NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
भारत
राजनीति
हिमाचल में अंधविश्वास की आड़ में बुजुर्ग महिला से मार-पीट, भीड़ ने पोती कालिख
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में 70 साल की बुजुर्ग विधवा महिला को देवता और जादू-टोने के नाम पर ना सिर्फ बुरी तरह पीटा गया बल्कि बाल काटकर, मुंह पर कालिख पोतकर पूरे गांव में घुमाया गया।
सोनिया यादव
11 Nov 2019
Women thrast
प्रतीकात्मक तस्वीर फोटो साभार:: Routers

अंधविश्वास के नाम पर आज भी देश में महिलाओं पर अत्याचार जारी है। ताजा मामला हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले का है। जहां एक 70 साल की बुजुर्ग विधवा महिला को देवता और जादू-टोने के नाम पर ना सिर्फ बुरी तरह पीटा गया बल्कि बाल काटकर, मुंह पर कालिख पोतकर पूरे गांव में घुमाया गया। हैरानी की बात यह है कि मंडी हिमाचल का दूसरा सबसे बड़ा जिला है और सूबे के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर यहीं के हैं। इन सब के बावजूद वृद्ध महिला को इस क्रूरता से कोई नहीं बचा सका और प्रशासन की नींद भी इस घटना के वीडियो के वायरल होने के बाद ही टूटी।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल बीते बुधवार मामला 6 नवंबर का है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के मुताबिक कुछ लोग एक बुजुर्ग महिला को अपमानित और प्रताड़ित करते दिखाई दे रहे हैंं। महिला बार-बार उनके सामने गिड़गिड़ा रही है मगर भीड़ में से कोई भी उनकी मदद के लिए आगे नहीं आया। वीडियो में हैरान करने वाली बात ये है कि एक ओर जहां लोग महिला को पीट रहे थे, थप्पड़ मार रहे थे और सड़कों पर घसीट रहे थे, वहीं दूसरी ओर ढोल-नगाडों और घंटियों की आवाज़ के साथ एक स्थानीय देवता की जय-जयकार भी कर रहे थे।

मामले को तूल पकड़ता देख मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने घटना का संज्ञान लेते हुए मंडी के एसपी गुरदेव चंद शर्मा को दोषियों के ख़िलाफ़ सख़्त क़दम उठाने के निर्देश दिए। तब जाकर प्रशासन ने इसकी सुध ली और नौ नवंबर को सरकाघाट थाने में एफ़आईआर दर्ज कर 21 लोगों को गिरफ़्तार किया है। जिनमें से सात महिलाएं हैं पुलिस ने सभी पर आईपीसी की धारा 147, 149, 452, 435, 355 और 427 के तहत मामला दर्ज किया है।

मंडी के एसपी गुरदेव चंद शर्मा ने मीडिया को बताया, "मामले में एफ़आईआर दर्ज कर ली गई है। वायरल वीडियो पुलिस के पास है और हम आरोपियों की पहचान कर रहे हैं और उसके बाद क़ानूनन कार्रवाई करेंगे। ऐसा कहा जा रहा है कि यह घटना स्थानीय देवता के गूर के इशारे पर हुई थी।"
magic blak_0.png
स्थानीय पत्रकार अभिषेक सूध ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहा, यहां बहुसंख्यक आबादी के लोग जो स्थानीय देवता के भक्त कहे जा रहे हैं, उन लोगों ने अफ़वाहें फैलाईं की बुज़ुर्ग महिला काला जादू करती है। जिसके बाद पूरी घटना ने एक विकराल रूप ले लिया।

अभिषेक का आगे कहना है कि महिला ने इस संबंध में कुछ दिन पहले ही स्थानीय ग्राम पंचायत में कुछ लोगों के खिलाफ शिकायत दी थी, जो उसे अक्सर परेशान किया करते थे। लेकिन वहां महिला के शिकायत पत्र को ही फाड़ दिया गया था। जिसके बाद शिकायत देने से भड़के लोगों ने महिला को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था।

