NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
इलाहाबाद कुंभ : कानपुर के 10 लाख लोगों की रोज़ी-रोटी संकट में
इलाहाबाद कुंभ के लिए कानपुर के चमड़ा उद्योग को 3 महीने बंद करने का आदेश दिया गया है। इससे इन टेनरियों में काम करने वाले 10 लाख से अधिक लोगों के सामने रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।
मुकुंद झा
29 Sep 2018
leather industry
सांकेतिक तस्वीर

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अगले साल इलाहाबाद में होने वाले कुंभ मेले की तैयारियों में जुटी हुई है। इस पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस सिलसिले में सरकार ने आदेश दिया है कि 15 दिसंबर से 15 मार्च तक कानपुर में सभी टेनरियों या चमड़ा फैक्ट्रियों को बंद रखा जाए। कुंभ मेले के दौरान गंगा के पानी को साफ बनाए रखने के लिए ये फैसला किया गया है। सरकार का यह फैसला वहाँ काम कर रहे लाखों मजदूरों को प्रभावित करेगा।

सरकार ने गंगा को साफ रखने के लिए ये निर्णय किया परन्तु यहाँ ये सवाल उठता है कि नमामि गंगे योजना के तहत गंगा को 2018 तक साफ होना था इसको लेकर कई सौ करोड़ो रूपये आवंटित भी किये गए परन्तु उसका क्या हुआ सरकार इस पर कोई जबाब नही दे रही है।

कुंभ मेले को देखते हुए गंगा की सफाई के नाम पर लाखों लोगों की रोज़ी रोटी छीनी जा रही है। एक अनुमान है कि तीन माह तक टेनरियां बंद रहने के कारण चमड़ा उद्योग को करोड़ो का नुकसान होगा। टेनरियां बंद रहने से इनमें काम करने वाले 10 लाख से अधिक लोगों के रोज़गार पर असर पड़ेगा। टेनरी संचालकों का यह भी कहना है कि इतने समय तक व्यापार के बंद रहने से इसका सीधा फायदा पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों को होगा। कानपुर से बड़ी मात्रा चमड़ा और चमड़े से बना सामान चीन, जापान, कोरिया और यूरोपीय देशों को एक्सपोर्ट होता है।

विश्वविख्यात है यहाँ का चमड़ा

अपने इस चमड़े के कारोबार से कानपुर का नाम पूरी दुनिया में मशहूर है। यहां तकरीबन 400 टेनरी हैं, वो बंद हो जाएगी और टेनरी बंद होने से कानपुर से तो चमड़ा निर्यात बंद हो जाएगा लेकिन विदेशों में इसकी माँग बनी रहेगी।  चीन, जापान, कोरिया और यूरोपीय देशों में भारत से ही चमड़ा जाता है सो इन देशों में सप्लाई करने का मौका पड़ोसी देशों को मिलेगा। टेनरी संचालकों का कहना है कि तीन महीने की बंदी से टेनरी संचालकों की बकाया रकम भी फंस जाएगी और इस बात भी गारंटी नहीं है कि उन्हें आगे से विदेशों से ऑर्डर मिलेंगे भी या नहीं। टेनरी एसोसिएशन कानपुर के पदाधिकारीयों के मुताबिक बीते पांच साल में चमड़ा उद्योग लगभग 70 फीसदी तक कम हुआ है।सरकार को समझना चाहिए कि तीन माह में तो कर्मचारी भुखमरी की कगार पर आ जाएंगे।

यूरोप के देशो जैसे फ्रांस, ब्रिटेन, इटली जैसे देशों में फुटवियर, चर्म उद्द्योगो  और परिधानों में यहाँ के चमड़े की बहुत मांग  है। अब तो लेदर ज्वैलरी में इसकी माँग लगतार बढ़ रही है। उद्यमियों का कहना है कि टेनरियों को हटाना समस्या का समाधान नहीं हो सकता  है। दशकों से लगी टेनरियों को कहीं भी शिफ्ट किया गया तो ये दम तोड़ देंगी। मरीज को भगाने से मर्ज नहीं जाएगा बल्कि इलाज करना होता है।

