NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
भारत
राजनीति
हिरासत में मौत मामले में तीन पुलिसवालों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव और राज्य के पुलिस प्रमुख को नोटिस जारी कर मामले पर उनकी रिपोर्ट मांगी थी, जिसके बाद यह कार्रवाई की गयी। इसी मामले में किसानों और अन्य लोगों ने प्रदर्शन भी किया।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
18 Oct 2019
harpur

हापुड़ : लोगों में बढ़ते गुस्से और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दख़ल के बाद तीन पुलिस कर्मियों और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ कथित तौर पर हिरासत में किसान की मौत के प्रकरण में हत्या का मामला दर्ज किया गया है।

अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि गुरुवार रात को मृतक प्रदीप तोमर के भाई कुलदीप तोमर की शिकायत के आधार पर एक प्राथमिकी दर्ज की गई।

आपको बता दें कि पिलखुआ थाना क्षेत्र के लाखन गाँव में 30 अगस्त को एक महिला के शव बरामद हुआ था। इस मामले में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। मृतका, प्रदीप तोमर के साले की पत्नी थी और पुलिस को शक था कि इस हत्या के पीछे प्रदीप का भी हाथ है।

बीते रविवार को 35 वर्षीय प्रदीप को इसी हत्या के मामले में पूछताछ के लिए हापुड़ के पिलखुवा इलाके में छिजारसी पुलिस थाने में बुलाया गया था और हिरासत में ले लिया गया था।

18_10_2019-pradeepfarmerdelhinews_19677967_0.jpg
मृतक प्रदीप तोमर (फाइल फोटो)


मृतक के परिवार ने आरोप लगाया था कि प्रदीप को पूछताछ के दौरान बेरहमी से पीटा गया, जिससे उसकी हालत बुरी तरह बिगड़ गई। आरोप में यह भी कहा गया कि प्रदीप से पूछताछ के दौरान उसका 10 साल का बेटा पुलिस चौकी के बाहर इंतजार करता रहा।

हापुड़ के पुलिस अधीक्षक यश वीर सिंह ने पीटीआई-भाषा को बताया कि इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 323 (हमला) के तहत क्षेत्राधिकारी संतोष कुमार, थाना प्रभारी योगेश बालियान, उप-निरीक्षक अजब सिंह और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस के मुताबिक, थाना प्रभारी बालियान और उप-निरीक्षक सिंह को पहले ही एक कांस्टेबल के साथ निलंबित कर दिया गया है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव और राज्य के पुलिस प्रमुख को नोटिस जारी कर मामले पर उनकी रिपोर्ट मांगी थी, जिसके बाद यह कार्रवाई की गयी।

आयोग के बयान के अनुसार, मीडिया से प्राप्त जानकारी के मुताबिक यह पुलिस हिरासत में एक व्यक्ति के मानवाधिकारों के उल्लंघन का मामला है, जिसके लिए राज्य की पुलिस की जवाबदेही बनती है।

एनएचआरसी ने पुलिस महानिदेशक ओ पी सिंह को निर्देश दिया है कि वह आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के बारे में और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में अपनी कार्रवाई रिपोर्ट में जानकारी दें।
 
आयोग ने मुख्य सचिव से पीड़ित परिवार की, खास तौर पर मृतक के नाबालिग बेटे की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है जो हिरासत में अपने पिता की कथित यातना और मौत के आघात से गुजर रहा है।

एनएचआरसी ने कहा, ‘‘चार सप्ताह में दोनों प्राधिकरणों से विस्तृत रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है।’’

पुलिस ने बताया कि प्रदीप को उसकी एक रिश्तेदार की पत्नी की हत्या के सिलसिले में हिरासत में लिया गया था। प्रदीप के रिश्तेदार और भाड़े पर लिए गए दो हत्यारों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था।

इस मामले को लेकर सैकड़ों किसानों, दलित कार्यकर्ताओं सहित समाजवादी पार्टी के नेताओं ने गुस्सा जाहिर करते हुए पिलखुआ थाने के सामने विरोध प्रदर्शन किया और यह मांग की कि इस मामलें से जुड़े आरोपियों को जेल भेजा जाए।

इसे भी पढ़ें : यूपी में बढ़ती पुलिसिया हिंसा और हिरासत में मौत: क्या भारत में मानवाधिकार संगठन अब मृतप्राय: हैं?

