NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
भारत
राजनीति
इलाहाबाद विश्वविद्यालय : विवादों के बीच 23 साल बाद दीक्षांत समारोह
विश्वविद्यालय प्रशासन ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह को मानद उपाधि देने की घोषणा की थी। लेकिन, कार्यक्रम के एक दिन पहले ही डीजीपी ने मानद उपाधि लेने से इंकार कर दिया।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
05 Sep 2019
UP

इलाहाबाद विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह गुरुवार को सीनेट हॉल में आयोजित किया गया। नोबल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने मुख्य अतिथि के तौर पर मेधावियों में मेडल प्रदान किया। इस मौक़े पर पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल पं. केशरीनाथ त्रिपाठी को मानद उपाधि दी गई।

छह मेधावियों को चांसलर अवार्ड से नवाज़ा गया। कुलपति प्रो. आरएल हांगलू ने केशरीनाथ त्रिपाठी को मानद उपाधि से अलंकृत किया। यह उपाधि प्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह को भी दिया जाना था लेकिन छात्रों के विरोध प्रदर्शन की वजह से वह समारोह में उपस्थित नहीं हो सके। आपको बता दें कि दोनों ही इलाहाबाद सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र भी हैं। 

23 साल बाद दीक्षांत समारोह

वर्ष 2005 में केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा पाने वाली इलाहाबाद यूनिवर्सिटी का यह केंद्रीय विश्वविद्यालय के रूप में पहला दीक्षांत समारोह था। पिछले 23 वर्षों से विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह आयोजित नहीं हुआ था। आख़िरी बार 1996 में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में दीक्षांत समारोह आयोजित हुआ था। 

जिसमें नोबल पुरस्कार विजेता प्रोफ़ेसर रिचर्ड को मानद उपाधि प्रदान की गई थी। समारोह में मिसाइल मैन पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, पूर्व चुनाव आयुक्त टीएन शेषन और मुलायम सिंह यादव शामिल हुए थे। केंद्रीय दर्जा मिलने के बाद इलाहाबाद में दीक्षांत समारोह की तैयारी तो कई बार हुई लेकिन आयोजन नहीं हो सका। 

छाए रहे विवाद

आपको बता दें कि इस बार दीक्षांत समारोह की जैसे-जैसे तिथि नज़दीक आती गई, इससे उतने ही विवाद भी जुड़ते गए।

इविवि में अंग्रेजी विभाग में शोधार्थी रहे ध्रुव कुमार सिंह उर्फ़ ध्रुव हर्ष ने फ़ेसबुक पर लिखा कि समारोह में बुलाए गए नोबेल पुरस्कार विजेता केवल मेडल बाटेंगे, जबकि डिग्री का वितरण किसी और के हाथों कराया जाएगा। पीएचडी की उपाधि पाने वालों के लिए यह सम्मानजनक नहीं होगा।

छात्र का यह दावा है कि दीक्षांत समारोह के आयोजन और उसमें आमंत्रण को लेकर उन्हें इविवि प्रशासन की ओर से आधिकारिक रूप से कोई सूचना नहीं भेजी गई। वह मुंबई में थे, जब उन्हें पता चला कि इविवि में दीक्षांत समारोह होने जा रहा है। 

उन्होंने अपनी तरफ़ से ई-मेल के माध्यम से इविवि प्रशासन से संपर्क भी किया, लेकिन दूसरी तरफ़ से कोई जवाब नहीं आया। हर्ष का आरोप है कि इविवि प्रशासन दीक्षांत समारोह का राजनीतिकरण कर रहा है और इसमें चंद लोगों का हित शामिल है। इविवि प्रशासन की इसी रवैये की वजह से उन्होंने अपनी पीएचडी की डिग्री त्यागने का निर्णय लिया है और वह दीक्षांत समारोह में शामिल नहीं होंगे।

