NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
समाज
भारत
ईडब्ल्यूएस मामले में जल्द फैसला ले केंद्र सरकार : दिल्ली हाईकोर्ट
कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि इस मामले पर प्राथमिकता से फैसला ले क्योंकि यह निजी स्कूलों में पढ़ने वाले आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के जीवन से जुड़ा हुआ है।
मुकुंद झा
28 May 2019
Delhi High Court
फोटो साभार: The Hans India

दिल्ली हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन की अध्यक्षता वाली बेंच ने सोमवार को आठवीं कक्षा के बाद सैकड़ों बच्चों को स्कूल से निकालने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि इस मामले पर प्राथमिकता से फैसला ले क्योंकि यह निजी स्कूलों में पढ़ने वाले आर्थिक रूप से कमजोर (ईडब्ल्यूएस) बच्चों के जीवन से जुड़ा हुआ है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट दायर करने का भी निर्देश दिया।

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कहा गया कि वह इस मामले पर विचार कर रही है और नई सरकार इस पर जल्द ही फैसला लेगी। इस मामले पर अगली सुनवाई 22 जुलाई को है। 

क्या है पूरा मामला

दिल्ली सहित देश में अप्रैल 2010 से शिक्षा का अधिकार लागू हुआ जिसके अंतर्गत सभी निजी स्कूलों को आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए 25%सीट देने को कहा गया। इसमें दो कैटेगिरी हैं। एक, जो निजी स्कूल सरकारी ज़मीन पर बने हैं उन्हें ऐसे छात्रों को 12वीं तक मुफ्त शिक्षा देनी है, जबकि अन्य निजी स्कूलों को 8वीं तक मुफ्त शिक्षा देना अनिवार्य है। ये कानून लागू भी हुआ लेकिन इसमें अब एक गंभीर समस्या आ रही है कि निजी स्कूल में जो छात्र आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के तहत शिक्षा ले रहे हैं उन्हें 8वीं पास करते ही स्कूल से निकाल दिया जाता है या फिर फीस देने को कहा जाता है। इन स्कूलों की फीस इतनी ज्यादा होती है की ये गरीब छात्र दे नहीं पाते है और अतत: उन्हें अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ती है।

अगर हम रिपोर्टों को देखें तो इससे साफ है कि दिल्ली के स्कूलों में 2013-14 कक्षा 9वीं में नामांकित 2,19,377 छात्रों में से, 44% छात्र 2016-17 में भी12वीं कक्षा तक नहीं पहुंच पाए। 

इसी गंभीर समस्या को देखते हुए आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए सोशल जूरिस्ट के अशोक अग्रवाल द्वारा दायर की गयी जनहित याचिका जिसमें आरटीई अधिनियम 2009 में संशोधन की माँग की गई है। जिससे ईडब्ल्यूएस छात्रों को कक्षा आठवीं से आगे की शिक्षा जारी रखने में मदद मिले और वो किसी बिना शर्त निजी स्कूलों में ईडब्ल्यूएस श्रेणी में कक्षा 12 तक शिक्षा ले सकें। याचिका में कहा गया है कि गैर सरकारी जमीन पर बने स्कूलों में बच्चों को 12वीं तक की शिक्षा उपलब्ध कराई जाए ताकि आरटीई के मूल उद्देश्य को पूरा किया जा सके। 

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में ये भी कहा है की “यह उन अधिकारों का भी उल्लंघन है, जो आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के छात्रों को भारत के संविधान से मिलते हैं। ये दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम,1973 अधिकार के प्रावधानों के साथ-साथ बच्चों को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा अधिनियम, 2009 का भी उल्लंघन करता है।”
उन्होंने ये भी कहा कि दिल्ली सरकार बच्चों के नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम, 2011 के भाग 11 (3) के प्रावधान को भी ठीक से लागू नहीं कर पाई है ।

