NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
ई-फ़ार्मेसी पर रोक : बिना नियम-कायदे के दवा की बिक्री ख़तरनाक़
"बिना डॉक्टरी परामर्श के कोई भी दवाई लेना गलत है। कई ऐसी दवाइयां हैं जिनकी बिक्री बंद है परंतु वो ऑनलाइन आसानी से उपलब्ध हैं।”
नवीन कुमार वर्मा
17 Dec 2018
सांकेतिक तस्वीर
Image Courtesy: ET Tech

नव उदारवादी नीतियों के बाद बाज़ार शब्द की परिभाषा में विस्तार हुआ। अब बाज़ार केवल दुकानों के समूह तक सीमित नहीं हैं बल्कि एक नए क़िस्म के आभासी बाज़ार के रूप में सामने आया है, जिसे ई-बाज़ार कहा जाता है। ई-बाज़ारों के उदय के बाद, जहाँ बाज़ारों के स्वरूप में बदलाव आया वहीं ग्राहकों के बाज़ार के प्रति सोच भी बदली। अब ग्राहकों को बाज़ार तक जाने की नहीं बल्कि बाज़ार खुद ग्राहकों के दरवाज़े तक आ गया। कई ई-कॉमर्स वेबसाइटस् अब ग्राहकों के लिए उपलब्ध हैं, जहां वे कपड़ों से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स और घर की सब्जियों से लेकर दवाइयों तक सभी कुछ घर बैठे मंगा सकते हैं। जिनके लिए प्रायः ग्राहकों को बाज़ार तक जाना पड़ता था। 

दिसंबर 2016 की मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ई-कॉमर्स वेबसाइटस् का भारत में बाज़ार करीब 2 लाख करोड़ से ज्यादा का है, जिसके 2020 तक दुगुना होने के कयास लगाए जा रहे हैं। भारत में इतने बड़े ई-बाज़ार का एक बड़ा हिस्सा "ई-फ़ार्मेसी" का है; परंतु ई-फ़ार्मेसी पर बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए बैन लगा दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने देशभर में ऑनलाइन दवाइयों की बिक्री पर पूर्णरूप से रोक लगा दी है। 

क्या है "ई-फ़ार्मेसी"?

"ई-फ़ार्मेसी", ऑनलाइन बाज़ार का एक प्रकार है, जिसके अंदर ग्राहक घर बैठे डॉक्टरी सलाह के अनुसार दवाई मंगा सकते हैं। देश में कई बड़ी ई-फ़ार्मेसी कंपनियां हैं- नेटमेड्स, प्रैक्टो और मेडलाइफ इनमें प्रमुख हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारत में तक़रीबन 780 अरब रुपये का दवा बाज़ार है, जिसमें ऑनलाइन दवा बाज़ार या कहें ई-फ़ार्मेसी की भागीदारी निरंतर बढ़ रही है। ऐसे में तमाम ऑनलाइन दवा कंपनियां आधिपत्य स्थापित करना चाहती हैं। वही दूसरी ओर ऑफलाइन स्टोर दवा विक्रेताओं की इससे परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।  जिस कारण पिछले कई सालों में दवा स्टोर विक्रेताओं के समूह कई बार ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में हड़ताल और प्रदर्शन कर चुके हैं।  

ऑफलाइन स्टोर दवा विक्रेताओं का कहना है कि ई-फ़ार्मेसी कंपनियां ऑनलाइन दवा बिक्री में कानूनों का पालन नहीं कर रही हैं। ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट,1940 और फ़ार्मेसी एक्ट 1948, देश में ऑनलाइन दवा बिक्री का विरोध करती हैं। खुदरा दवा विक्रेताओं के शीर्ष संगठन एआईओसीडी (All India Origin Chemists and Distributors Ltd.) ने दवाओं की ऑनलाइन बिक्री को 'अवैध' बताते हुए राष्ट्रव्यापी हड़ताल भी की थी, जिसमे देश भर में करीब आठ लाख दवा विक्रेता शामिल हुए थे।   

