NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
हर तरफ है प्रतिरोध का ही सिलसिला
वरिष्ठ मानवाधिकार व सामाजिक कार्यकर्त्ताओं, पत्रकार, साहित्यकार और जन मुद्दों के वकीलों की गिरफ्तारी/छापेमारी के खिलाफ जारी है राष्ट्रव्यापी प्रतिरोध!
अनिल अंशुमन
06 Sep 2018
protest against bhima koregaon arrests

“असहमति का स्वर, लोकतंत्र का सेफ्टी वाल्व हैIII” माननीय सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को ही विस्तार दे रहा है इन दिनों देश के विभिन्न राज्यों की राजधानियों व शहरों में निरंतर जारी नागरिक प्रतिवादों का सिलसिलाI सड़कों पर उतर रहे आक्रोशित नागरिक जन के सवाल नारों की शक्ल पूछ रहें हैं, परन्तु सत्ता और उसके सारे ‘मुख’ शांत हैंI फेक न्यूज़ फैलाने वाले भक्तों की व्हाट्सअप-चौकड़ी और चैनल भी जाने किस बिल में समा गये हैंI इतना ही नहीं, बिना वारंट के ही कार्यवाही किये जाने के तीन दिनों बाद ही पुणे पुलिस के आला अधिकारीयों ने जिस दावे के साथ गोदी-मीडिया के सामने गिरफ्तार लोगों के प्रधानमन्त्री की हत्या में शामिल होने का तथाकथित “पुख्ता सबूत” पेश कर झूठ को सच साबित कर रही थेI स्वतः संज्ञान लेते हुए उसी राज्य के हाई कोर्ट ने फ़ौरन फटकार लगाकर पूछा – जब मामला कोर्ट में है तो पुलिस ने ये प्रेस वार्ता क्यों की? इस पर पुणे पुलिस ही नहीं खुद महाराष्ट्र सरकार की अभी तक बोलती बंद हैI क्योंकि यह सर्व विदित है कि जब मामला कोर्ट में हो तब पुलिस द्वारा कोर्ट के बाहर कुछ भी कहना कोर्ट की अवमानना हैI अलबत्ता सरकार की ओर से चैनलों में झूठ परोसनेवाले प्रवक्ता महोदय ने पुणे पुलिस से आगे बढ़कर फिर से एक नयी गढ़ी हुई चिठ्ठी मीडिया के सामने परोसकर विपक्ष के कुछेक नेताओं को घसीटना चाहा, मगर कोई ख़ास फायदा नहीं हुआI उसी तरह इतनी महत्वपूर्ण घटना पर जनाब केन्द्रीय गृहमंत्री, जो प्रधान मंत्री जी को फॉलो करते हुए बात–बात पर ट्विट करते हैं, पूरी तरह खामोशी बरते हुए हैंI राष्ट्रीय गोदी मीडिया के हर चर्चा से ये मामला बाहर है, तब जबकि उन्हीं के अनुसार यह प्रधानमंत्री जी की हत्या की साज़िश जैसा अति संवेदनशील राष्ट्रीय मुद्दा हैI

