NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
हरियाणा: पी० डब्ल्यू० डी० विभाग के कर्मचारी क्यों कर रहे हैं आंदोलन?
पब्लिक वर्क डिपार्टमेंट के कर्मचारियों ने सरकार पर विभाग का निजीकरण करने का आरोप लगाया। इसके साथ अन्य मांगों को लेकर कर्मचारीयों ने 27 को पंचकुला की ओर कूच करेंगे ।
मुकुंद झा
21 Nov 2018
harayana

हरियाणा सरकार के पी ०डब्ल्यू०डी० विभाग के कर्मचारियों  और  करनाल, पानीपत जनस्वास्थ्य, सिंचाई विभाग, भवन और सड़क मार्ग के फील्ड कर्मचारियों ने अधीक्षक अभियंता जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी परिमंडल करनाल के कार्यालय के सामने दो दिन, 19 -20 नबंर को आठ घंटे की भूख हड़ताल की। ये कर्मचारी हरियाणा सरकार के सोनीपत और करनाल शहर की वाटर सप्लाई और सीवेज व्यवस्था को नगर निगम के हवाले करने के  फैसले का विरोध कर रहे हैं।

कर्मचारियों का कहना है कि सरकार  विभागों को निजी हाथों मे सौंपना चाहती है। कर्मचारियों की मांग है कि नगरनिगमों को दी गई जल और सीवेज सेवाओं को वापस जनस्वस्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को दी जाए। कैशलेस मेडिकल सुविधा और पुरानी पेंशन योजना लागू हो। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गई तो सभी कर्मचारी 27 नवंबर को संगठन प्रमुख अभियंता जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग पंचकूला के कार्यालय का घेराव  करेंगे।

कर्मचारी क्यों कर रहे है विरोध ?        

 पी०डब्ल्यू०डी० मैकनिकल वर्करस यूनियन, सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा से जुड़ी हुई है। इसके महासचिव शीलकराम मलिक ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि सरकार सरकारी विभागों को तबाह करने की साज़िश कर रही है। उन्होंने बात करते हुए कहा कि सरकार की इस निति का विरोध करने का  मुख्य कारण यह है कि हमारे सर्विस रुलस और निगम के रुल भिन्न है। इसके साथ हमें नगर निगम विभाग का हिस्सा बना देने पर पेंशन के साथ कई अन्य सामजिक सुरक्षा का लाभ नही मिलेगा क्योंकि नगर निगम के कर्मचारियों को पेंशन,रिटायर फंड जैसी सुविधाएं नहीं मिलती हैं।

शीलकराम मलिक ने कहा हमारे पास शहर में साफ सफाई और सीवेज साफ करने के सभी संसाधन हैं। अभी भी निगम हमारे कर्मचारियों के माध्यम से ही काम कर रही है लेकिन धीरे-धीरे इसे पंचायतो के माध्यम से निजी लोगो को सौंप दिया जाएगा | शीलकराम आगे कहते हैं कि हमारा विभाग पूर्णत सरकारी है जबकि निगम पूर्णत सरकारी नहीं है ,अगर सरकार को यह काम निगम के माध्यम से करना है तो नए कर्मचारी की भर्ती करे हमारे विभाग के कर्मचारी को क्यों ले रही है जबकि हमारे विभाग में कर्मचारियों की संख्या की पहले ही कम है |

इसके अलावा आंदोलनकारियों के  दो और मुख्य मुद्दे है जिसको लेकर वो विरोध कर रहे हैं। 

•        कैशलेस मेडिकल सुविधा :- हरियाणा सरकार  ने केवल कुछ गंभीर  बीमारियों के लिए ही कैशलेस मेडिकल सुविधा उपलब्ध करा रखी है बाकि बीमारियों में कर्मचारी को अपने जेब से खर्च करके बिल सरकार से पास करना होता है तब जाकर उन्हें रिफंड मिलाता है। कर्मचारी यूनियन की मांग है कि इस पूरी प्रक्रिया में बहुत ही लंबा समय लगता है इसलिए कर्मचारियों की मांग है कि सरकार सभी बीमारियों के लिए कैशलेस मेडिकल सुविधा  दे जिससे कर्मचारी अपना ईलाज बिना किसी बाधा के करा सकें।

