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शिक्षा
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शिक्षा में असमानता को दूर करने का चीनी जतन 
बच्चों पर पढ़ाई एवं उनके माता-पिता पर पड़ने वाले भारी वित्तीय बोझ को कम करने की चीन की 'दोहरी कटौती' नीति को सरकार के इस विचार के समर्थन के रूप में देखा जा सकता है कि उसके लिए बच्चों और परिवारों के मस्तिष्क और स्वास्थ्य का मसला निवेशकों और अरबपतियों  की जेबों से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है। 
टिंग्स चा
15 Nov 2021
china
छवि सौजन्य: फ्ल़िकर 

चीन में, बच्चों पर शैक्षणिक दबाव बहुत अधिक सघन होता है, और यह उनके शैशवावस्था से ही शुरू हो जाता है। शंघाई में रहने वाली एक मां अपने छह साल के बच्चे की रूटीन के बारे में बताती हैं, "किंडरगार्टन में ही, बच्चों को पूरा सप्ताहांत पिनयिन सीखने में बिताना पड़ता है।" पिनयिन पात्रों के उनके स्वर और मानक चीनी के उच्चारण पर आधारित उनके रोमनकरण की एक प्रणाली है।" वे कहती हैं,"फिर गणित जैसा विषय भी है, जिसमें 20 अंकों तक जोड़ और घटाव बच्चों को सीखना होता है,और अंग्रेजी की पढ़ाई भी करनी पड़ती है। इन विषयों की तैयारी किए बिना, इसकी उम्मीद नहीं जाती कि एक छात्र अपनी कक्षा के अन्य साथी छात्रों से बेहतर करेगा और अगली कक्षा के पाठ्यक्रम को भलीभांति "समझने" में सक्षम होगा"। 

हालांकि, स्कूली पाठ्यक्रम को केवल "समझ" लेना ही पर्याप्त नहीं हो सकता है। जैसा कि शंघाई की वह मां कहती हैं, बच्चों को "आगे बढ़ने" के लिए पियानो, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग, गणितीय ओलंपियाड, और शतरंज आदि में राष्ट्रीय (चीनी) और अंतर्राष्ट्रीय दोनों किस्मों में साप्ताहिक स्कूल के बाद की कक्षाओं में भी भाग लेना पड़ता है।

आज चीनी बच्चों की सप्ताह में पूरे छह दिनों में सुबह 6:40 बजे उठने और रात 10:30 पर ही बिस्तर पर जाने की दिनचर्या आम हो गई है। इस दिनचर्या के चलते प्राथमिक और मध्य विद्यालय में पढ़ने वाले 67 प्रतिशत बच्चे राष्ट्रीय मानकों के मुताबिक नींद नहीं ले पाते हैं। इसके तहत, प्राथमिक स्कूल के छात्रों के लिए रोजाना 9 घंटे की और मिडिल स्कूल के छात्रों के लिए रोजाना आठ घंटे की नींद लेना आवश्यक है-”यह निर्धारण जून 2021 में चीनी शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी प्रश्नावली में शिक्षकों, अभिभावकों और छात्रों द्वारा दिए गए जवाबों के मुताबिक किया गया है। 

चीन एक ऐसा देश है, जिसने शिक्षण में उच्च मूल्य को काफी पहले से ही कायम रखा है, उसमें कन्फ्यूशियस के इस विश्वास पर विशेष बल दिया गया है कि ‘शिक्षा बच्चे के व्यक्तिगत नैतिक चरित्र को विकसित करती है और सामाजिक भलाई में अपना विशिष्ट योगदान करती है।‘ शिक्षा की इसी प्राथमिकता ने, खास कर चीन के जनवादी गणराज्य की स्थापना के बाद से, देश के त्वरित विकास में भी योगदान दिया है। 

शाही युग की सिविल परीक्षाओं में जड़ें जमाने के साथ, चीन की शिक्षा प्रणाली अत्यधिक प्रतिस्पर्धी, योग्यता एवं परीक्षा-आधारित हो गई है। वार्षिक विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा-गाओकाओ-जिसे दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है- देश के शीर्ष स्तरीय विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए छात्रों के 11 मिलियन परिवारों की पीढ़ीगत आशा की परिणति का प्रतिनिधित्व करती है। हालांकि, कुछ ही छात्र दाखिला ले पाने में कामयाब हो पाते हैं। इसलिए, चीनी परिवार अपने बच्चों को "आगे बढ़ाने" की कोशिश में स्कूल के बाद अतिरिक्त ट्यूशन या प्रशिक्षण देने का विकल्प चुनते हैं। 