सरकार भले ही ये मानकर चल रही हो कि – जो सुनियोजित – सुविचारित  योजना थी उसे लागू कर दिया गया है और लोगों को चिल्लाने दो! लेकिन इन गिरफ्तारियों व छापेमारियों ने देश के उस विशाल ‘नागरिक समाज’ को भी चौंका दिया है कि – ये क्या हो रहा है? जो खुली आँखों से रुपये को रोज लुढ़कते, हर दिन डीजल–पेट्रोल के दाम बढ़ते और तब भी जीडीपी को बढ़ते हुए देख कर हैरान हो सोच में पड़ गया है कि क्या दिनों–दिन बद्दतर होते इन हालातों पर “सवाल” करने मात्र पर उसे भी “अर्बन नक्सल” कहकर जेलों में डाला जाएगा? इसीलिए सुदूर असम से लेकर बंगाल, ओड़िशा व दक्षिण के सभी राज्यों समेत पूरे देश में जारी ‘प्रतिवाद अभियानों’ में केवल सामाजिक जन संगठन, सामाजिक कार्यकर्त्ता, संस्कृतिकर्मी अथवा जनान्दोलानकारी ही नहीं शामिल हो रहें हैं, बल्कि लोकतंत्रपसंद नागरिक समाज के वे लोग शामिल हो रहें हैं जो न तो सक्रिय तौर पर किसी राजनीति पार्टी से जुड़े हुए हैं और न ही किसी सामाजिक संगठन में सक्रिय हैंI इनमें से कोई चिकित्सक है तो कोई वकील अथवा प्रोफ़ेसर–शिक्षक या बुद्धिजीवी-साहित्यकार अथवा ऐसे जागरूक नागरिक समाज से हैं जो वर्तमान स्थितियों से बेहद चिंतित हैI जिन्हें अच्छे दिन तो नहीं ही नसीब हुए, बल्कि अपने दिनों को लगातार ‘खतरनाक दिन’ में तब्दील होता देख रहे हैंI वे खुली आँखों से ये देख रहे हैं कि कहीं भी जो कुछ गलत या खतरनाक हो रहा है, उसे सत्ता का खुला संरक्षण व प्रोत्साहन मिल रहा है, मानो, सब कुछ पूर्वनिर्धारित और सुनियोजित होI जिसका विरोध तो दूर, सवाल उठाना भी “देशद्रोह/राजद्रोह” करार दिया जा रहा हैI

इन संगीन हालातों पर देश की जानी–मानी वरिष्ठ इतिहासकार रोमिला थापर को यह कहना पड़ा है कि- “बीते चार सालों में, डर भय और आतंक का माहौल बढ़ा हैI सरकार का रवैया ज़्यादा अथॉरिटेरीयन हो गया हैI पहले कानून इस तरह से काम नहीं करता थाI आधी रात को पुलिस किसी को उठाने के लिए इस तरह नहीं पंहुचती थीI अगर आप पर मुकदमा चल रहा था, तो आपको उसकी जानकारी होती थी...हालात और भी गंभीर हो सकते हैं, क्योंकि सरकार अगर अपने मक़सद में एकबार क़ामयाब हो जाती है तो वह और अधिक ताक़त से लोगों की आवाज़ को दबाने में जुट जायेगी...!” देश के सभी विपक्षी व क्षेत्रीय दल व उनके प्रवक्ताओं ने भी साफ़ कहा है कि- ये छापेमारी और गिरफ्तारियाँ, देशवासियों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला ही नहीं बल्कि यह 1975 के आपातकाल से भी बद्दतर स्थिति है कि जब मानवाधिकार कार्यकर्त्ताओं को भी नहीं छोड़ा जा रहा हैI तीस्ता सीतलवाड़, स्वामी अग्निवेश व परन्जॉय गुहा सरीखे कई वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्त्ताओं ने सरकार की इस कार्यवाही का “विरोध की आवाज़ को दबाने वाला” कृत्य बताते हुए निंदा कीI 30 अगस्त को प्रेस क्लब दिल्ली में अरुंधती राय, प्रशांत भूषण व जिग्नेश मेवाणी इत्यादि के नेतृत्व में अनेक सोशल कार्यकर्त्ताओं ने प्रेस वार्ता के ज़रिये सभी गिरफ्तार किये गए लोगों की अविलम्ब रिहाई की माँग करते हुए गिरफ्तारी व छापेमारी का कड़ा विरोध कियाI वहीं उसी दिन जंतर–मंतर पर ‘जन एकता जन अभियान’ के बैनर तले दर्जनों जन संगठनों के सदस्यों, मानवाधिकार कार्यकर्त्ताओं व सोशल कार्यकर्त्ताओं समेत कई वरिष्ठ आन्दोलनकारियों ने बृहत विरोध प्रदर्शन कियाI

फिलहाल जिस तरह से पूरे देश में विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है और इसे नागरिक समाज का समर्थन मिल रहा ही और सत्ताधारी इसे जितना सचेतन नज़रंदाज़ करें, स्थितियाँ दिखा रही हैं कि सत्ता सवालों के घेरे में आ चुकी हैI