इलाके में धारा 144 लागू

बता दें कि घटना का मुख्य अभियुक्त स्थानीय देवता का पुजारी है। इसे मानने वाले लोगों की ओर से हंगामे की आशंका को देखते हुए ज़िला प्रशासन ने इलाक़े में धारा 144 लगा दी है।

सरकाघाट तहसील के समाहल गांव के कुछ स्थानीय निवासियों ने न्यूज़क्लिक को बताया कि पीड़ित महिला के पति फौज में थे और रिटायर होने के कुछ ही समय बाद 37 साल की उम्र में उनका निधन हो गया था। करीब 25 साल की उम्र में महिला विधवा हो गई थी, जिसके बाद से वह पूजा-पाठ के प्रति समर्पित हैं। फिलहाल परिवार के नाम पर महिला की एक बेटी है जिसकी शादी हो चुकी है। महिला अपने घर में अकेली रह रही थी।

कुछ लोगों का कहना है कि गांव के कई प्रभावशाली लोगों की नज़र महिला की संपत्ति पर है। इससे पहले भी महिला के घर को जलाने की कोशिश की गई थी। इस मामले की जानकारी भी पुलिस को पहले से ही थी। कई बार कुछ लोगों ने विधवा को बदनाम करने की भी कोशिश की है मगर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।

स्थानीय पत्रकार पूनम मंढोतरा का कहना है कि इस इलाक़े में जादू-टोने की घटनाओं के बारे में कभी सुनने को नहीं मिला। देव संस्कृति का प्रभाव भी खास नहीं है। लोग शिक्षित हैं और ज्यादातर सरकारी नौकरियों में हैं। ऐसे में इस तरह की घटना को अंजाम देने के पीछे कुछ और कारण भी हो सकता है।

पूनम आगे बताती हैं कि लोग महिला को पहले से परेशान कर रहे थे। जाहिर है उन्हें अकेला देखकर उन्हें प्रताड़ित करने की कोशिश है। हो सकता है उनकी संपत्ति का मामला हो या कोई निजी रंजीश या अकेली औरत समझ कर लोग उनको परेशान कर रहे हों।

बता दें कि मंडी के डिप्टी कमिश्नर ऋग्वेद मिलिंद ठाकुर ने मीडिया से कहा है कि देव समाज इस घटना में किसी देवता का कोई प्रभाव नहीं मानता। इसलिए अब हम इस घटना के कारण पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।

नहीं खत्म हो रही महिलाओं को प्रताड़ित करने की प्रथा

गौरतलब है कि हिमाचल के कई जिलों में देव संस्कृति का असर हैष कुल्लू, चंबा, सिरमौर और शिमला जैसे इलाकों में इसका बहुत प्रभाव है। लेकिन हाल के दिनों में तांत्रिक क्रियाओं और जादू-टोने की घटनाएं सामने नहीं आईं। ऐसे में इस घटना पर यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या कुछ लोग अंधविश्वास के नाम पर इस वाहियात कृत्य को आस्था और देव संस्कृति का रंग देकर बचने की कोशिश कर रहे हैं या आज भी हमारे समाज में विधवा महिलाओं को जानबूझ कर प्रताड़ित करने की प्रथा खत्म नहीं हो पा रही है।

अंधविश्वास की आड़ में औरतों पर जुल्म करना, उनकी हत्या कर देना, उनका बलात्कार करना, घर से निकाल देना, मार-पीट करना कोई नई बात नहीं है। आधुनिकीकरण के इस दौर में शहरों में भले ही ऐसे मामले कम दिखाई दें लेकिन गांवों में अभी भी इस तरह की घटनाएं आम हैं।

महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में कई सालों से कार्यरथ आस्था श्रीवास्तव कहती हैं कि गांवों में अक्सर अकेली औरत से जुड़ी कई अफवाह देखने को मिलती हैं। आम तौर पर विधवाएं, बूढ़ी औरतें, वो औरतें जिनका कोई बच्चा ना हुआ हो, इस तरह की औरतों को टार्गेट किया जाता है क्योंकि इनमें किसी ना किसी तरह की कमी निकलना आसान हो जाता है। कई औरतों को डायन कहकर इसलिए मार दिया गया क्योंकि उनका खुद का कोई बच्चा नहीं था और उस गांव से कोई छोटा बच्चा गायब हो गया था। हैरानी होती है कि आज के हमारे पढ़े-लिखे समाज में भी ये घटनाएं होती हैं।

