NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
गांधी : हमारे हुक्मरान ने तुम्हारा चश्मा तो लिया पर तुम्हारी चश्म का क्या?
...कितनी ही योजनाएँ/ उपक्रम और संस्थाएँ/  तुम्हारे नाम से चलाए गए-
तुम्हारे नाम की उपयोगिता है/ नाम के साम्य की उपयोगिता है.../ फिर भी नाशाद हो तुम/  तो आख़िर क्या करें हम/ मनाएं कैसे तुम्हारा/ डेढ़ सौ साला जश्न?
न्यूज़क्लिक डेस्क
20 Oct 2019
mahatma gandhi

पूर्व वरिष्ठ आईएएस कमल कान्त जैसवाल एक संवेदनशील कवि भी हैं। आपने करीब 36 वर्षों तक भारतीय प्रशासनिक सेवा के विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। एक लंबे समय से 'कॉमन कॉज़' संस्था से जुड़े हैं। आप इसके निदेशक रहे और वर्तमान में गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष हैं। महात्मा गांधी को आज के हालात में याद करते हुए उन्होंने यह कविता लिखी और सवाल पूछा कि हमारे हुक्मरान यानी शासकों ने तुम्हारा चश्मा तो लिया पर तुम्हारी चश्म यानी तुम्हारी आँखों या नज़र या फिर नज़रिया का क्या?", वे पूछते हैं कि "मनाएं कैसे तुम्हारा डेढ़ सौ साला जश्न?”
रविवार विशेष में आइए पढ़ते हैं उनकी ये कविता -
 

बापू की विरासत                        
 

उपयोगितावादी हमारी परंपरा में
हर किसी का इस्तेमाल होता है
तुम्हारा भी हुआ है इस्तेमाल -
आगे भी होता रहेगा।

पहले तुम डाक टिकटों पर छपे
छाए फिर रंग-बिरंगे नोटों पर
चमचमाते टकसाली सिक्कों पर
तुम्हारी छवि उकेरी गई।

संसद भवन के प्रांगण में
दफ्तरों व संस्थानों में
तुम्हारे बुत लगाए गए -
सजावट के तौर पर ही सही।

पर न जाने क्यों लगती हैं
नोटों पर छपी ये तस्वीरें बेजान
इनकी आँखों में वो नूर नहीं -
सिर्फ़ सूनापन है।

शायद तुमने सोचा भी न था
शान-ओ-शौकत को ठुकरा कर
ग़रीबी ख़ुद-ब-ख़ुद अपना कर
तुमको बनना होगा इक दिन
नोटों व सिक्कों की पहचान।

और फिर काले बाज़ारों में
अँधेरे गलियारों में
सियासत की तिजारत में
संसद की इमारत में -
गाँधी छाप नोटों का
होगा आदान-प्रदान।

जगह-बेजगह खड़े तुम्हारे ये बुत
कुछ अनमने से लगते हैं
शायद वहाँ से जो दिखता है
तुम्हें भाता नहीं है -
रास आता नहीं है।

कितनी ही योजनाएँ
उपक्रम और संस्थाएँ
तुम्हारे नाम से चलाए गए -
तुम्हारे नाम की उपयोगिता है
नाम के साम्य की उपयोगिता है।

फिर भी नाशाद हो तुम
तो आख़िर क्या करें हम
मनाएं कैसे तुम्हारा
डेढ़ सौ साला जश्न?

चलो इतना तो मानोगे
स्वच्छ भारत का ये अभियान
जिसने बढ़ाई देश की शान
सभी को जिस पे है अभिमान -
तुम्हारी अपनी पेशकश है?

बने हो उसके शुभंकर
या कहें ब्रैंड अम्बेसडर
उदास फिर भी क्यों हो तुम -
बड़ी भारी है ये उलझन।

कहीं ऐसा तो नहीं है
कि तुम्हारे दर्शन में
शुचिता तभी होती हो
जब बाहर और भीतर
बाह्य और अभ्यन्तर
पूर्व संचित कलुष को
कटुता के कल्मष को -
धो दिया जाए?

हमारे हुक्मरान ने
तुम्हारा चश्मा तो लिया
पर तुम्हारी चश्म का क्या?
औ' फिर उसका नज़रिया -
वो अपनाया कि ठुकराया?

