, पीयूष गोयल के मामले पर सवाल खड़े किए गए हैं और इनपर मोदी सरकार से जवाब मांगा गया है। जो भ्रष्टाचार के सवाल पर हमेशा से पिछली सरकार पर हमले करती रही है।

"पुलवामा और युद्धोन्माद के नाम पर वोट मांगना बन्द करो!"

एआईपीएफ़ ने भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर चिंता ज़ाहिर करते हुए कहा है कि दो परमाणु अस्त्रों से लैस देशों के बीच युद्ध पूरे एशिया और दुनिया के लिये ख़तरनाक है। एआईपीएफ़ ने कहा है कि युद्ध से कभी किसी मसले का हल नहीं निकल सकता। एआईपीएफ़ ने अपील की है दोनों देश कूटनीतिक तरीक़ों से इस मसले का हल निकालें।

एआईपीएफ़ सैनिकों के अधिकार की सुरक्षा की मांग कर रहा है और कहा है कि वो सैनिकों के परिवारों के साथ मज़बूती से खड़े हैं।

सरकार की पांच साल की विफ़लताओं को मद्देनज़र रखते हुए एआईपीएफ़ अंत में उन मांगों की बात कर रहा है जो आम जन के मुद्दे हैं।

"भारत की जनता के घोषणापत्र" में शामिल आम जन की मांगें

जनता को सुविधाएं प्रदान करने के लिए सबसे अमीर लोगों पर टैक्स लगाया जाये।

एक भ्रष्टाचार मुक्त भारत का निर्माण हो।

लोगों के हक़ों की बात हो।

किसानों, मज़दूरों को सुरक्षा और समृद्धि प्रदान की जाए।

शिक्षा और रोज़गार के मुद्दों को सबसे ज़्यादा अहमियत दी जाए

LGBTQI  के सुरक्षा, अधिकार सुरक्षित किये जाएं और उनपर हो रही हिंसा को रोका जाये।

पर्यावरण सुरक्षा और सेवा।

नाबालिगों और बच्चों को अधिकार प्रदान किये जाएं।

जनता के इन तमाम मुद्दों को बताते हुए एआईपीएफ़ का कहना है कि इन सब सवालों पर कोई फ़ैसला तभी लिया जा सकता है जब मौजूदा सरकार सत्ता से हटेगी और जनता के हक़ों की बात करने वाली सरकार सत्ता में आएगी। संगठन का मानना है कि इस बार एक ऐसी सरकार के चुनाव की ज़िम्मेदारी है जो देश के संविधान और धर्मनिरपेक्ष ढांचे को सुरक्षित रखने के साथ आम जनता के बुनियादी सवालों को हल कर सके।

एआईपीएफ़ ने सभी विपक्षी दलों से इन मुद्दों पर जनता के हक में एकजुटता दिखाने और इस मुहिम में शामिल होने की अपील की है। एआईपीएफ का कहना है कि जनता खुद इन सवालों पर गौर करे और आने वाले चुनाव में इन मुद्दों को आगे रखकर ही नई सरकार का चुनाव करे।

AIPF
ALL INDIA PEOPLE'S FORUM
PEOPLE'S CHARTER
General elections2019
2019 आम चुनाव
जनता का घोषणापत्र
Narendra modi
BJP Govt
BJP-RSS
Save Democracy
Save Nation
PEOPLE DEMAND

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़

हिमाचल में हाती समूह को आदिवासी समूह घोषित करने की तैयारी, क्या हैं इसके नुक़सान? 


बाकी खबरें

  • BJP
    अनिल जैन
    खबरों के आगे-पीछे: अंदरुनी कलह तो भाजपा में भी कम नहीं
    01 May 2022
    राजस्थान में वसुंधरा खेमा उनके चेहरे पर अगला चुनाव लड़ने का दबाव बना रहा है, तो प्रदेश अध्यक्ष सतीश पुनिया से लेकर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत इसके खिलाफ है। ऐसी ही खींचतान महाराष्ट्र में भी…
  • ipta
    रवि शंकर दुबे
    समाज में सौहार्द की नई अलख जगा रही है इप्टा की सांस्कृतिक यात्रा
    01 May 2022
    देश में फैली नफ़रत और धार्मिक उन्माद के ख़िलाफ़ भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) मोहब्बत बांटने निकला है। देशभर के गावों और शहरों में घूम कर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन किए जा रहे हैं।
  • प्रेम कुमार
    प्रधानमंत्री जी! पहले 4 करोड़ अंडरट्रायल कैदियों को न्याय जरूरी है! 
    01 May 2022
    4 करोड़ मामले ट्रायल कोर्ट में लंबित हैं तो न्याय व्यवस्था की पोल खुल जाती है। हाईकोर्ट में 40 लाख दीवानी मामले और 16 लाख आपराधिक मामले जुड़कर 56 लाख हो जाते हैं जो लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट की…
  • आज का कार्टून
    दिन-तारीख़ कई, लेकिन सबसे ख़ास एक मई
    01 May 2022
    कार्टूनिस्ट इरफ़ान की नज़र में एक मई का मतलब।
  • राज वाल्मीकि
    ज़रूरी है दलित आदिवासी मज़दूरों के हालात पर भी ग़ौर करना
    01 May 2022
    “मालिक हम से दस से बारह घंटे काम लेता है। मशीन पर खड़े होकर काम करना पड़ता है। मेरे घुटनों में दर्द रहने लगा है। आठ घंटे की मजदूरी के आठ-नौ हजार रुपये तनखा देता है। चार घंटे ओवर टाइम करनी पड़ती है तब…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License