NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
समाज
विज्ञान
अंतरराष्ट्रीय
इंसानी दिमाग़ में भाषा का विकास कितना पुराना है?
ऐसे लोग जिनकी भाषायी क्षमता पर स्ट्रोक या मस्तिष्क अवनति (डिजेनरेशन) के चलते बुरा असर पड़ा है, उनके इलाज में इस 'पाथवे' से मिली जानकारी अहम हो सकती है।
संदीपन तालुकदार
22 Apr 2020
इंसानी दिमाग़

भाषा एक विशिष्ट मानवीय गुण है। आख़िर हमारे बदलते इतिहास के बीच यह इंसानी दिमाग़़ का हिस्सा कब बनी? दुर्भाग्य से इंसानी दिमाग़, हड्डियों और दांतों की तरह जीवाश्म में परिवर्तित नहीं होते। किसी भी दिमाग़ी जीवाश्म के न होने के चलते, मानवीय विकास के क्रम में भाषा कितनी पुरानी है, यह सवाल अब भी वैज्ञानिकों के बीच पहेली है।

इस पहेली को समझने के लिए हमें अपने पास उपलब्ध साधन, जैसे दूसरे जानवरों के मस्तिष्क, जो हमारे पूर्वजों की तरह थे, उन पर ही निर्भर रहना होगा। 'नेचर' में प्रकाशित एक न्यूरोसाइंस पेपर में इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई गई है। उसमें कुछ अहम चीजें प्रकाश में आई हैं। उद्भव को लेकर अब तक जो मान्यताएं चली आ रही थीं, पेपर के मुताबिक भाषा उससे भी दो करोड़ साल पहले इंसानी दिमाग़ में पहुंच चुकी थी। बता दें अब तक यह माना जाता रहा है कि भाषा करीब 50 लाख साल से निश्चित तौर पर इंसानी दिमाग़ का हिस्सा है।

अपनी रिसर्च में वैज्ञानिकों ने तमाम खुले प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध 'ब्रेन स्कैन' और मानव-बंदर-चिंपांजी-लंगूरों के ब्रेन स्कैन का इस्तेमाल किया है, जो उन्होंने ख़ुद किए थे। भाषा के लिए इंसानी दिमाग़ में मौजूद धनुषाकार 'फास्सिकुलस पाथवे' बेहद अहम होता है। यह रास्ता दिमाग़ के बाहरी क्षेत्र को भीतरी हिस्से से जोड़ता है। यहां इस 'न्यूरल पाथवे या कोशिकीय मार्ग' से हमारा मतलब उस भारी चौड़ाई वाले संयोजक मार्ग से है, जो दिमाग़ के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ता है। यह हमें अच्छी तरह पता है कि दिमाग़ के अलग-अलग हिस्से भिन्न-भिन्न काम करते हैं। वैज्ञानिकों ने अपने विश्लेषण में पाया कि चिंपांजी, बंदरों और अफ्रीकन लंगूरों के दिमाग़ में अपनी तरह का 'आर्कुयेट फास्सिकुलस पाथवे' या 'धनुषाकार मार्ग' होता है। 

यह पाथवे जो हमारे दिमाग़ में भाषा के लिए बेहद अहम होता है, दरअसल यह हमारे पूर्वजों में ही विकसित हो चुका था। शोध के मुताबिक़, अफ़्रीकी लंगूरों के साथ इंसान के जो 'साझा पूर्वज' थे, कम से कम उनमें तो यह पाथवे मौजूद था। करीब़ ढाई करोड़ साल पहले इंसान और अफ्रीकी लंगूरों के साझा पूर्वज थे। इससे पहले भाषा के पचास लाख साल पहले विकसित होने की जो बता कही जाती थी, वह चिंपाजीं के साथ इंसान के साझा पूर्वजों के आधार पर थी। इंसान और चिंपाजी के साझा पूर्वज पचास लाख साल पहले मौजूद थे, मतलब इतने साल पहले आज के इंसान के पूर्वज, चिंपाजियों से अलग हुए थे।

