NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
एनपीआर जनगणना से किस तरह अलग है ?
कुछ राज्य सरकारों के मुख्यमंत्रियों ने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) की प्रक्रिया पर यह कहते हुए रोक लगा दी है कि इससे एनआरसी किया जा सकता है।
आईसीएफ़
03 Mar 2020
Census Vs NPR

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) के लिए डाटा का संग्रह, जनगणना के घरों की सूची बनाने वाले चरण के साथ ही अप्रैल 2020 में शुरू हो जाएगा। इस बात को लेकर बहुत भ्रम है कि दोनों अभियान एक ही हैं या अलग-अलग हैं। असल में कुछ राज्य सरकारों के मुख्यमंत्रियों ने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) की प्रक्रिया पर यह कहते हुए रोक लगा दी है कि इससे एनआरसी किया जा सकता है, जबकि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, उद्धव ठाकरे की तरह कुछ मुख्यमंत्रियों  ने बयान दिया है कि ‘एनपीआर सिर्फ़ एक जनगणना’ है।

लेकिन,अप्रैल 2020 से सितंबर 2020 तक दोनों ही अभियानों को एक साथ अंजाम देने को लेकर सरकार के निर्णय से कुछ हद तक भ्रम की स्थिति पैदा होती है। हालांकि अपने मक़सद और मूल में वे एक दूसरे से पूरी तरह अलग हैं- एनपीआर और जनगणना को "समान" या "एक ही तरह" के अभियान रूप में बताए जाने का प्रयास किया जाता रहा है। यह एनपीआर-एनआरआईसी के बारे में बड़े सवालों से बचने के लिए सरकार की कोशिशों का हिस्सा भर है।

जनगणना और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) आख़िर किस तरह समान हैं?

एनपीआर और जनगणना दोनों में घर-घर जाकर डाटा संग्रह किये जाने की ज़रूरत होती है। जनगणना के लिए इस डाटा संग्रह को घर की सूची बनाए जाने वाला चरण कहा जाता है। इस घर की सूची बनाए जाने वाले चरण के दौरान, सरकार द्वारा नियुक्त एक गिनती करने वाला उस शहर/गांव या क्षेत्र के प्रत्येक घर में जाता है,जो शहर/गांव या क्षेत्र उसे सौंपा जाता है और हर व्यक्ति के बारे में वह जानकारी इकट्ठा करता है। गृह मंत्रालय की सितंबर 2019 की अधिसूचना के अनुसार, जनगणना के लिए नियुक्त ये गिनती करने वाला ही एनपीआर को भी अपडेट करेगा।

इसे भी पढ़े : क्या एनपीआर और एनआरसी एक दूसरे से जुड़े हुए हैं?

हालांकि, घर-घर जाकर डाटा संग्रह की आवश्यकता के अलावा, जनगणना और एनपीआर के बीच शायद ही किसी तरह की कोई समानता हो।

जनगणना और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) आख़िर किस तरह अलग-अलग हैं ?

इन दोनों के बीच के फ़र्क़ के मुख्य बिंदु हैं- क़ानूनी उत्पत्ति और मक़सद; सूचना और डाटा गोपनीयता; और सज़ा।

क़ानूनी उत्पत्ति और मक़सद

जनसंख्या की गणना भारत सरकार द्वारा हर दस साल में एक बार की जाती है। यह प्रक्रिया पहली बार 1872 में तब शुरू हुई थी, जब भारत औपनिवेशिक शासन के अधीन था। यह जनगणना, जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत की जाती है। इस जनगणना के लिए इकट्ठा किये जाने वाले आंकड़ों से देश की जनसंख्या की जनसांख्यिकीय और सामाजिक-आर्थिक तस्वीर सामने आती हैं। जनगणना के आंकड़ों को इकट्ठा करने और उनका विश्लेषण करने का मक़सद इतना ही है कि यह योजना और नीति को मदद पहुँचाता है, और मौजूदा सरकारी नीतियों के प्रभाव का आकलन करने में भी मददगार होता है।

