NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
भारत
राजनीति
आईआईएम अहमदाबाद प्रशासन 'लोगो' को लेकर बैकफुट पर क्यों आ गया?
संस्थान के नए 'लोगो' से अहमदाबाद की सिदी सैय्यद मस्‍जिद के जाली की तस्‍वीर और संस्कृत के श्‍लोक ‘विद्या विनियोगाद्विकासः’ को हटाने को लेकर अब प्रशासन ने कहा है कि सिर्फ कलर और फॉन्ट में मामूली बदलाव किया जा रहा है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
02 Apr 2022
IIMA
Image courtesy : The Indian Express

इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट अहमदाबाद यानी आईआईएम-अहमदाबाद एक बार फिर सुर्खियों में है। एमबीए कोर्स को लेकर सरकार से टकराव के बाद अब संस्थान अपने 'लोगो' में बदलाव को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है। खबरों के मुताबिक संस्थान के नए 'लोगो' से अहमदाबाद की सिदी सैय्यद मस्जिद के जाली की तस्वीर और संस्कृत के श्लोक ‘विद्या विनियोगाद्विकासः’ को हटाया जा रहा है। इस फैसले के खिलाफ संस्‍थान के प्रोफेसर ही खड़े हो गए हैं। प्रोफेसर्स ने बोर्ड ऑफ गवर्नर्स को पत्र लिखकर 'लोगो' बदलने के फैसले पर विरोध जताया है। उनका कहना है कि इस फैसले से भविष्य में संस्थान की छवि पर बुरा असर पड़ सकता है।

बता दें कि आईआईएम अहमदाबाद का वर्तमान 'लोगो' साल1961 में संस्थान की स्थापना के समय अपनाया गया था। इसमें ‘ट्री ऑफ लाइफ’ का मूल भाव है, जो अहमदाबाद में सिदी सैय्यद मस्जिद की एक उत्कृष्ट नक्काशीदार पत्थर की जाली से प्रेरित है। इसमें संस्कृत का श्लोक ‘विद्या विनियोगद्विकास’ लिखा हुआ है, जिसका मतलब है ‘विद्या के लेन देन से विकास होता है।'

क्या है पूरा मामला?

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक आईआईएम-अहमदाबाद के प्रोफेसर्स ने आईआईएम अहमदाबाद के बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला को लिखे पत्र में कहा है कि उन्हें 'लोगो' में बदलाव के बारे में 4 मार्च को एकेडमिक काउंसिल की एक बैठक में पहली बार बताया गया और इसी दौरान यह भी जानकारी दी गई कि नए 'लोगो' को लेकर दो प्रस्ताव दिए गये थे, जिसमें से एक घरेलू और दूसरा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल करने के लिए प्रस्तावित थे।

संस्थान के करीब 45 फैकल्टी मेंबर्स द्वारा साइन किए गए इस पत्र में कहा गया है कि वर्तमान 'लोगो' में मौजूद सिदी सैयद मस्जिद की जाली और संस्कृत सूत्र वाक्य हमारी पहचान हैं। ये भारतीय लोकाचार को दर्शाते हैं। ये भारतीयता की पहचान हैं, ये हमारी विद्या और संस्थान से जुड़ाव को दर्शाते है… इसमें बदलाव करना हमारी पहचान पर प्रहार करने के समान है… 'लोगो' में बदलाव करने से भविष्य में आईआईएम अहमदाबाद के ब्रांड पर भी असर पड़ेगा।

फैकल्टी को सूचित किए बिना 'लोगो' बदला गया

इस पत्र में आगे लिखा है कि आईआईएम अहमदाबाद की फैकल्टी को यह कभी नहीं बताया गया कि 'लोगो' को फिर से डिजाइन करने की जरूरत है। न ही 'लोगो' में बदलाव करने को लेकर कोई समिति बनाई गई थी… इस बारे में फैकल्टी से कोई राय भी नहीं मांगी गई, एकेडमिक काउंसिल या फैकल्टी से जुड़ी किसी अन्य कमेटी में भी इसे लेकर कोई प्रेजेंटेशन नहीं दिया गया।

मालूम हो कि आईआईएम अहमदाबाद के पूर्व निदेशक बकुल ढोलकिया ने भी 'लोगो' बदलने के फैसले का खुलकर विरोध किया है। उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए इस तरह के फैसलों को संस्थान की संस्कृति और मौलिक उल्लंघन बताया है। 'लोगो' के बदलाव को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने सवाल किया कि संस्थान का 'लोगो' आखिर किसके इशारे पर और क्यों बदला जा रहा है? इसकी क्या जरूरत है? आईआईएम अहमदाबाद के 'लोगो' से संस्कृत शब्द हटाने की क्या जरूरत है?