स्कूल-बाद के शिक्षण उद्योग में उछाल

चीन में स्कूल के बाद घर पर बच्चों को निजी स्तर पर ट्यूशन देने का छोटे स्तर पर शुरू हुआ उपक्रम वह 1990 के दशक तक अंतरराष्ट्रीय पूंजी के सहमेल के साथ एक विशाल एवं व्यवस्थित वाणिज्यिक उद्योग के रूप में विकसित हो गया। इस रूप में कि उदारीकरण की इस अवधि में, चीन का एक शैक्षिक संस्थान, न्यू ओरिएंटल, 2006 में न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होने वाला देश का पहला कोचिंग संस्थान बन गया। बाजारों के रुख पर शोध-अनुसंधान करने वाले कियानज़ान के अनुसार, 2019 तक, चीन में स्कूली पढ़ाई के बाद का निजी ट्यूशन उद्योग का कारोबार बढ़कर 120 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। 

इस बीच, साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार, "के-12 में राष्ट्रव्यापी छात्र नामांकन" 2019 के 325.3 मिलियन से बढ़कर 2024 तक 659.5 मिलियन हो जाने का अनुमान है। चीन में निजी ट्यूशन क्षेत्र अब जरूरतमंद छात्रों के लिए एक पूरक संसाधन नहीं रह गया है, वह पिछले कुछ वर्षों में अत्यधिक पूंजीकृत और लाभ से संचालित होने वाला उपक्रम बन गया है। शिक्षा मंत्रालय के शब्दों में, शिक्षा "पूंजी द्वारा अपहृत" हो गई थी। यह स्थिति 24 जुलाई तक रही थी। इसके बाद चीन सरकार ने स्कूल के बाद के शिक्षण को विनियमित करने की घोषणा कर दी, जिसने ट्यूशन इंडस्ट्रीज को हिलाकर रख दिया। 

'दोहरी कटौती' नीति

सरकार बच्चों पर पढ़ाई का बोझ कम करने और माता-पिता पर शिक्षा का वित्तीय दबाव घटाने के लक्ष्य से इस "दोहरी कटौती" की नीति अपना रही है। इस के दिशानिर्देश पाठ्येतर शिक्षा को विनियमित करते हैं, स्टार्टअप प्लेटफार्मों को स्टॉक एक्सचेंजों में सूचीबद्ध होने और उन्हें विदेशी धन प्राप्त करने से रोकते हैं, और मौजूदा प्लेटफार्मों को स्वयं के गैर-लाभकारी संस्थाओं के रूप में पंजीकरण कराने की मांग करते हैं।

इस नए दिशा-निर्देश के अंतर्गत निजी शिक्षण संस्थान मुख्य विषयों को पढ़ाने से लाभ नहीं कमा सकते हैं और छुट्टियों के दौरान या सप्ताहांत में बच्चों को पढ़ाने के लिए नहीं बुला सकते हैं। यहां मुनाफे पर गौर किया जाना महत्त्वपूर्ण है। 2018 में, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने निजी ट्यूशन कंपनियों की आलोचना की थी, और इस पर जोर दिया था कि- शिक्षा "चेतना का क्षेत्र" है, अतः उसे मुनाफा कमाने की एक मशीनरी में नहीं बदला जाना चाहिए।" 

चीन का ट्यूशन उद्योग, जो माता-पिता की चिंताओं से अकूत लाभ कमा रहा है, वह अपने कदाचार के लिए हाल ही में व्यापक जांच के दायरे में आया है। जून में, उपभोक्ता शिकायतों में बढ़ोतरी के बाद 15 कोचिंग सेंटरों पर लगभग 5.73 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया गया था। सरकारी अधिकारियों द्वारा किए गए एक निरीक्षण में इन ट्यूशन केंद्रों में फर्जी योग्यता वाले शिक्षक, फर्जी रिजल्ट और गलत मूल्यांकन सहित कई अनियमितताओं का पता चला। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, चीन में वास्तविक "टू-ट्रैक सिस्टम" ने "शैक्षिक अनुचितता" का विस्तार किया, जिसमें एक तरफ तो बच्चों की मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा व्यवस्था की गई है, जबकि दूसरी तरफ निजी ट्यूशन सेंटर माता-पिता एवं अभिभावकों से भारी शुल्क वसूल रहे थे। 