इसे भी पढ़े :नागरिकता की जांच : अधिकारों से वंचित करने के मनमाने तरीक़े

इसके विरोध के बावजूद वर्ष 2010 में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर बनाने और इसके रख रखाव का चलन शुरू हुआ। एनपीआर नागरिकता (नागरिक पहचान का पंजीकरण और राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी करना) नियमावली, 2003 के तहत नागरिकता अधिनियम, 1955 में 2003 संशोधन के बाद  ही जारी किया गया है। एनपीआर संकलित करने का एकमात्र मक़सद एनआरआईसी बनाना है। सत्यापन के दौरान एनपीआर के दौरान एकत्र किये गये डाटा का उपयोग नागरिकता का निर्धारण करने के लिए किया जाता है। इस तरह, एनपीआर, एनआरआईसी बनाने की तरफ़ पहला क़दम है।

जनगणना के दौरान हासिल जानकारियां समावेशी योजना और नीतिगत निर्णयों में मददगार हो सकती हैं। एनपीआर-एनआरआईसी अभियान, अपने इरादे में भेदभाव और बाहर का रास्ता दिखाने की कोशिश वाला है।

सूचना और डाटा गोपनीयता

जनगणना की प्रक्रिया में पूछे गये सवालों का मक़सद साक्षरता, रोज़गार, निवास, प्रवास, विवाह, आय आदि पर विवरण हासिल करना है। एनपीआर की जानकारियों में जनसांख्यिकीय के साथ-साथ बायोमेट्रिक विवरण भी शामिल होते हैं। माता-पिता के जन्म का विवरण मांगने वाले एनपीआर 2020 के फ़ॉर्म में जोड़े गये नये प्रश्न विशेष रूप से नागरिकता निर्धारण से सम्बन्धित हैं।

जन्म के विवरण के अलावा, इस नये फ़ॉर्म में आधार कार्ड नंबर, पासपोर्ट, पैन कार्ड नंबर और वोटर-आईडी जैसे विवरण भी मांगे गये हैं। इस विवरण की सहायता से सामूहिक निगरानी के लिए आसानी से उपलब्ध हर व्यक्ति की व्यक्तिगत जानकारी के साथ एक केंद्रीकृत डेटाबेस तैयार किया जायेगा। यह विशेष रूप से चिंताजनक इसलिए है, क्योंकि एकत्र किया गया यह डाटा गंभीर ख़तरे में होगा।

हालांकि जनगणना अधिनियम, जनगणना के दौरान इकट्ठा किये गये इन आंकड़ों को सरकार के लिए गोपनीय और सुरक्षित रखना अनिवार्य बनाता है। (जनगणना अधिनियम के अनुसार,  जनगणना के दौरान इकट्ठा किये गये डाटा को यदि कोई सरकारी अधिकारी ग़लत तरीके से एकत्र करता है या सार्वजनिक करता है, तो उन सरकारी अधिकारियों को दंडित किये जाने का प्रावधान है।), जबकि ग़ौरतलब है कि नागरिकता नियमों के तहत एनपीआर डाटा के लिए इस तरह की गोपनीयता की कोई आवश्यकता ही नहीं है।

दंड

यदि कोई व्यक्ति जनगणना डेटा संग्रह के दौरान कुछ जानकारी देने में विफल रहता है तो कोई दंडात्मक व्यवस्था नहीं हैं। हालांकि, एनपीआर में किसी विशेष जानकारी का खुलासा न करने पर दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है। घर के मुखिया का कानूनी दायित्व है कि वह प्रत्येक व्यक्ति के बारे में सही जानकारी दे और ऐसा करने में विफल होने पर जुर्माना लगेगा।

मोबाइल एप के माध्यम से डेटा संग्रह

जनगणना और एनपीआर का अपडेशन मोबाइल आधारित एप के माध्यम से किया जाएगा। यह डेटा गोपनीयता की चिंताओं को बढ़ाता है और यह किसी व्यक्ति की सूचित सहमति के बिना डेटा एकत्र करने का जोखिम पैदा करता है। हालांकि, जनगणना के लिए पूछे गए प्रश्न एनपीआर के प्रश्नों से भिन्न हैं और कुछ प्रश्न तो ओवरलैप करते हैं। जनगणना के दौरान व्यक्ति को पता नहीं चल सकता है कि वह किस प्रश्न का उत्तर दे रहा है या यह जानकारी कहां रिकॉर्ड की गई है क्योंकि यह मोबाइल आधारित एप के माध्यम से किया जाएगा। ऐसी जानकारी देने में प्रत्येक व्यक्ति को मूर्ख बनाने के लिए यह एक संगठित योजना की तरह प्रतीत होता है जो नागरिकता निर्धारित करने में मदद कर सकती है

साभार : इंडियन कल्चरल फ़ोरम

इसे भी पढ़े : सीएए नागरिकता क़ानूनों में क्या बदलाव करता है ?