नहीं अपनाई वो नज़र
कि जिसमें सब हों बराबर
हिन्दू मुस्लिम हों बिरादर
पराई पीर हो अपनी
यही तदबीर हो अपनी
कि ज़ख़्मों पर लगे मरहम
कि सड़कों पर बहे न ख़ून -
फिर कोई न हो बेदम।

हमें है याद वो ग़लती
गुज़रे वक़्त जो गुजरात में की
तुम्हारे अपने सूबे में
किस बदख़्वाह मंसूबे में
फ़ितन के परचम लहरा कर
लहू की नदियाँ बहा कर -
मनाई थी तुम्हारी जन्मशती।

तुम्हारी आँखें सवाल करती हैं
कितना बेहाल करती हैं!

"कहा था राष्ट्रपिता मुझको
विरासत फिर क्यों ठुकराई?
बुलाते थे मुझे बापू
बपौती क्यों न अपनाई?"

आज कुछ ऐसा करें हम
कि दिल्ली में जमुना तट पर
विस्मृत सी एक मज़ार पर
टिमटिमाता हुआ वो दिया
जो स्नेह से जलता है
ज़हनी अंधेरों से लड़ता है
दिलों को रौशन करता है -
स्नेह से रीता होकर  
कहीं दम तोड़ न दे!

नफ़रतों की ये बेरहम आँधी
अपने नापाक दामन से
उसको बुझा न जाए!

हो कर मायूस
फिर कोई सीमांत गाँधी
बुझे मन
भीगे नयन
उलटे कदम -
अपने वतन लौट न जाए!

तुम्हें देते हैं आश्वासन, बापू!
हम वो दीपक जलाए रक्खेंगे
दीप से दीप जलाते जायेंगे
सोज़ आँधी से बचाए रक्खेंगे।

ये धर्मोन्माद, ये वहशत
ये दंगे फ़साद-ओ-दहशत
इनकी मानसिकता के विरुद्ध
कृत संकल्प
हो प्रतिबद्ध -

मनाएंगे इक अनूठा जन्मोत्सव!
अमन तस्कीन और सौहार्द का उत्सव।

हक़ीक़त तुम्हारी पाइंदा रहेगी!
विरासत तुम्हारी ज़िंदा रहेगी!

     

- कमल कान्त जैसवाल

Mahatma Gandhi
Gandhi's 150th Jubilee
Indian democracy
GOVERNMENT OF INDIA
corruption in system
Gandhian ideology
hindi poetry
BJP
Congress
Kamal Kant Jaswal

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • veto
    एपी/भाषा
    रूस ने हमले रोकने की मांग करने वाले संरा के प्रस्ताव पर वीटो किया
    26 Feb 2022
    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शुक्रवार को इस प्रस्ताव के पक्ष में 11 और विपक्ष में एक मत पड़ा। चीन, भारत और संयुक्त अरब अमीरात मतदान से दूर रहे।
  • Gujarat
    राजेंद्र शर्मा
    बैठे-ठाले: गोबर-धन को आने दो!
    26 Feb 2022
    छुट्टा जानवरों की आपदा का शोर मचाने वाले यह नहीं भूलें कि इसी आपदा में से गोबर-धन का अवसर निकला है।
  • Leander Paes and Rhea Pillai
    सोनिया यादव
    लिएंडर पेस और रिया पिल्लई मामले में अदालत का फ़ैसला ज़रूरी क्यों है?
    26 Feb 2022
    लिव-इन रिलेशनशिप में घरेलू हिंसा को मान्यता देने वाला ये फ़ैसला अपने आप में उन तमाम पीड़ित महिलाओं के लिए एक उम्मीद है, जो समाज में अपने रिश्ते के अस्तित्व तो लेकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करती…
  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव 2022: किस तरफ होगा पूर्वांचल में जनादेश ?
    26 Feb 2022
    इस ख़ास बातचीत में परंजॉय गुहा ठाकुरता और शिव कुमार बात कर रहे हैं यूपी चुनाव में पूर्वांचाल की. आखिर किस तरफ है जनता का रुख? किसको मिलेगी बहुमत? क्या भाजपा अपना गढ़ बचा पायेगी? जवाब ढूंढ रहे हैं…
  • manipur
    शशि शेखर
    मणिपुर चुनाव: भाजपा के 5 साल और पानी को तरसती जनता
    26 Feb 2022
    ड्रग्स, अफस्पा, पहचान और पानी का संकट। नतीजतन, 5 साल की डबल इंजन सरकार को अब फिर से ‘फ्री स्कूटी’ का ही भरोसा रह गया है। अब जनता को तय करना है कि उसे ‘फ्री स्कूटी’ चाहिए या पीने का पानी?    
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License