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इमरान ने मोदी को लिखा पत्र, बातचीत की इच्छा, भारत ने कहा- न
भारत ने वार्ता की पाक की पेशकश को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि आतंकवाद और वार्ता साथ - साथ नहीं हो सकती।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
08 Jun 2019
Imran
फाइल फोटो

इस्लामाबाद : पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने शुक्रवार को अपने भारतीय समकक्ष नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिख कर कहा कि कश्मीर मुद्दे सहित सभी सुलह योग्य समस्याओं के समाधान के लिए नयी दिल्ली के साथ इस्लामाबाद वार्ता करना चाहता है।

दरअसल, एक दिन पहले भारत ने कहा था कि बिशकेक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर बैठक से इतर दोनों नेताओं के बीच कोई द्विपक्षीय बैठक नहीं होगी।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने गुरुवार को पत्रकारों को कहा, "जहां तक मेरी जानकारी है, बिश्केक के एससीओ सम्मेलन में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ द्विपक्षीय बैठक की कोई योजना नहीं बनाई गई है।"

हालांकि चीन में भारत के राजदूत विक्रम मिस्री ने जानकारी दी है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन से इतर बिश्केक में मुलाकात करेंगे।

भारत के प्रधानमंत्री पद पर दूसरे कार्यकाल के लिए मोदी को बधाई देते हुए खान ने पत्र में कहा है कि दोनों राष्ट्रों के बीच वार्ता ही दोनों देशों के लोगों को गरीबी से उबरने में मदद करने का एकमात्र समाधान है तथा इसके लिए यह जरूरी है कि क्षेत्रीय विकास के लिए साथ मिल कर काम किया जाए। जियो टीवी की खबर में यह कहा गया है।

खान ने कहा कि पाकिस्तान कश्मीर मुद्दा सहित सभी समस्याओं का समाधान चाहता है।

मोदी के सत्ता में वापस आने के बाद यह दूसरा मौका है जब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के लोगों की बेहतरी के लिए भारत के साथ मिल कर काम करने की आकांक्षा जताई है।

गौरतलब है कि पुलवामा आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया और पाकिस्तान के बालाकोट में 26 फरवरी को आतंकी ठिकानों पर भारत के एयर स्ट्राइक करने के बाद दोनों देश लगभग युद्ध की कगार पर पहुंच गए थे।

लोकसभा चुनाव में मिली जीत पर मोदी से 26 मई को खान ने बात कर उन्हें बधाई दी थी।

वहीं, मोदी ने क्षेत्र में विश्वास पैदा करने तथा शांति एवं समृद्धि के लिए हिंसा और आतंकवाद मुक्त माहौल बनाने की अपील की थी।

हालांकि, भारत ने वार्ता की पाक की पेशकश को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि आतंकवाद और वार्ता साथ - साथ नहीं हो सकती।

फारूख अब्दुल्ला ने की बातचीत की वकालत

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारुख अब्दुल्ला ने कश्मीर मुद्दे के हल के लिए देश के बाहर और देश के अंदर वार्ता की अपील करते हुए शुक्रवार को उम्मीद जताई कि केन्द्र की नयी सरकार हालिया आमचुनाव में मिले प्रचंड जनादेश का इस्तेमाल जम्मू कश्मीर में शांति बहाल करने में करेगी।

अब्दुल्ला ने श्रीनगर में उनसे मुलाकात के लिए आए कई प्रतिनिधिमंडलों से यह बात कही।

अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘भारत और पाकिस्तान के बीच दोबारा बातचीत शुरू होने से हमारे राज्य के लोगों को असुरक्षा और तनाव रहित बेहतर जीवन जीने में मदद मिलेगी। मुझे उम्मीद है कि केन्द्र का नया शासन प्रचंड जनादेश का इस्तेमाल राज्य में शांति का युग लाने में करेगा।’’

उन्होंने कहा कि हम अपनी पार्टी के माध्यम से पड़ोसी मुल्क से बातचीत करने की केन्द्र सरकार से मांग करते रहेंगे। देश के भीतर भी केन्द्र को पक्षकारों से बातचीत की पहल करनी चाहिए।

(समाचार एजेंसी भाषा और आईएएनएस के इनपुट के साथ)

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