 पुरानी पेंशन को बहाल किया जाए:- कर्मचारियों की दूसरी सबसे अहम मांग है पुरानी पेंशल की बहाली। सरकार की नए पेंशन नीति का विरोध केवल हरियाणा के कर्मचारी ही नहीं बल्कि सभी निगमों के कर्मचारी कर रहे हैं। उनके मुताबिक इस नई नीति के तहत कर्मचारी की पेंशन सुनिश्चित नहीं है,जो पहले निश्चित होती थी। अब उनके पैसों को सरकार शेयर मार्केट में लगा रही है, उस पर फायदा हो या नुकसान वो कर्मचारी का होगा। यानी इसमें बड़ा जोखिम है। इसी को लेकर सभी कर्मचारी इसका विरोध कर रहे हैं।

इस पर शीलकराम ने कहा कि जो पेंशन कर्मचारी की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा होती थी, यह सरकार उसके इस पक्ष को पूरी तरह से खत्म कर रही है। अब कर्मचारी की सेवानिवृत्ति के बाद कोई सुरक्षा नहीं है। वो आगे कहते हैं कि विधायक और सांसदों को एक दिन के कार्यकाल के बाद भी एक निश्चित पेंशन दी जाती है तो जो कर्मचारी अपना पूरा जीवन काम करने में बिताता है उसको पेंशन क्यों न मिले? अगर सरकार हमरी मांग को नही मानती तो हम 27 तारीख को पंचकुला में प्रमुख अभियंता के कार्यालय पर धावा बोलंगे |

harayana
PWD
employees protest

Related Stories

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

भीषण महामारी की मार झेलते दिल्ली के अनेक गांवों को पिछले 30 वर्षों से अस्पतालों का इंतज़ार

बख्तावरपुर : शहर बसने की क़ीमत गाँव ने चुकाई !

यूपी : 5,000 से अधिक जल निगमकर्मियों को नौकरी एवं पेंशन से महरूम होने का डर

विकलांग व्यक्तियों को यथोचित संसाधनों से महरूम रखा जा रहा है 

हिमाचल: होटल ईस्टबोर्न के कर्मचारियों ने अपने 16 महीने के बक़ाया वेतन देने की मांग को लेकर किया विरोध प्रदर्शन

उत्तराखंड: एक सड़क के लिए दो महीने से आंदोलन फिर भी सुनवाई नहीं

यूपी : कामगार संगठनों ने की योगी सरकार से "राम मंदिर के लिए ज़बरदस्ती चंदा न लेने" की अपील

दिल्ली में किसानों ने बोला हल्ला तो यूपी के कई जिलों में कर्मचारियों और छात्र संगठनों की रही हड़ताल

मिंटो ब्रिज हादसा: स्मार्ट सिटी बनाने का दावा और ड्राइवर के मौत की ज़िम्मेदारी!


बाकी खबरें

  • सरोजिनी बिष्ट
    विधानसभा घेरने की तैयारी में उत्तर प्रदेश की आशाएं, जानिये क्या हैं इनके मुद्दे? 
    17 May 2022
    ये आशायें लखनऊ में "उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन- (AICCTU, ऐक्टू) के बैनर तले एकत्रित हुईं थीं।
  • जितेन्द्र कुमार
    बिहार में विकास की जाति क्या है? क्या ख़ास जातियों वाले ज़िलों में ही किया जा रहा विकास? 
    17 May 2022
    बिहार में एक कहावत बड़ी प्रसिद्ध है, इसे लगभग हर बार चुनाव के समय दुहराया जाता है: ‘रोम पोप का, मधेपुरा गोप का और दरभंगा ठोप का’ (मतलब रोम में पोप का वर्चस्व है, मधेपुरा में यादवों का वर्चस्व है और…
  • असद रिज़वी
    लखनऊः नफ़रत के ख़िलाफ़ प्रेम और सद्भावना का महिलाएं दे रहीं संदेश
    17 May 2022
    एडवा से जुड़ी महिलाएं घर-घर जाकर सांप्रदायिकता और नफ़रत से दूर रहने की लोगों से अपील कर रही हैं।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 43 फ़ीसदी से ज़्यादा नए मामले दिल्ली एनसीआर से सामने आए 
    17 May 2022
    देश में क़रीब एक महीने बाद कोरोना के 2 हज़ार से कम यानी 1,569 नए मामले सामने आए हैं | इसमें से 43 फीसदी से ज्यादा यानी 663 मामले दिल्ली एनसीआर से सामने आए हैं। 
  • एम. के. भद्रकुमार
    श्रीलंका की मौजूदा स्थिति ख़तरे से भरी
    17 May 2022
    यहां ख़तरा इस बात को लेकर है कि जिस तरह के राजनीतिक परिदृश्य सामने आ रहे हैं, उनसे आर्थिक बहाली की संभावनाएं कमज़ोर होंगी।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License