100 साल से भी पुराना है इतिहास 

चर्म उद्योग का इतिहास काफी पुराना है। जाजमऊ में 1902 में पहली बार एक अंग्रेज ने टेनरी लगाई। उनका नाम था सेवन और उन्ही के नाम पर टेनरी का नाम था- सेवन टेनरी। इसके बाद एक और अंग्रेज स्नैडर ने जाजमऊ में टेनरी खोली। 1904 मे यूनाइटेड प्रोविन्शियल टेनरी का जन्म हुआ और हाफिज हलीम ने - इंडियन नेशनल टेनरी लगाई। हलीम कॉलेज उन्हीं के नाम पर है  इसके बाद तो टेनरियां खुलने का सिलसिला शुरू हो गया। कानपुर में 90 प्रतिशत टेनरियों में बफैलो लेदर का काम होता है। 60 बड़ी टेनरियां और इस पूरी बेल्ट में 350 छोटी टेनरियां हैं | इन्होने अपने जन्म के बाद से फर्श से अर्श तक का सफर किया है। लेकिन पिछले दो-चार वर्षो से गंभीर संकट से गुज़र रहा है क्योंकि सरकार की विफलता के करण लगतार इन पर NGT के साथ ही दक्षिणपंथी हिंदूवादी लोगों ने लगतार हमला किया है।

“सरकार को मजदूरों की फिक्र नहीं”

यहाँ काम करने वाले मजदूरों का कहना है कि इससे पहले की सरकारों में  भी कुम्भ मेले का आयोजन होता था, तब भी सरकारें तीन से चार दिन तक टेनरी बंद करती थी, परन्तु इसबार पता नहीं ऐसा क्या हुआ की सरकार इसे तीन महीने के लिए बंद कर रही है? परन्तु हम मजदूरों का क्या होगा ये किसी ने नहीं सोचा है, यह कैसे हुक्मरां हैं जिन्हें इस बात की जरा भी फिक्र नहीं है कि अगर तीन महीने तक टेनरी बंद रही तो उसमे काम करने वाले मजदूर और कर्मचारी अपना निर्वाह कैसे करेंगे, कैसे बच्चों की स्कूल की फीस जमा होगी। आखिर हम लोग तीन महीने तक क्या करेंगे, क्या खाएंगे।

चमड़ा उद्योग में ज़्यादातर मुस्लिम और दलित ही काम करते हैं

इस उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि कानपुर के चमड़ा उद्योग में लाखो मज़दूर काम करते है जिसमें से करीब 80 फीसदी मजदूर दलित हैं बाकी मुस्लिम। चमड़े की धुलाई, सफाई, और रखरखाव का काम केवल दलित और मुस्लिम मजदूर ही करते हैं। अन्य धर्मों के लोग इन कार्यों से दूर रहते हैं। उनकी शिकायत है कि शिकंजा केवल टेनरियों पर कसा जा रहा है क्योंकि टेनरियां बदनाम हैं, जबकि हरिद्वार से कोलकाता तक सैकड़ों की संख्या में ऐसे अनेक उद्योगों की फैक्ट्रिया हैं जो अपना गंदा पानी गंगा में बहाती हैं।

क्या टेनरी पर रोक से गंगा निर्मल होगी?

हमारी सरकार को समझाना चाहिए कि गंगा पूरी तरह से तभी साफ हो पायेगी जब हरिद्वार से कोलकाता तक गंगा किनारे लगे सभी उद्योगो को बंद किया जाए, न कि केवल टेनरियों को। वहाँ के उद्यमियों का कहना है कि टेनरी मालिकों की टेनरी तो सभी को दिखती है लेकिन गंगा में जो सैकड़ों शव बह कर आते हैं उस पर किसी का ध्यान नहीं जाता। उन्होंने कहा, 'पहले उस पर रोक लगायी जाये, उसके बाद टेनरियों की शिफ्टिंग कानपुर से कहीं और की जाए। वह कहते हैं कि कन्नौज, फर्रुखाबाद और उन्नाव के अन्य उद्योगों पर शिकंजा क्यों नहीं कसा जाता है जो गंगा नदी में प्रदूषित जल बहाते हैं।

 

ऐसे में 2019 कुंभ तक गंगा को निर्मल करने का दावा करने वाली भाजपा ने अबतक इसको लेकर कुछ नही किया है। जानकार बताते हैं कि गंगा का प्रदूषण सिर्फ टेनरी पर रोक लगाने से ही नहीं दूर होगा। बल्कि नालों के पानी को ट्रीट करना जरूरी है। यहां यह जानना महत्वपूर्ण है कि गंगा में गिर रहे 21 नालों में से सिर्फ छह नाले ही कुंभ मेले से पहले बंद किए जाएंगे।

KUMBH
ALLAHABAD
Leather Industry
KANPUR
yogi government

Related Stories

कानपुर हिंसा: दोषियों पर गैंगस्टर के तहत मुकदमे का आदेश... नूपुर शर्मा पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं!