Bhima Koregaon
activists' arrests
protests against arrests of activists

Related Stories

इतवार की कविता: भीमा कोरेगाँव

भीमा कोरेगांव: HC ने वरवर राव, वर्नोन गोंजाल्विस, अरुण फरेरा को जमानत देने से इनकार किया

‘मैं कोई मूक दर्शक नहीं हूँ’, फ़ादर स्टैन स्वामी लिखित पुस्तक का हुआ लोकार्पण

एनआईए स्टेन स्वामी की प्रतिष्ठा या लोगों के दिलों में उनकी जगह को धूमिल नहीं कर सकती

अदालत ने वरवर राव की स्थायी जमानत दिए जाने संबंधी याचिका ख़ारिज की

भीमा कोरेगांव: बॉम्बे HC ने की गौतम नवलखा पर सुनवाई, जेल अधिकारियों को फटकारा

सामाजिक कार्यकर्ताओं की देशभक्ति को लगातार दंडित किया जा रहा है: सुधा भारद्वाज

2021 में सुप्रीम कोर्ट का मिला-जुला रिकॉर्ड इसकी बहुसंख्यकवादी भूमिका को जांच के दायरे में ले आता है!

अदालत ने सुधा भारद्वाज को 50,000 रुपये के मुचलके पर जेल से रिहा करने की अनुमति दी

एल्गार परिषद मामला: सुप्रीम कोर्ट ने सुधा भारद्वाज की ज़मानत के ख़िलाफ़ एनआईए की याचिका ख़ारिज की


बाकी खबरें

  • BIRBHUMI
    रबीन्द्र नाथ सिन्हा
    टीएमसी नेताओं ने माना कि रामपुरहाट की घटना ने पार्टी को दाग़दार बना दिया है
    30 Mar 2022
    शायद पहली बार टीएमसी नेताओं ने निजी चर्चा में स्वीकार किया कि बोगटुई की घटना से पार्टी की छवि को झटका लगा है और नरसंहार पार्टी प्रमुख और मुख्यमंत्री के लिए बेहद शर्मनाक साबित हो रहा है।
  • Bharat Bandh
    न्यूज़क्लिक टीम
    देशव्यापी हड़ताल: दिल्ली में भी देखने को मिला व्यापक असर
    29 Mar 2022
    केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के द्वारा आवाह्न पर किए गए दो दिवसीय आम हड़ताल के दूसरे दिन 29 मार्च को देश भर में जहां औद्दोगिक क्षेत्रों में मज़दूरों की हड़ताल हुई, वहीं दिल्ली के सरकारी कर्मचारी और…
  • IPTA
    रवि शंकर दुबे
    देशव्यापी हड़ताल को मिला कलाकारों का समर्थन, इप्टा ने दिखाया सरकारी 'मकड़जाल'
    29 Mar 2022
    किसानों और मज़दूरों के संगठनों ने पूरे देश में दो दिवसीय हड़ताल की। जिसका मुद्दा मंगलवार को राज्यसभा में गूंजा। वहीं हड़ताल के समर्थन में कई नाटक मंडलियों ने नुक्कड़ नाटक खेलकर जनता को जागरुक किया।
  • विजय विनीत
    सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी
    29 Mar 2022
    "मोदी सरकार एलआईसी का बंटाधार करने पर उतारू है। वह इस वित्तीय संस्था को पूंजीपतियों के हवाले करना चाहती है। कारपोरेट घरानों को मुनाफा पहुंचाने के लिए अब एलआईसी में आईपीओ लाया जा रहा है, ताकि आसानी से…
  • एम. के. भद्रकुमार
    अमेरिका ने ईरान पर फिर लगाम लगाई
    29 Mar 2022
    इज़रायली विदेश मंत्री याइर लापिड द्वारा दक्षिणी नेगेव के रेगिस्तान में आयोजित अरब राजनयिकों का शिखर सम्मेलन एक ऐतिहासिक परिघटना है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License