पेकिंग यूनिवर्सिटी में नेशनल स्कूल ऑफ डेवलपमेंट के डीन याओ यांग ने कहा, "साझा समृद्धि के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण मुद्दा शैक्षिक निष्पक्षता हासिल करना है।" याओ ने देश में हो रहे उच्च धन संकेंद्रण की ओर इशारा किया। देश के केंद्रीय बैंक, पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना के एक सर्वेक्षण के अनुसार, 2019 में, चीन में शहरी परिवारों की परिसंपत्ति "सबसे कम 20 प्रतिशत" थी, जो सभी सेंपल परिवारों की शुद्ध संपत्ति का केवल 2.3 प्रतिशत थी। जबकि "उच्चतम 20 प्रतिशत घर-बारों में शुद्ध संपत्ति की हिस्सेदारी 64.5 प्रतिशत" है। सामाजिक असमानता के एक लक्षण के रूप में,  याओ शिक्षा के उत्थान को केवल आय वितरण के एक साधन के रूप में देखने की बजाय मध्य वर्ग के विस्तार और सामान्य समृद्धि के निर्माण के एक प्रमुख तंत्र के रूप में देखते हैं। 

हालांकि "सामान्य समृद्धि" चीनी नेताओं माओत्से तुंग और देंग शियाओपिंग के जमाने के शब्द है, जो सरकार द्वारा शुरू किए गए सुधारों की एक दृष्टि और चक्र दोनों को संदर्भित करती है, जिसका उद्देश्य कल्याणकारी तंत्र को मजबूत करने के साथ नागरिकों की आर्थिक क्षमता में सामंजस्य बिठाना है। यह आज चीनी लोगों के लिए उच्च शिक्षा, आवास और स्वास्थ्य देखभाल की लागत के रूप में खड़े "तीन पहाड़ों" की चुनौतियों से पार पाने के प्रयास का भी हिस्सा है। 

इसका लक्ष्य विकास और आय वितरण, कर और सामाजिक कल्याण सुधारों, और परोपकार के माध्यम से ग्रामीण इलाकों एवं शहरों, सामाजिक वर्गों एवं क्षेत्रों के बीच बढ़ती असमानताओं को दूर करना है-देश के अमीरों को वंचित-गरीब समाज को उनका दाय वापस करने के लिए प्रोत्साहित करना है। सरकार द्वारा इन सुधारों की घोषणा के बाद से, प्रमुख चीनी कंपनियों और धनी व्यक्तियों ने दान की पेशकश की है, जिनमें प्रौद्योगिकी दिग्गज अलीबाबा का "देश के समृद्धि-संपन्नता के अंतर को कम करने में मदद करने" के लिए वर्ष 2025 तक 15.5 बिलियन डॉलर का धन देने का वचन भी शामिल है। यह घोषणा अलीबाबा की एकाधिकारवादी रवैये अपनाने के खिलाफ 2.8 बिलियन डॉलर के जुर्माना के बाद की गई है। 

इस बीच, निजी ट्यूशन में आए उथल-पुथल ने शेयर बाजारों को हिलाकर रख दिया, जिससे कि चीनी और अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंजों में सूचीबद्ध 24 कंपनियों को अब अनिश्चित भविष्य का सामना करना पड़ रहा है और "उन्हें अपनी शैक्षणिक संपत्तियों को हटाने या बेचने पर मजबूर होना पड़ सकता है।" फोर्ब्स के अनुसार, टीएएल (TAL) एजुकेशन ग्रुप के अरबपति चेयरमैन झांग बैंग्सिन की व्यक्तिगत संपत्ति में अप्रैल-जुलाई के दौरान लगभग 90 फीसदी से $1.4 बिलियन डॉलर तक गिरावट आई है। 

