NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
हम खेलेंगे : CAA-NRC और सरकार की बर्बरता के ख़िलाफ़ प्रदर्शन का ज़रिया बना फ़ुटबॉल 
खेल जारी रहना चाहिए। और हमारे देश के विचार को बचाने के लिए विरोध प्रदर्शन भी। केरल में कोच्चि के महाराजा मैदान में फ़ुटबॉल मैदान पर पहुंची फ़ासीवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई।
लियो ज़ेवियर
16 Jan 2020
football

लड़के हों या लड़कियां, जवान हों या बूढ़े, महिलाएं हों या पुरूष, सभी बारी-बारी से ''फ़ासीवादी डिफेंडर्स'' के बीच से गेंद छकाते हुए ले जा रहे थे। इन फ़ासीवादी डिफेंडर्स को ख़ाकी रंग की हाफ़ पैंट और सफ़ेद शर्ट पहनाई गई थीं। यह खेल लोगों के जज़्बे और उनकी एकता का प्रतीक था। यह नागरिकता संशोधन क़ानून (2019) और एनआरसी के ख़िलाफ़ लोगों का सम्मिलित विरोध प्रदर्शन था। स्वाभाविक तौर पर यह प्रतीकात्मक था।

प्रदर्शनकारी फ़ुटबॉलर्स में पांच साल से लेकर उम्र के आठवें दशक में पहुंच चुके लोग शामिल थे। विरोध करने के लिए उन्होंने फ़ुटबॉल का तरीका चुना। सभी ने एक स्वर में केंद्र की बीजेपी सरकार और इसकी विभाजनकारी राजनीति की निंदा की।

''हम खेलेंगे : फ़ासीवाद के ख़िलाफ़ फ़ुटबॉल प्रदर्शन'' नाम का यह कार्यक्रम कोझीकोड स्थित सांस्कृतिक सामुदायिक संगठन ''स्ट्रीट्स ऑफ़ कालीकट'', फ़िल्म बनाने वालों के संगठन ''कलेक्टिव फ़ेस वन'' और महाराजा कॉलेज यूनियन ने केरल के कोच्ची में आयोजित करवाया था। अपनी टीम के लिए तय ड्रेस में वहां पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने इस शाम को ''पंथुकोंदोरू नेरचा'' का नाम दिया।

भारत की कई जगहों पर बीजेपी सरकार और नागरिकता संशोधन क़ानून का विरोध हो रहा है। विरोध करने वालों में युवा, छात्र और सामुदायिक नेता शामिल हैं, जिनका समर्थन कुछ राजनीतिक पार्टियां भी कर रही हैं। जैसे-जैसे आंदोलन तेज़ होता गया, सरकार ने प्रदर्शनकारियों और नागरिक समूहों से बात करने की जगह असहमति और लोकतांत्रिक आवाज़ों को दबाने की रणनीति अपनाई। ख़ासकर उन आवाज़ों को ताक़त और प्रोपगेंडा से दबाने की कोशिश की गई, जो समाज के वंचित तबकों से उठ रही थीं।

''फ़ासीवाद के ख़िलाफ़ फ़ुटबॉल विरोध प्रदर्शन'' टूर्नामेंट में चार कॉलेज टीम शामिल थीं। कई क्लब के बीच ऐसे मैच हुए जिनमें एक तरफ सात खिलाड़ी तो दूसरी तरफ़ पांच खिलाड़ी खेल रहे थे। इस महिला टीम और फ़ुटबॉल प्रशंसकों के दस्ते भी बनाए गए थे। इस तरह के अनूठे प्रदर्शन की शुरुआत राष्ट्रीय ब्लाइंड फ़ुटबॉल टीम के कप्तान सीवी सीना, केरल के कप्तान फल्हान सीएस और अनीस एमके ने बारी बारी से पेनल्टी किक मारकर की। इसे उन्होंने ''शॉट अगेंस्ट फ़ासिज़्म'' नाम दिया। यह पेनल्टी उन ताक़तों से कहीं ज़्यादा ताक़तवर थी, जो भारतीय संविधान के मूल्यों को दबाने की कोशिश कर रही हैं।

लेखक और निर्देशक मुहसिन परारी के मुताबिक़, ''यह शाम एक कड़ा संदेश भेजने में कामयाब रही। यह इस वक्त की मांग है कि सभी लोग फासिज़्म के ख़िलाफ़ एक साथ आएं। हमने फ़ुटबॉल चुना, क्योंकि इसे दुनिया भर में लाखों लोग पसंद करते हैं और इसमें लोगों को जोड़ने की ताक़त है।'' परारी इस आठ घंटे चले प्रदर्शन के आयोजकों में से एक हैं।

फ़ुटबॉल मैच के अलावा जो लोग मैदान पर जुटे, उनके लिए दो खास कार्यक्रम भी मौजूद थे। इसमें पहला था- ''शूटऑउट फॉर डेमोक्रेसी'' और दूसरा ''ड्रिबल अ नाज़ी''। जो भी लोग मैदान पर पहुंचे, उन्होंने ख़ाकी हाफ़पैंट में मौजूद पुतलों के आसपास फ़ुटबॉल के साथ अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया। जैसे ही कोई गोल होता, वहां आज़ादी के नारे लगाए जाते। शुरुआती लक्ष्य फासिज़्म के ख़िलाफ़ दस हज़ार गोल करने का था। कहने की ज़रूरत नहीं है कि इस लक्ष्य को हासिल कर लिया गया।