लेकिन इंसानी पाथवे दूसरों से काफ़ी अलग है। इसका बांया हिस्सा मज़बूत है, जबकि दाहिनी हिस्से में दिमाग़ का वह हिस्सा काम करता है, जिसमें श्रवण क्षमता नहीं होती। लेकिन बंदरों और चिंपांजियों के दिमाग़ में ऐसा नहीं था।

इस अध्ययन के करस्पोंडिंग लेखक क्रिस्टोफ़र पेटकोव कहते हैं, ''भाषा को बोला, लिखा या उसका संकेतन किया जा सकता है। लेकिन अगर कुछ पाथवे ज़्यादा मज़बूती या कमज़ोरी से गुंथे हों, तो उससे ज़्यादा सटीक ढंग से इंसानी दिमाग़ में भाषा की पुनर्प्राप्ति और पुनर्वास के लिए जगह बन सकती है, ताकि भाषा क्षमताओं का दोबारा विकास किया जा सके।''

अगर इन शब्दों पर यक़ीन करें, तो हम मान सकते हैं कि ताज़ा अध्ययन न सिर्फ़ मानव विकास क्रम को समझने की ज़रूरी जानकारी है, बल्कि आज के लोगों लिए भी कई मायनों में अहम है। ऐसे लोग जिनकी भाषायी क्षमता पर स्ट्रोक या मस्तिष्क अवनति (डिजेनरेशन) के चलते बुरा असर पड़ा है, जिनकी भाषायी क्षमताओं का नुकसान हुआ है, उनके इलाज में इन पाथवे से मिली जानकारी अहम हो सकती है।

अंग्रेज़ी में लिखा मूल आलेख आप यहाँ पढ़ सकते हैं।

Human brain evolution
Arcuate Fasciculus
Language Pathway of Human Brain
Christopher Petkov

Related Stories


बाकी खबरें

  • सोनिया यादव
    भारत के लगभग आधे शहर वायु प्रदूषण की चपेट में, दिल्ली दुनिया की सबसे प्रदूषित कैपिटल सिटी: रिपोर्ट
    23 Mar 2022
    देश के 48 फीसदी शहरों में डब्लूएचओ द्वारा तय मानकों से 10 गुना ज्यादा वायु प्रदूषण का स्तर पाया गया। वहीं दुनिया के 100 सबसे प्रदूषित स्थानों की सूची में 63 भारतीय शहर शामिल रहे।
  • journalist
    कुमुदिनी पति
    रूस और यूक्रेन: हर मोर्चे पर डटीं महिलाएं युद्ध के विरोध में
    23 Mar 2022
    युद्ध हर देश के लिए बुरा है। इस लेख में हम यह जानने की कोशिश करेंगे कि इस युद्ध की वजह से यूक्रेन और रूस की महिलाओं को क्या कुछ झेलना पड़ रहा है और युद्ध लम्बा खिंचा तो उनपर और उनके बच्चों पर क्या…
  • china
    कैथरीन शायर
    सऊदी अरब और चीन: अब सबसे अच्छे नए दोस्त?
    23 Mar 2022
    मध्य पूर्व का यह देश चीन की तरफ झुक रहा है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ उसके लंबे समय से चले रहे मजबूत संबंधों को खत्म करने की एक धमकी है। अब देखना है कि दोनों के बीच यह अनबन कितनी गंभीर है?
  • agriculture
    श्रुति एमडी
    तमिलनाडु राज्य और कृषि का बजट ‘संतोषजनक नहीं’ है
    23 Mar 2022
    राज्य एवं कृषि दोनों ही बजट में कई चुनावी वादे अछूते ही बने रहे। इसके अलावा, मुद्रास्फीति और महंगाई को देखते हुए वित्तीय आवंटन कम था।
  • Fire
    भाषा
    हैदराबाद: कबाड़ गोदाम में आग लगने से बिहार के 11 प्रवासी मज़दूरों की दर्दनाक मौत
    23 Mar 2022
    दमकल और पुलिस अधिकारियों ने बताया कि श्रमिक खुद को नहीं बचा सके क्योंकि वहां केवल एक ही सीढ़ी थी। हालांकि एक व्यक्ति कमरे से कूदकर बचने में सफल रहा।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License