न्यू ओरिएंटल के संस्थापक यू मिनहोंग, जिन्होंने अपनी व्यक्तिगत संपत्ति में 70 फीसदी की गिरावट देखी है, ने हाल ही में घोषणा की कि वे सरकार द्वारा निजी शिक्षण संस्थानों पर कार्रवाई के बाद अपनी कंपनी को कृषि उत्पादों को बेचने की ओर पुनर्निर्देशित करेंगे। न्यू ओरिएंटल स्कूलों की लगभग 1,500 शाखाओं को बंद होने के बाद, इन स्कूलों के शिक्षक अब इन कृषि उत्पादों को लाइवस्ट्रीम के माध्यम से बेचने में "भाग लेंगे" और "ग्रामीण पुनरोद्धार का समर्थन" करने में मदद करेंगे। 

बीजिंग नॉर्मल यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ प्रोफेसर गु मिंगयुआन के अनुसार, निजी शिक्षण को विनियमित करना केवल "एकमुश्त" उपाय नहीं है, बल्कि "सार्वजनिक शिक्षा की पहुंच को मजबूत करना" आवश्यक है। दोहरी कटौती नीति के आधार पर, सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। शिक्षा मंत्रालय ने 31 अगस्त को बार-बार ली जाने वाली परीक्षा और तिस पर भी कठिन परीक्षा एवं उसके परिणामों पर जोर देने की प्रवृत्तियों की आलोचना करते हुए एक नोटिस जारी किया, जिसमें कहा गया है कि ऐसी परीक्षा व्यवस्था "छात्रों के शरीर और दिमाग को नुकसान पहुंचाती है।" तब से प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में परीक्षा एवं होम टॉस्क की मात्रा कम कर दी गई है, जबकि परीक्षा के अंकों को प्रकाशित करने और बच्चों की श्रेणीयां (रैंकिंग) निर्धारित करने से रोकने के उपाय किए गए हैं।

कामकाजी माता-पिता का समर्थन करने के लिए पब्लिक स्कूलों में कला और खेल जैसे गैर-पाठ्यचर्या प्रशिक्षण क्षेत्रों के रूप में स्कूल के बाद की सेवाओं को बढ़ाया जा रहा है, और शिक्षकों के वेतन में वृद्धि के लिए नई प्रतिबद्धताएं बनाई गई हैं। पेइचिंग शहर के पब्लिक स्कूलों में शीर्ष शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को रोटेट करने के लिए एक पायलट कार्यक्रम लागू किया जा रहा है। यह कुलीन स्कूलों द्वारा संचालित अचल संपत्ति की अटकलों पर विराम लगाने में मदद करेगा। इस बीच, सरकार की तरफ से निजी ट्यूशन के लिए शुल्क नियमनों की घोषणा किए जाने की उम्मीद है। 

दोहरी कटौती नीति को सरकार के इस अभिसमर्थन के रूप में देखा जा सकता है कि उसके लिए बच्चों और उनके परिवारों की दिमागी क्षमता और स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने का मुद्दा निवेशकों और अरबपतियों की जेब से अधिक प्राथमिकता के दायरे में आता है। इसके कुछ सकारात्मक परिणाम अभी से दिखने लगे हैं-57 मिलियन से अधिक माता-पिता के बीच हुए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि उनमें से 97.5 फीसदी माता-पिता एवं अभिभावक सरकार की ताजा दोहरी कटौती नीति से संतुष्ट थे। जैसा कि आधिकारिक घोषणा में कहा गया है, बच्चे, आखिरकार, "समाजवाद के निर्माता और उत्तराधिकारी" हैं, और समाजवाद का निर्माण पीढ़ी दर पीढ़ी चलने वाली परियोजना है।

(टिंग्स चा ट्राईकॉन्टिनेंटल : सामाजिक अनुसंधान संस्थान के कला विभाग की एक शोधकर्ता और समन्वयक हैं। वे डोंगशेंग की संपादक भी हैं, जो चीनी राजनीति और समाज में रुचि रखने वाले शोधकर्ताओं का एक अंतरराष्ट्रीय समूह है।) 

स्रोत: यह लेख ग्लोबट्रॉटर द्वारा प्रकाशित किया गया था। 

अंग्रेजी में मूल रूप से प्रकाशित लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें

How China Is Addressing Education Inequality

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