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आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
100 दिनः अब राजनीतिक मार करेंगे किसान
100 दिनों के लंबे संघर्ष ने किसानों को और तपा दिया है। किसानों ने शनिवार को पांच घंटे का जाम केएमपी एक्सप्रेस-वे पर किया और इस तरह से आंदोलन को अलग वेग के साथ जिंदा रखने का ऐलान किया।
भाषा सिंह
06 Mar 2021
kmp protest

किसान आंदोलन को आज 100 दिन पूरे हो गये। संभवतः यह दुनिया का अपने आप में सबसे बड़ा, सबसे अधिक लोगों को लामबंद करने वाला, व्यापक धरातल वाला जनआंदोलन है। आज देश भर में किसानों के समर्थन में अलग-अलग तबके ने आवाज उठाई। किसानों ने आज पांच घंटे का जाम कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेस-वे पर किया और इस तरह से आंदोलन को अलग वेग के साथ जिंदा रखने का ऐलान किया।

किसान आंदोलन ने एक नई धार पैदा की है महापंचायतों के जरिये। जिस तरह से लाखों की तादाद में किसान इन महापंचायतों में उमड़ रहे हैं, उनमें महिलाओं की शिरकत हो रही है, मुसलमान किसान बड़ी संख्या में आ रहे हैं, खेतिहर मजदूर शामिल हो रहे हैं और सबके स्वर भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ मुखर हो रहे है—उससे एक बात साफ है कि यह आंदोलन अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए अब भी उतना ही दृढ़प्रतिज्ञ है जितना शुरू में था। यानी 100 दिनों के लंबे संघर्ष ने किसानों को और तपा दिया है। उत्तर प्रदेश में हो रही महापंचायतों ने खुलकर जहां योगी सरकार, भाजपा औऱ मोदी सरकार को किसान विरोधी घोषित किया है, उनके खिलाफ वोट देने का ऐलान किया है, वहीं हरियाणा में भी भाजपा की खट्टर सरकार के खिलाफ लामबंदी तेज हो गई है। संयुक्त किसान मोर्चे आज बकायदा बयान जारी करके कहा है कि 10 मार्च को हरियाणा की मनोहरलाल खट्टर सरकार के खिलाफ जो अविश्वास प्रस्ताव पेश किया जा रहा है, उसका सभी विधायकों से समर्थन करने की अपील की गई है। बयान में कहा गया है—

संयुक्त किसान मोर्चा हरियाणा के सभी लोगों से यह अपील करता है कि वे बड़ी संख्या में एकजुट होकर सभी विधायकों (खासकर भाजपा और जेजेपी के विधायकों) के पास जाएं और उनसे अपील करें कि वो अविश्वास प्रस्ताव में किसान विरोधी भाजपा-जेजेपी सरकार के खिलाफ वोट डालें। हरियाणा के सभी विधायकों को यह संदेश देने की ज़रूरत है कि जो विधायक किसान आंदोलन के इस निर्णायक समय में किसान आंदोलन के साथ खड़ा नहीं होगा, उस विधायक को जनता आने वाले समय में सबक सिखाएगी। ---

ये अपने आप में बहुत अहम पहल है। किसान यूनियनों को अब यह साफ लग रहा है कि जब तक उनके आंदोलन की राजनीतिक मार सत्ताधारी दल को नहीं पड़ेगी, तब तक वह उनकी मांगों पर तवज्जो नहीं देगी।

यही सोच पश्चिम बंगाल में चल रहे चुनाव संग्राम को लेकर भी किसान नेताओं में बनी है। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि अब किसान बंगाल जाएंगे और वहाँ भाजपा और मोदी सरकार के किसान विरोधी रवैये पर लोगों से बात करेंगे और राजनीतिक प्रक्रिया में शिरकत करेंगे।

100 दिनों तक सफलतापूर्वक, शांतिपूर्ण आंदोलन चलाकर देश के अन्नदाता ने तीन किसान कानूनों के साथ-साथ लोकतंत्र बचाने की एक लंबी मिसाल पेश की है और यही वजह है कि विदेशों तक में इसकी धूम मची है। अंतर्ऱाष्ट्रीय मैग्जीन टाइम  ने जिस तरह से आंदोलन में शिरकत करने वाली महिला किसानों पर कवर निकाला है, उससे किसान आंदोलन की गूंज का अंदाजा लगता है। 

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