इसके साथ ही डीजीपी को मानद उपाधि देने पर भी सवाल उठने लगे। इविवि अध्यापक संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रो. राम किशोर शास्त्री ने डीजीपी को उपाधि दिए जाने का विरोध किया था। प्रो. शास्त्री ने बुधवार को दिल्ली में इसी सिलसिले में एक प्रेस वार्ता भी की।

विवाद बढ़ता देख कार्यक्रम के एक दिन पहले ही डीजीपी ने इविवि से मानद उपाधि लेने से मना कर दिया। उन्होंने कुलपति को पत्र लिखकर अपने निर्णय की जानकारी दी है। दीक्षांत समारोह का विरोध करने वालों ने इसे अपनी जीत बताया है।

बता दें कि इस प्रकरण से पहले भी विवि प्रशासन को कई झटके लग चुके हैं। दीक्षांत समारोह में उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने शामिल होने की स्वीकृति दी थी, लेकिन बाद में उन्होंने भी मना कर दिया था।

छात्र संगठनों ने भी किया विरोध

इलाहाबाद में इस बार के दीक्षांत समारोह का ज़्यादातर छात्र संगठनों ने भी विरोध किया है।

विश्वविद्यालय की पूर्व छात्र अध्यक्ष रिचा सिंह का कहना है, "ये इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कुलपति का दीक्षांत समारोह था। कुलपति का इसलिये क्योंकि कार्यक्रम में कुलपति जी ने सबको आमंत्रित किया सिवाय छात्रों के। 28000 छात्रों की एंट्री को ज़बरदस्ती बैन कर दिया गया है।

69784554_2442949249123589_7198923258966573056_n.jpg

जिन डीजीपी साहब विश्वविद्यालय ख़ुश करने के लिये मानद उपाधि देना चाहता था, छात्रों के विरोध के चलते उन्होंने उपाधि लेने से मना कर दिया है। डीजीपी साहब ने सही समय पर, सही फ़ैसला लिया। एक पूर्व शोध छात्र ने डॉक्टरेट उपाधि लेने से मना कर दिया है। सभी छात्रसंघ पदाधिकारियों को बुधवार से पुलिस ने उठाकर जेल में डाल दिया है।" 

आपको बता दें कि इससे पहले छात्र संगठनों और कुछ पूर्व छात्रसंघ अध्यक्षों ने कैलाश सत्यार्थी को पत्र लिखकर इस कार्यक्रम में शामिल नहीं होने की अपील की थी। 

पत्र में छात्रों ने कैलाश सत्यार्थी के लिए लिखा था, "जब पूरब के ऑक्सफ़ोर्ड कहे जाने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय में आप आ रहे हैं तो विश्वविद्यालय के 30 हज़ार युवा दिल खोलकर आपका स्वागत कर पाने में हिचक महसूस कर रहे हैं। इसका कारण है विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर, जिनके साथ आपको मंच साझा करना है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति पर ऐसा कोई आरोप नहीं है जो न लगा हो, 20 से अधिक कंटेम्प्ट ऑफ़ कोर्ट, आर्थिक अनियमितता, पद के दुरुपयोग करते हुए महिलाओं का शोषण, शिक्षक भर्ती में भष्ट्राचार, (जिनकी जांच चल रही है) पत्राचार कर्मियों से उनकी रोज़ी-रोटी छीन लेना, शिक्षकों का अपमान, छात्रसंघ के पदाधिकारियों का अपमान। जिनके चलते मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा वर्तमान शिक्षक भर्तीयों पर भी रोक लगा कर कुलपति पर जांच बैठा दी गयी है।"

दीक्षांत समारोह के दौरान विश्वविद्यालय के आसपास के चौराहों से लेकर परिसर तक भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। इस दौरान छात्रसंघ बहाली की मांग को लेकर परिसर में धरना दे रहे छात्रनेताओं को गिरफ़्तार भी कर लिया गया था।