प्रतीकात्मक तौर पर खिलाड़ियों ने आपस में अपनी जर्सी भी बदली, ताकि फ़ुटबॉल के ज़रिए लोगों को एक साथ लाने संदेश दिया जा सके। शर्ट आपस में बदलकर खिलाड़ी अपनी आपसी प्रतिस्पर्धा से ऊपर उठे और संदेश दिया कि किसी बड़े मुद्दे पर आपसी मतभेदों को भुलाकर एकसाथ आया जा सकता है। उन्होंने इसे हमारे देश का ताना-बाना क़रार दिया।

आधी रात तक चले इस कार्यक्रम में गीतकार-संगीतकार शहबाज अमन और शांका ट्राइब बैंड ने भी अपनी प्रस्तुति दी। इस दौरान नागरिकता संशोधन अधिनियम, नरेंद्र मोदी और अमित शाह के ख़िलाफ़ लगातार नारे लगते रहे।

football against fascism

यह कार्यक्रम केरल में फ़ुटबॉल और राजनीति के जुड़ाव की परंपरा का एक पड़ाव था। 22 दिसंबर को मल्लापुरम में एक टूर्नामेंट विरोध प्रदर्शन का मैदान बन गया था। वहां मौजूद दर्शकों ने खूब CAA विरोधी नारे लगाए थे। पूरा मैदान आज़ादी के नारों से गूंज उठा था।

महाराजा स्टेडियम में भी माहौल बेहद प्रेरणादायक था। चाहे कोई भी स्थित हो, ''द गेम मस्ट गो ऑन (खेल जारी रहना चाहिए)'' फ़ुटबॉल का शाश्वत नियम है। लोगों की आवाज़ ही वो चीज है, जो फ़ुटबॉल को मैदान और हमारी स्मृतियों में मौजूदा ओहदा दिलवाती है।

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

Football against fascism
football against CAA
CAA Protests
CAA NRC protests
Citizenship Amendment Act
Indian democracy
Amit Shah
Narendra modi
bjp policy
BJP government
JNU Protests
Indian protest against CAA
football protest Kochi
Maharajas College Ground
Hum Khelenge
Football Protest Against Fascism

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी

झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!

दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को मिला व्यापक जनसमर्थन, मज़दूरों के साथ किसान-छात्र-महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन

देशव्यापी हड़ताल का दूसरा दिन, जगह-जगह धरना-प्रदर्शन

मोदी सरकार की वादाख़िलाफ़ी पर आंदोलन को नए सिरे से धार देने में जुटे पूर्वांचल के किसान

ग़ौरतलब: किसानों को आंदोलन और परिवर्तनकामी राजनीति दोनों को ही साधना होगा


बाकी खबरें

  • bharat ek mauj
    न्यूज़क्लिक टीम
    भारत एक मौज: क्यों नहीं हैं भारत के लोग Happy?
    28 Mar 2022
    'भारत एक मौज' के आज के एपिसोड में संजय Happiness Report पर चर्चा करेंगे के आखिर क्यों भारत का नंबर खुश रहने वाले देशों में आखिरी 10 देशों में आता है। उसके साथ ही वह फिल्म 'The Kashmir Files ' पर भी…
  • विजय विनीत
    पूर्वांचल में ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बीच सड़कों पर उतरे मज़दूर
    28 Mar 2022
    मोदी सरकार लगातार मेहनतकश तबके पर हमला कर रही है। ईपीएफ की ब्याज दरों में कटौती इसका ताजा उदाहरण है। इस कटौती से असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को सर्वाधिक नुकसान होगा। इससे पहले सरकार ने 44 श्रम कानूनों…
  • एपी
    रूस-यूक्रेन अपडेट:जेलेंस्की के तेवर नरम, बातचीत में ‘विलंब किए बिना’ शांति की बात
    28 Mar 2022
    रूस लंबे समय से मांग कर रहा है कि यूक्रेन पश्चिम के नाटो गठबंधन में शामिल होने की उम्मीद छोड़ दे क्योंकि मॉस्को इसे अपने लिए खतरा मानता है।
  • मुकुंद झा
    देशव्यापी हड़ताल के पहले दिन दिल्ली-एनसीआर में दिखा व्यापक असर
    28 Mar 2022
    सुबह से ही मज़दूर नेताओं और यूनियनों ने औद्योगिक क्षेत्र में जाकर मज़दूरों से काम का बहिष्कार करने की अपील की और उसके बाद मज़दूरों ने एकत्रित होकर औद्योगिक क्षेत्रों में रैली भी की। 
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    माले का 11वां राज्य सम्मेलन संपन्न, महिलाओं-नौजवानों और अल्पसंख्यकों को तरजीह
    28 Mar 2022
    "इस सम्मेलन में महिला प्रतिनिधियों ने जिस बेबाक तरीक़े से अपनी बातें रखीं, वह सम्मेलन के लिए अच्छा संकेत है।"
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License