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ईएसआई के मुद्दे पर सरकार ने आख़िरकार दिया जवाब
सरकार ने सोमवार को मान लिया है कि कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के तहत सरकार के पास 75 हजार करोड़ रुपये का स्थायी कोष (कॉर्पस फंड) है जो कर्मचारियों के हितों के लिहाज से उचित है। लेकिन इससे पहले सरकार ये मानने से इनकार करती रही है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
08 Jul 2019
ईएसआई के मुद्दे पर सरकार ने आख़िरकार दिया जवाब

श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष गंगवार ने सोमवार को मान लिया है कि कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के तहत सरकार के पास 75 हजार करोड़ रुपये का स्थायी कोष (कॉर्पस फंड) है जो कर्मचारियों के हितों के लिहाज से उचित है। लेकिन इससे पहले सरकार ये मानने से इनकार करती रही है और ईएसआई को ख़त्म करने के प्रयासों में लगी नज़र आई है। 1948 विंटेज की कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) योजना, जिसने श्रमिकों और उनके परिवारों को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं तक कुछ पहुँच प्रदान की थी, उसमें किया गया हालिया संशोधन, इस योजना को महत्वपूर्ण रूप से बेअसर करने की धमकी देता है। ईएसआई योजना के बारे में सरकार के ग़लत "सुधार" के मामले को ध्यान में रखते हुए, यह तय है कि सरकार का स्वास्थ्य बीमा पर संकीर्ण नज़रिया है और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की बड़ी ज़िम्मेदारी को समझने में वह पूरी तरह से अक्षम है।

ये तस्वीर सोमवार को बदलती हुई नज़र आई जब लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान सौगत रॉय, प्रवेश वर्मा और कुछ अन्य सदस्यों के पूरक प्रश्नों के उत्तर में गंगवार ने कहा कि ईएसआईसी के तहत पंजीकृत कर्मचारियों को बकाये का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए सरकार प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि ईएसआईसी के तहत वर्तमान समय में 75 हजार करोड़ रुपये हैं जो कर्मचारियों के हित के लिए सही है। 

कुछ सदस्यों ने अपने क्षेत्रों में ईएसआईसी अस्पतालों की खराब स्थिति का मुद्दा उठाया। इसके जवाब में मंत्री ने कहा कि वह इसका संज्ञान लेंगे।

प्रवेश वर्मा ने जब प्रश्न पूछने के दौरान अपने पिता और पूर्व श्रम मंत्री साहब सिंह वर्मा का उल्लेख किया तो लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि ‘साहब सिंह वर्मा ने श्रम मंत्री के तौर पर अच्छा काम किया था, उन्हें याद करना चाहिए।’

इसमें कोई संदेह नहीं है कि ईएसआई योजना में काफ़ी सुधार किया जा सकता है ताकि यह अपने जनादेश को बेहतर तरीक़े से पूरा करे। उदाहरण के लिए, ईएसआईसी राज्य सरकार द्वारा संचालित डिस्पेंसरी में सेवा की गुणवत्ता की निगरानी और उसको रेगुलेट करने में असमर्थ है। इसे सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय मानव संसाधन नियोजन में परिवर्तन भी लागू कर सकता है ताकि अधिकारी जवाबदेह बने रहें।

(भाषा से इनपुट के साथ)

Employees’ State Insurance
Employees’ State Insurance Corporation
Labour Ministry
ESI
public health
healthcare
Workers’ Rights
social security
BJP
NDA

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