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भारत
राजनीति
हरियाणा: छात्रसंघ के प्रत्यक्ष चुनाव को लेकर छात्रों का संघर्ष जारी
12 अक्टूबर को प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बर्बर लाठी चार्ज हुआ व आँसू गैसे से हमला हुआ, इसके विरोध में शनिवार को पूरे राज्य में छात्रों ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का पुतला दहन किया गया|
मुकुंद झा
14 Oct 2018
Haryana students' union elections

हरियाणा में छात्रसंघ चुनाव को लेकर भारी हंगामा जारी हैI लगभग 22 वर्षों बाद हरियाणा राज्य में पुन: छात्रसंघ चुनाव होने जा रहे हैंI परन्तु वहाँ के छात्रों का कहना है कि मनोहर लाल खट्टर की सरकार छात्रसंघ चुनाव नहीं करवा रही है बल्कि कैंपस का अराजनीतिकरण कर रही हैI वे सीधे चुनाव की जगह अप्रत्यक्ष चुनाव करवाना चाहती हैI हरियाणा में शुक्रवार को प्रत्यक्ष चुनाव की मांग को लेकर छात्रों ने प्रदर्शन कियाI इस दौरान हज़ारों छात्रों पर लाठीचार्ज हुआ व आँसू गैस से हमला किया गया, साथ ही कई छात्रों को हिरासत में लिया गया| इस पुलिसिया दमन के खिलाफ शनिवार को छात्रों ने पूरे प्रदेश में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की शवयात्रा निकाली व पुतला दहन किया|  

यह विरोध प्रदर्शन सयुंक्त छात्र संघर्ष समिति के नेतृत्व में किया जा रहा हैI इसमें राज्य के लगभग सभी छात्र संगठन शमिल हैं केवल राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) इसमें शामिल नहीं है| इस संयुक्त संघर्ष समिति में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (एसएफआई) और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ़ इंडिया (एनएसयूआई) सहित तकरीबन 11 छात्र संगठन हैं| इस समिति के अध्यक्ष शाहनवाज हैं, जो एसएफआई के केन्द्रीय कमेटी के भी सदस्य है| शुक्रवार को पूरे हरियाणा में छात्रों ने विभिन्न कालेजों व विश्विद्यालयों में सरकार द्वारा छात्रसंघ का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से करवाने के खिलाफ प्रदर्शन कियाI इसके तहत छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालयों में हड़ताल का आवाहन किया था|

शाहनवाज ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि, “ये प्रदर्शन पूरे राज्य में थाI हम शुक्रवार को अपनी मांगो को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, परन्तु सरकार और प्रशासन द्वारा हमारी मांग सुनने के स्थान पर बर्बता पूर्वक पीटा गया व आँसू गैसे से हमला किया गया, जिसमें हमारे कई कार्यकर्ता गंभीर रूप से जख्मी हुए|”

अप्रत्यक्ष चुनावो का विरोध क्यों?

हरियाणा के छात्रों संगठनों की काफी लंबे समय से छात्र संघ चुनाव करवाने की मांग थीI यह मुद्दा भाजपा ने अपने मांगपत्र में भी प्रमुखता से रखा था, परन्तु अब जब छात्रसंघ चुनावों का ऐलान किया गया है तो छात्र संगठनों का कहना है कि सरकार अप्रत्यक्ष चुनाव करवाना चाहती है और इसमें किसी तरह की पारदर्शिता नहीं होगी तथा इससे संवैधानिक मूल्यों का भी हनन किया जा रहा है|

एसएफआई के पूर्व राज्य सचिव सुमित ने अप्रत्यक्ष चुनाव करवाने को लेकर सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि, “भाजपा अपने मित्र छात्र संगठन एबीवीपी को इन चुनावों के मध्यम से हरियाणा छात्र संघ में बैठाना चाहती है| जिसके लिए हर विभाग की लिस्ट एबीवीपी ने बना रखी है और उन्हीं को क्लास रिप्रेजेन्टेटिव (CR) बनाया जा रहा है| ऐसे लोगों को चुना जा रहा है जो या तो एबीवीपी के हैं या फिर उन्होंने कभी छात्र राजनीति नहीं की है| इसमें सरकार द्वारा कई सारी शर्तें भी लगायी गयी हैं जो सरासर गलत हैं, जैसे शोध के छात्र न तो चुनाव लड़े सकते हैं न ही वोट डाला सकते हैं और न ही सेल्फ फाईनेंसिंग कोर्से वाले छात्र वोट डाल सकते हैं| इन सब छात्रों को सीधे चुनाव प्रक्रिया से बहार कर दिया गया है| इस चुनाव में आरक्षण की भी कोई जगह नहीं हैI”

उन्होंने यह भी बताया कि छात्रों में इस चुनाव को लेकर कितनी निराशा है उसका अंदाज इसी बात से लगा सकते हैं कि महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU) में 300 CR चुने जाने थे परन्तु केवल 157 नामकंन दायर हुए है|

हरियाणा छात्रसंघ चुनाव का इतिहास

हरियाणा में 1996 में डॉ बंसीलाल के सरकार छात्र संघ चुनावों पर रोक लगाई थी यह कहते हुए कि इसमें केवल गुंडागर्दी होती हैI उस वर्ष छात्रसंघ चुनावों में एक छात्र की हत्या के बाद यह निर्णय किया गया थाI इससे पूर्व भी 1986 और 1989 के छात्रसंघ चुनावों में एसएफआई के नेताओं की हत्या हुई थी|

रोक लगाये जाने के बाद से ही छात्र लगातार छात्रसंघ चुनावों को फिर बहाल करने की मांग कर रहे थे इसके तकरीबन दो वर्ष बाद हरियाणा सरकार ने चुनावों को लेकर 3 कुलपतियों की एक कमेटी बनाईI जिसके अध्यक्ष हिसार विश्विद्यालय के कुलपति डॉ  टंकेश्वर थे, उन्होंने अपनी रिपोर्ट सरकार को दी परन्तु सरकार उनके सुझावों को सार्वजनिक नहीं किया गयाI अब अप्रत्यक्ष चुनावो की घोषणा कर दी गयी है जिसको लेकर छात्रों में भारी रोष है|

इसी को लेकर एसएफआई ने 7 सितबर को चंडीगढ़ में प्रदर्शन किया था व 11 को रोहतक में गिरफ्तारी देकर विरोध भी दर्ज करवाया था|

संयुक्त संघर्ष समिति के सदस्य व एसएफआई के नेता सुमित ने कहा कि अगर सरकार ने अभी भी अपने इस फैसले को वापस नहीं लिया व प्रत्यक्ष चुनाव करवाने की घोषणा नहीं की, तो 17 अक्टूबर को जिस दिन सरकार ने चुनाव की तिथि तय की है, उस दिन पूरे हरियाणा में हड़ताल करेंगे व सभी कालेज और विभागों में तालाबंदी कर सभी कार्यों को बंद करेंगे| किसी भी हाल में अप्रत्यक्ष चुनाव नही होने देंगे|

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