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

योगी सरकार द्वारा ‘अपात्र लोगों’ को राशन कार्ड वापस करने के आदेश के बाद यूपी के ग्रामीण हिस्से में बढ़ी नाराज़गी

मनरेगा मज़दूरों के मेहनताने पर आख़िर कौन डाल रहा है डाका?

योगी 2.0 का पहला बड़ा फैसला: लाभार्थियों को नहीं मिला 3 महीने से मुफ़्त राशन 

ग्राउंड रिपोर्ट: स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रचार में मस्त यूपी सरकार, वेंटिलेटर पर लेटे सरकारी अस्पताल

CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा

चंदौली: कोतवाल पर युवती का क़त्ल कर सुसाइड केस बनाने का आरोप

लखनऊ: अतंर्राष्ट्रीय शूटिंग रेंज बना आवारा कुत्तों की नसबंदी का अड्डा


बाकी खबरें

  • Barauni Refinery Blast
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बरौनी रिफायनरी ब्लास्ट: माले और ऐक्टू की जांच टीम का दौरा, प्रबंधन पर उठाए गंभीर सवाल
    20 Sep 2021
    भाकपा (माले) और मज़दूर संगठन ऐक्टू की जांच टीम ने घटनास्थल का दौरा किया और अपनी एक जाँच रिपोर्ट दी, जिसमें उन्होंने कहा कि 16 सितंबर को बरौनी रिफाइनरी में हुआ ब्लास्ट प्रबन्धन की आपराधिक लापरवाही का…
  • New Homes, School Buildings, Roads and Football Academies Built Under Kerala Govt’s 100-Day Programme
    अज़हर मोईदीन
    केरल सरकार के 100-दिवसीय कार्यक्रम के तहत नए घर, विद्यालय भवन, सड़कें एवं फुटबॉल अकादमियां की गईं निर्मित  
    20 Sep 2021
    100-दिवसीय कार्यक्रम में शामिल परियोजनाओं के कार्यान्वयन पर नजर रखने के लिए बनाये गए राजकीय नियंत्रण-मंडल की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों के विभिन्न विभागों के तहत…
  • Afghanistan
    एम. के. भद्रकुमार
    शांघाई सहयोग संगठन अमेरिका की अगुवाई वाले क्वाड के अधीन काम नहीं करेगा
    20 Sep 2021
    एससीओ यानी शांघाई सहयोग संगठन, अमेरिका की अगुवाई वाले चार देशों के गठबंधन क्वाड के अधीन काम नहीं करेगा।
  • Indigenous People of Brazil Fight for Their Future
    निक एस्टेस
    अपने भविष्य के लिए लड़ते ब्राज़ील के मूल निवासी
    20 Sep 2021
    हाल ही में इतिहास की सबसे बड़ी मूल निवासियों की लामबंदी ने सत्ता प्रतिष्ठानों के आस-पास की उस शुचिता की धारणा को को तोड़कर रख दिया है जिसने सदियों से इन मूल निवासियों को सत्ता से बाहर रखा है या उनके…
  • Government employees in Jammu and Kashmir
    सबरंग इंडिया
    जम्मू-कश्मीर में सरकारी कर्मचारियों से पूर्ण निष्ठा अनिवार्य, आवधिक चरित्र और पूर्ववृत्त सत्यापन भी जरूरी
    20 Sep 2021
    16 सितंबर को जारी सरकारी आदेश में कहा गया है कि अगर किसी कर्मचारी के खिलाफ किसी भी तरह की प्रतिकूल रिपोर्ट की पुष्टि होती है तो उसे बर्खास्त किया जा सकता है
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License