अगर सरकार द्वार इस तरह के संशोधन होते हैं तो इससे आर्थिक रूप से कमज़ोर लाखों छात्रों को अपनी पढ़ाई पूरी करने में मदद मिलेगी |

EWS
economically backward
Delhi High court
PRIVATE SCHOOL
school children
Government schools
Delhi school
ews students

Related Stories

नई शिक्षा नीति से सधेगा काॅरपोरेट हित

उत्तराखंड : ज़रूरी सुविधाओं के अभाव में बंद होते सरकारी स्कूल, RTE क़ानून की आड़ में निजी स्कूलों का बढ़ता कारोबार 

सरकार ने बताया, 38 हजार स्कूलों में शौचालयों की सुविधा नहीं

वायु प्रदूषण: दिल्ली में स्कूल, कॉलेज, सरकारी कार्यालय 29 नवंबर से फिर खुलेंगे

बिहार के बाद बंगाल के स्कूली बच्चों में सबसे ज़्यादा डिजिटल विभाजन : एएसईआर सर्वे

दिल्ली : याचिका का दावा- स्कूलों से अनुपस्थित हैं 40,000 शिक्षक, कोविड संबंधी ज़िम्मेदारियों में किया गया नियुक्त

स्कूल तोड़कर बीच से निकाल दी गई फोर लेन सड़क, ग्रामीणों ने शुरू किया ‘सड़क पर स्कूल’ अभियान

दिल्ली में कक्षा 9-12 के सरकारी एवं निजी स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय एक सितम्बर से खुलेंगे

कोविड-19: बिहार में जिन छात्रों के पास स्मार्ट फोन और इंटरनेट नहीं, वे ऑनलाइन कक्षाओं से वंचित

वॉल मैगजीन कैम्पेन: दीवारों पर अभिव्यक्ति के सहारे कोरोना से आई दूरियां पाट रहे बाल-पत्रकार 


बाकी खबरें

  • भाषा
    अदालत ने कहा जहांगीरपुरी हिंसा रोकने में दिल्ली पुलिस ‘पूरी तरह विफल’
    09 May 2022
    अदालत ने कहा कि 16 अप्रैल को हनुमान जयंती पर हुए घटनाक्रम और दंगे रोकने तथा कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने में स्थानीय प्रशासन की भूमिका की जांच किए जाने की आवश्यकता है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 3,207 नए मामले, 29 मरीज़ों की मौत 
    09 May 2022
    राज्यों में कोरोना जगह-जगह पर विस्पोट की तरह सामने आ रहा है | कोरोना ज़्यादातर शैक्षणिक संस्थानों में बच्चो को अपनी चपेट में ले रहा है |
  • Wheat
    सुबोध वर्मा
    क्या मोदी सरकार गेहूं संकट से निपट सकती है?
    09 May 2022
    मोदी युग में पहली बार गेहूं के उत्पादन में गिरावट आई है और ख़रीद घट गई है, जिससे गेहूं का स्टॉक कम हो गया है और खाद्यान्न आधारित योजनाओं पर इसका असर पड़ रहा है।
  • राजेंद्र शर्मा
    कटाक्ष: एक निशान, अलग-अलग विधान, फिर भी नया इंडिया महान!
    09 May 2022
    क्या मोदी जी के राज में बग्गाओं की आज़ादी ही आज़ादी है, मेवाणियों की आज़ादी अपराध है? क्या देश में बग्गाओं के लिए अलग का़ानून है और मेवाणियों के लिए अलग क़ानून?
  • एम. के. भद्रकुमार
    सऊदी अरब के साथ अमेरिका की ज़ोर-ज़बरदस्ती की कूटनीति
    09 May 2022
    सीआईए प्रमुख का फ़ोन कॉल प्रिंस मोहम्मद के साथ मैत्रीपूर्ण बातचीत के लिए तो नहीं ही होगी, क्योंकि सऊदी चीन के बीआरआई का अहम साथी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License