वहीं दूसरी ओर ई-फार्मेसी कंपनियों का दावा है कि वह सभी प्रकार के नियमों का पालन करते हैं।  

बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए देशभर में ऑनलाइन दवाईयों की बिक्री पर पूर्णरूप से रोक लगा दी है। कोर्ट ने यह फैसला दिल्ली के डर्मिटोलॉजिस्ट ज़हीर अहमद की याचिका पर दिया। ज़हीर अहमद की याचिका में कहा गया था कि लाखों की संख्या में  दवाएं इंटरनेट पर बिना किसी नियम कानून के बेचीं जा रहीं हैं। जिस कारण मरीज़ों की जान को खतरा तो है ही साथ में डॉक्टर्स के लिए भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 

याचिका में सरकार की मंशा पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। याचिका के मुताबिक दवाइयों की ऑनलाइन बिक्री को लेकर सरकार कुछ भी ठोस कदम नहीं उठा रही है। ऑनलाइन दवा-विक्रेता बिना लाइसेंस के दवाइयां बेच रहे हैं। कई दवाइयां ऐसी होती हैं, जिनका सेवन बिना डॉक्टरी परामर्श के नहीं किया जा सकता। लेकिन, उनकी बिक्री आसानी से उपलब्ध है। याचिका में बताया गया है कि सरकार भी इस बात से अवगत है। हालांकि, सितंबर में केंद्र सकार ने ऑनलाइन दवाइयों की बिक्री से संबंधित नियम का ड्राफ्ट तैयार किया था। जिसके मुताबिक दवाइयों की बिक्री रजिस्टर्ड ई-फॉर्मेसी पोर्टल के जरिए ही की जा सकती है। दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति वीके राव की पीठ ने याचिका पर अंतरिम आदेश दिया, जिसमें दवाओं की ऑनलाइन 'गैरकानूनी' बिक्री पर रोक लगाने की मांग की गई। अदालत ने इससे पहले इस याचिका पर केंद्र, दिल्ली सरकार, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन, भारतीय फार्मेसी परिषद से जवाब मांगा। डॉक्टर जहीर अहमद द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि दवाओं की ऑनलाइन गैरकानूनी बिक्री से दवाओं के दुरुपयोग जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। जिसे कोर्ट ने स्वीकार किया और ऑनलाइन दवाइयों की बिक्री पर रोक लगा दी।  

इसी विषय पर न्यूज़क्लिक ने ग्रेटर नोएडा में डॉक्टर कमल भूषण से बात की। डॉ. कमल भूषण ने बताया कि "बिना डॉक्टरी परामर्श के कोई भी दवाई लेना गलत है। कई ऐसी दवाइयां हैं जिनकी बिक्री बंद है परंतु वो ऑनलाइन आसानी से उपलब्ध हैं। इस लिहाज़ से देखें तो दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला सराहनीय है परंतु इससे उन मरीजों को परेशानी उठानी पड़ेगी जो बाज़ार जाकर दवाई खरीदने में असमर्थ हैं।” 

वहीं डॉ ज़हीर अहमद की तरफ़ से याचिका दायर करने वाले नकुल मोहता ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि "हमने याचिका सरकार के खिलाफ की है। सरकार की नाक के नीचे दवाइयों की ऑनलाइन अवैध बिक्री हो रही है, जिससे मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ हो रहा है। ज्यादा फायदा कमाने के लिए बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के दवाइयां बेचीं जा रही हैं जिन पर जल्दी से जल्दी रोक लगनी चाहिए।" 