Himachal Pradesh
black magic
Jairam Thakur
crimes against women
violence against women
exploitation of women
women empowerment

Related Stories

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

यूपी : महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में एकजुट हुए महिला संगठन

बिहार: आख़िर कब बंद होगा औरतों की अस्मिता की क़ीमत लगाने का सिलसिला?

बिहार: 8 साल की मासूम के साथ बलात्कार और हत्या, फिर उठे ‘सुशासन’ पर सवाल

मध्य प्रदेश : मर्दों के झुंड ने खुलेआम आदिवासी लड़कियों के साथ की बदतमीज़ी, क़ानून व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

बिहार: मुज़फ़्फ़रपुर कांड से लेकर गायघाट शेल्टर होम तक दिखती सिस्टम की 'लापरवाही'

यूपी: बुलंदशहर मामले में फिर पुलिस पर उठे सवाल, मामला दबाने का लगा आरोप!

दिल्ली गैंगरेप: निर्भया कांड के 9 साल बाद भी नहीं बदली राजधानी में महिला सुरक्षा की तस्वीर

असम: बलात्कार आरोपी पद्म पुरस्कार विजेता की प्रतिष्ठा किसी के सम्मान से ऊपर नहीं


बाकी खबरें

  • अनिल सिन्हा
    उत्तर प्रदेशः हम क्यों नहीं देख पा रहे हैं जनमत के अपहरण को!
    12 Mar 2022
    हालात के समग्र विश्लेषण की जगह सरलीकरण का सहारा लेकर हम उत्तर प्रदेश में 2024 के पूर्वाभ्यास को नहीं समझ सकते हैं।
  • uttarakhand
    एम.ओबैद
    उत्तराखंडः 5 सीटें ऐसी जिन पर 1 हज़ार से कम वोटों से हुई हार-जीत
    12 Mar 2022
    प्रदेश की पांच ऐसी सीटें हैं जहां एक हज़ार से कम वोटों के अंतर से प्रत्याशियों की जीत-हार का फ़ैसला हुआ। आइए जानते हैं कि कौन सी हैं ये सीटें—
  • ITI
    सौरव कुमार
    बेंगलुरु: बर्ख़ास्तगी के विरोध में ITI कर्मचारियों का धरना जारी, 100 दिन पार 
    12 Mar 2022
    एक फैक्ट-फाइंडिंग पैनल के मुतबिक, पहली कोविड-19 लहर के बाद ही आईटीआई ने ठेके पर कार्यरत श्रमिकों को ‘कुशल’ से ‘अकुशल’ की श्रेणी में पदावनत कर दिया था।
  • Caste in UP elections
    अजय कुमार
    CSDS पोस्ट पोल सर्वे: भाजपा का जातिगत गठबंधन समाजवादी पार्टी से ज़्यादा कामयाब
    12 Mar 2022
    सीएसडीएस के उत्तर प्रदेश के सर्वे के मुताबिक भाजपा और भाजपा के सहयोगी दलों ने यादव और मुस्लिमों को छोड़कर प्रदेश की तकरीबन हर जाति से अच्छा खासा वोट हासिल किया है।
  • app based wokers
    संदीप चक्रवर्ती
    पश्चिम बंगाल: डिलीवरी बॉयज का शोषण करती ऐप कंपनियां, सरकारी हस्तक्षेप की ज़रूरत 
    12 Mar 2022
    "हम चाहते हैं कि हमारे वास्तविक नियोक्ता, फ्लिपकार्ट या ई-कार्ट हमें नियुक्ति पत्र दें और हर महीने के लिए हमारा एक निश्चित भुगतान तय किया जाए। सरकार ने जैसा ओला और उबर के मामले में हस्तक्षेप किया,…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License