Census Vs NPR
census
NPR
NRIC
NRC
CAA
Anti CAA Protest

Related Stories

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

शाहीन बाग़ : देखने हम भी गए थे प तमाशा न हुआ!

शाहीन बाग़ ग्राउंड रिपोर्ट : जनता के पुरज़ोर विरोध के आगे झुकी एमसीडी, नहीं कर पाई 'बुलडोज़र हमला'

चुनावी वादे पूरे नहीं करने की नाकामी को छिपाने के लिए शाह सीएए का मुद्दा उठा रहे हैं: माकपा

CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा

आदिवासियों के विकास के लिए अलग धर्म संहिता की ज़रूरत- जनगणना के पहले जनजातीय नेता

लाल क़िले पर गुरु परब मनाने की मोदी नीति के पीछे की राजनीति क्या है? 

शाहीन बाग़ की पुकार : तेरी नफ़रत, मेरा प्यार

दबाये जाने की तमाम कोशिशों के बावजूद भारत का बहुलतावादी लोकतंत्र बचा रहेगा: ज़ोया हसन

उत्तरप्रदेश में चुनाव पूरब की ओर बढ़ने के साथ भाजपा की मुश्किलें भी बढ़ रही हैं 


बाकी खबरें

  • Bikram Singh Majithia
    भाषा
    पंजाब: मजीठिया के ख़िलाफ़ नशीले पदार्थों संबंधी मामला दर्ज, शिअद ने ‘‘राजनीतिक प्रतिशोध’’ करार दिया
    21 Dec 2021
    मजीठिया के ख़िलाफ़ सोमवार को मोहाली में स्वापक औषधि एवं मन: प्रभावी पदार्थ अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।
  • Election reform bill passed in both houses
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    चुनाव सुधार बिल दोनों सदनों में पास, विपक्ष ने उठाया निजता के अधिकार का सवाल
    21 Dec 2021
    20 दिसंबर को लोकसभा में पास होने के बाद आज 21 दिसंबर को चुनाव सुधार बिल राज्यसभा में भी बिना किसी बहस के पास कर दिया गया।
  • covid
    एलेक्जेंडर फ्रियूंड
    कोविड: प्रोटीन आधारित वैक्सीन से पैदा हुई नई उम्मीद
    21 Dec 2021
    ऐसी उम्मीद लगाई जा रही है कि प्रोटीन आधारित वैक्सीन से ग़रीब देशों में वैश्विक कोरोना टीकाकरण अभियान में तेज़ी आएगी। वैक्सीन का विरोध करने वाले कुछ लोग भी इन्हें चाहते हैं।
  • Bihar: Junior doctors' strike
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहारः मांगों की पूर्ति का आश्वासन मिलने के बाद जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल ख़त्म
    21 Dec 2021
    प्रदेश के जूनियर डॉक्टरों ने पांच सूत्री मांगों को लेकर सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की थी, लेकिन सरकार की ओर से इन मांगों को स्वीकार करने का आश्वासन मिलने के बाद आधी रात को हड़ताल समाप्त कर…
  • Madrasa teacher
    असद रिज़वी
    उत्तर प्रदेश: 21 हज़ार मदरसा शिक्षकों को 4 वर्षों से नहीं मिला मानदेय, आमरण अनशन की दी चेतावनी
    21 Dec 2021
    मदरसों में गुणवत्तापूर्ण आधुनिक शिक्षा प्रदान कराने की योजना के तहत केंद्र सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश में 21546 मदरसा शिक्षकों को नियुक्त किया गया था। पिछले चार वर्षों से अधिक समय से मानदेय नहीं मिलने…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License