समय के साथ-साथ बाज़ारों के स्वरूप में बदलाव आया है। ई-फ़ार्मेसी के कारण उन मरीजों को फायदा तो  हुआ जो बाज़ारो से जाकर दवाई खरीदने मे असमर्थ हैं मगर ई-फ़ार्मेसी कंपनियों की अनियमितताओं जैसे प्रतिबंधित दवाइयों की बिक्री, बिना डॉक्टरी पर्चे के दवाइयों की खरीद और एक्सपाइरी डेट की दवाइयों का मरीजों तक पहुंचना शामिल हैं। इन अनियमितताओं को दूर किए बिना "ई-फार्मेसी" की अनुमति ख़तरनाक ही साबित हो सकती है।

e pharmacy
Delhi High court
e commerce
MEDLIFE
e pharmacy ban
medicines

Related Stories

दिल्ली उच्च न्यायालय ने क़ुतुब मीनार परिसर के पास मस्जिद में नमाज़ रोकने के ख़िलाफ़ याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने से इनकार किया

बग्गा मामला: उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस से पंजाब पुलिस की याचिका पर जवाब मांगा

मैरिटल रेप : दिल्ली हाई कोर्ट के बंटे हुए फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, क्या अब ख़त्म होगा न्याय का इंतज़ार!

जारी रहेगी पारंपरिक खुदरा की कीमत पर ई-कॉमर्स की विस्फोटक वृद्धि

दवाई की क़ीमतों में 5 से लेकर 5 हज़ार रुपये से ज़्यादा का इज़ाफ़ा

दवा के दामों में वृद्धि लोगों को बुरी तरह आहत करेगी – दवा मूल्य निर्धारण एवं उत्पादन नीति को पुनर्निर्देशित करने की आवश्यता है

दिल्ली दंगों के दो साल: इंसाफ़ के लिए भटकते पीड़ित, तारीख़ पर मिलती तारीख़

महामारी के मद्देनजर कामगार वर्ग की ज़रूरतों के अनुरूप शहरों की योजना में बदलाव की आवश्यकता  

अदालत ने ईडब्ल्यूएस श्रेणी के 44 हजार बच्चों के दाख़िले पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा

दिल्ली: तुगलकाबाद के सांसी कैंप की बेदखली के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने दी राहत


बाकी खबरें

  • जितेन्द्र कुमार
    बहस: क्यों यादवों को मुसलमानों के पक्ष में डटा रहना चाहिए!
    04 Apr 2022
    आरएसएस-बीजेपी की मौजूदा राजनीतिक तैयारी को देखकर के अखिलेश यादव को मुसलमानों के साथ-साथ दलितों की सुरक्षा की जिम्मेदारी यादवों के कंधे पर डालनी चाहिए।
  • एम.ओबैद
    बिहारः बड़े-बड़े दावों के बावजूद भ्रष्टाचार रोकने में नाकाम नीतीश सरकार
    04 Apr 2022
    समय-समय पर नीतीश सरकार भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलेरेंस नीति की बात करती रही है, लेकिन इसके उलट राज्य में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी होती जा रही हैं।
  • आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक:  ‘रोज़गार अभियान’ कब शुरू होगा सरकार जी!
    04 Apr 2022
    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘स्कूल चलो अभियान’ की शुरुआत की। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा पे चर्चा की थी। लेकिन बेरोज़गारी पर कोई बात नहीं कर रहा है।…
  • जगन्नाथ कुमार यादव
    नई शिक्षा नीति, सीयूसीईटी के ख़िलाफ़ छात्र-शिक्षकों ने खोला मोर्चा 
    04 Apr 2022
    बीते शुक्रवार को नई शिक्षा नीति (एनईपी ), हायर एजुकेशन फंडिंग एजेंसी (हेफ़ा), फोर ईयर अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम (FYUP),  सेंट्रल यूनिवर्सिटी कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (सीयूसीईटी) आदि के खिलाफ दिल्ली…
  • अनिल सिन्हा
    नेहरू म्यूज़ियम का नाम बदलनाः राष्ट्र की स्मृतियों के ख़िलाफ़ संघ परिवार का युद्ध
    04 Apr 2022
    सवाल उठता है कि क्या संघ परिवार की लड़ाई सिर्फ़ नेहरू से है? गहराई से देखें तो संघ परिवार देश के इतिहास की उन तमाम स्मृतियों से लड़ रहा है जो संस्कृति या विचारधारा की विविधता तथा लोकतंत्र के पक्ष में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License