आपको बता दें कि सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स (ACHR) द्वारा जारी एशियाई आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में हिरासत में हुई मौतों के संबंध में सबसे खराब रिकॉर्ड है। 26 जून को जो रिपोर्ट प्रकाशित हुई है, उसमें कहा गया है कि 1 अप्रैल 2017 से 28 फरवरी 2018 तक कुल 1,674 मामलों में कस्टोडियल मौतें हुई हैं, जिसमें 1,530 मौतें न्यायिक हिरासत में और 144 मौतें पुलिस हिरासत में हुई हैं। उक्त समय अवधि में प्रतिदिन औसतन लगभग हिरासत में 5 मौतें हुईं। यूपी में जनवरी 2017 से अगस्त 2017 तक ऐसी कुल 204 मौतें रिपोर्ट हुईं थीं और फरवरी 2018 तक यह संख्या लगभग दोगुना हो गई।  

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ) 

Uttar pradesh
human rights violation
civil rights activists
civil society
Death in custody
Hapur
Murder case against police

Related Stories

यूपी : महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में एकजुट हुए महिला संगठन

चंदौली: कोतवाल पर युवती का क़त्ल कर सुसाइड केस बनाने का आरोप

उत्तर प्रदेश: इंटर अंग्रेजी का प्रश्न पत्र लीक, परीक्षा निरस्त, जिला विद्यालय निरीक्षक निलंबित

यूपी: अयोध्या में चरमराई क़ानून व्यवस्था, कहीं मासूम से बलात्कार तो कहीं युवक की पीट-पीट कर हत्या

यूपी में मीडिया का दमन: 5 साल में पत्रकारों के उत्पीड़न के 138 मामले

यूपी: बुलंदशहर मामले में फिर पुलिस पर उठे सवाल, मामला दबाने का लगा आरोप!

पीएम को काले झंडे दिखाने वाली महिला पर फ़ायरिंग- किसने भेजे थे बदमाश?

यूपी: ललितपुर बलात्कार मामले में कई गिरफ्तार, लेकिन कानून व्यवस्था पर सवाल अब भी बरकरार!

यूपी: आज़मगढ़ में पीड़ित महिला ने आत्महत्या नहीं की, सिस्टम की लापरवाही ने उसकी जान ले ली!

यूपी में पत्रकार लगातार सरकार के निशाने पर, एक ख़बर को लेकर 3 मीडियाकर्मियों पर मुक़दमा


बाकी खबरें

  • डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    'राम का नाम बदनाम ना करो'
    17 Apr 2022
    यह आराधना करने का नया तरीका है जो भक्तों ने, राम भक्तों ने नहीं, सरकार जी के भक्तों ने, योगी जी के भक्तों ने, बीजेपी के भक्तों ने ईजाद किया है।
  • फ़ाइल फ़ोटो- PTI
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: क्या अब दोबारा आ गया है LIC बेचने का वक्त?
    17 Apr 2022
    हर हफ़्ते की कुछ ज़रूरी ख़बरों को लेकर फिर हाज़िर हैं लेखक अनिल जैन..
  • hate
    न्यूज़क्लिक टीम
    नफ़रत देश, संविधान सब ख़त्म कर देगी- बोला नागरिक समाज
    16 Apr 2022
    देश भर में राम नवमी के मौक़े पर हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद जगह जगह प्रदर्शन हुए. इसी कड़ी में दिल्ली में जंतर मंतर पर नागरिक समाज के कई लोग इकट्ठा हुए. प्रदर्शनकारियों की माँग थी कि सरकार हिंसा और…
  • hafte ki baaat
    न्यूज़क्लिक टीम
    अखिलेश भाजपा से क्यों नहीं लड़ सकते और उप-चुनाव के नतीजे
    16 Apr 2022
    भाजपा उत्तर प्रदेश को लेकर क्यों इस कदर आश्वस्त है? क्या अखिलेश यादव भी मायावती जी की तरह अब भाजपा से निकट भविष्य में कभी लड़ नहींं सकते? किस बात से वह भाजपा से खुलकर भिडना नहीं चाहते?
  • EVM
    रवि शंकर दुबे
    लोकसभा और विधानसभा उपचुनावों में औंधे मुंह गिरी भाजपा
    16 Apr 2022
    देश में एक लोकसभा और चार विधानसभा चुनावों के नतीजे नए संकेत दे रहे हैं। चार अलग-अलग राज्यों में हुए उपचुनावों में भाजपा एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हुई है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License