उन्होंने आगे बताया कि साल 1961 में आईआईएम अहमदाबाद की स्थापना डॉ. विक्रम साराभाई ने की थी, तब यह 'लोगो' उन्होंने ही दिया था। इसे बदलना संस्थान के सालों पुराने कल्चर, मानदंडों और प्रथाओं के साथ खिलवाड़ करना है।

ढोलकिया के अनुसार, "इस तरह का निर्णय लेते समय आईआईएम अहमदाबाद की फैकल्टी के डेमोक्रेटिक अधिकारों से भी समझौता किया गया है। हैरानी की बात यह है कि बोर्ड ने उस प्रस्ताव पर विचार किया, जो एकेडमिक काउंसिल की ओर से नहीं भेजा गया था। ऐसा लगता है कि संस्थान की दशकों पुरानी संस्कृति खत्म हो रही है।"

आईआईएम अहमदाबाद का प्रशासन 'लोगो' को लेकर बैकफुट पर

मामले के तूल पकड़ने के बाद आईआईएम अहमदाबाद ने एक बयान जारी कर कहा है कि संस्‍थान को अपनी वेबसाइट अपडेट करने के लिए 'लोगो' में बदलाव की जरूरत महसूस हुई है। जब इसके अंतिम डिजाइन पर काम किया गया तब मूल्‍यांकन, पर्यवेक्षण, डेवलपमेंट ऑफ वर्डमार्क और डेवलपमेंट ऑफ ब्रांडमार्क को ध्‍यान में रखा गया। नया प्रस्तावित 'लोगो' असल 'लोगो' की परंपरा को जारी रखेगा।

संस्थान के मुताबिक नए 'लोगो' में संस्‍कृत शब्‍द को रखा जाएगा। इसमें रंगों को संवारा जा रहा है, फॉन्‍ट नए किए जा रहे हैं। इसमें जालीनुमा ब्रांड मार्क को डिजिटल मीडिया में कम्युनिकेशन को लेकर सहज किया जाएगा। नया 'लोगो' जून में रिलीज करना प्रस्तावित है।

भारत की विरासत को अपने अंदर समेटे हुए है आईआईएम अहमदाबाद

गौरतलब है कि इससे पहले संस्थान तब सुर्खियों में था जब आईआईएम्स को मिली स्वायत्तता को कमज़ोर करने की सरकार की कोशिश के खिलाफ आईआईएम अहमदाबाद ने विरोध दर्ज करवाया था। सरकार यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन के नियमों का हवाला देकर एक साल के एमबीए कोर्स को बंद करवाना चाहती थी तो वहीं आईआईएम्स इसे अपने एक्ट के अनुरूप बताकर इसे जारी रखना चाहते थे। तब भी संस्थान की फैकल्टी ने इसे देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में सरकार की दख़लअंदाज़ी करार दिया था।

इसे भी पढ़ें: क्या है आईआईएम और सरकार के बीच टकराव की वजह?

आईआईएम अहमदाबाद को देश के सबसे प्रतिभाशाली दिमागों की मेजबानी करने वाले संस्थान माना जाता है। देश का नंबर वन और विश्व के टॉप मैनेजमेंट संस्थानों में शामिल इस संस्थान के क्लब, वास्तुकला और शिक्षण के बारे में हमेशा बातें की जाती हैं। यहां आपको अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों से लेकर शास्त्रीय हिंदुस्तानी संगीत कलाकारों तक, सफल उद्यमियों से लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं तक और परास्नातक-स्नातकों से लेकर फ्रेशर्स तक, हर कोई मिल जाता है। संस्थान अनेकता में एकता के भाव के साथ भारत की विरासत को अपने अंदर समेटे हुए है, जो इस नए 'लोगो' के साथ ही विवादों में पड़ती नज़र आ रही है।

Ahmedabad IIMA
IIM-A faculty
Indian Institute of Management

Related Stories

क्या है आईआईएम और सरकार के बीच टकराव की वजह?


बाकी खबरें

  • IGDTUW
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली सरकार के विश्वविद्यालय के सफ़ाई कर्मचारियों ने कपड़े उतार कर मुख्यमंत्री आवास पर किया प्रदर्शन!
    21 Oct 2021
    सफाई कर्मचारियों ने कहा कि वो दिल्ली सरकार की बर्बर उदासीनता के खिलाफ आज यानी गुरुवार को दलित महिला कर्मचारी सूर्यास्त के समय मुख्यमंत्री आवास पर अपने बाल मुंडवा कर उनका त्याग करेंगी। विश्वविद्यालय…
  • Bangladesh Violence
    एजाज़ अशरफ़
    बांग्लादेश हिंसा: अल्पसंख्यकों के लिए असहनीय जगह में तब्दील होता भारतीय उपमहाद्वीप
    21 Oct 2021
    अतीत की उथल-पुथल से सबक सीखने के बजाय, बांग्लादेश, पाकिस्तान और भारत में विभाजन की पूनरावृति देखी जा रही है।
  • patna
    राहुल कुमार गौरव
    पटना मेट्रो: पुनर्वास का इंतिज़ाम नहीं, अतिक्रमण हटाने पहुंची पुलिस के डंडे से हुई चाय वाले की मौत!
    21 Oct 2021
    पटना के कंकड़बाग इलाका के मलाही पकड़ी चौराहे के दोनों तरफ की सड़कों के बीच में खाली पड़ी जमीन पर पिछले कई सालों से दर्जनों परिवार 50 सालों से रह रहे हैं। पटना में मेट्रो निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा…
  • Patna
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार: कश्मीर में प्रवासी बिहारी मज़दूरों की हत्या के ख़िलाफ़ पटना सहित पूरे राज्य में मनाया गया विरोध दिवस
    21 Oct 2021
    माले के मुताबिक़ राजधानी पटना के साथ-साथ बिहारशरीफ, बेगूसराय, अरवल, नवादा, रोहतास, डुमरांव, समस्तीपुर, भोजपुर, सिवान, दरभंगा आदि जिलों में भी विरोध मार्च निकाले गए।
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में बीते 24 घंटे में संक्रमण के 18 हजार से ज्यादा नए मामले
    21 Oct 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 0.52 फ़ीसदी यानी 1 लाख 78 हज़ार 831 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License