University of Allahabad
UttarPradesh
Student organizations
student politics
Kesharinath Tripathi
central university

Related Stories

लखनऊ विश्वविद्यालय में एबीवीपी का हंगामा: प्रोफ़ेसर और दलित चिंतक रविकांत चंदन का घेराव, धमकी

बीएचयू: लाइब्रेरी के लिए छात्राओं का संघर्ष तेज़, ‘कर्फ्यू टाइमिंग’ हटाने की मांग

बीएचयू: 21 घंटे खुलेगी साइबर लाइब्रेरी, छात्र आंदोलन की बड़ी लेकिन अधूरी जीत

केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में तकरीबन 33% शिक्षण पद खाली 

कुपोषित बच्चों के समक्ष स्वास्थ्य और शिक्षा की चुनौतियां

प्रत्यक्ष कक्षाओं की बहाली को लेकर छात्र संगठनों का रोष प्रदर्शन, जेएनयू, डीयू और जामिया करेंगे  बैठक में जल्द निर्णय

केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अध्यापक नहीं होंगे तो पढ़ाई कहां से होगी?

अखिल भारतीय चिकित्सा शिक्षा कोटा के तहत ओबीसी को मिला आरक्षण, छात्र संगठनों ने कहा संघर्ष की हुई जीत!

मोदी जी! विकलांग को दिव्यांग नाम नहीं, शिक्षा का अधिकार चाहिए

यूपी: रोज़गार के सरकारी दावों से इतर प्राथमिक शिक्षक भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों का प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • Ukrain
    रवीश कुमार
    सुनिए सरकार: इस वक्त हेडलाइन मैनेजमेंट छोड़कर छात्रों को निकालने के मैनजमेंट पर ध्यान दें
    27 Feb 2022
    जब सारे बच्चे सुरक्षित आ जाएंगे और आपके प्रयासों से आ जाएंगे, तो यह देश इतना कृपालु है कि आपको श्रेय देगा। लेकिन चंद सौ को निकाल कर इस वक्त जहाज़ के आते ही मंत्री भेज कर फोटो खींचाने की ज़रूरत नहीं…
  • ECI
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: विपक्ष को पोस्टल बैलेट में खेल होने का डर
    27 Feb 2022
    हर हफ़्ते की ऐसी चुनिंदा ख़बरें जिन पर कम ध्यान जाता है लेकिन वो होती महत्वपूर्ण हैं, ऐसी ही ख़बरों को लेकर आए हैं अनिल जैन..
  • BIG FACES
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव, पांचवां चरण: दांव पर है कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा
    27 Feb 2022
    यूपी चुनावों के पांचवें चरण में बड़े-बड़े नेताओं की सीट शामिल हैं, ऐसे में राजा भैया से लेकर पीएम पुनिया के बेटे तक की साख दांव पर है। अयोध्या, अमेठी और प्रयागराज की महत्वपूर्ण सीटों पर भी सभी की…
  • cartoon
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: सरकार-जी, बम केवल साइकिल में ही नहीं लगता
    27 Feb 2022
    सरकार जी, एक बम और है। और वह बम भी आपको याद नहीं है। सोचा मैं ही याद दिला दूं। वह बम आपने ही, आपकी पार्टी ने ही लगाया है, प्लांट किया है। वह बम है, घृणा का, वैमनस्य का, दो समुदायों में अलगाव का। वह…
  • न्यूज़क्लिक डेस्क
    इतवार की कविता : 'ऐ शरीफ़ इंसानो, जंग टलती रहे तो बेहतर है...'
    27 Feb 2022
    यूक्रेन पर रूस पर हमला जारी है। और इन हमलों के चलते आम नागरिकों की परेशानियाँ भी बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में पढ़िये साहिर लुधियानवी की जंग के ख़िलाफ़ लिखी यह नज़्म जिसमें वह कहते हैं कि 'जंग टलती रहे तो ब
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License